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Meenakshi Kandwal मीनाक्षी कंडवाल

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Executive Editor NDTV India | Anchor 10pm Kacchari | Writes about Hill States Uttarakhand, Himachal, J&K, NE | Ex- AAJTAK, TIMES NOW, STAR NEWS, INDIA TV |

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पीएम संसद में पूछ रहे हैं की “नेहरू” सरनेम रखने में क्या दिक़्क़त है… लेकिन इसी वक्त उत्तराखंड की राजधानी दून में जिन परिवारों ने पर्वतों के अपने घर-खेत-मवेशी बेचकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को कोचिंग कराई, उनके बच्चे सड़क पर है। क्योंकि नक़लमाफिया आउट ऑफ़ कंट्रोल है।

पीएम संसद में पूछ रहे हैं की “नेहरू” सरनेम रखने में क्या दिक़्क़त है… लेकिन इसी वक्त उत्तराखंड की राजधानी दून में जिन परिवारों ने पर्वतों के अपने घर-खेत-मवेशी बेचकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को कोचिंग कराई, उनके बच्चे सड़क पर है। क्योंकि नक़लमाफिया आउट ऑफ़ कंट्रोल है।

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एग्जिट पोल और चुनाव नतीजों के शोर में केदारनाथ धाम में "थार" की गड़गड़ाहट कहीं दब ना जाए.. तीर्थों में 'फाइव स्टार स्पिरिचुएलिटी' का नया दरबार सजाए जाने पर ये वीडियो तैयार किया है। उत्तराखंड समेत पूरे देश और विदेश में बसे श्रद्धालु इस विषय पर चिंता जाहिर कर रहे हैं। मुझे लगता है कि उत्तराखंड सरकार, ब्यूरोक्रेसी और केंद्र सरकार को भी इस बारे में फौरी कदम उठाने चाहिए वरना सनातन धर्म के शास्त्रों में दैवीय शक्तियों के स्थान विशेष को त्याग देने की सैंकड़ों कथाएं भरी पड़ी है। *विकास के खिलाफ कोई नहीं है... लेकिन फिलहाल तस्वीर हादसों को न्योता देती ऊपजाऊ जमीन के रुप में विकसित होती ज्यादा दिख रही है। #TharInKedarnath #Uttarakhand

Meenakshi Kandwal मीनाक्षी कंडवाल

504,582 次观看 • 2 年前

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दो दिन पहले हिमाचल प्रदेश के मनाली की तबाही और जम्मू वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर आई आपदा की तस्वीरें देखने के बाद ये वीडियो बनाया था.. और आज सुबह की शुरुआत ही उत्तराखंड में बीती रात बरपे कहर के साथ हुई। टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में बादल फटे और तस्वीरें चीख-चीख कर बता रही है कि हिमालय को किस कदर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, ओवर टूरिज्म और प्रकृति के दोहन ने छलनी कर दिया है। सवाल आज भी वही है। हिमालयी राज्यों का संकट सिर्फ पहाड़ियों का नहीं है.. पूरे देश का है। जिस राज्य के लोग पेड़ कटने के लिए लड़ गए थे.. पेड़ों से चिपक गए थे। जहां हर विशाल वृक्ष के नीचे कोई ना कोई 'स्थान देवता' प्रतिष्ठित है। जहां अभी तक भी नई दुल्हन को सबसे पहले पानी के सोते पर ले जाकर कलश पूजा की परंपरा है... और नदी के ऊपर से गुजरने से पहले प्रार्थना करके सिक्का डालने की रीत रही है कि 'हे नदी स्वरुप प्रकृति, आदिशक्ति आपको लांघ रहे हैं, अनुमति दो.. आशीर्वाद दो'... जिस देवभूमि में जंगलों को पार करने से पहले वनदेवियों से रक्षा मांगी जाती है... उसी देवभूमि में प्रकृति के साथ जीने की शैली बर्बाद कर दी गई है। और किसलिए..? सिर्फ और सिर्फ अंधे व्यापार और तीर्थाटन को बेचकर पैसा कमाने के नाम पर। शर्मनाक, अफसोसनाक और नुकसान के बाद भी ना सीखने की हनक। #Uttarakhand #manaliFlood2025 #SaveHimalaya

Meenakshi Kandwal मीनाक्षी कंडवाल

32,331 次观看 • 1 年前

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