Meena Kotwal (मीना कोटवाल)'s banner
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)'s profile picture

Meena Kotwal (मीना कोटवाल)

@KotwalMeena282,346 subscribers

Founder @The_Mooknayak @TheMooknayakEng |Ex- BBC | Profiled in New York Times, DW, Le Figaro, AJ, VOA etc | Study @IIMC_India, @jmiu_official, https://t.co/o9cQpDL84y

Shorts

तनु प्रिया झा से रिपोर्टर पूछता है- आपके पिता ने आपके हसबैंड को क्यों मार दिया? जवाब देते हुए तनु प्रिय झा कहती हैं- "अंतर्जातीय विवाह, पता नहीं ब्राह्मण होने का कौन सा कीड़ा था उसके मन में...जो मेरे पति को मार दिया..."

तनु प्रिया झा से रिपोर्टर पूछता है- आपके पिता ने आपके हसबैंड को क्यों मार दिया? जवाब देते हुए तनु प्रिय झा कहती हैं- "अंतर्जातीय विवाह, पता नहीं ब्राह्मण होने का कौन सा कीड़ा था उसके मन में...जो मेरे पति को मार दिया..."

62,039 views

"बाल काटना नाई का धर्म नहीं, धंधा है. चमड़े की सिलाई करना मोची का धर्म नहीं, धंधा है. इसी प्रकार पूजा -पाठ करना ब्राह्मण का धर्म नहीं, धंधा है..." - महात्मा ज्योतिबा फुले

"बाल काटना नाई का धर्म नहीं, धंधा है. चमड़े की सिलाई करना मोची का धर्म नहीं, धंधा है. इसी प्रकार पूजा -पाठ करना ब्राह्मण का धर्म नहीं, धंधा है..." - महात्मा ज्योतिबा फुले

24,731 views

"शिक्षक की पिटाई से दलित छात्र की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती..." - यूपी: जौनपुर के सराय त्रिलोकी कम्पोजिट माध्यमिक स्कूल के शिक्षक ने दलित छात्र को कथित रूप से जातिसूचक शब्द कहते हुए बर्बरता से पिटाई की...!

"शिक्षक की पिटाई से दलित छात्र की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती..." - यूपी: जौनपुर के सराय त्रिलोकी कम्पोजिट माध्यमिक स्कूल के शिक्षक ने दलित छात्र को कथित रूप से जातिसूचक शब्द कहते हुए बर्बरता से पिटाई की...!

13,991 views

Videos

KotwalMeena's profile picture

*संक्षेप में* : अगर आपको हमारे काम/खबर से शिकायत है तो इसका तहेदिल से स्वागत है। मेरी निजी ज़िंदगी, पसंद-नापसंद आदि को लेकर मनगढ़ंत कहानियां/गपशप/प्रतिद्वंद्विता/निजी खुन्नस ना निकालें। आप सबसे गुजारिश है कि हमारे प्राइवेसी का ख्याल रखें, सोशल मीडिया पर यूं लिंचिंग/बदनाम/चरित्रहनन ना करें। हम महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि जो बीड़ा/काम हमने उठाया है, वो महत्वपूर्ण है। मैं अपने काम में बेहद व्यस्त हूं। एक नए प्रोजेक्ट और कुछ स्टोरी करने और करवाने में लगी हुई हूँ। इसलिए इसपर आगे कोई टिप्पणी नहीं करूंगी। सबूत के साथ आइए, सबका जवाब दूंगी, अफवाहों का कहां-कहां जवाब दूं? दोस्तों, जो भी मेरे निजी ज़िंदगी की धज्जियां उड़ा रहे हैं, उनके प्राइवेसी का भी मैं सम्मान करती हूं। एक पत्रकार होने के नाते मैंने सीखा है कि किसी की भी निजी जिंदगी को सार्वजनिक मंच पर डिस्कस करना अनैतिक होता है। इस बात को मेरे साथ काम करने वाले बेहतर जानते हैं, नहीं तो कहानियों हमारे पास भी बहुत हैं। मेरी टीम में किसी भी बात पर अपनी राय रखने की सबको आज़ादी है और उस विषय पर कई बार एक बहस का माहौल भी बनता है। ये हर एक मीडिया हाऊस में होता है लेकिन जिनके पास टीम ही नहीं वो शायद इस बात को ना समझ पाए। मेरे पार्टनर/हमसफ़र मेरी लाइफ़ और मेरे प्रोफ़ेशन दोनों का पार्ट हैं, आपको दिक़्क़त है तो ये आपकी समस्या है। खैरे, अच्छा लगता कि आप मेरे काम को कॉम्पीटिशन देते लेकिन वो मेहनत आपसे हो नहीं पा रही, इसलिए जाने दीजिए आपकी व्यक्तिगत खुन्नस का कारण समझ सकती हूँ। एक बात और मूकनायक बाबा साहेब की महान विरासत है और हम सिर्फ़ उसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी वजह से तमाम लोगों की ज़िंदगी में बदलाव आया है। ये आप मूकनायक की अंग्रजी-हिंदी वेबसाइट और यू-ट्यूब पर जाकर देख सकते हैं कि कैसे किसी गाँव में मूकनायक की वजह से बिजली पहुँचती हैं जहां दलितों की आबादी है, तो कैसे दिल्ली कैंट की एक नौ साल की दलित बच्ची के साथ गैंगरेप मामले में इंसाफ़ की आवाज़ उठ जाती है तो कहीं दलित-आदिवासियों के लिए कई करोड़ों का बजट भी सिर्फ़ मूकनायक की ख़बर की वजह से पास हो पाता है। ऐसी ही तमाम खबरें है, ये तो सिर्फ कुछ उदाहरण दिए हैं। इतना ही नहीं द मूकनायक ने दर्जनों को रोज़गार दिया है और उनका घर-परिवार चल रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स से लेकर अल-जजीरा और द वॉयस ऑफ अमेरिका सब जगह मैंने यही बात कही है कि बाबा साहेब की वजह से ही मैं यह सब कर पा रही हूँ। चाहे कोलंबिया यूनिवर्सिटी हो या फिर जेएनयू/दिल्ली यूनिवर्सिटी बाबा साहेब के नाम के साथ ही संबोधन का शुरूआत करती हूँ, लेकिन दुखद कि आज मुझे यह भी साबित करना पड़ रहा है। इसके साथ ही एक जानकारी दे दूँ, अमेरिका जाने से इतना ना बौखलाइए। इसी साल मैं और मेरी टीम के साथी यूरोप जा रहे हैं, फिर अमरीका जाने वाले हैं, तो थोड़ी नफ़रत और जलन तब तक के लिए भी बचा कर रखिए। दोस्तों, डॉ. आंबेडकर सबके हैं, उन्हें सीमित करने वाले मानवता के दुश्मन हैं। जातिवादी-पुरुषवादी समाज ने अपनी घर की महिलाओं को भी आगे नहीं बढ़ने दिया, जिन्होंने अपनी घर की महिलाओं को बाहर नहीं निकलने दिया, उन्हें सीमित किया वे आज स्त्रीवादी/आंबेडकरवादी बन रहे हैं, क्या ये खिलवाड़ आप समझ नहीं पा रहे? मेरी प्यारी महिलाओं जातिवादी-पितृसत्ता के चंगुल में फँसकर ख़ुद को इस्तेमाल ना होने दें, ये हमें एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर सब बर्बाद कर देंगे। बेहद मेहनत और दिन-रात एक कर हमने यह मुक़ाम हासिल किया है। व्यक्तिगत लड़ाई बनाकर, इसे एक झटके में बर्बाद ना करना। बाबा साहेब ने कहा था, शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो…बस इसी पर चलना, कभी भी किसी को नीचे ना धकेलना, एकता में ही बल है। याद रखना कि हमें अपनी लाइन बड़ी खींचनी है, अपनों की लाइन को मिटाना नहीं है। शुक्रिया, जय भीम, जय संविधान, जय सावित्री…

Meena Kotwal (मीना कोटवाल)

253,053 views • 3 years ago