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यह वीडियो विक्रमशिला सेतु के पास का है। — पुल टूटने के बाद भागलपुर से सीमांचल जाने वाले हजारों लोग रोज ऐसे सफर करने को मजबूर हैं। — धूप… बारिश… आंधी… और जान हथेली पर। — जिस देश का राजा अरबों के विमान में उड़ता हो, उस देश की जनता ऐसे ही सफर करती है। — यही है “अमृतकाल” की असली तस्वीर #घोरकलजुग #bihar

यह वीडियो विक्रमशिला सेतु के पास का है। — पुल टूटने के बाद भागलपुर से सीमांचल जाने वाले हजारों लोग रोज ऐसे सफर करने को मजबूर हैं। — धूप… बारिश… आंधी… और जान हथेली पर। — जिस देश का राजा अरबों के विमान में उड़ता हो, उस देश की जनता ऐसे ही सफर करती है। — यही है “अमृतकाल” की असली तस्वीर #घोरकलजुग #bihar

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चाँदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल.. इक तू ही धनवान है, माय फ्रैंड.. बाक़ी सब कंगाल 🤪 #घोरकलजुग #gold #silver

चाँदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल.. इक तू ही धनवान है, माय फ्रैंड.. बाक़ी सब कंगाल 🤪 #घोरकलजुग #gold #silver

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"नई लाशें बिछाने के लिए ही गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं..." #NagpurViolence #घोरकलजुग

"नई लाशें बिछाने के लिए ही गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं..." #NagpurViolence #घोरकलजुग

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सुनो अंजना, रुबिका, चित्रा… छिंदवाड़ा। 16 मौतें। संदिग्ध, पर एक भी पोस्टमॉर्टम नहीं। पहले दिन से सवाल उठ रहे थे। अब कल। एक बच्ची का शव निकालकर पोस्टमॉर्टम हुआ। सरकारी सिस्टम कातिल बन गया। पर ये तुम्हारी TRP में फिट नहीं, है ना? #घोरकलजुग #CoughSyrupScandal

सुनो अंजना, रुबिका, चित्रा… छिंदवाड़ा। 16 मौतें। संदिग्ध, पर एक भी पोस्टमॉर्टम नहीं। पहले दिन से सवाल उठ रहे थे। अब कल। एक बच्ची का शव निकालकर पोस्टमॉर्टम हुआ। सरकारी सिस्टम कातिल बन गया। पर ये तुम्हारी TRP में फिट नहीं, है ना? #घोरकलजुग #CoughSyrupScandal

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चित्रा, आपको चुनाव आयुक्त के शेर बहुत पसंद आते है लेकिन वो चवन्नी छाप शेयर होते है ऐसे कौन बेइज्जती करता है दिबांग भाई 🤣🤣#घोरकलजुग

चित्रा, आपको चुनाव आयुक्त के शेर बहुत पसंद आते है लेकिन वो चवन्नी छाप शेयर होते है ऐसे कौन बेइज्जती करता है दिबांग भाई 🤣🤣#घोरकलजुग

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बिहार के नए मुख्यमंत्री की नजर है पैनी क्योंकि वो विधानसभा में भी खाते है खैनी 😂 #घोरकलजुग

बिहार के नए मुख्यमंत्री की नजर है पैनी क्योंकि वो विधानसभा में भी खाते है खैनी 😂 #घोरकलजुग

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मासूम बच्ची कह रही है— “मुझे बहुत खुशी है कि इंडिया जीत गई, जैसे हमें बताया गया है… हमने ऑपरेशन सिंदूर का बदला ले लिया है।” सोचिए… पिछले 11 सालों में इस देश की पूरी पीढ़ी का ऐसा माइंडवॉश कर दिया गया कि खेल का मैदान भी उन्हें युद्ध का मैदान दिखने लगा। इस मासूम बच्ची को न पहलगाम के निर्दोष नागरिक दिखते हैं… न ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सैनिकों का खून। कसूर उसका नहीं है… कसूर उस फर्जी राष्ट्रवाद का है जिसने भारत की एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया। इतिहास इस शर्मनाक काम के लिए सरकार, मीडिया और नफ़रती चिंटुओं को कभी माफ़ नहीं करेगा। 🙏🙏 #घोरकलजुग #INDvsPAK

मासूम बच्ची कह रही है— “मुझे बहुत खुशी है कि इंडिया जीत गई, जैसे हमें बताया गया है… हमने ऑपरेशन सिंदूर का बदला ले लिया है।” सोचिए… पिछले 11 सालों में इस देश की पूरी पीढ़ी का ऐसा माइंडवॉश कर दिया गया कि खेल का मैदान भी उन्हें युद्ध का मैदान दिखने लगा। इस मासूम बच्ची को न पहलगाम के निर्दोष नागरिक दिखते हैं… न ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सैनिकों का खून। कसूर उसका नहीं है… कसूर उस फर्जी राष्ट्रवाद का है जिसने भारत की एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया। इतिहास इस शर्मनाक काम के लिए सरकार, मीडिया और नफ़रती चिंटुओं को कभी माफ़ नहीं करेगा। 🙏🙏 #घोरकलजुग #INDvsPAK

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लाल किले के धमाके के एक प्रत्यक्षदर्शी से मेरी बात हुई — उसका कहना है कि गाड़ी 40–50 फीट हवा में उछल गई और उसमे बैठे लोग गाड़ियों पर आकर गिरने लगे और धमाका इतना तेज़ था कि आवाज़ उसके ऑफिस तक सुनाई दी #redfort #घोरकलजुग

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लाल किले के धमाके के एक प्रत्यक्षदर्शी से मेरी बात हुई — उसका कहना है कि गाड़ी 40–50 फीट हवा में उछल गई और उसमे बैठे लोग गाड़ियों पर आकर गिरने लगे और धमाका इतना तेज़ था कि आवाज़ उसके ऑफिस तक सुनाई दी #redfort #घोरकलजुग

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मै देशभक्ति क्यों करूं… जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी आप पाकिस्तान से एशिया कप खेलें ••• और टीवी पर हंसी-ठिठोली की तस्वीरें परोसी जाएँ। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब हमारे जवान गलवान में शहीद हो जाएँ ••• और उसी के बाद साहब चीनियों से गलबहिया करते नज़र आएँ। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब बरसात के बाद गली करंट और गड्ढों का जाल बन जाए ••• जब शहर की हवा फेफड़े चुरा ले और ट्रैफिक ज़िंदगी निगल ले ••• जब किराया, सब्ज़ी—हर चीज़ महँगी भी हो और ज़हरीली भी। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब ऑटोवाला मजबूरी का दो गुना भाड़ा वसूले ••• पड़ोसी आपका आँगन गंदा करे ••• और सड़क पर लोग भाई नहीं, खतरा लगें। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब पुलिस, अदालत और बीमा आपके संकट को अपना धंधा बना लें ••• टैक्स समय पर दो, लेकिन रिफंड के लिए गिड़गिड़ाओ। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब युवाओं को नौकरी देने की बजाय सरकार उन्हें सड़कों पर पीटे ••• सरकारी अस्पतालों के रहते निजी अस्पताल लूट मचाएँ ••• सरकारी स्कूल नाम के रह जाएँ और निजी स्कूलों की मोटी फीस के बाद भी बच्चों को कोचिंग के दर-दर भटकना पड़े। #घोरकलजुग #BycottAsiaCup

मै देशभक्ति क्यों करूं… जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी आप पाकिस्तान से एशिया कप खेलें ••• और टीवी पर हंसी-ठिठोली की तस्वीरें परोसी जाएँ। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब हमारे जवान गलवान में शहीद हो जाएँ ••• और उसी के बाद साहब चीनियों से गलबहिया करते नज़र आएँ। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब बरसात के बाद गली करंट और गड्ढों का जाल बन जाए ••• जब शहर की हवा फेफड़े चुरा ले और ट्रैफिक ज़िंदगी निगल ले ••• जब किराया, सब्ज़ी—हर चीज़ महँगी भी हो और ज़हरीली भी। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब ऑटोवाला मजबूरी का दो गुना भाड़ा वसूले ••• पड़ोसी आपका आँगन गंदा करे ••• और सड़क पर लोग भाई नहीं, खतरा लगें। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब पुलिस, अदालत और बीमा आपके संकट को अपना धंधा बना लें ••• टैक्स समय पर दो, लेकिन रिफंड के लिए गिड़गिड़ाओ। मै देशभक्ति क्यों करूं… जब युवाओं को नौकरी देने की बजाय सरकार उन्हें सड़कों पर पीटे ••• सरकारी अस्पतालों के रहते निजी अस्पताल लूट मचाएँ ••• सरकारी स्कूल नाम के रह जाएँ और निजी स्कूलों की मोटी फीस के बाद भी बच्चों को कोचिंग के दर-दर भटकना पड़े। #घोरकलजुग #BycottAsiaCup

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संदीप दीक्षित आज नामांकन भरने निकले तो ऐसा लगा पूरी नई दिल्ली स्वागत के लिए सड़कों पर आ गई है ❤️❤️ #DelhiElections2025

संदीप दीक्षित आज नामांकन भरने निकले तो ऐसा लगा पूरी नई दिल्ली स्वागत के लिए सड़कों पर आ गई है ❤️❤️ #DelhiElections2025

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जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, यासिर अराफात फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा — "मेरी बहन चली गई।" ग़ाज़ा पट्टी में कई घरों में उस दिन खाना नहीं बना। ईरान, इराक, फिलिस्तीन — हर जगह मातम जैसा शोक था, जैसे कोई अपना चला गया हो। ऐसा था भारत का स्थान पश्चिम एशिया में। ऐसी थी इंदिरा गांधी की विदेश नीति। आज सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर जो सवाल उठाए हैं, वो सिर्फ आलोचना नहीं थी — वो उस नीति की हत्या पर शोक था, जिसने भारत को दुनिया में मज़हबी ध्रुवीकरण से ऊपर उठाकर न्याय और संतुलन की मिसाल बनाया था। उन्होंने बिल्कुल सही कहा — “भारत की दशकों पुरानी संतुलित और स्पष्ट विदेश नीति को धूल-धूसरित कर दिया गया है।” इंदिरा गांधी न तो धर्म देखकर विदेश नीति तय करती थीं, न ही वोटबैंक देखकर देश की दिशा तय करती थीं। उन्होंने यासिर अराफात को सिर्फ एक मज़हबी नेता नहीं, एक स्वतंत्रता सेनानी माना। जब दुनिया उन्हें आतंकवादी मान रही थी, भारत ने उन्हें आत्मनिर्णय का हक़ दिलाने की आवाज़ बुलंद की। 1974 में इंदिरा गांधी ईरान गईं। शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी ने उनका ऐतिहासिक स्वागत किया। तेहरान की सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। भारत और ईरान ने सिर्फ तेल या व्यापार की बात नहीं की — बल्कि शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति में गहरी साझेदारी की नींव रखी। भारत कभी ईरान के इस्लामिक चरित्र से डरता नहीं था, और ईरान कभी भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर उंगली नहीं उठाता था। और सद्दाम हुसैन? इराक के इस शक्तिशाली और विवादास्पद नेता से भी भारत ने रिश्ते बनाए। क्यों? क्योंकि भारत को तेल चाहिए था, मज़दूरों को रोज़गार चाहिए था, और पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिरता चाहिए थी। इराक भारत को रियायती दरों पर तेल देता था। हज़ारों भारतीय वहां काम करते थे — सिर्फ पैसे के लिए नहीं, भारत के झंडे के भरोसे के कारण। 1971 में जब पाकिस्तान को भारत ने दो हिस्सों में बांट दिया, तब दुनिया की महाशक्तियाँ भारत पर हमलावर थीं। मगर ईरान, इराक, फिलिस्तीन ने भारत का विरोध नहीं किया। बल्कि समझा — भारत न्याय कर रहा है। और जब अमेरिका का सातवाँ बेड़ा हिंद महासागर में घुसा भारत को डराने, तब सिर्फ रूस नहीं खड़ा हुआ — बल्कि पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों तक ने भारत के खिलाफ माहौल बनने नहीं दिया। क्यों? क्योंकि भारत की विदेश नीति में दोहरापन नहीं था। वो मज़हबी तुष्टिकरण नहीं, साफ़, राष्ट्रहित आधारित नीति थी। और आज… भारत ग़ज़ा पर चुप है। इजरायल की गोद में बैठकर "वसुधैव कुटुम्बकम्" का जाप करता है। शब्द हैं, आत्मा नहीं। इंदिरा होतीं तो भारत दोनों से बात करता — इजरायल से भी, ईरान से भी। दुनिया को याद दिलाता कि भारत न्याय का पक्ष चुनता है, धर्म का नहीं। #घोरकलजुग #IranIsraelConflict

अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj

741,575 görüntüleme • 11 ay önce

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सोहन… सिर्फ़ 17 साल का। क्लास 12 का बच्चा। 29 अगस्त — बस में बैठा इंदौर जा रहा था। चलती बस से पुलिस ने उतार लिया। कुछ घंटे बाद — “2.7 किलो अफ़ीम मिली” कहकर सिस्टम ने उसे अपराधी बना दिया। कोर्ट, जेल… और एक मासूम ज़िंदगी पर हमेशा के लिए दाग़। लेकिन सच की भी हिम्मत होती है। माता–पिता हाई कोर्ट पहुँचे। और खुल गया पूरा खेल — मल्हारगढ़ थाने के अफ़सरों ने फेक ड्रग बस्ट गढ़ा था। हाँ, वही थाना… जो देशभर में 9वाँ सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। सोचिए — अगर “बेस्ट” पुलिस स्टेशन ये कर सकता है, तो आम आदमी किससे उम्मीद रखे? ये कहानी सिर्फ़ सोहन की नहीं… ये चेतावनी है — जब सिस्टम ही चालाकी पर उतर आए, तो सबसे सुरक्षित जगह भी सबसे ख़तरनाक बन जाती है। एक बच्चे का भविष्य… सिस्टम की मनमानी में कुचल दिया गया। #घोरकलजुग #MadhyaPradeshNews

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88,145 görüntüleme • 6 ay önce