
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj
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Gandhian, Nehruvian, Entrepreneur, Blogger, Digital & Data journalist
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जो लोग कहते हैं कि नेहरू 1952 के चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बने, वे यह वीडियो पूरा देखें। अगर ऐसा था, तो 1950 में निधन हो चुके सरदार पटेल किस सरकार में उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे? पटेल नेहरू को अपना नेता मानते थे। कई मौकों पर उन्होंने नेहरू को इस्तीफा देने से भी रोका था। पटेल को समझना है तो सिर्फ उनकी मूर्तियाँ मत देखिए, उन्हें पढ़िए। पटेल को पढ़ेंगे, तो नेहरू को भी नए सिरे से जान पाएंगे। इतिहास से खिलवाड़ की एक समस्या है—वह खुद ही झूठ पकड़ लेता है। #घोरकलजुग #नेहरु #पटेल
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj17,974 görüntüleme • 3 gün önce

जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, यासिर अराफात फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा — "मेरी बहन चली गई।" ग़ाज़ा पट्टी में कई घरों में उस दिन खाना नहीं बना। ईरान, इराक, फिलिस्तीन — हर जगह मातम जैसा शोक था, जैसे कोई अपना चला गया हो। ऐसा था भारत का स्थान पश्चिम एशिया में। ऐसी थी इंदिरा गांधी की विदेश नीति। आज सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर जो सवाल उठाए हैं, वो सिर्फ आलोचना नहीं थी — वो उस नीति की हत्या पर शोक था, जिसने भारत को दुनिया में मज़हबी ध्रुवीकरण से ऊपर उठाकर न्याय और संतुलन की मिसाल बनाया था। उन्होंने बिल्कुल सही कहा — “भारत की दशकों पुरानी संतुलित और स्पष्ट विदेश नीति को धूल-धूसरित कर दिया गया है।” इंदिरा गांधी न तो धर्म देखकर विदेश नीति तय करती थीं, न ही वोटबैंक देखकर देश की दिशा तय करती थीं। उन्होंने यासिर अराफात को सिर्फ एक मज़हबी नेता नहीं, एक स्वतंत्रता सेनानी माना। जब दुनिया उन्हें आतंकवादी मान रही थी, भारत ने उन्हें आत्मनिर्णय का हक़ दिलाने की आवाज़ बुलंद की। 1974 में इंदिरा गांधी ईरान गईं। शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी ने उनका ऐतिहासिक स्वागत किया। तेहरान की सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। भारत और ईरान ने सिर्फ तेल या व्यापार की बात नहीं की — बल्कि शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति में गहरी साझेदारी की नींव रखी। भारत कभी ईरान के इस्लामिक चरित्र से डरता नहीं था, और ईरान कभी भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर उंगली नहीं उठाता था। और सद्दाम हुसैन? इराक के इस शक्तिशाली और विवादास्पद नेता से भी भारत ने रिश्ते बनाए। क्यों? क्योंकि भारत को तेल चाहिए था, मज़दूरों को रोज़गार चाहिए था, और पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिरता चाहिए थी। इराक भारत को रियायती दरों पर तेल देता था। हज़ारों भारतीय वहां काम करते थे — सिर्फ पैसे के लिए नहीं, भारत के झंडे के भरोसे के कारण। 1971 में जब पाकिस्तान को भारत ने दो हिस्सों में बांट दिया, तब दुनिया की महाशक्तियाँ भारत पर हमलावर थीं। मगर ईरान, इराक, फिलिस्तीन ने भारत का विरोध नहीं किया। बल्कि समझा — भारत न्याय कर रहा है। और जब अमेरिका का सातवाँ बेड़ा हिंद महासागर में घुसा भारत को डराने, तब सिर्फ रूस नहीं खड़ा हुआ — बल्कि पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों तक ने भारत के खिलाफ माहौल बनने नहीं दिया। क्यों? क्योंकि भारत की विदेश नीति में दोहरापन नहीं था। वो मज़हबी तुष्टिकरण नहीं, साफ़, राष्ट्रहित आधारित नीति थी। और आज… भारत ग़ज़ा पर चुप है। इजरायल की गोद में बैठकर "वसुधैव कुटुम्बकम्" का जाप करता है। शब्द हैं, आत्मा नहीं। इंदिरा होतीं तो भारत दोनों से बात करता — इजरायल से भी, ईरान से भी। दुनिया को याद दिलाता कि भारत न्याय का पक्ष चुनता है, धर्म का नहीं। #घोरकलजुग #IranIsraelConflict
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj741,575 görüntüleme • 11 ay önce

"पूरा डेटा देखने में 3600 साल लगेंगे" — ये सुनकर तो लगा मानो चुनाव आयुक्त चाँद पर पैदल जाने निकले हों 🤣 भारत में 6,40,930 गांव हैं। अगर हर गांव से सिर्फ 1 आदमी भी देखे… तो 3600 साल = 13,14,000 दिन लोगों की संख्या = 6,40,930 कुल समय = 2 दिन मतलब डेटा 2-3 दिन में देख सकते हैं, लेकिन बहाना… सदियों का! 🤣 #घोरकलजुग #VoteChori #ElectionCommissionOfIndia Rahul Gandhi
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj570,968 görüntüleme • 10 ay önce

इस महिला पत्रकार को सलाम 👏 जिसने वो सवाल पूछने की हिम्मत की, जो पूरी दुनिया पूछने से डरती है। तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताक़ी से सीधा सवाल — "जब ईरान, सऊदी, सीरिया और देवबंद तक में लड़कियाँ पढ़ती हैं, तो अफ़ग़ानिस्तान में क्यों नहीं?" और साथ ही पत्रकार दानिश सिद्दीकी की निर्मम हत्या पर जवाब भी मांगा। ऐसी पत्रकारिता ही असली पत्रकारिता है — सत्ता के सामने सवाल, सच के साथ खड़ी आवाज़ #Taliban #घोरकलजुग
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj266,400 görüntüleme • 8 ay önce

भारत की बेटी का सवाल सीधा था 👇 👉 "आपरेशन सिंदूर में आपने कहा था—ख़ून और पानी साथ नहीं बह सकते… तो फिर क्रिकेट क्यों खेल रहे हैं?" लेकिन देखिए बेशर्म बीजेपी सांसद का जवाब— "ख़ून–पानी कहा था, क्रिकेट का नहीं!" यही है नया इंडिया… जहाँ शहादत का दर्द भी सत्ता के लिए मज़ाक बन चुका है। #घोरकलजुग #indiaVsPakistan
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj253,777 görüntüleme • 9 ay önce

#SIR केस में Yogendra Yadav ने सुप्रीम कोर्ट में 25 मिनट तक तर्क रखे—इतने धारदार कि जज ने प्रशंसा कर धन्यवाद दिया। कई मुद्दों पर असहमति है, पर उनका विश्लेषण, भाषा-कौशल और लोकतांत्रिक सोच बेमिसाल है। ऐसे लोग का राजनीति में होना जरूरी बेहद जरूरी है #VoteChori #घोरकलजुग
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj277,170 görüntüleme • 10 ay önce

देख रहे हैं विनोद टेली प्रॉम्पटर के बगैर बोलना कितना कठिन होता हैं 🤣🤣 #घोरकलजुग
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj446,364 görüntüleme • 2 yıl önce

मैं किसी गाली का समर्थन नहीं करता। लेकिन याद रखिए— मोदी को भीड़ में किसने गाली दी, कोई नहीं जानता। मगर 2019 में राहुल गांधी को BJP के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने मां की गाली दी थी। कार्रवाई तो दूर, बीजेपी ने उन्हें इनाम में विधानसभा टिकट पकड़ा दिया। 👇 #घोरकलजुग
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj187,535 görüntüleme • 9 ay önce

एक चूहे को मारने की कीमत कितनी हो सकती है? ₹10, ₹20… या ज़्यादा से ज़्यादा ₹100! लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने चूहा मारने के लिए ₹12,000 प्रति चूहा खर्च किए। फिर भी एमवाय अस्पताल में चूहे घुस गए और दो मासूम बच्चियों की अंगुलियाँ कुतर डालीं। 👉 करोड़ों रुपये ठेके पर खर्च हुए, 👉 लेकिन अस्पताल में न स्वच्छता है, न सुरक्षा। यह सिर्फ लापरवाही नहीं — यह भ्रष्टाचार और अमानवीय अपराध है। #घोरकलजुग Rahul Gandhi Jitendra (Jitu) Patwari
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj161,573 görüntüleme • 9 ay önce

एमपी में अब कानून नहीं, डर और लाठी का राज है। कल जिस इंजीनियर छात्र की पुलिस की पिटाई से मौत हुई, उसका नया वीडियो आया है — उसे पहले अर्धनग्न करके भगाया गया, फिर एक कॉन्स्टेबल ने जूते से पैर कुचला, और पिता ने कहा — बेटे को राइफल की बट से पीटा गया। ये इंसाफ नहीं, जुल्म की हद है। एमपी में अब कानून नहीं, जंगल राज चल रहा है। #घोरकलजुग #MadhyaPradesh Jitendra (Jitu) Patwari
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj141,786 görüntüleme • 8 ay önce

भारत के मुसलमानों को आदित्य धर का शुक्रिया अदा करना चाहिए। “अस्सलामु अलैकुम” आज उन नफ़रतियों के मुँह से भी निकल रहा है जो रोज़ मुसलमान को गाली देते हैं। करीब 100 करोड़ बार “फ्लिपरांची का वल्लाह” बोला-गाया जा चुका है। धुरंधर के गाने-डायलॉग्स पर हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई— सब साथ नाच रहे हैं। यही असली हिंदुस्तान है। आप प्रोपेगेंडा करने चले थे, पर प्रोपेगेंडा किसी और का हो गया 🤪 #घोरकलजुग #Dhurandar
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj105,243 görüntüleme • 5 ay önce

ये वीडियो अप्रैल 2025 का है… रिपोर्टर चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था — "ये पुल कभी भी गिर सकता है!" सरकार ने क्या किया? फाइलें पलटीं, नोटिंग हुई, मीटिंग हुई, पर मरम्मत नहीं हुई। और आज? वही पुल टूट गया। 10 लोग मारे गए। कुछ गाड़ियाँ पानी में समा गईं। कुछ बच्चे अब भी लापता हैं। अब फिर वही ड्रामा चलेगा — जाँच के आदेश, एक-दो सस्पेंड, बाकी सब क्लीन चिट। याद कीजिए — मोरबी ब्रिज गिरा तो कहा गया सभी ब्रिज की जाँच होगी। क्या हुआ उस एलान का? तीन महीने पहले आवाज़ दी गई थी, आज चीखें गूंज रही हैं। ये हादसा नहीं, हत्या है। ज़िम्मेदार कौन? कोई बताएगा? #bridgecollapse #घोरकलजुग
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj174,485 görüntüleme • 11 ay önce

सोहन… सिर्फ़ 17 साल का। क्लास 12 का बच्चा। 29 अगस्त — बस में बैठा इंदौर जा रहा था। चलती बस से पुलिस ने उतार लिया। कुछ घंटे बाद — “2.7 किलो अफ़ीम मिली” कहकर सिस्टम ने उसे अपराधी बना दिया। कोर्ट, जेल… और एक मासूम ज़िंदगी पर हमेशा के लिए दाग़। लेकिन सच की भी हिम्मत होती है। माता–पिता हाई कोर्ट पहुँचे। और खुल गया पूरा खेल — मल्हारगढ़ थाने के अफ़सरों ने फेक ड्रग बस्ट गढ़ा था। हाँ, वही थाना… जो देशभर में 9वाँ सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। सोचिए — अगर “बेस्ट” पुलिस स्टेशन ये कर सकता है, तो आम आदमी किससे उम्मीद रखे? ये कहानी सिर्फ़ सोहन की नहीं… ये चेतावनी है — जब सिस्टम ही चालाकी पर उतर आए, तो सबसे सुरक्षित जगह भी सबसे ख़तरनाक बन जाती है। एक बच्चे का भविष्य… सिस्टम की मनमानी में कुचल दिया गया। #घोरकलजुग #MadhyaPradeshNews
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj88,145 görüntüleme • 6 ay önce