
Mahmud
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एक वायरल वीडियो में एक गरीब पिता अपने मृत बच्चे को कंधे पर उठाकर अस्पताल से घर लौटता दिख रहा है। उसके पास न स्ट्रेचर मिला न एंबुलेंस। बच्चे को कंधे पर लेकर रोते हुए उस पिता का दर्द दिल दहला देने वाला है। अगर एक गरीब परिवार को अपने बच्चे का शव ले जाने तक की सुविधा नहीं मिलती तो फिर विकास और अच्छे दिनों के दावों का क्या मतलब है? भक्तों से सवाल है इस दर्द पर भी कुछ कहेंगे? Grok पता करो ये कहां का वीडियो है और कब का है??
Mahmud311,944 просмотров • 22 дней назад

आजकल बच्चे का जन्म नहीं होता सीधा बच्चे का बाप पैदा होता है। छोटा पटाखा बड़ा धमाका। खुद ही देखिए और कमेंट्स कीजिए।
Mahmud420,874 просмотров • 1 год назад

हीरो फिल्मी नहीं असली होते हैं। ना यूनिफॉर्म ना कैमरा बस इंसानियत और तुरंत फैसला यही असली हीरो हैं। केरल के कन्नूर में एक छोटी बच्ची साइकिल चलाते हुए च्युइंग गम चबा रही थी। अचानक गम गले में अटक गया सांस रुकने लगी चेहरा नीला पड़ने लगा। उसी वक्त सड़क किनारे खड़े कुछ युवक उसकी मदद को दौड़े। एक युवक ने तुरंत समझदारी दिखाते हुए बच्ची की पीठ दबाई बस सेकंडों में गम बाहर निकल आया और उसकी जान बच गई। सलाम उस सूझबूझ को जिसने एक मासूम की जिंदगी लौटाई। आपके हिसाब से हीरो का असली मतलब क्या है फिल्मों का पर्दा या ऐसे रोजमर्रा के गुमनाम लोग?
Mahmud336,193 просмотров • 11 месяцев назад

रिल्स के पीछे भागते भागते लोग अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं। कुछ सेकंड का वायरल वीडियो कभी भी आपकी पूरी जिंदगी से बड़ा नहीं हो सकता। सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। आपके लिए ज्यादा ज़रूरी क्या है लाइक्स और व्यूज या जिन्दगी और सुरक्षा? Disclaimer: This video may disturb you
Mahmud228,345 просмотров • 1 год назад

चढ़ाई पे चलते वक्त जब सामने लोडेड गाड़ी हो तो दूरी बनाके चले। एक सेकंड की जल्दबाज़ी ज़िंदगी भर का अफसोस बन सकती है।
Mahmud253,191 просмотров • 1 год назад

इज्जत बचाने के नाम पर इंसानियत को मार देना ये कौन सी गैरत है? क्या हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां मर्द की इज्जत बहन बेटी की जान लेने से बच जाता है? माना उन्नीस साल की लड़की के कदम बहक गए थे पर बाप ने खुलेआम हाथ बांधकर नहर में धकेल दिया। वीडियो बनाकर खुद अपने व्हाट्सएप पर डाला खुद को गैरतमंद साबित करने के लिए। और उधर मां चिल्लाती रही मेरी बेटी मेरी बेटी को बचाओ। उसको तैरना नहीं आता बचाओ उसको। मैं भी अपनी बच्ची के साथ जाना चाहती हूं। पर अफसोस कोई बचाने नहीं आया। पर अगर इसी उम्र के बेटे के कदम बहक जाते तो क्या उसके हिस्से में भी ऐसी दर्दनाक मौत दिया जाता???? इज्जत बचाने के नाम पर इंसानियत को मार देना ये कौन सी गैरत है? क्या हमारा समाज इज्जत के नाम पर हत्या को जायज ठहरा चुका है? इज्जत सिर्फ पुरुषों के लिए अपराध से ऊपर है?
Mahmud71,096 просмотров • 11 месяцев назад
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