
Kuldeep Mishra / sardar
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Practitioner, Tauism | Podcast: Teen Taal | Executive Editor @TheLallantop
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राजनीतिक नौसिखियों और शातिर चालबाज़ों के लिए: - निजी नहीं, भारत मंडपम में हुआ सार्वजनिक कार्यक्रम था जिसमें डिजिटल दुनिया के 250 से ज़्यादा पत्रकार शामिल थे. - विभिन्न दलों के नेताओं से पत्रकारों की मुलाक़ात और चाय-नाश्ता उतना आम है, जितना सोशल मीडिया पर किसी की सुपारी देने और लेने का चलन. - पत्रकार और नेता इसी तरह नोट्स एक्सचेंज करते हैं. लोकतंत्र के दो स्तंभ संवाद करते हैं. ये बंद कमरे का संवाद नहीं था. - इस तरह के कार्यक्रम कांग्रेस समेत दूसरी पार्टियां भी करती रही हैं. संपादक उसमें भी जाते रहे हैं. - इस भ्रम में न रहें कि आपके चहेते पत्रकार किसी पार्टी/नेता के सार्वजनिक या पारिवारिक कार्यक्रमों में नहीं जाते.
Kuldeep Mishra / sardar420,986 次观看 • 1 年前

हैरानी की बात है कि दूसरी भगदड़ के समय कुछ पुलिसकर्मी घटनास्थल पर मौजूद थे लेकिन DIG वैभव कृष्ण कह रहे हैं कि उन्हें झूंसी भगदड़ की सूचना ही नहीं मिली. उनके शब्द हैं, ‘किसी ने पुलिस को रिपोर्ट नहीं किया.’ ये वीडियो घटना के समय का है, जब ये पुलिसकर्मी वरिष्ठ अधिकारियों से फोर्स भेजने की अपील कर रही है. क्या ये बात काबिल-ए-यक़ीन है कि पुलिस के आला अधिकारियों को उनके स्टाफ ने ही नहीं बताया? किसी सीसीटीवी कैमरा में वहाँ की स्थिति नहीं दिखी? जब पुलिस-प्रशासन को सूचना नहीं थी तो वहाँ मौजूद चप्पलों और कपड़ों का अंबार कौन साफ़ करवा रहा था?
Kuldeep Mishra / sardar144,058 次观看 • 1 年前
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