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मेरी लेखनी ही मेरी पहचान है उसी से आप मेरी विचारधारा को जान सकते हो।

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एक तो IAS ऊपर से ऑल इंडिया पहली रैंक ऊपर से दलित समाज की लड़की ऊपर से विवाह बौद्ध धर्म के रीति रिवाज से करना अब बाड़मेर जिला कलेक्टर मतलब जातिवादी लोगों का तो इस लड़की ने जीना हराम कर रखा है वो जाए तो जाए कहां?? #TinaDabi

एक तो IAS ऊपर से ऑल इंडिया पहली रैंक ऊपर से दलित समाज की लड़की ऊपर से विवाह बौद्ध धर्म के रीति रिवाज से करना अब बाड़मेर जिला कलेक्टर मतलब जातिवादी लोगों का तो इस लड़की ने जीना हराम कर रखा है वो जाए तो जाए कहां?? #TinaDabi

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दर्द आरक्षण का कम है दर्द इस बात का ज्यादा है कि नीचे बैठने वाले आज हमारे सामने कुर्सी पर टांग पर टांग रख कर कैसे बैठे हैं। बस ये दर्द है न वही जातिवाद का कारण है। जातिवादियो इस दर्द का इलाज यही है कि तुम ये मान लो कि सबको समान संसाधन देकर एक साथ दौड़ाया जाए तो तुम पीछे रह जाओगे

दर्द आरक्षण का कम है दर्द इस बात का ज्यादा है कि नीचे बैठने वाले आज हमारे सामने कुर्सी पर टांग पर टांग रख कर कैसे बैठे हैं। बस ये दर्द है न वही जातिवाद का कारण है। जातिवादियो इस दर्द का इलाज यही है कि तुम ये मान लो कि सबको समान संसाधन देकर एक साथ दौड़ाया जाए तो तुम पीछे रह जाओगे

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संविधान एक दलित ने लिखा था इसलिए आए दिन अपशब्द बोले जा रहे हैं यदि यही संविधान एक ब्राह्मण ने लिखा होता तो अब तक उसे विष्णु का अवतार घोषित कर दिया गया होता। ~ रेणु चौधरी

संविधान एक दलित ने लिखा था इसलिए आए दिन अपशब्द बोले जा रहे हैं यदि यही संविधान एक ब्राह्मण ने लिखा होता तो अब तक उसे विष्णु का अवतार घोषित कर दिया गया होता। ~ रेणु चौधरी

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ये बिग बॉस को कौन फैमिली शो बोलता था सामने आओ
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मनुवादी पत्रकार चौबे - क्या चंद्रशेखर आजाद नशा करते हैं? रोहिणी - हां वो थोड़ा करते हैं। मैंने देखा है। पत्रकार - वो अमेरिका में लग्जरी लाइफ प्रमोट करके आए हैं। रोहिणी - हां वो गलत है। अब मनुवादी पत्रकार रोहिणी से जाकर जरूर सवाल जवाब करेंगे क्योंकि उन्हें पता है यदि आजाद भैया थोड़े ओर मजबूत हुए तो SC ST OBC अल्पसंख्यक इतने मजबूत हो जाएंगे कि उनके अधिकारों पर कोई चोट नहीं कर सकता। लग्जरी लाइफ दिखाना गलत क्यों है? बाबा साहेब ने खुद कहा था अच्छा पहनो , अच्छा दिखो लेकिन आजाद भैया फिर भी नॉर्मल रहते हैं वो किसी से छुपा नहीं है। मनुवादी पत्रकार को लगता है कि वो आजाद भैया को नीचा दिखा देंगे और उनका साथ रोहिणी घावरी दे रही है। बॉलीवुड में एक ट्रेंड है जब आपको आपका बॉयफ्रेंड छोड़ दे तो उसका तमाशा बना दो ताकि फेमस होने में बहुत कम समय लगे बस घावरी वही कर रही है इससे ज्यादा कोई बात नहीं है। बाकी न्यायालय जाकर न्याय ले सकती थी लेकिन अभी तक इसके केस का कुछ नहीं बना है।

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117,679 просмотров • 9 месяцев назад

KammoMeghwal333's profile picture

इंटरव्यू पूरा सुनना 😜 ये लड़की SI राजस्थान भर्ती की टॉपर लिस्ट में थी। इसका नाम मंजू विश्नोई है। इसका इंटरव्यू जो उत्कर्ष कोचिंग ने लिया था सुन कर आपको हंसी आयेगी। जो लोग कल टीना डाबी मैम पर लांछन लगा रहे थे वो अपने समाज की लड़कियों के इस तरह के इंटरव्यू सुन कर अपने खुद के अंदर झांका करो कि आप लोग कैसे सिलेक्ट होते हो??? लिव इन रिलेशनशिप के बारे में इनके विचार सुन कर तो कोई भी पागल हो जाए। एक बार इस टॉपर का इंटरव्यू सुन लीजिए फिर बताओ कि RPSC में कौन लोग बैठे हैं जो इनको इंटरव्यू में पास कर देते हैं। ये खुद ऐसे पास हो रहे हैं और दोष आरक्षण को देते हैं। जातिवादियों तुम्हें अब सुधर जाना चाहिए क्योंकि अब बहुजन समाज जाग चुका है। #TinaDabi

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214,900 просмотров • 1 год назад

नांगेली का बलिदान हमें कभी नहीं भूलना चाहिए देखो जातिवादी लोगों ने कैसे हमारे ऊपर जुल्म ढहाए हैं। नंगली ने कैसे ब्रेस्ट tax से छुटकारा दिलाया पढ़ो पूरा Repost or bookmark करना मत भूल जाना और quote करके लिखना है पढ़ो नांगली का बलिदान दलित महिलाएं चुकाती थीं ‘ब्रेस्ट टैक्स’ 1729, मद्रास प्रेसीडेंसी में त्रावणकोर साम्राज्य की स्थापना हुई। राजा थे मार्थंड वर्मा। साम्राज्य बना तो नियम-कानून बने। टैक्स लेने का सिस्टम बनाया गया। जैसे आज हाउस टैक्स, सेल टैक्स और जीएसटी, लेकिन एक टैक्स और बनाया गया...ब्रेस्ट टैक्स मतलब स्तन कर। ये कर दलित और ओबीसी वर्ग की महिलाओं पर लगाया गया। ब्रेस्ट साइज के हिसाब से टैक्स त्रावणकोर में निचली जाति की महिलाएं सिर्फ कमर तक कपड़ा पहन सकती थी। अफसरों और ऊंची जाति के लोगों के सामने वे जब भी गुजरती उन्हें अपनी छाती खुली रखनी पड़ती थी। अगर महिलाएं छाती ढकना चाहें तो उन्हें इसके बदले ब्रेस्ट टैक्स देना होगा। इसमें भी दो नियम थे। जिसका ब्रेस्ट छोटा उसे कम टैक्स और जिसका बड़ा उसे ज्यादा टैक्स। टैक्स का नाम रखा था मूलाक्रम। चाकू से फाड़ देते थे महिलाओं के कपड़े नादर वर्ग की महिलाओं ने कपड़े से सीना ढका तो सूचना राजपुरोहित तक पहुंच जाती थी। पुरोहित एक लंबी लाठी लेकर चलता था जिसके सिरे पर एक चाकू बंधी होती थी। वह उसी से ब्लाउज खींचकर फाड़ देता था। उस कपड़े को वह पेड़ों पर टांग देता था। यह संदेश देने का एक तरीका था कि आगे कोई ऐसी हिम्मत न कर सके। नंगेली ने कुरीतियों की खटिया खड़ी कर डाली 19वीं शताब्दी की शुरुआत में चेरथला में नांगेली नाम की एक महिला थी। स्वाभिमानी और क्रांतिकारी। उसने तय किया कि ब्रेस्ट भी ढकूंगी और टैक्स भी नहीं दूंगी। नांगेली का यह कदम सामंतवादी लोगों के मुंह पर तमाचा था। अधिकारी घर पहुंचे तो नांगेली के पति चिरकंडुन ने टैक्स देने से मना कर दिया। बात राजा तक पहुंच गई। राजा ने एक बड़े दल को नांगेली भेज दिया। अफसरों को पत्ते पर सजाकर सौंप दिया अपना कटा स्तन राजा के आदेश पर टैक्स लेने अफसर नांगेली के घर पहुंच गए। पूरा गांव इकट्ठा हो गया। अफसर बोले, "ब्रेस्ट टैक्स दो, किसी तरह की माफी नहीं मिलेगी।" नांगेली बोली, 'रुकिए मैं लाती हूं टैक्स।' नांगेली अपनी झोपड़ी में गई। बाहर आई तो लोग दंग रह गए। अफसरों की आंखे फटी की फटी रह गई। नांगेली केले के पत्ते पर अपना कटा स्तन लेकर खड़ी थी। अफसर भाग गए। लगातार ब्लीडिंग से नांगेली जमीन पर गिर पड़ी और फिर कभी न उठ सकी। नांगेली की चिता में कूदकर पति ने दी जान नांगेली की मौत के बाद उसके पति चिरकंडुन ने भी चिता में कूदकर अपनी जान दे दी। भारतीय इतिहास में किसी पुरुष के 'सती' होने की यह एकमात्र घटना है। इस घटना के बाद विद्रोह हो गया। हिंसा शुरू हो गई। महिलाओं ने फुल कपड़े पहनना शुरू कर दिए। मद्रास के कमिश्नर त्रावणकोर राजा के महल में पहुंच गए। कहा, "हम हिंसा रोकने में असफल साबित हो रहे हैं कुछ करिए।" राजा बैकफुट पर चले गए। उन्हें घोषणा करनी पड़ी कि अब नादर जाति की महिलाएं बिना टैक्स के ऊपर कपड़े पहन सकती हैं। अंग्रेजों के बढ़ते दबदबे से महिलाओं को मिली राहत अंग्रेजी दीवान जर्मनी दास ने अपनी किताब 'महारानी' में इस कुप्रथा का जिक्र करते हुए लिखा, “संघर्ष लंबा चला। 1965 में प्रजा जीत गई और सभी को पूरे कपड़े पहनने का अधिकार मिल गया। इस अधिकार के बावजूद कई हिस्सों में दलितों को कपड़े न पहनने देने की कुप्रथा चलती रही। जय भीम जय जोहार जय संविधान
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नांगेली का बलिदान हमें कभी नहीं भूलना चाहिए देखो जातिवादी लोगों ने कैसे हमारे ऊपर जुल्म ढहाए हैं। नंगली ने कैसे ब्रेस्ट tax से छुटकारा दिलाया पढ़ो पूरा Repost or bookmark करना मत भूल जाना और quote करके लिखना है पढ़ो नांगली का बलिदान दलित महिलाएं चुकाती थीं ‘ब्रेस्ट टैक्स’ 1729, मद्रास प्रेसीडेंसी में त्रावणकोर साम्राज्य की स्थापना हुई। राजा थे मार्थंड वर्मा। साम्राज्य बना तो नियम-कानून बने। टैक्स लेने का सिस्टम बनाया गया। जैसे आज हाउस टैक्स, सेल टैक्स और जीएसटी, लेकिन एक टैक्स और बनाया गया...ब्रेस्ट टैक्स मतलब स्तन कर। ये कर दलित और ओबीसी वर्ग की महिलाओं पर लगाया गया। ब्रेस्ट साइज के हिसाब से टैक्स त्रावणकोर में निचली जाति की महिलाएं सिर्फ कमर तक कपड़ा पहन सकती थी। अफसरों और ऊंची जाति के लोगों के सामने वे जब भी गुजरती उन्हें अपनी छाती खुली रखनी पड़ती थी। अगर महिलाएं छाती ढकना चाहें तो उन्हें इसके बदले ब्रेस्ट टैक्स देना होगा। इसमें भी दो नियम थे। जिसका ब्रेस्ट छोटा उसे कम टैक्स और जिसका बड़ा उसे ज्यादा टैक्स। टैक्स का नाम रखा था मूलाक्रम। चाकू से फाड़ देते थे महिलाओं के कपड़े नादर वर्ग की महिलाओं ने कपड़े से सीना ढका तो सूचना राजपुरोहित तक पहुंच जाती थी। पुरोहित एक लंबी लाठी लेकर चलता था जिसके सिरे पर एक चाकू बंधी होती थी। वह उसी से ब्लाउज खींचकर फाड़ देता था। उस कपड़े को वह पेड़ों पर टांग देता था। यह संदेश देने का एक तरीका था कि आगे कोई ऐसी हिम्मत न कर सके। नंगेली ने कुरीतियों की खटिया खड़ी कर डाली 19वीं शताब्दी की शुरुआत में चेरथला में नांगेली नाम की एक महिला थी। स्वाभिमानी और क्रांतिकारी। उसने तय किया कि ब्रेस्ट भी ढकूंगी और टैक्स भी नहीं दूंगी। नांगेली का यह कदम सामंतवादी लोगों के मुंह पर तमाचा था। अधिकारी घर पहुंचे तो नांगेली के पति चिरकंडुन ने टैक्स देने से मना कर दिया। बात राजा तक पहुंच गई। राजा ने एक बड़े दल को नांगेली भेज दिया। अफसरों को पत्ते पर सजाकर सौंप दिया अपना कटा स्तन राजा के आदेश पर टैक्स लेने अफसर नांगेली के घर पहुंच गए। पूरा गांव इकट्ठा हो गया। अफसर बोले, "ब्रेस्ट टैक्स दो, किसी तरह की माफी नहीं मिलेगी।" नांगेली बोली, 'रुकिए मैं लाती हूं टैक्स।' नांगेली अपनी झोपड़ी में गई। बाहर आई तो लोग दंग रह गए। अफसरों की आंखे फटी की फटी रह गई। नांगेली केले के पत्ते पर अपना कटा स्तन लेकर खड़ी थी। अफसर भाग गए। लगातार ब्लीडिंग से नांगेली जमीन पर गिर पड़ी और फिर कभी न उठ सकी। नांगेली की चिता में कूदकर पति ने दी जान नांगेली की मौत के बाद उसके पति चिरकंडुन ने भी चिता में कूदकर अपनी जान दे दी। भारतीय इतिहास में किसी पुरुष के 'सती' होने की यह एकमात्र घटना है। इस घटना के बाद विद्रोह हो गया। हिंसा शुरू हो गई। महिलाओं ने फुल कपड़े पहनना शुरू कर दिए। मद्रास के कमिश्नर त्रावणकोर राजा के महल में पहुंच गए। कहा, "हम हिंसा रोकने में असफल साबित हो रहे हैं कुछ करिए।" राजा बैकफुट पर चले गए। उन्हें घोषणा करनी पड़ी कि अब नादर जाति की महिलाएं बिना टैक्स के ऊपर कपड़े पहन सकती हैं। अंग्रेजों के बढ़ते दबदबे से महिलाओं को मिली राहत अंग्रेजी दीवान जर्मनी दास ने अपनी किताब 'महारानी' में इस कुप्रथा का जिक्र करते हुए लिखा, “संघर्ष लंबा चला। 1965 में प्रजा जीत गई और सभी को पूरे कपड़े पहनने का अधिकार मिल गया। इस अधिकार के बावजूद कई हिस्सों में दलितों को कपड़े न पहनने देने की कुप्रथा चलती रही। जय भीम जय जोहार जय संविधान

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बाबा साहेब के बच्चे हो तो रिपोस्ट नहीं रुकना चाहिए जातिवादी लोगों की जड़ें में हिलाती रहूंगी। जो लोग योग्यता योग्यता चिलाते हैं तो ias #tinadabi मैम जो पिछड़े समाज से आती है उनको करारा जवाब दे रही है। योग्यता जाति की मोहताज नहीं है। जब इतने बड़े पद पर कार्य करने का मौका ही नहीं दोगे तो योग्यता सिद्ध कैसे होगी? आज बहन को सलाम कीजिए। आज बहन टीना डाबी ने बाड़मेर में कई सरकारी और प्राईवेट अस्पताल का दौरा किया तो पाया कि कुछ सरकारी डॉक्टर अपना खुद का क्लिनिक चला रहे थे। बहन ने जांच के आदेश दिए हैं और अन्य डॉक्टरों में भय व्याप्त हो चुका है। मीडिया ने बहन की जांच को प्रभावित कर दिया क्यों कि साथ में मीडिया में खबर आ रही थी तो कुछ डॉक्टर प्राइवेट क्लिनिक से भाग कर अपने सरकारी अस्पताल में भाग गए। बाड़मेर साफ होकर रहेगा। जय भीम जय जोहार जय संविधान

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मैंने पहले ही कहा था बाड़मेर सुधारने वाला है #tinadabi मैम ने पूरे प्रशासन को हिला कर रख दिया है। सड़कों को खुदवाकर उनके सैंपल की जांच कर रही है। आप टीना डाबी मैम के लिए repost कीजिए ताकि दूसरे ias AC रूम से बाहर निकले तो छतरी ले कर न निकले ऐसे काम करने के लिए निकले। जिला कलक्टर टीना डाबी ने सोमवार को शहर के अलग -अलग इलाकों का निरीक्षण किया। शहर के मल्लीनाथ सर्किल के पास जिला कलक्टर ने नवनिर्मित सीसी रोड़ की क्वालिटी को भी जांचा। इसके साथ ही जिला कलक्टर ने सिणधरी चौराहे के आसपास NH ऑथोरिटी के अधिकारियों को बुलाकर हाईवे के नालों से लगाकर सड़क और विभिन्न व्यवस्थाओं को जायजा लिया। जिला कलक्टर NHAI के काम से नाखुश नजर आई।

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पत्रकार - मायावती कहीं दिखाई नहीं दे रही है? आजाद भैया - पहले आप हमारी नेता का सम्मान से नाम ले। मायावती जी ये सम्मान सिर्फ आजाद समाज पार्टी कांशीराम के लोग कर रहे हैं। जबकि बसपा के लोग रोज आजाद भैया को अपशब्द बोलते हैं। रोहिणी घावरी वाले मामले में देखा जाए तो सबसे ज्यादा खुश बसपा के कार्यकर्ता थे। दूसरी पार्टी के लोगों ने तो बात तक को नहीं पकड़ा लेकिन बसपा के लोग 2 दिन उस खबर को ऐसे तूल पकड़वाया जैसे आजाद भैया ही उनके सबसे बड़े दुश्मन हो। जबकि हम आज भी बसपा का सम्मान करते हैं और बहन जी हमारे लिए सम्मानित नेता है और रहेंगी। ऐसी विचारधारा को पोषित करने वाले आजाद भैया का धन्यवाद। अपने आदर्शों को नहीं भूलना ही आजाद समाज पार्टी की ताकत है। सोनू बामणिया -ASP Amar Jyoti Sadab Husain Idrisi Kishan Meghwal Gordhan Lilawat - ASP Anil Kumar Dhenwal Mahesh Pahwal ASP Ravindra Bhati Gurjar

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