
Vijender Chauhan
@masijeevi • 71,670 subscribers
Educator, Interviewer, Motivational Speaker, Media Analyst
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जब छात्र सड़कों पर अपने हक के लिए प्रदर्शन कर रहे हों, तब मीडिया का काम सत्ता से कठिन सवाल पूछना है, न कि सत्ता के लिए सवालों को आसान बनाना। NEET जैसे मुद्दों पर लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर हो, तो कैमरे छात्रों की आवाज दिखाएँगे या सिर्फ़ सरकार का पक्ष? अगर पत्रकारिता सत्ता से सवाल नहीं पूछेगी, तो फिर सवाल कौन पूछेगा? #Journalism #Media #StudentProtest #JantarMantar #NEET #GodiMedia
Vijender Chauhan126,692 Aufrufe • vor 4 Tagen

लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकार का काम है और जवाब देना सत्ता की ज़िम्मेदारी। लेकिन अगर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री unscripted press conferences से बचते हुए सिर्फ चुनिंदा मंचों, तय सवालों और नियंत्रित माहौल में ही दिखाई दें, तो बहस सिर्फ़ एक नेता की नहीं, लोकतांत्रिक जवाबदेही की भी होती है। लोकतंत्र में सबसे मजबूत नेता वही होता है, जो सबसे कठिन सवालों का सामना कर सके। #Modi #NarendraModi #PressFreedom #MediaFreedom #Journalism #Democracy #Accountability #FreePress #India #Politics
Vijender Chauhan53,231 Aufrufe • vor 15 Tagen

गरीबी की परिभाषा भी अजब है। ₹8 लाख कमाने वाला OBC में "क्रीमी लेयर" हो जाता है, लेकिन वही ₹8 लाख EWS में "आर्थिक रूप से कमजोर" कहलाता है। सवाल किसी उम्मीदवार की योग्यता पर नहीं है। सवाल यह है कि अगर IIT, MNC और महंगी कोचिंग तक पहुँच रखने वाले भी EWS हैं, तो फिर असली गरीब कहाँ है? कहीं ऐसा तो नहीं कि हमने गरीबी की परिभाषा इतनी फैला दी कि गरीब ही उसमें गुम हो गया? #EWS #UPSC #SocialJustice
Vijender Chauhan88,532 Aufrufe • vor 1 Monat

आरक्षण का विरोध करने वाले कहते हैं, "योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते।" लेकिन जब योग्य उम्मीदवार मौजूद हों और फिर भी आरक्षित सीटों को "Not Found Suitable (NFS)" बताकर खाली छोड़ दिया जाए, तो सवाल मेरिट पर नहीं, सिस्टम पर उठता है। क्या NFS प्रतिनिधित्व रोकने का नया संस्थागत हथियार बनता जा रहा है? सवाल पूछना जरूरी है। #Reservation #NFS #SocialJustice #HigherEducation #PhD #Representation
Vijender Chauhan44,204 Aufrufe • vor 24 Tagen

अगर फ़ैसले कानून और सबूत से नहीं, बल्कि जज के दलित, मुस्लिम या महिला होने के चश्मे से पढ़े जाने लगें, तो ख़तरा किसी एक जज को नहीं, पूरी न्यायपालिका को होता है। सवाल सिर्फ एक फ़ैसले का नहीं है। सवाल यह है कि भारत में फ़ैसले संविधान से तय होंगे या पहचान की राजनीति से? #Judiciary #RuleOfLaw #ConstitutionOfIndia #JudicialIndependence #Justice #IndianJudiciary #Democracy #Constitution
Vijender Chauhan17,957 Aufrufe • vor 19 Tagen

वैसे कुछ स्टूडेंट्स को दो बार समझाने से भी समझ नहीं आता 🙂 #Algorithmbias
Vijender Chauhan92,289 Aufrufe • vor 6 Monaten

₹3.5 लाख करोड़ का कोचिंग बाज़ार सिर्फ एक उद्योग नहीं, शिक्षा व्यवस्था की असफलता का प्रमाण है। जब नौकरी का सपना स्कूल और विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि कोचिंग संस्थान तय करने लगें तो समझ लीजिए शिक्षा नहीं, परीक्षाओं का व्यापार चल रहा है। युवाओं का भविष्य अब सीखने से नहीं, फीस भरने की क्षमता से तय होने लगा है। #EducationCrisis #ExamIndustry #CoachingCulture #EducationReform #YouthOfIndia #SystemFailure #UPSC #NEET #JEE #IndianEducation #EducationForAll #StudentsNotCustomers #SaveEducation Rahul Gandhi
Vijender Chauhan21,158 Aufrufe • vor 1 Monat

NEET UG scam 2024 highlights a deep-rooted issue in our education system. Such scams erode the faith of our youth in the integrity of the system. It’s time for comprehensive reforms to ensure transparency and fairness. #NEETScam #EducationReform #YouthTrust
Vijender Chauhan253,681 Aufrufe • vor 2 Jahren

अमित शाह के अंबेडकर अंबेडकर अंबेडकर प्रलाप में अर्थ से भी ज़्यादा पकड़ने की बात टोन है और कोफ़्त है. सबसे अहम बात है कि बात अब खुलकर सामने आ गई है. चुनाव ब्राह्मणवादी “सात जन्म के स्वर्ग” और अंबेडकर अंबेडकर…की बाइनरी के बीच है- आप चुन लीजिए अब इससे ज़्यादा खुलकर नहीं खेल सकते वो. Dilip Mandal तो चुन चुके आप कब चुनेंगे ?
Vijender Chauhan196,227 Aufrufe • vor 1 Jahr

क्या मीडिया आज भी सत्ता से सवाल पूछ रहा है, या सिर्फ़ तयशुदा नैरेटिव्स को आगे बढ़ा रहा है? नेहरू बनाम मोदी की बहस बार-बार क्यों लौटती है? क्या यह इतिहास को समझने की कोशिश है, या जनता की स्मृति और सोच को एक खास दिशा देने का प्रयास? इस चर्चा में मीडिया, सत्ता, कॉरपोरेट हितों और जनमत के जटिल रिश्तों पर बात की गई है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया है कि लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका क्या सिर्फ़ दर्शक की है, या फिर सवाल पूछने वाले सक्रिय नागरिक की? लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि उन नागरिकों से चलता है जो सुनते हैं, सोचते हैं और हर दावे को परखते हैं। देखिए, सोचिए और अपनी राय स्वयं बनाइए। #Media #Journalism #PressFreedom #Democracy #Narrative #PublicMemory #CriticalThinking #IndianMedia #Politics #History #Nehru
Vijender Chauhan23,915 Aufrufe • vor 1 Monat

"जब आखिरी पेड़ काट दिया जाएगा, आखिरी नदी जहरीली हो जाएगी, तब इंसान समझेगा कि पैसा खाया नहीं जा सकता।" और शायद इसी सवाल के बीच खड़ा है Google का 15 बिलियन डॉलर वाला Vizag AI Project। AI और विकास के नाम पर इसे भविष्य की बड़ी छलांग बताया जा रहा है। लेकिन अगर पानी, ऊर्जा और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को नज़रअंदाज किया गया, तो यह प्रोजेक्ट भविष्य का "Environmental और Economic Disaster" भी बन सकता है। सवाल AI का नहीं, विकास के उस मॉडल का है जिसमें मुनाफे और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। #Google #AI #Environment #ClimateCrisis #WaterCrisis #Development #India #DataCenter
Vijender Chauhan20,817 Aufrufe • vor 1 Monat
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35 दलित परिवार गाँव छोड़ रहे हैं। लेकिन असली सवाल है ,उन्हें छोड़ना क्यों पड़ रहा है? 75 साल बाद भी अगर सम्मान और सुरक्षा पाने के लिए लोगों को अपना घर छोड़ना पड़े, तो यह सिर्फ़ सामाजिक भेदभाव नहीं, संविधान से ज़्यादा जाति की ताकत और सिस्टम की नाकामी की कहानी है। #DalitRights #CasteDiscrimination #SocialJustice #equality
Vijender Chauhan10,202 Aufrufe • vor 1 Monat