
खुरपेंची स्वास्थ्य
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FSSAI और Drug Authority of India को जवाबदेह बनाने का संकल्प ⚖️ | नकली खाद्य , दवा माफियाओं और अंधविश्वास के खिलाफ जनआवाज़ 🔥 |
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जब Mother Dairy का दूध खरीदा गया, जिसकी एक्सपायरी 90 दिन बताई जाती है, तो फिर एक्सपायरी से 11 दिन पहले ही दूध सड़कर बदबूदार कैसे हो गया? कुछ सीधे और ज़रूरी सवाल 👇 • क्या पैकिंग से पहले बैच की माइक्रोबायोलॉजिकल जांच हुई थी? • कोल्ड चेन में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई? • स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन की निगरानी कौन करता है? • क्या हर बैच की शेल्फ-लाइफ वास्तव में टेस्ट की जाती है या सिर्फ़ कागज़ों में? • ग्राहक की शिकायत पर सैंपल उठाकर तुरंत जांच क्यों नहीं होती?
खुरपेंची स्वास्थ्य386,545 views • 8 months ago

अमूल के पैकेट के शुद्ध देशी घी के नाम पर डालडा घी बेचा जा रहा है। अब ये अमूल वालों की गलती है या फिर Blinkit वालों की? ख़ैर गलती जिसकी भी हो, आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। पूरे देश में नकली पनीर से लेकर इंजेक्शन वाली सब्ज़ियाँ बेची जा रही हैं, क्योंकि निगरानी एजेंसियाँ भांग खाकर सो रही हैं। अब सवाल और ज़्यादा गंभीर हैं— ब्रांड का नाम ढाल बन गया है, ज़िम्मेदारी किसकी है? ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म क्वालिटी चेक क्यों नहीं करते? FSSAI, राज्य की फूड सेफ्टी टीमें, छापे और सैंपल सिर्फ़ कागज़ों में क्यों? मिलावट पकड़ में आने के बाद भी सज़ा दिखती क्यों नहीं? क्या आम आदमी की सेहत इतनी सस्ती है कि उस पर रोज प्रयोग होंगे? ये लापरवाही नहीं , सिस्टमेटिक अपराध है। और जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी , थाली में ज़हर और बयानबाज़ी में “सब ठीक है” चलता रहेगा।
खुरपेंची स्वास्थ्य377,906 views • 9 months ago

एक महिला ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से पॉलिसी ली। किडनी इन्फेक्शन हुआ , तेज बुखार में कंपकंपी छूटने लगी , हालत बिगड़ी तो अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। लेकिन जब क्लेम लगाया गया तो जवाब मिला आप तो दवा से ठीक हो सकती थीं , एडमिट क्यों हुईं? अब सवाल ये है कि 👇 क्या बीमा कंपनी अब डॉक्टर भी बन गई है? क्या मरीज की हालत अस्पताल तय करेगा या इंश्योरेंस ऑफिस? क्या ICU में जाने से पहले कंपनी से अनुमति लेनी होगी कि “सर, क्या मैं सच में बीमार हूं?” पॉलिसी बेचते समय कहते हैं “कैशलेस, टेंशन फ्री।” और क्लेम के समय कहते हैं “आपको तो सिर्फ गोली खानी चाहिए थी।” तो फिर इंश्योरेंस किस बात का है? बीमारी कवर करने का या क्लेम रिजेक्ट करने का?
खुरपेंची स्वास्थ्य208,216 views • 7 months ago

एक महिला डॉक्टर स्टाफ ने बेहद चौंकाने वाली बात बताई कि आजकल कई युवा डॉक्टरों को यह समझाया जा रहा है कि मरीज को ICU में ज्यादा से ज्यादा कैसे रोका जाए, किस तरह हालत को जरूरत से ज्यादा गंभीर दिखाया जाए और कैसे इलाज को सेवा नहीं बल्कि कमाई का धंधा बनाया जाए। सबसे शर्मनाक बात यह है कि सरकार और संबंधित विभाग सब देखकर भी चुप हैं मानो पूरे सिस्टम ने तिरपाल ओढ़कर सोने की कसम खा ली हो।
खुरपेंची स्वास्थ्य99,444 views • 5 months ago
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पेपर कप में चाय पीने से 15 मिनट में 25,000 माइक्रोप्लास्टिक निकलते हैं—IIT खड़गपुर की स्टडी में ऐसा दावा है। रोज लाखों लोग ऐसे कप इस्तेमाल कर रहे हैं , तो क्या लोग कैंसर अपने अंदर भर रहे? FSSAI, हेल्थ मिनिस्ट्री और स्टेट फूड डिपार्टमेंट अब तक क्या कर रहे थे ??
खुरपेंची स्वास्थ्य151,790 views • 10 months ago

प्राइवेट हॉस्पिटलों की हैवानियत इतनी बढ़ चुकी है कि गरीब की नॉर्मल डिलीवरी के 10K, मामूली ऑपरेशन के 12K माँगे। 8K दिए तो इलाज से साफ इनकार। मजबूरी में दूसरे अस्पताल भागे… लेकिन देर हो चुकी थी। पैसे न होने की सज़ा एक मासूम की मौत बनी। ये इलाज नहीं , खुला हत्या-व्यापार है।
खुरपेंची स्वास्थ्य143,135 views • 10 months ago