
Mohd Ansar
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गुस्ताख़-ए-नबी की एक सज़ा क़ानून से मिले फाँसी की सज़ा । #arrestsharmishta
Mohd Ansar370,483 Aufrufe • vor 1 Jahr

नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में खुली गुस्ताख़ी है। उनके बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल बेहद निंदनीय और असहनीय है यह हैरानी की बात है कि ऐसी महिला अब तक आज़ाद घूम रही है। Kolkata Police को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और उचित क़ानूनी कार्रवाई करनी चाहिए
Mohd Ansar209,510 Aufrufe • vor 1 Jahr

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनाई शहीद हो गए या अल्लाह ये झूट हो 😭
Mohd Ansar53,145 Aufrufe • vor 6 Monaten

*हम सब के सम्माननीय व आदरणीय हैं हज़रत मोहम्मद साहब* (डी.आई.जी आज़मगढ़)उत्तर प्रदेश भारत
Mohd Ansar76,516 Aufrufe • vor 11 Monaten
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वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश जनपद गाजियाबाद में मुरादनगर गंगनहर पर मंदिर के बाहर चेंजिंग रूम है!! इसमें CCTV कैमरा लगा मिला है!! सभी कैमरे की Live फीड महंत मुकेश गोस्वामी के मोबाइल पर थी!! महंत के मोबाइल से पुलिस को महिलाओं के कपड़े बदलते हुए कई क्लिप मिली हैं!! महंत पर FIR दर्ज, महंत हुआ फरार!! लेकिन अन्य बाबाओ की धुलाई हो रही है आप वीडियो मे देख सकते है वीडियो सोशल मिडिया Alok kumar yadav के माध्यम से प्राप्त हुआ।ये घटना 2024 की बताई जा रही।
Mohd Ansar56,828 Aufrufe • vor 1 Jahr
2:13
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मैं Arfa Khanum के समर्थन में नहीं हूँ, उनका पोस्ट ग़लत था। लेकिन सवाल ये है — गौमाता सिर्फ बकरीद पर ही क्यों याद आती हैं? रोज़ हज़ारों गायें कट रही हैं, तब आपकी आस्था कहाँ जाती है? विरोध करो तो हर दिन करो — मुसलमान आपके साथ है आइए मैदान में करिए विरोध 👇🏻👇🏻 #arfakhanum #EidulAdha2025
Mohd Ansar57,039 Aufrufe • vor 1 Jahr

जब मजार ,500 साल बाद भी "अवैध" हो सकती है… बहराइच (यूपी) में लक्कड़ शाह बाबा की दरगाह, जो 16वीं सदी से वजूद में थी, उसे 2025 में बुलडोज़र से मिटा दिया गया। कहा गया — "अवैध निर्माण" था। अब हम एक सवाल पूछना चाहते हैं — क्या ये पैमाना सब पर लागू होगा? हमारे हिंदू भाई अक्सर पीपल, नीम, या बरगद के पेड़ के नीचे धागा बांधकर, छोटी मूर्ति रखकर पूजा शुरू करते हैं — वक़्त के साथ वो जगह "धार्मिक स्थल" बन जाती है। तो क्या कभी सरकार ने कहा कि वो “अवैध” है? क्या कभी बुलडोज़र उन स्थानों तक पहुंचा? या ये बुलडोज़र सिर्फ़ मुसलमानों की आस्था के लिए तैयार खड़ा रहता है? हम अपने हिंदू भाइयों की आस्था का सम्मान करते हैं, क्योंकि आस्था इंसान का निजी और पवित्र अधिकार है। लेकिन क्या मुसलमानों की आस्था की कोई क़ीमत नहीं? क्या उनके मज़ार, कब्रें, मस्जिदें — सिर्फ "फाइलों का बोझ" हैं? हम कोर्ट का इंतज़ार करते हैं। हम कानून का सम्मान करते हैं। लेकिन क्या कानून सब पर बराबर लागू होता है — या आस्था की क़ीमत सिर्फ़ मज़हब देखकर तय होती है? अगर आज 700 साल पुरानी मजार "अवैध" है तो कल क्या होगा?
Mohd Ansar48,103 Aufrufe • vor 1 Jahr