
Gaurav Shyama Pandey
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Journalist Ex- Khabargaon, The Lallantop, Lokmat, Navbharat Times. Alumnus- @IIMC_India, University of Allahabad
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सांसद अफजाल अंसारी- ये आपकी कृपा पर नहीं है कि आप तय करें कि ये लोग ही मिट्टी देंगे DM- मैं जिला अधिकारी हूं, आपने परमिशन नहीं ली है, हम विधिक कार्रवाई करेंगे सांसद- आप कुछ भी हों, मिट्टी देने के लिए अपने धार्मिक प्रायोजन के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं DM मैडम को बताना चाहिए कि 144 में अंतिम संस्कार के लिए भी परमिशन लेनी पड़ती है क्या?
Gaurav Shyama Pandey548,499 次观看 • 2 年前

2022 में MPPSC प्रोटेस्ट के दौरान तेज कुशवाहा मिले. आए थे अफसर बनने. लेकिन हालात ने फल का ठेला लगाने पर मजबूर कर दिया. 2 बार मेन्स लिख चुके थे. इंटरव्यू की तैयारी पूरी थी. लेकिन पेपर लीक, आरक्षण विवाद की वजह से वैकेंसी अटकी पड़ी थी. कल तेज का मैसेज आया, भइया सेलेक्शन हो गया 1/2
Gaurav Shyama Pandey67,466 次观看 • 1 年前

अमावस की रात 29 जनवरी की रात मैं संगम नोज पर था. वहां इतना भयावह दृश्य था कि कभी नहीं भूल सकता. असंख्य लोगों की भीड़ थी. और लगातार चली आ रही थी. घाट भरे हुए थे. जो लोग पहले आ गए थे वो वहीं बिछा के सो गए थे. कुछ लोग नागाओं का स्नान देखने के लिए घाट पर डेरा डाले हुए थे. प्रशासन लगातार लोगों से स्नान कर घाट छोड़ने के लिए कह रहा था. लेकिन घाट भरे हुए थे. इधर सारी भीड़ संगम की ही ओर चली आ रही थी. कहीं किसी दूसरे घाट की ओर कोई डायवर्जन नहीं. हर चीज की एक सीमा होती है. संगम घाट की भी है. कितने ही लोग आ पाएंगे. अंतत: वही हुआ जिसका डर था. पीछे कुछ औरतें गिरीं. उन्हें उठाने की कोशिश की. चार-पांच लोग मेरे हाथ पर चढ़ गए. मैं भी गिर गया. मेरी किस्मत अच्छी थी कि मेरे ऊपर कोई नहीं गिरा. हल्की चोट आई, पूरा शरीर पसीने से भीग गया था. मेरे सामने कई महिलाओं को चोट लगी. लगा अब यहां से वापस नहीं लौट पाऊंगा. मेरे साथ के सारे लोग कहीं नहीं दिख रहे थे. वहां से निकलने के बाद भी बहुत समय तक कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. आकर परेड ग्राउंड में बैठा. 2.45 से तीन बजे के आसपास अचानक सायरन की आवाज गूंजने लगी. एक के बाद एक लगातार एम्बुलेंस आ-जा रही थी. वीडियो भी शेयर किया था मैंने इसका. समझ गया अनहोनी हो गई है. चार दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी भी वही सब सारा दृश्य घूम रहा है. ये वीडियो 29 की सुबह संगम से लौटने के बाद बनाया था. पोस्ट करने की हिम्मत नहीं थी. लेकिन साथियों का कहना है जो देखा है वो बताओ. देखिए #MahakumbhStampede
Gaurav Shyama Pandey65,795 次观看 • 1 年前

लापता पत्रकार एक और नौजवान पत्रकार लापता हो गया. पत्रकारों का लापता हो जाना कोई नई बात नहीं है. अक्सर हो जाते हैं. केवल इसलिए कि वो अपना काम कर रहे होते हैं. और ये किसी त्रासदी से कम नहीं है. क्योंकि जब भी कोई पत्रकार लापता होता है, वो लौटकर वापस घर नहीं आता. उसकी लाश आती है. जो कभी किसी नदी से बरामद होती है, कभी किसी सेप्टिक टैंक से. राजीव की भी लाश नदी से मिली. काशीपुर, उत्तराखंड के राजीव पत्रकार थे. उन्होंने IIMC, नई दिल्ली से पढ़ाई की थी और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते थे. अपना चैनल चलाते थे. उन मुद्दोें पर बात करते थे जो लोगों को प्रभावित करते थे. उनके परिजनों का कहना है कि उत्तराकाशी के अस्पताल पर वीडियो बनाने के बाद से उनको धमकियां मिल रही थीं. कुछ दिनों तक लापता रहने के बाद उनकी लाश मिली है. सरकार ने जांच कराने की बात कही है. न्याय की उम्मीद है. हम देखेंगे... राजीव के चैनल पर उनका ये आखिरी रील मिला
Gaurav Shyama Pandey32,885 次观看 • 11 个月前