
𝒎.
@Madhunita_ • 1,253 subscribers
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सदा न संग सहेलियाँ,सदा न राजा देश सदा न जुग में जीवणा,सदा न काला केश सदा न फूलै केतकी,सदा न सावन होय सदा न विपदा रह सके,सदा न सुख भी होय सदा न मौज बसन्त री,सदा न ग्रीष्म भाण सदा न जोवन थिर रहे,सदा न संपत माण सदा न काहू की रही,गल प्रीतम की बांह ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई,तरवर की सी छाँह।
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