
Mohammad Irfan
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Commentary ᴘᴀʀᴏᴅʏ ᴀᴄᴄᴏᴜɴᴛ ᴏꜰ Mohammad Irfan, ɴᴏᴛ ᴀꜰꜰɪʟɪᴀᴛᴇᴅ ᴛᴏ Mohammad Irfan, ᴘᴏꜱᴛꜱ ᴀʀᴇ ᴘᴇʀꜱᴏɴᴀʟ ᴛʜᴏᴜɢʜᴛs, ʀᴛꜱ ᴀʀᴇ ɴᴏᴛ ᴇɴᴅᴏʀꜱᴇᴍᴇɴᴛ.
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जेल जाने के लिए मुकद्दमा अपने जेब में रखकर घूमता हूँ! नेहा बोरा के समर्थन में मोहम्मद इरफ़ान !
Mohammad Irfan86,719 просмотров • 11 дней назад

तो क्या चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार घुसपैठिये है ???? अब घुसपैठिये तय करेंगे हम हिंदुस्तानी है या नहीं ???
Mohammad Irfan28,487 просмотров • 4 дней назад

धर्म गुरुओ को अब आगे आना चाहिए ये लोग संस्कृति के नाम पर धर्म को बदनाम कर रहे है
Mohammad Irfan33,153 просмотров • 6 дней назад

🖊 syed asim waqar जी ने लिखा और इंटरब्यू में कहा अगर ये सच है यह बात लोगो तक क्यों नहीं पहुंचाई मिडिया ने 👇👇👇 पिछले 10 साल मे उत्तर प्रदेश मे लगभग 30 मस्जिदे 25 मज़ार और 6 ईदगाह शहीद की गयी है... और लगभग 688 मंदिर भी तोड़े गए है मैं अपनी लीडरशिप से बात करूँगा.. सरकार बनने के बाद सभी तोड़े गए मंदिर और मस्जिद उन्ही लोगो के पैसे से बनाये जायेंगे... जिन्होंने ने अपने दस्तखत से इनको गिराया है चाहे कोई भी हो
Mohammad Irfan70,619 просмотров • 20 дней назад

मै मोहम्मद इरफ़ान यह मेरा दूसरा वीडियो यूटूब के लिए #इरफ़ान
Mohammad Irfan70,126 просмотров • 1 месяц назад

🔥 संघर्ष की लड़ाई जारी रहेगी…! ✊ अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना हमारा कर्तब्य है और इंसाफ़ के लिए लड़ना हमारी ज़िम्मेदारी। शाहीन और नफीसा के साथ कथित मारपीट और अभद्रता के मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग जारी रहेगी। हम किसी से बदला नहीं चाहते, बस इंसाफ़ चाहते हैं। 🇮🇳 संघर्ष जारी रहेगा… न्याय मिलने तक! — मोहम्मद इरफान 🇮🇳
Mohammad Irfan24,798 просмотров • 24 дней назад

🔥 सवाल पूछने वाली आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता! ✊ साकेत थाने में पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों ने पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 📢 पत्रकार सवाल पूछता है—और लोकतंत्र में सवाल पूछना उसका अधिकार है। ⚖️ आरोपों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए। 👇 यह मामला किन पत्रकारों से जुड़ा है? पत्रकार नफ़ीसा ख़ान और साहिन ख़ान के नाम सामने आए हैं। 🔥 मुद्दा व्यक्ति का नहीं, पत्रकारिता की आज़ादी और इंसाफ़ का है। ❤️ वीडियो पूरा देखिए 🔄 सही लगे तो SHARE कीजिए
Mohammad Irfan15,387 просмотров • 24 дней назад

लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार भी तुम्हारा है, तुम झूठ को सच लिख दो, अख़बार भी तुम्हारा है। फ़रियादी जाएँ तो जाएँ कहाँ, क़ानून भी तुम्हारा है, दरबार भी तुम्हारा है। मगर याद रखना— ज़ुल्म की भी एक हद होती है, और सब्र की भी एक हद होती है। इतना मत डराओ कि डरना ही छोड़ दें, इतना मत दबाओ कि आवाज़ ही बन जाएँ। जिस दिन ख़ामोश होंठ बोल पड़ेंगे, जिस दिन सहमे कदम चल पड़ेंगे, उस दिन चप्पा-चप्पा गूँजेगा— इंक़लाब के नारों से! 🔥✊ जय हिन्द 🇮🇳🙏
Mohammad Irfan14,452 просмотров • 24 дней назад

अब सलीके से लबो से खोलना है जहा कोई ना बोले वहा बोलना है मै आ रहा हु झारखण्ड #छात्र
Mohammad Irfan13,960 просмотров • 1 месяц назад
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