
जाट समाज
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यह हैं हरियाणा के मोहित जाट, जो दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। मोहित का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि छात्र जंतर-मंतर से संसद तक प्रदर्शन करेंगे, तो उन्होंने पहले ही मेडिकल लीव ले ली। छुट्टी खत्म होने के बाद उन्हें कई बार ड्यूटी जॉइन करने के लिए बुलाया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जब उन पर लगातार दबाव बढ़ा, तो उन्होंने दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर पद से इस्तीफा देना उचित समझा और छात्रों के बीच जंतर-मंतर पहुंच गए। उनका कहना था— "मैं अपने भाई-बहन जैसे छात्रों पर लाठी नहीं उठा सकता। मेरे शिक्षकों ने मुझे इस काबिल बनाया है कि मैं मेहनत करके अपना पेट पाल लूंगा।" पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जाट पुलिसकर्मियों को उनकी जाति के नाम पर लगातार निशाना बनाया जा रहा था, मानो हर जाट पुलिसकर्मी एक जैसा हो। आज मोहित के फैसले ने यह साबित कर दिया कि किसी व्यक्ति का चरित्र उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके अपने फैसलों और सिद्धांतों से तय होता है। किसी भी समाज या जाति को एक घटना के आधार पर कटघरे में खड़ा करना गलत है।सवाल सत्ता से करो, आदेश देने वालों से करो, नीतियों से करो। पूरे समाज को बदनाम करके अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश मत करो। #StudentPower #StudentProtest
जाट समाज172,368 views • 7 days ago

सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फौगाट के एशियन गेम्स ट्रायल के लिए आदेश पारित किया । अब ज्यादती देखो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी मजाक बनाकर अपनी पॉवर एक्सरसाइज कर रहे है। ओर वो लोग जो 50 किलो में विनेश के लड़ने पर उसे दोष दे रहे थे।जवाब मांग रहे थे।अब जब वो मां भी बनी है और उसने 57 किलो में लड़ने की इच्छा जताई थी। तो बोल रहे है आप 50 किलो में ट्रायल दो। इतनी ज्यादती!!!!!!! हद नहीं हो रही है ये..... मतलब कि आप चाहे सुप्रीम कोर्ट जाओ या कही जाओ सब इनकी जूती नीचे है और इनकी ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठाने पर आपको रौंद दिया जाएगा... अपनी मर्जी से रातों रात नियम बना रहे है....... बस अपनी ताकत का प्रदर्शन करके बताओ के अच्छे खिलाड़ी को खत्म करने है क्योंकि उसने इनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत दिखाई है। पहलवान कितने वजन में लड़ेगा वो पहलवान तय करेगा। ओर अगर वो सबको हराने का माद्दा रखता हो तो देश की गरिमा ऐसे ही पहलवानों को आगे भेजने में है। न कि मनमर्जी ओर पावर एक्सरसाइज में उसे टॉर्चर करके खत्म करने की घटिया राजनीति हो। Vinesh Phogat
जाट समाज321,635 views • 2 months ago

अगर "The Kashmir Files" में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार दिखाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, तो "Satluj" में पंजाब के उस दौर की घटनाओं को दिखाना गलत कैसे हो गया? जब किसी फिल्म में ऐसे मामले दिखाए जाते हैं जिनकी जांच Central Bureau of Investigation ने की हो और जिनमें Supreme Court of India ने भी दोषियों की सज़ा बरकरार रखी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर वही तथ्य पर्दे पर दिखाए जाएँ तो उनसे डर किसे है? इंसानी स्वभाव यही है कि जो सच हमारे पक्ष में हो उसे इतिहास कहा जाता है, और जो सच असहज करे उसे विवाद बना दिया जाता है। लेकिन सच को छिपाने से वह मिटता नहीं, बल्कि लोगों के मन में और बड़े सवाल छोड़ जाता है। अगर फिल्म में तथ्य गलत हैं तो उनका जवाब तथ्यों से दिया जाना चाहिए। लेकिन अगर एक फिल्म को बिना खुली बहस के हटा दिया जाए, तो सबसे बड़ा नुकसान सच जानने के अधिकार और अभिव्यक्ति की आज़ादी का होता है। समझ नहीं आया कि सतलुज फिल्म चलने से किसको नुकसान होता और किसको फायदा होता? किसने हटवाई होगी यह फिल्म? #punjab95 #Satluj
जाट समाज74,486 views • 24 days ago

विनेश और ज्योति दोनों ही हमारी बेटी है, खेल में हार जीत होती रहती है। लगभग दो वर्षों बाद मैट पर लौटीं विनेश ने ज्योति को 7-1 से हराकर दमदार आगाज़ किया। विनेश की हर एक जीत WFI में बैठे जालसाजो के मुँह पर तमाचा जड़ रहीं है। शाबाश विनेश! देश को आप पर गर्व है। 🇮🇳💪 #VineshPhogat
जाट समाज32,217 views • 2 months ago

जाट की सीधी बात है। जो जाटों का अपमान करेगा उसे गद्दी से हटा देंगे। #जाट_समाज
जाट समाज48,350 views • 4 months ago

राजनीति में राजकुमार भाटी हैं, उनका परिवार नहीं! उसी प्रकार ये भी समझ लो - राजनीति में राजकुमार भाटी है, समाज की माँ-बहने नहीं। किसी कार्यक्रम/मंच से समाज की औरतों के लिए एसी बात कहना कतई भी सही नहीं। और जो आस-पास बैठ कर दाँत दिखा रहे थे, हंसने वाली बात तो ये राजकुमार भाटी का संदर्भ समझने के बाद भी नहीं लग रही।
जाट समाज29,439 views • 2 months ago

पश्चिमी यूपी की कुश्ती को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है। जिस धरती ने देश को अनेक अंतरराष्ट्रीय और ओलंपियन पहलवान दिए, आज वहीं के अखाड़े वीरान होने लगे हैं। बड़ौत जाट कॉलेज का कुश्ती हॉल हो या पश्चिमी यूपी के दूसरे ऐतिहासिक अखाड़े—उनकी बदहाली बहुत कुछ बयां करती है। क्षेत्र के कई अखाड़ों और महिला पहलवानों को पहले भी संसाधनों और प्रशिक्षण से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। आज हालात ऐसे हैं कि पश्चिमी यूपी की प्रतिभाशाली बेटियों को भी बेहतर प्रशिक्षण के लिए पूर्वी यूपी का रुख करना पड़ रहा है। सवाल किसी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि इस बात का है कि जिस पश्चिमी यूपी ने भारतीय कुश्ती की नींव मजबूत की, वहीं की खेल व्यवस्था क्यों कमजोर होती जा रही है? अगर यही हाल रहा तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ इतिहास पढ़ेंगी कि कभी पश्चिमी यूपी भारत की कुश्ती की सबसे मजबूत पहचान हुआ करता था। अब समय आ गया है कि पश्चिमी यूपी के अखाड़ों को फिर से संसाधन, अच्छे कोच और सम्मान मिले। कुश्ती को बचाना है तो उसकी जड़ों को मजबूत करना होगा।
जाट समाज15,152 views • 1 month ago