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🔱 वन्दे मातरम् | हर हर महादेव 🚩 राष्ट्रवाद | सनातन | भारतीय इतिहास 🇮🇳 Nation First 📚 इतिहास • संस्कृति • समसामयिक विषय 🎥 Daily Videos & Articles

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जनता का फैसला पीरपैंती पावर प्लांट पर विरोध की कहानी बहुत सुनाई गई। लेकिन जनसुनवाई ने सच सामने रख दिया। स्थानीय लोग चाहते हैं— रोज़गार अपने ज़िले में, बिजली अपने राज्य में, और भविष्य अपने बच्चों के लिए। Ultra super critical तकनीक, Zero liquid discharge, हर पेड़ के बदले तीन पेड़— यानी विकास भी, पर्यावरण भी। जब जनता साथ खड़ी हो, तो झूठे आरोप टिक नहीं पाते। पीरपैंती पावर प्लांट— बिजली का नहीं, बिहार के आत्मनिर्भर भविष्य का प्रोजेक्ट है। #Bhagalpur #PirpaintiPowerPlant #AdaniPower #Bihar

जनता का फैसला पीरपैंती पावर प्लांट पर विरोध की कहानी बहुत सुनाई गई। लेकिन जनसुनवाई ने सच सामने रख दिया। स्थानीय लोग चाहते हैं— रोज़गार अपने ज़िले में, बिजली अपने राज्य में, और भविष्य अपने बच्चों के लिए। Ultra super critical तकनीक, Zero liquid discharge, हर पेड़ के बदले तीन पेड़— यानी विकास भी, पर्यावरण भी। जब जनता साथ खड़ी हो, तो झूठे आरोप टिक नहीं पाते। पीरपैंती पावर प्लांट— बिजली का नहीं, बिहार के आत्मनिर्भर भविष्य का प्रोजेक्ट है। #Bhagalpur #PirpaintiPowerPlant #AdaniPower #Bihar

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सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम सिया राम जय राम जय जय राम

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जय श्री शनि देव शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है, जो कर्मफल दाता हैं और अनुशासन व न्याय के प्रतीक हैं। इस दिन शनि देव की पूजा करने, तेल चढ़ाने, और हनुमान जी की आराधना करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और महादशा के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि व स्थिरता आती है।

जय श्री शनि देव शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है, जो कर्मफल दाता हैं और अनुशासन व न्याय के प्रतीक हैं। इस दिन शनि देव की पूजा करने, तेल चढ़ाने, और हनुमान जी की आराधना करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और महादशा के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि व स्थिरता आती है।

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माँ सरस्वती का आशीर्वाद केवल किताबों तक सीमित नहीं होता। वह हमें सही-गलत की पहचान, और सच बोलने का साहस देती हैं। इस पावन दिन पर कामना है— ज्ञान के साथ विनम्रता आए, और बुद्धि के साथ करुणा। माँ सरस्वती सभी के जीवन में प्रकाश और प्रगति लाएँ। सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

माँ सरस्वती का आशीर्वाद केवल किताबों तक सीमित नहीं होता। वह हमें सही-गलत की पहचान, और सच बोलने का साहस देती हैं। इस पावन दिन पर कामना है— ज्ञान के साथ विनम्रता आए, और बुद्धि के साथ करुणा। माँ सरस्वती सभी के जीवन में प्रकाश और प्रगति लाएँ। सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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इतिहास गवाह है, महादेव को न कोई मिटा पाया है और न ही उनकी भक्ति को। 🔱 सदियों पहले, जब बर्बरता की हदें पार हुईं और महादेव की एक भव्य मूर्ति का मस्तक काटकर नदी की लहरों के हवाले कर दिया गया, तो लगा शायद सब खत्म हो गया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। वह मस्तक बहते-बहते नदी किनारे एक वीरान झाड़ी में मिट्टी के नीचे छिप गया। सालों बीत गए... और फिर शुरू हुआ एक ऐसा चमत्कार जिसने विज्ञान और तर्क को पीछे छोड़ दिया। 🐄 ✨ एक गरीब बूढ़ी महिला की प्रिय गाय रोज़ाना उसी मिट्टी के टीले पर जाकर अपना सारा दूध स्वतः ही अर्पित करने लगी। महिला परेशान थी कि आखिर गाय का दूध जाता कहाँ है? जब उसने पीछा किया और अपनी आँखों से वो दृश्य देखा, तो उसकी रूह काँप उठी। जहाँ गाय दूध की धारा बहा रही थी, वहां खुदाई करने पर वही 'मस्तक' प्रकट हुआ जो सालों पहले खंडित किया गया था। आज वही स्थान 'बाबा बालेश्वर नाथ' के नाम से जाना जाता है। यह कहानी सिर्फ एक मंदिर की नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि जिसे दुनिया 'खंडित' समझती है, महादेव उसमें भी पूर्ण होकर प्रकट होते हैं। अगर आपकी भक्ति सच्ची है, तो ईश्वर खुद चलकर आपके पास आएंगे, चाहे वो एक गाय के माध्यम से ही क्यों न हो। 🙏🚩 सत्य सनातन है। हर-हर महादेव! 🕉️

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91,030 просмотров • 3 месяцев назад

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हजारों साल पहले, एक स्वयं भगवान को अपने पाप से मुक्ति के लिए यहाँ आना पड़ा था। आज यह पावन स्थल पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सनातन धर्म की अटूट आस्था का प्रतीक बनकर खड़ा है। 🏛️ हिंगलाज माता मंदिर का वह रहस्यमयी इतिहास जो हर सनातनी को जानना चाहिए: * ब्रह्मांडीय शक्तिपीठ: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता सती का 'ब्रह्मरंध्र' (मस्तिष्क) गिरा था। यह 51 शक्तिपीठों में सबसे शक्तिशाली गुफा मंदिर है। * प्रभु श्री राम की यात्रा: रावण वध के बाद लगे 'ब्रह्महत्या' के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ पैदल चलकर यहाँ यज्ञ करने आए थे। * क्षत्रिय वंश की रक्षा: भगवान परशुराम के क्रोध से बचने के लिए जब राजाओं ने माता की शरण ली, तो माता ने उन्हें 'ब्रह्मक्षत्रिय' बनाकर जीवनदान दिया। * आक्रांताओं पर भारी चमत्कार: कट्टरपंथियों के हर हमले को नाकाम करने वाली इस पवित्र गुफा की रक्षा आज भी स्थानीय बलूच मुस्लिम 'बीबी नानी' (नानी पीर) मानकर करते हैं। 🔄 हमारी इस महान सभ्यता और लुप्त होते इतिहास को दूसरों तक पहुँचाने के लिए रीट्वीट (Retweet) करें! 💬 कमेंट में बताएं: क्या आपको भगवान राम की इस बलूचिस्तान यात्रा के बारे में पहले से पता था? जय माता दी! 👇

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50,913 просмотров • 2 месяцев назад

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🚨 महाभारत का एक योद्धा जो 5000+ सालों से आज भी जीवित है और रोज़ सुबह इस रहस्यमयी किले में पूजा करने आता है! 😱👇 मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में स्थित 'असीरगढ़ का किला', जिसे कभी 'दक्कन की कुंजी' (दक्षिण का द्वार) कहा जाता था, अपने सीने में एक ऐसा राज़ छुपाए है जो विज्ञान को भी हैरान कर देता है। स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार, महाभारत के अमर योद्धा अश्वत्थामा आज भी इस अभेद्य किले के गुप्त शिव मंदिर में सबसे पहले शिवलिंग पर गुलाब का फूल और चंदन अर्पित करते हैं। कई लोगों ने सुबह-सुबह वहां अदृश्य मौजूदगी को महसूस करने का दावा किया है! क्या यह सिर्फ एक लोककथा है या कोई अनसुलझा सच? 🏰🔱 💬 क्या आप इस रहस्यमयी किले में रात बिताने की हिम्मत करेंगे? नीचे कमेंट्स में बताएं और ऐसे ही ऐतिहासिक रहस्यों के लिए फॉलो करें! 🔄

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43,058 просмотров • 2 месяцев назад

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एक ऐसी संतान, जिसके जन्म के पीछे छिपा था ब्रह्मा जी का वो वरदान जो ब्रह्मांड का सबसे बड़ा धोखा बन गया। 🔱✨ क्या आप जानते हैं कि महादेव और भगवान विष्णु की एक ऐसी संतान भी है, जिसने जन्म लेते ही देवताओं की किस्मत बदल दी थी? सबने सोचा कि दो पुरुषों के मिलन से संतान कैसे संभव है? यही सोचकर एक भयानक राक्षसी ने वरदान मांग लिया कि उसकी मृत्यु सिर्फ 'हरि' (विष्णु) और 'हर' (शिव) के पुत्र के हाथों हो। उसे लगा वह अमर हो गई। लेकिन फिर हुआ वो महाचमत्कार जिसने पूरी सृष्टि को हिलाकर रख दिया। भगवान विष्णु ने लिया एक ऐसा रूप कि स्वयं शिवजी भी सम्मोहित हो गए। इस दिव्य मिलन से जन्मे भगवान अयप्पा (मणिकांठन)। गले में दिव्य मणि, हाथों में धनुष-बाण और ऐसी शक्ति जिसने महिषी जैसी भयंकर राक्षसी का अंत सिर्फ 12 वर्ष की आयु में कर दिया। दक्षिण भारत का प्रसिद्ध 'सबरीमाला मंदिर' आज भी इस अद्भुत इतिहास का गवाह है। नीचे कमेंट्स में 'हरिहर पुत्र अयप्पा' लिखकर बताएं कि क्या आपको सबरीमाला मंदिर के चमत्कारों के बारे में पता है? 👇

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37,747 просмотров • 2 месяцев назад

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भगवान विष्णु और महर्षि भृगु की यह कथा केवल एक प्रहार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस महान परीक्षा की गाथा है जिसने वैकुंठ के द्वार हमेशा के लिए बदल दिए! 🚩✨ एक मुनि ने भगवान विष्णु की छाती पर लात क्यों मारी? 😱 क्या यह केवल एक अपमान था या इसके पीछे छिपा था ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य? जानिए क्यों आज भी विष्णु जी के हृदय पर उस लात का निशान मौजूद है! 👇 कथा और जिज्ञासा (Content): जब ऋषि भृगु त्रिदेवों की श्रेष्ठता की परीक्षा लेने निकले, तो अंत में वे वैकुंठ पहुँचे। भगवान विष्णु निद्रा में थे, तभी क्रोधित भृगु ने उनके वक्षस्थल (छाती) पर ज़ोरदार प्रहार कर दिया। हैरान कर देने वाली प्रतिक्रिया: क्रोध के बजाय श्रीहरि ने भृगु के चरणों को पकड़ लिया और पूछा— "हे ऋषिवर, आपकी कोमल लात से मेरे वज्र जैसे हृदय पर चोट तो नहीं लगी?" 🥺🙏 श्रीवत्स का जन्म: इसी विनम्रता ने विष्णु जी को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध किया, लेकिन उनकी छाती पर भृगु के पैर का वह निशान हमेशा के लिए अंकित हो गया, जिसे आज हम 'श्रीवत्स' कहते हैं। माता लक्ष्मी का कोप: इस अपमान को माता लक्ष्मी सहन न कर सकीं। उन्होंने न केवल भृगु वंश को श्राप दिया, बल्कि वैकुंठ भी त्याग दिया। इसी अलगाव के कारण भगवान को पृथ्वी पर 'वेंकटेश्वर' (तिरुपति बालाजी) के रूप में आना पड़ा। क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी ने ब्राह्मणों को धनहीन होने का श्राप क्यों दिया था? क्या आज भी इसका प्रभाव दिखता है? 💭 अपनी राय कमेंट्स में बताएं और इस अद्भुत पौराणिक रहस्य को अपने मित्रों के साथ शेयर करे

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“राजकन्या से राक्षसी बनने तक… रत्नमाला की कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।” “एक राजकन्या… जिसके मन में भगवान को पुत्र रूप में पाने की इच्छा जगी थी। लेकिन वही राजकन्या अगले जन्म में बनी ऐसी राक्षसी, जिसका नाम सुनते ही लोग कांप उठे… कहानी शुरू होती है राजा बलि की पुत्री ‘रत्नमाला’ से। जब उसने वामन भगवान को देखा, तो उसके भीतर ममता उमड़ पड़ी — ‘काश, ये बालक मेरा पुत्र होता…’ ❤️ पर कुछ ही क्षण बाद, अपने पिता का सब कुछ छिनता देखकर उसी ममता ने क्रोध का रूप ले लिया… ☠️ और फिर मिला एक ऐसा श्राप-सा वरदान, जिसने एक राजकुमारी को बना दिया — ‘पूतना’। लेकिन सबसे बड़ा रहस्य ये है… कि भगवान श्रीकृष्ण ने उसे मृत्यु के बाद भी ‘मां’ का सम्मान क्यों दिया? ✨” जय श्री कृष्णा

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भोलेनाथ की नगरी में एक सीख सदैव गूंजती है — “अतिथि देवो भवः”। कहते हैं, महादेव स्वयं कभी साधु, कभी भिक्षुक, तो कभी एक साधारण यात्री का रूप धारण कर भक्तों के द्वार पर पहुँच जाते हैं। जो व्यक्ति प्रेम, विनम्रता और श्रद्धा से अतिथि का सत्कार करता है, उस पर शिव कृपा अवश्य बरसती है। भगवान शिव का स्वरूप हमें सिखाता है कि हर आने वाले में ईश्वर का अंश देखो। अतिथि केवल घर आने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि वह अवसर है जहाँ मानवता, सेवा और संस्कार की परीक्षा होती है। जहाँ अतिथि का सम्मान होता है, वहाँ शिव का आशीर्वाद, सुख और शांति स्वयं निवास करते हैं। हर हर महादेव! 🔱

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