पहली मुलाक़ात है मिला मजबूत साथ है शाम भी खास है वक़्त भी खास है, मुझको एहसास है तुझको एहसास है। इससे ज़्यादा हमें और क्या चाहिए, मैं तेरे पास हूँ तू मेरे पास है
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सहरसा के लोगों का दिल जितने आया हूँ, सहरसा के घरों में खाना बनता है, उनका जो जूठन बचता है उसका हिस्सेदार बनने आया हूँ, और सहरसा को गेटवे ऑफ़ बिहार बनाने आया हूँ, नजीर बनाने आया हूँ. बोलिए सहरसा अपने जूठन में मुझे भी एक हिस्सेदार बनाओगे ?