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अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali

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eternal kid way back home

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ये असम के गुवाहाटी में IPL मैच नहीं धुल रहा है बल्कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की नाकामी और भ्रष्टाचार का पाप धुल रहा है। राजस्थान जैसे राज्य की IPL टीम है, रणजी टीम है, लेकिन हालात इतने खराब है कि वहां के IPL मैच पिछले कई सालों से असम के गुवाहाटी में आयोजित कराने पड़ रहे हैं कारण: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को नेताओं ने अपने निकम्मे पुत्रों को पद देने का अखाड़ा बना लिया है।

ये असम के गुवाहाटी में IPL मैच नहीं धुल रहा है बल्कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की नाकामी और भ्रष्टाचार का पाप धुल रहा है। राजस्थान जैसे राज्य की IPL टीम है, रणजी टीम है, लेकिन हालात इतने खराब है कि वहां के IPL मैच पिछले कई सालों से असम के गुवाहाटी में आयोजित कराने पड़ रहे हैं कारण: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को नेताओं ने अपने निकम्मे पुत्रों को पद देने का अखाड़ा बना लिया है।

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ये गहन राजनीतिक शोध का विषय है— लोकसभा चुनाव में गमछा घुमाकर पूरे उत्तर भारत में बीजेपी को पटखनी देने की नींव रखने वाले गोविंद सिंह डोटासरा ने इस बार निकाय चुनाव में आक्रामक प्रचार क्यों नहीं किया, सभी बड़े नेताओं को अपने अपने क्षेत्र में सीमित क्यों रखा, चुनाव को स्थानीय समीकरण के अनुसार क्यों लड़ा? कथित चाणक्य अमित शाह समेत चुनावी विश्लेषकों के लिए गहन शोध का विषय है कि डोटासरा की रणनीति पकड़ में क्यों नहीं आती है और हर बार विरोधी डोटासरा के सामने मुंह की क्यों खाते हैं।

ये गहन राजनीतिक शोध का विषय है— लोकसभा चुनाव में गमछा घुमाकर पूरे उत्तर भारत में बीजेपी को पटखनी देने की नींव रखने वाले गोविंद सिंह डोटासरा ने इस बार निकाय चुनाव में आक्रामक प्रचार क्यों नहीं किया, सभी बड़े नेताओं को अपने अपने क्षेत्र में सीमित क्यों रखा, चुनाव को स्थानीय समीकरण के अनुसार क्यों लड़ा? कथित चाणक्य अमित शाह समेत चुनावी विश्लेषकों के लिए गहन शोध का विषय है कि डोटासरा की रणनीति पकड़ में क्यों नहीं आती है और हर बार विरोधी डोटासरा के सामने मुंह की क्यों खाते हैं।

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हर साल असम में बाढ़ आती है, सरकार और भारत के लोग लगभग असम के लोगों की इस पीड़ा को इग्नोर ही करते हैं। छात्र नेता निर्मल चौधरी राजस्थान से असम पहुंचे हैं और वहां के बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद कर रहे हैं। देखकर अच्छा लगा कि "रील वाले नेता" के आरोप झेल रहे लड़के ने रील से आगे बढ़कर असम के लोगों की मदद कर उत्तर भारत के लोगों में नॉर्थ ईस्ट की मदद करने के लिए प्रेरणा, जागृति का काम किया है और सवाल उठाने वाले लोगों की नीयत पर सवाल उठा दिए हैं।

हर साल असम में बाढ़ आती है, सरकार और भारत के लोग लगभग असम के लोगों की इस पीड़ा को इग्नोर ही करते हैं। छात्र नेता निर्मल चौधरी राजस्थान से असम पहुंचे हैं और वहां के बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद कर रहे हैं। देखकर अच्छा लगा कि "रील वाले नेता" के आरोप झेल रहे लड़के ने रील से आगे बढ़कर असम के लोगों की मदद कर उत्तर भारत के लोगों में नॉर्थ ईस्ट की मदद करने के लिए प्रेरणा, जागृति का काम किया है और सवाल उठाने वाले लोगों की नीयत पर सवाल उठा दिए हैं।

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डोटासरा तो अचानक मानेसर कांड से निकले नेता हैं या अशोक गहलोत जी के आशीर्वाद से प्रदेश अध्यक्ष बने थे – गुटबाज गहलोत– पायलट और जातिवादी मीडिया। मैं क्या बोलूंगा आप सिखाओगे क्या, बैठ जाएये आप...... बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ को फटकार लगाती ये वो आवाज थी जिसको नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी जी ने तराशा और सदन में 163 विधायकों वाली बीजेपी वसुन्धरा सरकार के सामने जनता की ढाल बनाकर खड़ा किया था, विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक बनाकर मौका दिया था। 2013 चुनाव में जब अशोक गहलोत जी के रहमो कर्म से कांग्रेस सिर्फ 21 सीट पर सिमट गई थी तब सोनिया जी ने अपने भरोसेमंद नेता रामेश्वर डूडी जी को सदन का नेता बनाया था, इन्हें रामेश्वर डूडी जी के नेतृत्व एवं आशीर्वाद से गोविंद सिंह डोटासरा, अशोक चांदना, घनश्याम मेहर जैसे मजबूत जननेता वसुंधरा सरकार के सामने सीना तानकर खड़े होते थे, इन्हें डूडी जी की छत्र छाया में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट जी ने मीडिया और दिल्ली– जयपुर के बाहर राजस्थान भर में अपना पहचान बनाई थी, सर्किट हाउस के दौरों से अलग जनसंघर्ष में ध्यान लगाया था। 2020 में सचिन पायलट मानेसर जाकर बैठ गए तब भी रामेश्वर डूडी जी की सलाह पर ही सोनिया गांधी जी ने केंद्र के अन्य वरिष्ठ नेताओं से विमर्श कर के ही डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, अशोक गहलोत कभी नहीं चाहते थे कि एक मजबूत नेता PCC अध्यक्ष बने, 2020 में गहलोत जी की पसंद के चारों नाम आलाकमान ने ठुकरा दिए थे और डूडी जी एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर ठप्पा लगाया था, अगली बार जब भी गहलोत जी खुद को कांग्रेस का मालिक समझ कर ये कहें कि उन्होंने इस नेता को ये बनवाया या डोटासरा जी तो मानेसर कांड से निकले नेता हैं, उन्हें रामेश्वर डूडी जी का नाम याद दिलवा देना और एक सवाल कर लेना कि गहलोत जी आप ने दिल्ली से सीधे मुख्यमंत्री बनकर राजस्थान आने के बाद हमेशा से क्यों चाहा था कि राजस्थान से लोकसभा में कोई मजबूत युवा सांसद न पहुंचे, प्रदेश अध्यक्ष पद पर मजबूत नेता न बैठें जो संगठन निर्माण पर ध्यान दें। अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali

डोटासरा तो अचानक मानेसर कांड से निकले नेता हैं या अशोक गहलोत जी के आशीर्वाद से प्रदेश अध्यक्ष बने थे – गुटबाज गहलोत– पायलट और जातिवादी मीडिया। मैं क्या बोलूंगा आप सिखाओगे क्या, बैठ जाएये आप...... बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ को फटकार लगाती ये वो आवाज थी जिसको नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी जी ने तराशा और सदन में 163 विधायकों वाली बीजेपी वसुन्धरा सरकार के सामने जनता की ढाल बनाकर खड़ा किया था, विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक बनाकर मौका दिया था। 2013 चुनाव में जब अशोक गहलोत जी के रहमो कर्म से कांग्रेस सिर्फ 21 सीट पर सिमट गई थी तब सोनिया जी ने अपने भरोसेमंद नेता रामेश्वर डूडी जी को सदन का नेता बनाया था, इन्हें रामेश्वर डूडी जी के नेतृत्व एवं आशीर्वाद से गोविंद सिंह डोटासरा, अशोक चांदना, घनश्याम मेहर जैसे मजबूत जननेता वसुंधरा सरकार के सामने सीना तानकर खड़े होते थे, इन्हें डूडी जी की छत्र छाया में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट जी ने मीडिया और दिल्ली– जयपुर के बाहर राजस्थान भर में अपना पहचान बनाई थी, सर्किट हाउस के दौरों से अलग जनसंघर्ष में ध्यान लगाया था। 2020 में सचिन पायलट मानेसर जाकर बैठ गए तब भी रामेश्वर डूडी जी की सलाह पर ही सोनिया गांधी जी ने केंद्र के अन्य वरिष्ठ नेताओं से विमर्श कर के ही डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, अशोक गहलोत कभी नहीं चाहते थे कि एक मजबूत नेता PCC अध्यक्ष बने, 2020 में गहलोत जी की पसंद के चारों नाम आलाकमान ने ठुकरा दिए थे और डूडी जी एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर ठप्पा लगाया था, अगली बार जब भी गहलोत जी खुद को कांग्रेस का मालिक समझ कर ये कहें कि उन्होंने इस नेता को ये बनवाया या डोटासरा जी तो मानेसर कांड से निकले नेता हैं, उन्हें रामेश्वर डूडी जी का नाम याद दिलवा देना और एक सवाल कर लेना कि गहलोत जी आप ने दिल्ली से सीधे मुख्यमंत्री बनकर राजस्थान आने के बाद हमेशा से क्यों चाहा था कि राजस्थान से लोकसभा में कोई मजबूत युवा सांसद न पहुंचे, प्रदेश अध्यक्ष पद पर मजबूत नेता न बैठें जो संगठन निर्माण पर ध्यान दें। अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali

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इनकी फंडिंग कहां से आ रही है? एक साधु के पास लाखों रुपए कहां से आएंगे, सरकार को पता लगाना चाहिए कहीं कुंभ मेले में देश विरोधी ताकतें तो नहीं हैं??

इनकी फंडिंग कहां से आ रही है? एक साधु के पास लाखों रुपए कहां से आएंगे, सरकार को पता लगाना चाहिए कहीं कुंभ मेले में देश विरोधी ताकतें तो नहीं हैं??

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राहुल गांधी के खिलाफ खुद को बड़ा साबित करने और केंद्र कांग्रेस में गुटबाजी को बढ़ावा देने से नाराज छात्रों ने सचिन पायलट मुर्दाबाद के नारे लगाकर दिल्ली यूनिवर्सिटी में पायलट का विरोध किया। इस देश में युवाओं का एक ही नेता है वो राहुल गांधी जी है 🤎

राहुल गांधी के खिलाफ खुद को बड़ा साबित करने और केंद्र कांग्रेस में गुटबाजी को बढ़ावा देने से नाराज छात्रों ने सचिन पायलट मुर्दाबाद के नारे लगाकर दिल्ली यूनिवर्सिटी में पायलट का विरोध किया। इस देश में युवाओं का एक ही नेता है वो राहुल गांधी जी है 🤎

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नरेश मीणा ने इनके लिए ही कुछ साल पहले जन्मदिन पर ड्रम भर भर के कितने लीटर खून डोनेट करवाया था? जब सचिन पायलट को राजस्थान में धरातल पर कोई चाहता भी नही था, जानता भी नहीं था तब पूर्वी राजस्थान में दलित आदिवासी समाज का चहेता नेता नरेश मीणा ने ही कंधों पर बैठाकर बनाया था आज सचिन पायलट पूर्वी राजस्थान में अपनी रैली में 100 लोग मुश्किल से बुला पा रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके नाम से नरेश मीणा अपना नाम चमका रहे हैं 🫨 झालावाड़ स्कूल पीड़ित लोगों को न्याय दिलवाने के लिए नरेश मीणा पहले दिन ही पहुंच गए थे और जनता के लिए एक महीने से ज्यादा उस मामले में जेल भुगत कर आए हैं, जबकि सचिन पायलट ने झालावाड़ स्कूल पीड़ित लोगों से मिलना तक उचित नहीं समझा है, ट्वीट करने से भी कटरा रहे हैं कहीं बीजेपी से अंदरूनी सेटिंग न टूट जाए!

नरेश मीणा ने इनके लिए ही कुछ साल पहले जन्मदिन पर ड्रम भर भर के कितने लीटर खून डोनेट करवाया था? जब सचिन पायलट को राजस्थान में धरातल पर कोई चाहता भी नही था, जानता भी नहीं था तब पूर्वी राजस्थान में दलित आदिवासी समाज का चहेता नेता नरेश मीणा ने ही कंधों पर बैठाकर बनाया था आज सचिन पायलट पूर्वी राजस्थान में अपनी रैली में 100 लोग मुश्किल से बुला पा रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके नाम से नरेश मीणा अपना नाम चमका रहे हैं 🫨 झालावाड़ स्कूल पीड़ित लोगों को न्याय दिलवाने के लिए नरेश मीणा पहले दिन ही पहुंच गए थे और जनता के लिए एक महीने से ज्यादा उस मामले में जेल भुगत कर आए हैं, जबकि सचिन पायलट ने झालावाड़ स्कूल पीड़ित लोगों से मिलना तक उचित नहीं समझा है, ट्वीट करने से भी कटरा रहे हैं कहीं बीजेपी से अंदरूनी सेटिंग न टूट जाए!

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ये साढ़ू कौन है?

ये साढ़ू कौन है?

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चौधरी चरण सिंह साहब को भारत रत्न मिलने की खुशी में किसानों ने दिल्ली में गुड बांटकर खुशी जाहिर की काश ये भारत रत्न रत्न कांग्रेस सरकार ने पहले ही दिया होता तो आज एक मनहूस, किसानों के हत्यारे के पास ये मौका नहीं आता

चौधरी चरण सिंह साहब को भारत रत्न मिलने की खुशी में किसानों ने दिल्ली में गुड बांटकर खुशी जाहिर की काश ये भारत रत्न रत्न कांग्रेस सरकार ने पहले ही दिया होता तो आज एक मनहूस, किसानों के हत्यारे के पास ये मौका नहीं आता

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अशोक गहलोत जी जादूगर हैं या सिर्फ कठपुतली राजनेता, आप खुद ही तय करें। गहलोत ने इस केसरी सिंह राठौड़ को 2023 चुनाव से पहले, मतलब आचार संहिता लगने से ठीक पहले बड़ी साजिश के तहत RPSC सदस्य बनाया था (बनाते ही माफी भी मांगी) और राजस्थान का जीता हुआ चुनाव कांग्रेस हार गई थी, भरतपुर और अजमेर ही नहीं बल्कि खुद अशोक गहलोत जी के गृह जिले जोधपुर समेत मारवाड़ के पाली, बाड़मेर जैसलमेर जालोर में कांग्रेस साफ हो गई थी जहां पहले कांग्रेस 39 में से 31 सीट जीती हुई थी वहां 7 सीटों पर सिमट गई जिसमें से भी 5 सीटें जाट- मेघवाल बाहुल्य थी जो जाट दलित मुस्लिम समीकरण से जीते जबकि राजपुत समाज के लिए गहलोत ने केसरी सिंह, EWS सरलीकरण, SI भर्ती समेत सारी भर्तियों में ...... खैर, उसके बावजूद विधानसभा और लोकसभा में खुद गहलोत और बेटे को उनकी सीट पर भी 5% राजपूत वोट नहीं मिले थे। जिस केसरी सिंह की मानसिकता सिर्फ इस वीडियो से ही नहीं बल्कि अन्य कई वीडियो में दिख जाएगी जहां वो खुले मंच से गुर्जर, दलित, जाट समेत सर्व समाज के लिए घृणित सोच दिखाते हुए अपने राजपूत समाज के सामने भाषण दे रहे हैं, ये केसरी सिंह 6 साल RPSC में रहकर कितने SC ST OBC और गैर राजपूत सवर्णों की नौकरी खायेंगे ये तो गहलोत जी जानें। जिस RPSC से पेपर लीक पर अशोक गहलोत 25 साल से बदनाम होते रहे हैं, जिस RPSC और पेपर लीक के लिए सड़कों पर उन्हीं के नेता पायलट कांग्रेस की गहलोत सरकार के खिलाफ धरने प्रदर्शन कर रहे हो उस RPSC में चुनाव से ठीक पहले ऐसे व्यक्ति को RPSC सदस्य बनाकर कांग्रेस को हराने वाले अशोक गहलोत कितने बड़े जादूगर हैं या सबसे बड़े कठपुतली राजनेता हैं, गहलोत ही जानें। मीडिया कहती है जादूगर है, लेकिन कांग्रेस का वोट बैंक तो गहलोत को कांग्रेस का कंस कहता है और मीडिया कहती है कि गहलोत गरीबों के गणेश है लेकिन राजस्थान का सर्वसमाज उन्हें 3 बार लगातार अलग अलग दशकों में नकार कर इसका प्रमाण दे चुका है। खैर मीडिया और अन्य राजनेताओं के समर्थकों की तरह हरियाणा में कांग्रेस और हुड्डा की हार को जाट vs 35 कहने की तरह मैं ये कभी नहीं कहूंगा कि अशोक गहलोत और राजनीति की वजह से माली vs अन्य 35 कौम हुआ होगा, और 3 अलग दशकों में हुआ होगा, इसकी चर्चा भी करेंगे, लेकिन फिर कभी। गहलोत की 3 दशकों में लगातार 3 बार हार के कारण मैंने बता दिए हैं, ये आप तय करें कि जादूगर हैं या कठपुतली राजनेता।।

अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali

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एक तरफ सचिन पायलट जी थे जिन्होंने संगठन , NSUI, युवा कांग्रेस में अपने लोग भरने के बाद स्थानीय चुनावों में भी जयपुर में बैठकर सारे टिकट अपने अनुसार बांट दिए थे ताकि जीते या हारे वो लोग संगठन से पहले व्यक्ति विशेष के लिए वफादार रहें। दूसरी तरफ गहलोत जी हैं जो 3 बार सर्वसमाज द्वारा बुरी तरह ठुकराए जाने के बाद अब "चौथी बार गहलोत सरकार या भाजपा रिपीट अबकी बार" से नीचे कुछ मंजूर नहीं करना चाहते हैं, चाहते हैं कि पार्टी फिर से मेहनत कर सरकार बनाएं और मुख्यमंत्री उन्हें पहले घोषित करें जैसे कि इन्होंने पार्टी को अपने गृह क्षेत्र मारवाड़ सहित पूरे राजस्थान में बर्बाद नहीं काफी मेहनत से मजबूत किया और पार्टी ने इन्हें बदले में कुछ नहीं दिया हो। उम्मीद है कांग्रेस कार्यकर्ता अब किसी व्यक्ति विशेष से ऊपर पार्टी को रखना सीखेंगे और पार्टी सिंबल एवं विचारधारा के प्रति वफादार रहकर काम करेंगे ताकि जनता आने वाले सभी चुनावों में दशकों तक बीजेपी को पटखनी देती रहें। Ashok Gehlot Sachin Pilot Govind Singh Dotasra Tika Ram Jully Congress Rajasthan PCC

अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali

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क्या भारत सरकार को ऐसे लोगों पर नजर रखनी चाहिए जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा है ? अमरकोट पाकिस्तान से पूर्व राजपरिवार जो भारत से गद्दारी कर स्वार्थ में अपने साथ जोधपुर जैसलमेर मेवाड़ सहित रियासतों को पाकिस्तान में मिलाने के प्रयास में लगे थे, उस सोढ़ा राजपूत परिवार की फोटो लगाकर भारत में कई लोग प्राउड फील करते हैं, अपना गौरव बताते हैं। आजादी के बाद भी इनकी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कई जगह रिश्तेदारी भी बताई जा रही है, – वीडियो में भाषण देता हुआ व्यक्ति पाकिस्तान का करणी सोढ़ा: जिसकी जयपुर के कानोता में ठाकुर मानसिंह की बेटी पद्मी सिंह से शादी हुई है करणी सोढ़ा की बहन की शादी यूपी के बलरामपुर में जेपी सिंह से हुई है। शिव, बाड़मेर से विधायक रवींद्र सिंह कई बार इस पाकिस्तानी परिवार की तारीफ करते सुने गए हैं, अभी युद्ध की अटकलों के बीच रवीन्द्र भाटी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पाकिस्तानी नागरिकों को पाकिस्तान न भेजने की अपील की।

अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali

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