
🧵 चरखा । CHARKHA 🧵
@laryamster • 3,591 subscribers
जय जवान - जय किसान - जय संविधान ✊ पढ़ा-लिखा
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मैं पिछले 10 साल से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हूँ। मैंने चैन्नई में 1 to 1 ट्यूशन पढ़ाया और बाद में दो बड़ी EdTech कंपनियों के साथ काम किया। और अभी ऑस्ट्रेलिया में SEHS, TAASS की ऑनलाइन कक्षाएँ लेता हूँ। इसके पहले, मैंने भी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई की है, लेकिन इस विडियो जैसी घटना पहले कभी नहीं देखी। हमें अक्सर यह सुनने को मिलता था और हम बोलते भी है कि, "तुम्हारे माता-पिता कितनी मेहनत करके तुम्हारी फीस भरते हैं, इसलिए पढ़ाई पर ध्यान दो और उनका नाम रोशन करो।" यह बात सामान्य है और जिम्मेदारी का अहसास कराती है। लेकिन जो वीडियो कल वायरल हुआ, उसका संबंध सीधे मेरे पेशे की नैतिकता से है, तो इस पर मैं बोलूँगा और वो भी कठोर शब्दों में । सुन राजवीर, जो छात्र हमारे पास आते हैं, वे ज्ञान दक्षिणा में लेने नहीं आते। वे अपने ग्राहक हैं, जो ज्ञान प्राप्त करने और सीट पर बैठने की फीस भरते हैं। अगर कोई अनुशासन का उल्लंघन कर रहा है, तो तेरा कोई अधिकार नहीं बनता कि तुम उनके परिवार के बारे में ऐसी असभ्य भाषा का प्रयोग करो। "तुम्हारे माँ-बाप के लक्षण यहाँ मत दिखाओ," "मंगतों! लाख रुपए देकर भेज दिया, कुसंस्कारी, सीटों के लिए लड़ते हो।" ऐसा ही कुछ बोल रहा ना ? कुसंस्कारी? जिस भाषा का इस्तेमाल तुमने उस व्यक्ति विशेष के घर वालों के लिए किया, वह किसके संस्कार दिखाता है? इसमें तुम किसके लक्षण दिखा रहा ? और मंगता किसे कह रहा है ? जिसने लाखों रुपए देकर तुम्हारी फीस भरी है, वह ग्राहक है, जिसने यह उम्मीद की है कि वह शांति से पढ़ाई करेगा और एक दिन RAS या RPS बनेगा। लेकिन इतनी मोटी फीस देने के बाद भी उसे सीट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, और ऊपर से एक बदतमीज़ शिक्षक की घटिया भाषा भी झेलनी पड़ रही है। इसका ज़िम्मेदार आखिर कौन है? यह तो सीधा-सीधा उस संस्थान की व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा जो छात्रों से मोटी रकम लेकर सुविधाएँ देने में असमर्थ है। अगर तुम्हारे पास सुविधाएँ नहीं हैं, तो इतनी संख्या में छात्रों को दाखिला क्यों लेते हो? जब कक्षाएँ भेड़-बकरियों की तरह भरोगे तो सीट की लड़ाई होना स्वाभाविक है। अगर कोई दुकानदार नक़ली सामान बेचेगा तो ग्राहक तो बोलेगा ही । जिस पैसे का घमण्ड तुम्हारे सिर चढ़ कर बोल रहा और जिस पैसे से गाड़ियाँ ख़रीद कर तुम मनोहर कहानियाँ सुनाते ये उन्हीं कुसंस्कारीयों के पैसे है । अब कुछेक स्वजातीय चमचे या मुफ्त के PR एजेंट इस बदतमीज़ के समर्थन में सफ़ाई देने आएँगे , उनसे मेरा यही कहना है कि यह दुकानदार तुम्हारे घर पर भी गेहूँ की बोरी नहीं रखकर जाएगा। Prince jatt Pooja Gunnu जाटणी Ram Kishore Dogiyal 𝙈𝙪𝙧𝙩𝙞 𝙉𝙖𝙞𝙣 Saroj Chaudhary Rajesh khora @DrRamSinghSamo Dr. Ramgopal ( jat)
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