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Satish Chandra Misra

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मेरी बातों में कड़ुआहट है, सच कहने की अकुलाहट है.

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मूर्खता का आतंक तो देखिए... केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रहलाद जोशी मीडिया से बातचीत कर रहे थे... तभी राहुल गांधी भी वहां आ गया...राहुल गांधी ने दोनों मंत्रियों से कहा-आइए मिलकर मीडिया से बात करते हैं... राहुल गांधी के इतना कहते ही दोनों मंत्री गज़ब की स्पीड से वहां से भागे... दरअसल उन्होंने बिलकुल ठीक किया... क्योंकि इस घटनाक्रम ने मुझे दो अंग्रेजी की और एक हिंदी की, कुल तीन कहावतों की याद तत्काल दिला दी... दोनों मंत्रियों का आवरण मुझे तीनों कहावतों के अनुकूल लगा। वो तीनों कहावतें आप भी देख पढ़ लीजिए.... 1. Never argue with an idiot. They will drag you down to their level and beat you with experience. — Mark Twain अर्थ: मूर्ख/बेवकूफ से बहस मत करो, वह तुम्हें अपनी स्तर पर लाकर अपने अनुभव से तुम्हें हरा देगा। 2. Never wrestle with a pig. You both get dirty, and the pig likes it. अर्थ: सूअर से कुश्ती मत लड़ो — दोनों गंदे हो जाओगे और सूअर को इसमें मजा आयेगा। 3. मूर्ख से बहस करना अपने ही चेहरे पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है — मच्छर मरे या न मरे, लेकिन तुम्हें थप्पड़ तो लगेगा ही लगेगा। (चाणक्य नीति)

मूर्खता का आतंक तो देखिए... केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रहलाद जोशी मीडिया से बातचीत कर रहे थे... तभी राहुल गांधी भी वहां आ गया...राहुल गांधी ने दोनों मंत्रियों से कहा-आइए मिलकर मीडिया से बात करते हैं... राहुल गांधी के इतना कहते ही दोनों मंत्री गज़ब की स्पीड से वहां से भागे... दरअसल उन्होंने बिलकुल ठीक किया... क्योंकि इस घटनाक्रम ने मुझे दो अंग्रेजी की और एक हिंदी की, कुल तीन कहावतों की याद तत्काल दिला दी... दोनों मंत्रियों का आवरण मुझे तीनों कहावतों के अनुकूल लगा। वो तीनों कहावतें आप भी देख पढ़ लीजिए.... 1. Never argue with an idiot. They will drag you down to their level and beat you with experience. — Mark Twain अर्थ: मूर्ख/बेवकूफ से बहस मत करो, वह तुम्हें अपनी स्तर पर लाकर अपने अनुभव से तुम्हें हरा देगा। 2. Never wrestle with a pig. You both get dirty, and the pig likes it. अर्थ: सूअर से कुश्ती मत लड़ो — दोनों गंदे हो जाओगे और सूअर को इसमें मजा आयेगा। 3. मूर्ख से बहस करना अपने ही चेहरे पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है — मच्छर मरे या न मरे, लेकिन तुम्हें थप्पड़ तो लगेगा ही लगेगा। (चाणक्य नीति)

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इस वीडियो में ललित मोदी बता रहे हैं कि, बैंगलोर में एक मैच के ठीक बाद एक बैठक हुई थी, जिसमें सुनंदा पुष्कर को छोड़कर बाकी सभी शेयरधारक मौजूद थे। ललित मोदी जब समझौते को देख रहे थे, तब उन्हें नहीं पता था कि सुनंदा पुष्कर कौन हैं। उन्होंने जब कंसोर्टियम के सदस्यों से पूछा कि वे सुनंदा पुष्कर को 25% शेयर और राजस्व का 15% क्यों दे रहे हैं, तो एक व्यक्ति ने उन्हें ऑटोमोबाइल डीलर बताया। ललित मोदी ने कहा कि वह खुद भारत में मार्केटिंग का काम करते हैं लेकिन उन्हें (सुनंदा पुष्कर) को नहीं जानता और जब तक उसे पता नहीं चलेगा कि सुनंदा पुष्कर कौन हैं, वह समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। इसके तुरंत बाद ललित मोदी के पास तत्कालीन विदेश मंत्री शशि थरूर का फोन आया। उन्होंने स्पीकरफोन पर ललित मोदी से कहा कि वह सुनंदा पुष्कर के बारे में न पूछें क्योंकि वह उनकी अच्छी दोस्त हैं। ललित मोदी ने इस पर आपत्ति जताई, नाराजगी व्यक्त की और फोन काटते हुए हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इसके बाद रात के दो बजे बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष शशांक मनोहर का फोन आया, जो आमतौर पर आईपीएल के कामों में दखल नहीं देते थे। उन्होंने वक्ता से तुरंत उसी समय समझौते पर हस्ताक्षर करने को कहा। ललित मोदी ने सुबह नागपुर आकर बात करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन शशांक मनोहर के अड़े रहने पर वक्ता ने उनके अधिकार का सम्मान करते हुए हस्ताक्षर करने की बात मान ली। लेकिन ललित मोदी ने समझौते पर यह लिखवाकर हस्ताक्षर किए कि अध्यक्ष उन्हें इसके लिए मजबूर कर रहे हैं। ललित मोदी को तब इस दबाव का कारण समझ नहीं आया था, लेकिन सुबह उठकर जब उन्होंने अखबारों के पहले पन्ने पढ़े, तब उसे पूरी स्थिति और दबाव की वजह समझ में आई। ललित मोदी का मानना है कि हस्ताक्षर करने का वह फैसला उसकी एक गलती थी, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है।

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84,137 views • 2 months ago

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5 हजार करोड़ की नेशनल हेराल्ड डकैती में अपनी अम्मी के साथ नामजद है अधेड़। पिछले 12 वर्षों से अधेड़ अपनी करतूतों के चलते इस स्थिति को लगातार निमंत्रण दे रहा था। मेरी आँखें भी पिछले 12 वर्षों से यह नज़ारा देखने के लिये तरस रही थीं। आज उनकी 12 वर्ष से अधिक लंबी प्रतीक्षा बड़ी धूमधाम से पूरी हुईं। जिस तरह रंगेहाथ पकड़े जाने पर कोई पॉकेटमार सड़क पर पसर जाता है और बचने का नपुंसक प्रयास करता है। ठीक उसी तरह आज देश को अराजकता की आग में झोंकने प्रधानमंत्री आवास पहुंचा अधेड़ उसी तरह सड़क पर लोटने लगा, पसर गया। लेकिन दिल्ली पुलिस का लफंगई के ऐसे हथकंडों से रोजाना सामना होता है। अतः कुछ सेकेंड में ही दिल्ली पुलिस ने अधेड़ को सड़क पर घसीटते हुए बस में फेंका और साथ लेकर रवाना हो गयी। देश को दो टुकड़ों में बांटकर शेष बचे भारत का 40 हजार वर्गकिमी भूभाग चीन के हाथों गंवाने वाले कुकर्मी नेहरू के उससे अधिक देशघाती, उसके वंशज को सड़क पर लोटते हुए, घसीटे जाते देख कर भारत से प्रेम करने वाले प्रत्येक भारतीय को असीम सुख और परम आनंद की अनुभूति हुई।

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दुनिया की सबसे बदनाम वेश्या पाकिस्तान के चक्कर में डोनाल्ड ट्रंप ने 1776 में आजाद हुए अमरीका के 250 साल लंबे इतिहास में अमेरिका को सबसे शर्मनाक दौर में पहुंचा दिया है। जयपुर एयरपोर्ट पर मार्को रूबियो को विदा करने कांस्टेबल, दरोग़ा और डिप्टी एसपी लेवल के अधिकारी आये थे। कोई मंत्री तो दूर, दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक, अमरीकी विदेश मंत्री को प्रोटोकॉल देने के लिए कलक्टर साहब तक उपस्थित नहीं हुए। यह स्थिति बता रही है कि, ढाई सौ साल में बनी अमेरिका की विश्वव्यापी साख और धाक को केवल डेढ़ साल में डोनाल्ड ट्रंप उसी तरह चाट गया है जैसे कुत्ते पत्तल चाटते हैं। वह भी पाकिस्तान के चक्कर में, विशेषकर भारत के संदर्भ में।

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62,483 views • 3 months ago

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एम. ए. बेबी (पूरा नाम: मारियान अलेक्ज़ेंडर बेबी) भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPI(M)) का वरिष्ठ नेता है। अप्रैल 2025 में उसे सीताराम येचुरी के स्थान पर पार्टी का महासचिव चुना गया था। 2006 से 2011 तक केरल सरकार में शिक्षा एवं संस्कृति मंत्री रह चुका है। यही एम ए बेबी वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेताओं के साथ 29 जून को ककरोची अड्डे पर पहुंचा और 10 जुलाई को उन्हीं कम्युनिस्ट नेताओं के साथ चीनी नेताओं से मिलने चीन के दूतावास पहुंच गया। हद तो यह है कि जब उनकी यह करतूत रिपब्लिक चैनल ने उजागर की तो ये कम्युनिस्ट गिरोह तिलमिला गया और सारी वीडियो फोटो हटाने की मांग लेकर कोर्ट पहुंच गया है।

Satish Chandra Misra

23,861 views • 1 month ago