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किसके लिए स्वर्ग बनाया है, ऐ ईश्वर ? यहाँ कौन है, जो गुनाहगार नहीं ?

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कंडोम क्यों प्रयोग किया जाता है? संभोग के दौरान लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करना चाहिए? कंडोम कितने प्रकार और कितने आकार के होते हैं? संभोग के दौरान महिला और पुरुष, दोनों को कंडोम का प्रयोग करना चाहिए? #SexualHealth #CondomAwareness #SafeSex कंडोम का मुख्य उद्देश्य अनचाहे गर्भधारण के जोखिम को कम करना और यौन संक्रमणों (STIs) से बचाव में मदद करना है। यह एक barrier method है, यानी शुक्राणु और कुछ संक्रमणों के संपर्क को रोकने में मदद करता है। कंडोम अलग-अलग प्रकार, सामग्री और आकार में मिलते हैं। सही फिट बहुत महत्वपूर्ण है, बहुत ढीला होने पर फिसल सकता है और बहुत तंग होने पर फटने का जोखिम बढ़ सकता है। सही आकार आमतौर पर पैकेज पर दिए गए nominal width के अनुसार चुना जाता है। पुरुष और महिला कंडोम अलग-अलग प्रकार के होते हैं और सामान्यत दोनों को एक साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपस में घर्षण बढ़ने से फटने का जोखिम बढ़ सकता है। लुब्रिकेंट (चिकनाई वाला जेल) का उपयोग संभोग के दौरान किया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य घर्षण कम करना और आराम बढ़ाना है। अगर कंडोम इस्तेमाल किया जा रहा हो, तो आम तौर पर water-based या silicone-based lubricant बेहतर विकल्प होते हैं। तेल, पेट्रोलियम जेली या ऑयल-बेस्ड उत्पाद लेटेक्स कंडोम को कमजोर कर सकते हैं। और हाँ, लुब्रिकेंट गर्भधारण या यौन संक्रमणों से सुरक्षा नहीं देता उसके लिए कंडोम जैसी सुरक्षा आवश्यक होती है।

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कामसूत्र के अनुसार महिलाओं को उनकी योनि, शारीरिक बनावट और स्वभाव के आधार पर चार प्रमुख श्रेणियों में बाँटा गया है। #कामसूत्र पद्मिनी — कमल जैसी महिला। चित्रिणी — कलात्मक स्वभाव वाली महिला। शंखिनी — शंख जैसी महिला। हस्तिनी — हाथी के समान स्वभाव या शारीरिक बनावट वाली महिला। #प्राचीनभारतीयज्ञान इसके अतिरिक्त, कामसूत्र की परंपरा में योनि की गहराई और आकार के आधार पर महिलाओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनकी तुलना पशुओं से की गई है। #ऐतिहासिकदृष्टिकोण मृगी (हिरणी) — जिनकी योनि की गहराई सबसे कम, लगभग 6 अंगुल मानी गई है। अश्विनी (घोड़ी) — जिनकी गहराई मध्यम, लगभग 9 अंगुल मानी गई है। हस्तिनी (हाथिनी) — जिनकी गहराई सबसे अधिक, लगभग 12 अंगुल या उससे अधिक मानी गई है। इन वर्गीकरणों का मुख्य उद्देश्य प्राचीन मान्यताओं के अनुसार शारीरिक एवं मानसिक अनुकूलता को समझना था। हालाँकि, इन वर्गीकरणों को आधुनिक विज्ञान द्वारा प्रमाणित वैज्ञानिक श्रेणियाँ नहीं माना जाता। आज किसी महिला के शरीर, व्यक्तित्व या स्वभाव को इस प्रकार की निश्चित श्रेणियों में बाँटना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। कामसूत्र को उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में समझना अधिक उपयुक्त है।

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