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FSSAI और Drug Authority of India को जवाबदेह बनाने का संकल्प ⚖️ | नकली खाद्य , दवा माफियाओं और अंधविश्वास के खिलाफ जनआवाज़ 🔥 |

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शादी ब्याह , तेरहवीं , भंडारे और भत्तवान में जाकर जो पनीर ,रायता और सुखी सब्जी लपेटते हो उसके स्वाद की असली वजह भी देख लो। अब यार इसमें कोई फूड सेफ्टी का रोना मत रोना।

शादी ब्याह , तेरहवीं , भंडारे और भत्तवान में जाकर जो पनीर ,रायता और सुखी सब्जी लपेटते हो उसके स्वाद की असली वजह भी देख लो। अब यार इसमें कोई फूड सेफ्टी का रोना मत रोना।

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अंधविश्वास और पाखंड अपने चरम पर है , ये मूर्ख एक बच्चे के सीने पर खुद रहा है , इसके मां - बाप से भी ज्यादा गवार है , जो उसको ये सब करने दे रहे है। सरकार को ऐसे कलाकारों को पागलखाने के अंदर डालकर सुबह शाम 440 वोल्ट का करंट देना चाहिए।

अंधविश्वास और पाखंड अपने चरम पर है , ये मूर्ख एक बच्चे के सीने पर खुद रहा है , इसके मां - बाप से भी ज्यादा गवार है , जो उसको ये सब करने दे रहे है। सरकार को ऐसे कलाकारों को पागलखाने के अंदर डालकर सुबह शाम 440 वोल्ट का करंट देना चाहिए।

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क्रीम रोल खाने वाले सभी भाइयों को ढेर सारी शुभकामनाएं , FSSAI वालों आप लोग भी ध्यान से देख लो यही क्रीम रोल देश के हर कोने में बिक रहा है। खैर आप लोगों को क्या ही मतलब सिर्फ टाइम से हिस्सा मिलता रहे।

क्रीम रोल खाने वाले सभी भाइयों को ढेर सारी शुभकामनाएं , FSSAI वालों आप लोग भी ध्यान से देख लो यही क्रीम रोल देश के हर कोने में बिक रहा है। खैर आप लोगों को क्या ही मतलब सिर्फ टाइम से हिस्सा मिलता रहे।

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FSSAI वालों जवाब दो ये कौन सी ICE CREAM पैक हो रही है ?? ऐसे प्रोडक्ट्स को अप्रूवल कैसे मिल जाता है? किस आधार पर लाइसेंस दिया गया? और जनता की सेहत के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब तक चलेगा?

FSSAI वालों जवाब दो ये कौन सी ICE CREAM पैक हो रही है ?? ऐसे प्रोडक्ट्स को अप्रूवल कैसे मिल जाता है? किस आधार पर लाइसेंस दिया गया? और जनता की सेहत के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब तक चलेगा?

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FSSAI वालों बताओ ये मुर्गियों को कौन सा टीका लगा रहा है , मुझे तो लग रहा है कि पोलियों का टीका लगा रहा है , लेकिन कुछ हरामखोर बोल रहे है कि इंजेक्शन लगाकर मुर्गी का साइज बढ़ा रहे है जिससे मुर्गी हफ्ते भर में 2 किलो की हो जाय।

FSSAI वालों बताओ ये मुर्गियों को कौन सा टीका लगा रहा है , मुझे तो लग रहा है कि पोलियों का टीका लगा रहा है , लेकिन कुछ हरामखोर बोल रहे है कि इंजेक्शन लगाकर मुर्गी का साइज बढ़ा रहे है जिससे मुर्गी हफ्ते भर में 2 किलो की हो जाय।

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बढ़िया भुजिया नमकीन खुद खाओ और पैकेट पैक होने के बाद अपने बच्चों को भी खिलाओ , खबरदार किसी ने FSSAI को टैग करके फूड सेफ्टी की बात की तो...!

बढ़िया भुजिया नमकीन खुद खाओ और पैकेट पैक होने के बाद अपने बच्चों को भी खिलाओ , खबरदार किसी ने FSSAI को टैग करके फूड सेफ्टी की बात की तो...!

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बढ़िया स्वादिष्ट चिप्स तैयार किया जा रहा है , लेकिन कुछ हरामखोर अनहाइजेनिक का ज्ञान पेल रहे है। FSSAI वालों तुम ही बता दो सबको की हाइजीन जैसा कुछ नहीं होता सिर्फ जायका चटक होना चाहिए।

बढ़िया स्वादिष्ट चिप्स तैयार किया जा रहा है , लेकिन कुछ हरामखोर अनहाइजेनिक का ज्ञान पेल रहे है। FSSAI वालों तुम ही बता दो सबको की हाइजीन जैसा कुछ नहीं होता सिर्फ जायका चटक होना चाहिए।

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सारे शरीर पर केमिकल पोतकर ये फ्रॉड आग पानी खेलते रहते है , कभी बच्चों के छाती पर चढ़कर लोगो को मूर्ख बनाते है तो कभी झाग वाले दूध से नहाकर बनाते है। इन सब को एक एक करके जबतक जेल में नहीं डाला जाएगा ये मौत का खेल ऐसे ही चलता रहेगा।

सारे शरीर पर केमिकल पोतकर ये फ्रॉड आग पानी खेलते रहते है , कभी बच्चों के छाती पर चढ़कर लोगो को मूर्ख बनाते है तो कभी झाग वाले दूध से नहाकर बनाते है। इन सब को एक एक करके जबतक जेल में नहीं डाला जाएगा ये मौत का खेल ऐसे ही चलता रहेगा।

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तुरई जिसे पूर्वांचल में नेनुआ कहा जाता है , अब खेत नहीं, केमिकल लैब में उगाई जा रही है। पैसे के लालच में कुछ लोग सब्जी को जल्दी बड़ा और चमकीला बनाने के लिए इंजेक्शन ठूंस रहे हैं। ये वही जहरीले केमिकल हैं जो कैंसर , हार्मोनल असंतुलन और लिवर डैमेज का कारण बनते हैं।

तुरई जिसे पूर्वांचल में नेनुआ कहा जाता है , अब खेत नहीं, केमिकल लैब में उगाई जा रही है। पैसे के लालच में कुछ लोग सब्जी को जल्दी बड़ा और चमकीला बनाने के लिए इंजेक्शन ठूंस रहे हैं। ये वही जहरीले केमिकल हैं जो कैंसर , हार्मोनल असंतुलन और लिवर डैमेज का कारण बनते हैं।

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मुझे इस व्यक्ती पर रत्तीभर भी भरोसा नहीं है , लेकिन FSSAI वालों तुम लोग बताओ क्या ऐसे ही हाइजीनिक तरीके से मैंगो जूस, फ्रूटी तमाम ड्रिंक बनाई जाती है ?? ऐसे लोगों पर कार्यवाही तो नहीं कर पाते कम से कम जवाब तो दे ही सकते हो ना ..??

मुझे इस व्यक्ती पर रत्तीभर भी भरोसा नहीं है , लेकिन FSSAI वालों तुम लोग बताओ क्या ऐसे ही हाइजीनिक तरीके से मैंगो जूस, फ्रूटी तमाम ड्रिंक बनाई जाती है ?? ऐसे लोगों पर कार्यवाही तो नहीं कर पाते कम से कम जवाब तो दे ही सकते हो ना ..??

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यह सिर्फ़ एक पैकेट काजू का मामला नहीं है बल्कि यह पैकेज्ड फूड सिस्टम की सड़ी हुई सच्चाई है। DMart जैसे बड़े रिटेलर और Pro V जैसे ब्रांडेड प्रोडक्ट में कीड़े मिलना कोई दुर्घटना नहीं, यह क्वालिटी कंट्रोल की खुली नाकामी है। जब महंगे दाम लेकर बेचे जा रहे ड्राय फ्रूट्स में कीड़े निकलें तो यह साफ है कि स्टोरेज , सप्लाई चेन , पैकिंग और इन-हाउस चेक सब फेल हैं। ब्रांड नाम सिर्फ़ भरोसा बेचने के लिए है , जमीन पर निगरानी शून्य है। सबसे बड़ा सवाल FSSAI कर क्या रहा है? • क्या पैकिंग से पहले कोई वास्तविक इंस्पेक्शन होता है? • क्या गोदामों की नियमित जांच होती है या सिर्फ़ कागज़ों में? • क्या कंज़्यूमर शिकायतों पर सैंपल टेस्ट होते हैं या मामला दबा दिया जाता है? • एक्सपायरी से पहले ही खराब हो चुके प्रोडक्ट्स बाज़ार में कैसे पहुँच रहे हैं? • बड़े ब्रांड होने पर क्या कार्रवाई से छूट मिल जाती है?

यह सिर्फ़ एक पैकेट काजू का मामला नहीं है बल्कि यह पैकेज्ड फूड सिस्टम की सड़ी हुई सच्चाई है। DMart जैसे बड़े रिटेलर और Pro V जैसे ब्रांडेड प्रोडक्ट में कीड़े मिलना कोई दुर्घटना नहीं, यह क्वालिटी कंट्रोल की खुली नाकामी है। जब महंगे दाम लेकर बेचे जा रहे ड्राय फ्रूट्स में कीड़े निकलें तो यह साफ है कि स्टोरेज , सप्लाई चेन , पैकिंग और इन-हाउस चेक सब फेल हैं। ब्रांड नाम सिर्फ़ भरोसा बेचने के लिए है , जमीन पर निगरानी शून्य है। सबसे बड़ा सवाल FSSAI कर क्या रहा है? • क्या पैकिंग से पहले कोई वास्तविक इंस्पेक्शन होता है? • क्या गोदामों की नियमित जांच होती है या सिर्फ़ कागज़ों में? • क्या कंज़्यूमर शिकायतों पर सैंपल टेस्ट होते हैं या मामला दबा दिया जाता है? • एक्सपायरी से पहले ही खराब हो चुके प्रोडक्ट्स बाज़ार में कैसे पहुँच रहे हैं? • बड़े ब्रांड होने पर क्या कार्रवाई से छूट मिल जाती है?

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सेहत से खिलवाड़ मिलावट से भरे इस बाज़ार में हम खुद कैंसर, हार्ट अटैक और गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं।

सेहत से खिलवाड़ मिलावट से भरे इस बाज़ार में हम खुद कैंसर, हार्ट अटैक और गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं।

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ट्रेनों में अक्सर अनाधिकृत वेंडर चटपटा स्वाद लिए फिरते है , और लोग बड़े चाव से खाते है , कभी खीरा नमक तो कभी समोसा प्याज तो कभी चना मटर प्याज मिक्स। एक बार ध्यान से देख लो आपका जायका कहां तैयार हो रहा है।

ट्रेनों में अक्सर अनाधिकृत वेंडर चटपटा स्वाद लिए फिरते है , और लोग बड़े चाव से खाते है , कभी खीरा नमक तो कभी समोसा प्याज तो कभी चना मटर प्याज मिक्स। एक बार ध्यान से देख लो आपका जायका कहां तैयार हो रहा है।

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मोदी जी ने जहां से झालमुडी खाई थी , वो दुकानदार जरूर इसी वेंडर क्रंची हरा मटर , भुजिया नमकीन और औरामाइन वाला पीला भुना चना खरीदता होगा।

मोदी जी ने जहां से झालमुडी खाई थी , वो दुकानदार जरूर इसी वेंडर क्रंची हरा मटर , भुजिया नमकीन और औरामाइन वाला पीला भुना चना खरीदता होगा।

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जिस चिप्स को आप लोग बहुत चाव से खाते है , देखिए कैसे उसी में बीडी पीकर, अपने पैरो से चहिल रहा है और कच्छे की खुश्बू उसके पसीने का जायका और वाशिंग पाउडर की महक से एकदम क्रंची चिप्स तैयार किया जा रहा है।

जिस चिप्स को आप लोग बहुत चाव से खाते है , देखिए कैसे उसी में बीडी पीकर, अपने पैरो से चहिल रहा है और कच्छे की खुश्बू उसके पसीने का जायका और वाशिंग पाउडर की महक से एकदम क्रंची चिप्स तैयार किया जा रहा है।

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📍 हैदराबाद में 4 पैकेट केमिकल के साथ 200 kg कृत्रिम पके आम पकड़े गए। FSSAI वालों अगर अपना ध्यान FIR से हटाकर फेक फूड पर लगाओगे तो हर जिले राज्य से ऐसे जहरीले सामान बेचने वाले पकड़े जाएंगे।

📍 हैदराबाद में 4 पैकेट केमिकल के साथ 200 kg कृत्रिम पके आम पकड़े गए। FSSAI वालों अगर अपना ध्यान FIR से हटाकर फेक फूड पर लगाओगे तो हर जिले राज्य से ऐसे जहरीले सामान बेचने वाले पकड़े जाएंगे।

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हेलो डियर FSSAI जरा बताओ कि ये बंदा सब्जियों के साथ कौन सा खेल - खेल रहा है ? अगर AI वीडियो है तो ऐसे हजारों वीडियो इंस्टाग्राम पर पड़े है। सबको स्ट्राइक मारकर हटवाओ नहीं तो तुम्हारी नौकरी खा जाएंगे ये हरामखोर लोग।

हेलो डियर FSSAI जरा बताओ कि ये बंदा सब्जियों के साथ कौन सा खेल - खेल रहा है ? अगर AI वीडियो है तो ऐसे हजारों वीडियो इंस्टाग्राम पर पड़े है। सबको स्ट्राइक मारकर हटवाओ नहीं तो तुम्हारी नौकरी खा जाएंगे ये हरामखोर लोग।

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📍 मथुरा “डर के आगे जीत है” — यह लाइन सुनते ही सबको DEW याद आता है। लेकिन सच यह है कि अब डर के आगे मौत है। यूपी के मथुरा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने नकली DEW कोल्ड ड्रिंक का पूरा गंदा जखीरा पकड़ा है। खुली नालियों में मिलाया जा रहा था केमिकल , गंदे पानी से बनाई जा रही नकली ड्रिंक , बिना किसी हाइजीन , बिना किसी लाइसेंस , बिना किसी टेस्टिंग के। अब कुछ जरूरी सवाल ड्राई फ्रूट्स खाने वाले अधिकारियों से 👇 1. Food Safety Department हर बार छापा पड़ने तक सोया क्यों रहता है? नकली कोल्ड्रिंक फैक्टरी महीनों से चल रही थी — किसकी नाकामी थी? 2. FSSAI और जिला प्रशासन बाजार में बिकने वाले ड्रिंक्स की नियमित टेस्टिंग क्यों नहीं करते? क्या बच्चों और आम लोगों की सेहत की कोई कीमत नहीं? 3. उत्पाद में कौनसे केमिकल मिले? कौनसा सैंपल रिपोर्ट है? लोग ज़हर पी रहे थे या कुछ और? 4. कितने दुकानों पर यह नकली DEW पहुंच चुका था? कितने लोग इसे पी चुके हैं — क्या किसी की जांच की गई? 5. फैक्टरी चलाने वालों के खिलाफ कौनसी धाराएँ लगाई गईं? गिरफ्तारी हुई या फिर हमेशा की तरह “नोटिस जारी” बोलकर छोड़ दिया जाएगा? 6. ब्रांड कंपनियों का ट्रैकिंग सिस्टम इतना कमजोर क्यों है कि उनकी बोतलों की जगह नकली माल बाजार में घूम रहा है?

📍 मथुरा “डर के आगे जीत है” — यह लाइन सुनते ही सबको DEW याद आता है। लेकिन सच यह है कि अब डर के आगे मौत है। यूपी के मथुरा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने नकली DEW कोल्ड ड्रिंक का पूरा गंदा जखीरा पकड़ा है। खुली नालियों में मिलाया जा रहा था केमिकल , गंदे पानी से बनाई जा रही नकली ड्रिंक , बिना किसी हाइजीन , बिना किसी लाइसेंस , बिना किसी टेस्टिंग के। अब कुछ जरूरी सवाल ड्राई फ्रूट्स खाने वाले अधिकारियों से 👇 1. Food Safety Department हर बार छापा पड़ने तक सोया क्यों रहता है? नकली कोल्ड्रिंक फैक्टरी महीनों से चल रही थी — किसकी नाकामी थी? 2. FSSAI और जिला प्रशासन बाजार में बिकने वाले ड्रिंक्स की नियमित टेस्टिंग क्यों नहीं करते? क्या बच्चों और आम लोगों की सेहत की कोई कीमत नहीं? 3. उत्पाद में कौनसे केमिकल मिले? कौनसा सैंपल रिपोर्ट है? लोग ज़हर पी रहे थे या कुछ और? 4. कितने दुकानों पर यह नकली DEW पहुंच चुका था? कितने लोग इसे पी चुके हैं — क्या किसी की जांच की गई? 5. फैक्टरी चलाने वालों के खिलाफ कौनसी धाराएँ लगाई गईं? गिरफ्तारी हुई या फिर हमेशा की तरह “नोटिस जारी” बोलकर छोड़ दिया जाएगा? 6. ब्रांड कंपनियों का ट्रैकिंग सिस्टम इतना कमजोर क्यों है कि उनकी बोतलों की जगह नकली माल बाजार में घूम रहा है?

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लौकी-कद्दू में इंजेक्शन लगाकर बेचने वाले सीधे जनता के शरीर में कैंसर डाल रहे हैं। ऐसे ठेकेदार, मेडिकल स्टोर और खरीदारों की पूरी सूची बनाओ। खेतों और मंडियों में छापा , सैंपल लैब भेजो , दोषियों को जेल व भारी जुर्माना करो। नागरिक-हॉटलाइन जरूरी।

लौकी-कद्दू में इंजेक्शन लगाकर बेचने वाले सीधे जनता के शरीर में कैंसर डाल रहे हैं। ऐसे ठेकेदार, मेडिकल स्टोर और खरीदारों की पूरी सूची बनाओ। खेतों और मंडियों में छापा , सैंपल लैब भेजो , दोषियों को जेल व भारी जुर्माना करो। नागरिक-हॉटलाइन जरूरी।

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तरबूज में सुई लगाकर तरबूज को जल्दी तैयार किया जा रहा है , FSSAI वालों पहले इन केमिकलों को बैन करो उसके बाद जो लोग जानबूझकर ये काम कर रहे है , उन लोगों को पकड़कर जेल में डालो।

तरबूज में सुई लगाकर तरबूज को जल्दी तैयार किया जा रहा है , FSSAI वालों पहले इन केमिकलों को बैन करो उसके बाद जो लोग जानबूझकर ये काम कर रहे है , उन लोगों को पकड़कर जेल में डालो।

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अमूल के पैकेट के शुद्ध देशी घी के नाम पर डालडा घी बेचा जा रहा है। अब ये अमूल वालों की गलती है या फिर Blinkit वालों की? ख़ैर गलती जिसकी भी हो, आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। पूरे देश में नकली पनीर से लेकर इंजेक्शन वाली सब्ज़ियाँ बेची जा रही हैं, क्योंकि निगरानी एजेंसियाँ भांग खाकर सो रही हैं। अब सवाल और ज़्यादा गंभीर हैं— ब्रांड का नाम ढाल बन गया है, ज़िम्मेदारी किसकी है? ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म क्वालिटी चेक क्यों नहीं करते? FSSAI, राज्य की फूड सेफ्टी टीमें, छापे और सैंपल सिर्फ़ कागज़ों में क्यों? मिलावट पकड़ में आने के बाद भी सज़ा दिखती क्यों नहीं? क्या आम आदमी की सेहत इतनी सस्ती है कि उस पर रोज प्रयोग होंगे? ये लापरवाही नहीं , सिस्टमेटिक अपराध है। और जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी , थाली में ज़हर और बयानबाज़ी में “सब ठीक है” चलता रहेगा।

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एक महिला ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से पॉलिसी ली। किडनी इन्फेक्शन हुआ , तेज बुखार में कंपकंपी छूटने लगी , हालत बिगड़ी तो अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। लेकिन जब क्लेम लगाया गया तो जवाब मिला आप तो दवा से ठीक हो सकती थीं , एडमिट क्यों हुईं? अब सवाल ये है कि 👇 क्या बीमा कंपनी अब डॉक्टर भी बन गई है? क्या मरीज की हालत अस्पताल तय करेगा या इंश्योरेंस ऑफिस? क्या ICU में जाने से पहले कंपनी से अनुमति लेनी होगी कि “सर, क्या मैं सच में बीमार हूं?” पॉलिसी बेचते समय कहते हैं “कैशलेस, टेंशन फ्री।” और क्लेम के समय कहते हैं “आपको तो सिर्फ गोली खानी चाहिए थी।” तो फिर इंश्योरेंस किस बात का है? बीमारी कवर करने का या क्लेम रिजेक्ट करने का?

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