
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)
@KotwalMeena • 282,346 subscribers
Founder @The_Mooknayak @TheMooknayakEng |Ex- BBC | Profiled in New York Times, DW, Le Figaro, AJ, VOA etc | Study @IIMC_India, @jmiu_official, https://t.co/o9cQpDL84y
Shorts
Videos

"मुझे मुल्ली कहा गया, ये पूरे समाज की महिलाओं का अपमान है" ये News24 वाले क्या चला रहे हैं? Manak Gupta जी इतना भी हिंदू-मुस्लिम करना ठीक नहीं है, नफरत और TRP के नशे से बाहर निकलिए, कुछ जिम्मेवारी नाम की चीज है भी या नहीं? कुछ भी चला रहे हैं अब तो आपलोग? Maithili Thakur ने भला ऐसा बोला कब? हद है...
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)522,441 просмотров • 8 месяцев назад

कुछ वक्त पहले इन्होंने कहा था- 'जो राम को नहीं भजता, वह च$#र' इसलिए इन्हें अयोध्या नहीं बुलाया गया है! कायदे से तो इनपर SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी और जेल भी लेकिन यहां मनु विधान जीत गया! खैर अब इन्हें किनारा किया जा रहा है क्योंकि इन्होंने दलितों पर बेहद ही अमर्यादित बयान दिया था!
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)147,179 просмотров • 6 месяцев назад

*संक्षेप में* : अगर आपको हमारे काम/खबर से शिकायत है तो इसका तहेदिल से स्वागत है। मेरी निजी ज़िंदगी, पसंद-नापसंद आदि को लेकर मनगढ़ंत कहानियां/गपशप/प्रतिद्वंद्विता/निजी खुन्नस ना निकालें। आप सबसे गुजारिश है कि हमारे प्राइवेसी का ख्याल रखें, सोशल मीडिया पर यूं लिंचिंग/बदनाम/चरित्रहनन ना करें। हम महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि जो बीड़ा/काम हमने उठाया है, वो महत्वपूर्ण है। मैं अपने काम में बेहद व्यस्त हूं। एक नए प्रोजेक्ट और कुछ स्टोरी करने और करवाने में लगी हुई हूँ। इसलिए इसपर आगे कोई टिप्पणी नहीं करूंगी। सबूत के साथ आइए, सबका जवाब दूंगी, अफवाहों का कहां-कहां जवाब दूं? दोस्तों, जो भी मेरे निजी ज़िंदगी की धज्जियां उड़ा रहे हैं, उनके प्राइवेसी का भी मैं सम्मान करती हूं। एक पत्रकार होने के नाते मैंने सीखा है कि किसी की भी निजी जिंदगी को सार्वजनिक मंच पर डिस्कस करना अनैतिक होता है। इस बात को मेरे साथ काम करने वाले बेहतर जानते हैं, नहीं तो कहानियों हमारे पास भी बहुत हैं। मेरी टीम में किसी भी बात पर अपनी राय रखने की सबको आज़ादी है और उस विषय पर कई बार एक बहस का माहौल भी बनता है। ये हर एक मीडिया हाऊस में होता है लेकिन जिनके पास टीम ही नहीं वो शायद इस बात को ना समझ पाए। मेरे पार्टनर/हमसफ़र मेरी लाइफ़ और मेरे प्रोफ़ेशन दोनों का पार्ट हैं, आपको दिक़्क़त है तो ये आपकी समस्या है। खैरे, अच्छा लगता कि आप मेरे काम को कॉम्पीटिशन देते लेकिन वो मेहनत आपसे हो नहीं पा रही, इसलिए जाने दीजिए आपकी व्यक्तिगत खुन्नस का कारण समझ सकती हूँ। एक बात और मूकनायक बाबा साहेब की महान विरासत है और हम सिर्फ़ उसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसकी वजह से तमाम लोगों की ज़िंदगी में बदलाव आया है। ये आप मूकनायक की अंग्रजी-हिंदी वेबसाइट और यू-ट्यूब पर जाकर देख सकते हैं कि कैसे किसी गाँव में मूकनायक की वजह से बिजली पहुँचती हैं जहां दलितों की आबादी है, तो कैसे दिल्ली कैंट की एक नौ साल की दलित बच्ची के साथ गैंगरेप मामले में इंसाफ़ की आवाज़ उठ जाती है तो कहीं दलित-आदिवासियों के लिए कई करोड़ों का बजट भी सिर्फ़ मूकनायक की ख़बर की वजह से पास हो पाता है। ऐसी ही तमाम खबरें है, ये तो सिर्फ कुछ उदाहरण दिए हैं। इतना ही नहीं द मूकनायक ने दर्जनों को रोज़गार दिया है और उनका घर-परिवार चल रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स से लेकर अल-जजीरा और द वॉयस ऑफ अमेरिका सब जगह मैंने यही बात कही है कि बाबा साहेब की वजह से ही मैं यह सब कर पा रही हूँ। चाहे कोलंबिया यूनिवर्सिटी हो या फिर जेएनयू/दिल्ली यूनिवर्सिटी बाबा साहेब के नाम के साथ ही संबोधन का शुरूआत करती हूँ, लेकिन दुखद कि आज मुझे यह भी साबित करना पड़ रहा है। इसके साथ ही एक जानकारी दे दूँ, अमेरिका जाने से इतना ना बौखलाइए। इसी साल मैं और मेरी टीम के साथी यूरोप जा रहे हैं, फिर अमरीका जाने वाले हैं, तो थोड़ी नफ़रत और जलन तब तक के लिए भी बचा कर रखिए। दोस्तों, डॉ. आंबेडकर सबके हैं, उन्हें सीमित करने वाले मानवता के दुश्मन हैं। जातिवादी-पुरुषवादी समाज ने अपनी घर की महिलाओं को भी आगे नहीं बढ़ने दिया, जिन्होंने अपनी घर की महिलाओं को बाहर नहीं निकलने दिया, उन्हें सीमित किया वे आज स्त्रीवादी/आंबेडकरवादी बन रहे हैं, क्या ये खिलवाड़ आप समझ नहीं पा रहे? मेरी प्यारी महिलाओं जातिवादी-पितृसत्ता के चंगुल में फँसकर ख़ुद को इस्तेमाल ना होने दें, ये हमें एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर सब बर्बाद कर देंगे। बेहद मेहनत और दिन-रात एक कर हमने यह मुक़ाम हासिल किया है। व्यक्तिगत लड़ाई बनाकर, इसे एक झटके में बर्बाद ना करना। बाबा साहेब ने कहा था, शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो…बस इसी पर चलना, कभी भी किसी को नीचे ना धकेलना, एकता में ही बल है। याद रखना कि हमें अपनी लाइन बड़ी खींचनी है, अपनों की लाइन को मिटाना नहीं है। शुक्रिया, जय भीम, जय संविधान, जय सावित्री…
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)253,053 просмотров • 3 лет назад

"आप त्रिवेदी हैं ना, तो आप बेहतर जानते होंगे कि अशुद्ध पानी को शुद्ध कैसे किया जाए..." फिर बाबा साहेब आंबेडकर ने पानी शुद्ध करने का मंत्र संस्कृत में सुनाया... यह वीडियो झूठे रामभद्राचार्य के लिए भी जिसने Shubhankar Mishra के पॉडकास्ट में कहा था कि बाबा साहेब को संस्कृत नहीं आती थी और टिक-टॉकर रीलबाज पत्रकार बस जी, जी, जी करता रहा!
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)53,529 просмотров • 9 месяцев назад

मामला कुछ पुराना है, लेकिन सोचिए हम कैसे समाज में रह रहे हैं- बेटी ने अपनी मर्जी से अंतर्जातीय विवाह कर लिया तो नाराज पिता ने बेटी का पिंडदान कर दिया! शोक पत्रिका भेजकर मृत्यु भोज के लिए बुलाया, परिजनों ने मुंडन भी करवाया! फिर किस मुंह से कहते हो कि 'यहां नारी की पूजा होती है?'
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)28,676 просмотров • 9 месяцев назад

अच्छा, तो छठ में कोई जातिवाद ही नहीं होता है! वाह, छठ तो भारतीय समाज नहीं बल्कि क्रांतिकारी लोग मनाते हैं, इसलिए जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होता, क्यों? बिहार में जहां जातियों के नाम पर टोले/मोहल्ले बने हुए हैं, वहां जातिवाद ना हो! सच दिखाने का साहस है तो सुनिए और देखिए भी👇🏾 डोम समाज से आने वाले आनंद मलिक बताते हैं कि हमारा बच्चा जब छठ स्थल (पूजा स्थल, बिहार का लोकप्रिय पर्व) पर बड़का जाति के पंडाल या घाट में जाता है तो वो लोग भगा देता है, कहते हैं कि यहां क्यों आए हो? स्कूलों में भी हमारे बच्चों को टीचर भगा देते हैं. हम लोगों के साथ छुआछूत किया जाता है. 1/1
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)21,512 просмотров • 7 месяцев назад

"करेंगे मुकाबला मेरिट से भी, मगर रेस की स्टार्टिंग लाइन एक होनी चाहिए सब के लिए..." "अपनी मां से कहो कि एयर कंडीशन से निकले और हमारी मां के साथ घर-घर जाकर झाड़ू-बर्तन करे...अपनी बहन से कहो कि रोज सवेरे आँख खुलते ही मुहल्ले की म्युनिसिपालिटी की इकलौते नल से एक घड़ा पानी भर कर लाए...आओ हमारे साथ हमारी जिंदगी चखो, फिर बात करो मेरिट की...." #आरक्षण #DalitLivesMatter
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)20,692 просмотров • 9 месяцев назад

इंस्टाग्राम पर यह वीडियो 'बागेश्वर के पागल' नामक हैंडल से अपलोड किया गया है!
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)16,196 просмотров • 7 месяцев назад

जनकवि रमाशंकर विद्रोही जी की कविता- "मेरा सर फोड़ दो, मेरी कमर तोड़ दो, पर ये न कहो कि अपना हक़ छोड़ दो..."
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)10,994 просмотров • 7 месяцев назад

चंद्रशेखर आजाद ने क्यों दी आकाश आनंद को भीम आर्मी ज्वाइन करने की सलाह? प्राइवेट नौकरी में कैसे मिलेगा रिजर्वेशन? क्या BSP का विकल्प बनकर उभर रहा है ASP? जीत के बाद Chandra Shekhar Aazad ने बताई आगे की पूरी प्लानिंग, BSP के सिकुड़ने पर कही बड़ी बात! Chandra Shekhar Aazad की Meena Kotwal (मीना कोटवाल) के साथ खास बातचीत The Mooknayak पर...
Meena Kotwal (मीना कोटवाल)23,572 просмотров • 2 лет назад
4:05
Sensitive content
This media may contain sensitive content.