
Dr. Laxman Yadav
@DrLaxman_Yadav • 313,270 subscribers
Author of the Best-Selling books 'Professor ki Diary' & 'Jaati Janaganana', Socialist, Constitutionalist, Political Analyst, Intercessor of Social Justice.
Shorts
Videos

जो लोग आज यह कह रहे हैं कि "हम कलाकार हैं, हमें राजनीति से क्या लेना-देना," उनसे एक सीधा सवाल है। जब कैमरे के सामने एक जैसी भाषा, एक जैसे भाव और लगभग एक जैसी स्क्रिप्ट के साथ बधाइयों वाले वीडियो रिकॉर्ड किए जा रहे थे, तब क्या वह राजनीति नहीं थी? अगर सत्ता के पक्ष में बोलना केवल "शुभकामना" माना जाएगा, लेकिन जनता के मुद्दों पर बोलना "राजनीति" कहलाएगा, तो यह दोहरा मापदंड है।
Dr. Laxman Yadav61,038 次观看 • 22 小时前

"झूठ बोलकर बच निकलने का दौर अब आसान नहीं रहा।" समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट कृष्ण कन्हैया पाल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को जवाब देते हुए कहा: "जिस पोस्ट को निशिकांत दुबे ने रीपोस्ट किया, वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक थी। मैंने पार्टी के संवैधानिक पदाधिकारी और अधिवक्ता के नाते कानूनी नोटिस भेजा। यदि उन्हें लगता है कि मेरी मानहानि कैसे हुई, तो उन्हें अपने कानूनी विशेषज्ञों से इसकी सलाह लेनी चाहिए।" यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि सोशल मीडिया पर आरोप उछालना आसान है, लेकिन अदालत और कानून के सामने हर शब्द का हिसाब देना पड़ता है। भाजपा की राजनीति में झूठ, आधी-अधूरी जानकारी और प्रोपेगेंडा के सहारे राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब ऐसे दावों की कानूनी जांच होती है, तो वही लोग सफाई देते और खेद जताते दिखाई देते हैं। लोकतंत्र झूठ के शोर से नहीं, बल्कि सच, सबूत और संविधान के राज से चलता है।
Dr. Laxman Yadav85,682 次观看 • 4 天前

कारसेवकों पर गोली चली - भाजपा 35 साल से इस एक घटना को बार-बार दोहराती रही है। लेकिन क्या भाजपा अयोध्या का पूरा इतिहास बताने का साहस करेगी? क्या वह बताएगी कि 1990 में अदालत का आदेश क्या था और प्रशासन के सामने परिस्थितियाँ क्या थीं? क्या वह 1992 में सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आश्वासनों और उसके बाद हुए विध्वंस की कहानी भी उतनी ही जोर से सुनाएगी? क्या वह बताएगी कि सुप्रीम कोर्ट ने उस विध्वंस पर क्या टिप्पणी की थी? और सबसे दिलचस्प सवाल - 1990 में मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में रहे नृपेंद्र मिश्रा आगे चलकर भाजपा के इतने भरोसेमंद कैसे बने कि नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया और बाद में वही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष बने? भाजपा की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत शायद यही रही है - इतिहास से अपने काम के पन्ने निकालो, बाकी छिपा दो और आधे सच को बार-बार दोहराकर पूरा सच बना दो। इस वीडियो में नारा नहीं, पूरी कहानी है। 1990 भी है, 1992 भी। अदालत के आदेश भी हैं और भाजपा से वे सवाल भी, जिनके जवाब उसके भाषणों में नहीं मिलते। वीडियो देखिए और साझा कीजिए - क्योंकि इतिहास आधा नहीं, पूरा बताया जाना चाहिए।
Dr. Laxman Yadav66,952 次观看 • 10 天前

जब एक छोटी-सी बच्ची कैमरे के सामने खड़े होकर कहती है - "हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन हमारे गाँव में स्कूल नहीं है" - तो यह सिर्फ़ एक बच्चे की आवाज़ नहीं, बल्कि देश के लाखों ग्रामीण बच्चों की पीड़ा है। किसी को 10 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते स्कूल जाना पड़ता है, किसी के गाँव में स्कूल ही नहीं है, कहीं बिजली नहीं है, कहीं शिक्षक नहीं हैं। फिर भी मंचों से "विश्वगुरु" और "विकसित भारत" के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। अगर बच्चों को शिक्षा पाने के लिए सुरक्षा, सड़क, स्कूल और बुनियादी सुविधाओं की भीख माँगनी पड़े, तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए गंभीर सवाल है। सरकार को नारों से नहीं, स्कूलों से जवाब देना होगा। क्योंकि देश का भविष्य भाषणों से नहीं, कक्षाओं से बनता है। हर बच्चे को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना कोई कृपा नहीं, उसका संवैधानिक अधिकार है।
Dr. Laxman Yadav23,480 次观看 • 3 天前

"We don't want Phunsukh Wangdu to die." ऐसे समय में जब ज़्यादातर बड़े फ़िल्मी सितारे और नामचीन सेलिब्रिटी चुप हैं, 3 Idiots में चतुर का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्या की यह अपील और भी ज़्यादा मायने रखती है। जब देश का एक सम्मानित नवप्रवर्तक 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा हो, तब चुप्पी भी एक संदेश देती है। लगता है कि सत्ता के सामने सच बोलने का साहस धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। ऐसे दौर में वही लोग याद रखे जाते हैं जो डर या सुविधा नहीं, बल्कि इंसानियत के साथ खड़े होने का फैसला करते हैं। सोनम वांगचुक के लिए उठी यह आवाज़ सिर्फ़ एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवाद की संस्कृति के लिए भी है।
Dr. Laxman Yadav28,286 次观看 • 4 天前

लखनऊ में एक इमारत में लगी भीषण आग में तक़रीबन डेढ़ दर्जन युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई। वहाँ मौजूद युवाओं की चीखें और गवाही सुनिए—यह सिर्फ़ एक हादसा नहीं, हमारे समय की एक भयावह सच्चाई है। इस आग में कुछ लोग जलकर मारे गए, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों को युवाओं ने अपनी उम्मीदों और भविष्य की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्होंने उनके लिए क्या किया? रोज़गार, शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था की जगह समाज को धर्म और नफ़रत की आग में झोंका जा रहा है। एक आग इमारतों को जलाती है, दूसरी आग पीढ़ियों के सपनों को। हम जैसे लोग बरसों से चेतावनी देते आ रहे हैं कि नफ़रत की राजनीति का अंत कभी अच्छा नहीं होता। मगर अगर अब भी नहीं संभले, अगर अब भी असली मुद्दों पर सवाल नहीं पूछे, तो सिर्फ़ इमारतें नहीं जलेंगी—सपने जलेंगे, भविष्य जलेगा, और एक पूरा समाज राख में बदलता चला जाएगा। वक़्त अभी भी है। तय करना हमें है कि हम आग बुझाने वालों के साथ खड़े होंगे या आग फैलाने वालों के साथ।
Dr. Laxman Yadav104,948 次观看 • 25 天前

मेरठ के SSP साहब का रसूख़ देखिए - आरोप पुलिस लगाएगी, हिरासत पुलिस लेगी, फैसला भी पुलिस करेगी और सज़ा भी SSP साहब अपने हाथों से देंगे! बंदी वाहन में घुसकर प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारना कौन-सा क़ानून है? योगी सरकार में पुलिस अफ़सरों को क्या वर्दी के साथ अदालत बनने का अधिकार भी मिल गया है? सवाल सत्ता से है - यूपी में क़ानून का शासन है या अफ़सरों के रसूख़ का?
Dr. Laxman Yadav40,373 次观看 • 10 天前

बांग्लादेश में मस्जिद से लोगों ने ऐलान किया कि प्रिय नागरिकों, हम 'स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन' आपसे अपील करते हैं कि देश में अशांति के इस दौर में हम सभी को सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना है. हमें हिंदू अल्पसंख्यकों की रक्षा करनी है, उपद्रवियों से उनके जान-माल की रक्षा करें। ये आपकी जिम्मेदारी है, हमारी जिम्मेदारी है, सबकी जिम्मेदारी है।
Dr. Laxman Yadav1,256,602 次观看 • 1 年前
0:23
Sensitive content
This media may contain sensitive content.

हावड़ा में बीजेपी के गुंडों द्वारा टीएमसी नेता श्यामलाल मित्रा के साथ की गई बर्बर मारपीट लोकतंत्र पर सीधा हमला है। लेकिन विडंबना देखिए - देश का तथाकथित “मुख्यधारा” मीडिया इस सच को दिखाने से कतराता है। सत्ता की चाटुकारिता में इतना डूब चुका है कि उसे न हिंसा दिखाई देती है, न अन्याय। अभी वे चुनावी जीत के जश्न में मशगूल हैं और नरेंद्र मोदी व भाजपा को बधाइयाँ देने में व्यस्त हैं। जब मीडिया सत्ता का पहरेदार बनने के बजाय उसका प्रवक्ता बन जाए, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। यह सिर्फ एक घटना नहीं है - यह उस खामोशी का प्रमाण है, जो सच के खिलाफ खड़ी कर दी गई है।
Dr. Laxman Yadav111,240 次观看 • 2 个月前

केरोसिन पहले भी मिलता था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे लगभग पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके पीछे कुछ कारण रहे होंगे। अब फिर पेट्रोल पंपों पर केरोसिन उपलब्ध कराने की बात की जा रही है। आखिर यह चल क्या रहा है? सरकार ऐसा क्यों कर रही है? क्या सरकार के पास कोई ठोस रोडमैप नहीं है?
Dr. Laxman Yadav150,120 次观看 • 3 个月前