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Neeraj Jha

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Editor at @moliticsindia

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भयावह!!! आप इसे छुट्टा पशु कहिए, आवारा पशु कहिए, निराश्रित पशु कह दीजिए या कोई और अच्छा नाम दे दीजिए; लेकिन प्लीज़! इनका समाधान निकालिए। उत्तर प्रदेश में तो रिपोर्ट्स के हिसाब से ख़ैर है ही स्थिति ख़राब अन्य शहरों में भी हालात अलग नहीं। मैं NCR में रहता हूं। और वहां इन जानवरों के कारण सड़क पर चलना भयावह लगता रहता है।

भयावह!!! आप इसे छुट्टा पशु कहिए, आवारा पशु कहिए, निराश्रित पशु कह दीजिए या कोई और अच्छा नाम दे दीजिए; लेकिन प्लीज़! इनका समाधान निकालिए। उत्तर प्रदेश में तो रिपोर्ट्स के हिसाब से ख़ैर है ही स्थिति ख़राब अन्य शहरों में भी हालात अलग नहीं। मैं NCR में रहता हूं। और वहां इन जानवरों के कारण सड़क पर चलना भयावह लगता रहता है।

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राम लला जो आने वाले हैं, अगर रेल के रास्ते आए तो वैष्णव साहब को खूब हड़काएंगे। Ashwini Vaishnaw साहब, आप रेल मंत्री हैं। देखिए आपके राज में रेल के दृश्य। पानी की बॉटल्स टॉयलेट में और लोग तो टॉयलेट, डिब्बों के बीच का एरिया, जहां जगह मिले, वहीं हैं। क्या पुरस्कार मिले आपको? #IndianRailways

राम लला जो आने वाले हैं, अगर रेल के रास्ते आए तो वैष्णव साहब को खूब हड़काएंगे। Ashwini Vaishnaw साहब, आप रेल मंत्री हैं। देखिए आपके राज में रेल के दृश्य। पानी की बॉटल्स टॉयलेट में और लोग तो टॉयलेट, डिब्बों के बीच का एरिया, जहां जगह मिले, वहीं हैं। क्या पुरस्कार मिले आपको? #IndianRailways

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4 महीने पहले गोपाल मिश्रा की शादी हुई। 22 की उम्र थी। लंबी जिंदगी और बड़ी दुनिया पड़ी थी देखने के लिए। लेकिन जी नहीं पाया। एक गोली ने उसकी जान ले ली। किसी की मौत पर ऐसा कहते हुए दुख ज़रूर हो रहा है, लेकिन एक बात है। जिस ट्रिगर के दबने से गोपाल की जान गई उस ट्रिगर पर कई हाथों का दबाव था। और उन कई हाथों में से एक हाथ गोपाल का भी था। मूर्ख भक्तों!!! अतिवाद की राजनीति तुम्हारा सर्वस्व लील लेगी। तुम्हारी कुर्बानी होगी। और इस कुर्बानी का फ़ायदा मिलेगा कुर्बानी दिलाने वालों के बाल बच्चों को। तुम या तो खुद मरोगे या किसी को मारोगे। तुम कभी शांत नहीं रह पाओगे। तुम्हारा यूं अशांत रहना ही तुम्हारे आकाओं की खुशियों का साधन है। थोड़ा शांत हो। थोड़ा मनुष्य बनकर सोचो। एक बार उस विधवा औरत और संतान खो चुके मां बाप के बारे में सोचो। अपने परिवार का ख़्याल करो। ये करोगे तो नफ़रत की राजनीति को न बोल पाओगे। और अगर नहीं बोला तो..... उफ्फ #Baharaich #BahraichRiots #GopalMishra

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341,784 просмотров • 1 год назад

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रुबिका लियाकत को चमची शब्द से दिक्कत हुई। मुझे भी हुई। लेकिन मुझे दिक्कत तब भी हुई थी जब राहुल गांधी को मेंस्ट्रीम कहा जाने वाला मीडिया दिन रात पप्पू कहता था। मुझे दिक्कत तब भी हुई जब बीजेपी के समर्थकों ने प्रेस वालों को प्रेस्टीट्यूट कहना शुरू किया था। मुझे दिक्कत तब भी हुई जब सत्तारूढ़ पार्टी ने एक एंकर के शो को बॉयकॉट कर दिया था केवल इसलिए क्योंकि वो पत्रकार सवाल करना जानते थे। मुझे दिक्कत तब भी हुई जब बड़े पत्रकारों से लेकर नवागंतुक पत्रकारों को "पत्रकारिता" के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ा। Rubika Liyaquat ने बीते 10 सालों में जनहित के कितने विषयों पर सवाल पूछे या शो बनाए? Molitics पर ये पूरी चर्चा

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355,967 просмотров • 2 лет назад

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अशोक मित्तल - इनसे जुड़े लगभग 10 ठिकानों पर ED ने सर्च किया था। इसी महीने की बात है। स्वाति मालीवाल - जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत 2016 के एक मामले में फंसी थीं। 2024 से पार्टी से अलग रास्ते पर चल रही हैं। 2025 में बरी हो गईं। राघव चड्ढा - शराब घोटाले के सप्लीमेंट्री चार्जशीट में इनका भी नाम था। लेकिन देखिए टॉप लीडरशिप जेल में गई। ये चुप रहे। हरभजन सिंह - अवैध बेटिंग मामले में ED 2025 में इनसे पूछताछ कर चुकी है। 7 सांसदों, जिन्होंने आप को छोड़कर बीजेपी का दामन था, में से 4 तो यहां। साहनी साब, गुप्ता जी व्यापार वाले लोग हैं। पाठक जी संगठन के आदमी थे। और अकादमीशियन!!! डर और दबाव या लोभ और लालच या कुछ और.....किस कारण बीजेपी में शामिल हुए होंगे ये लोग? #RaghavChadha Molitics

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59,698 просмотров • 3 месяцев назад

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इंजिनियरिंग की। और उसी दौरान तय कर लिया कि पत्रकारिता करूंगा। धीरे धीरे ख़तरों का अंदेशा होने लगा। और पत्रकारिता में आने की सोच मज़बूत होती गई। क्योंकि समझ आ गया था कि ये बहुत ज़रूरी काम है। बहुत बड़ा दावा तो क्या हो करें!!! पर इतना ज़रूर है लोकतंत्र को बनाए रखने में पत्रकारों और पत्रकारिता का बहुत बड़ा रोल है। इसीलिए हमले इसी संस्थान पर होते हैं। सवाल पूछने वालों को टारगेट किया जा रहा है। और उसी क्रम में हमारे फेसबुक पेज को देश में रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया है। सवाल ये है कि क्या हम सवाल पूछना बंद कर देंगे? जवाब - हाहाहाहाहा!!!! अभी गनीमत है सब्र मेरा, अभी लबालब भरा नहीं हूं वो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उसे कहां मैं मर नहीं हूं वो कह रहा है कि कुछ दिनों में मिटा के रख दूंगा नस्ल तेरी, है उसकी फितरत डरा रहा है, है मेरी आदत डरा नहीं हूं!!!! Molitics

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63,464 просмотров • 4 месяцев назад

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दयाशंकर मिश्र ने राहुल गांधी पर एक किताब लिखी। पब्लिशर्स ने मना किया तो सेल्फ पब्लिश किया। पहले दिन 1000 प्रतियां बिक गईं। फिर Amit Malviya का मैसेज आया बधाई। और उसके बाद शुरू हुआ उत्पीड़न का खेल। 1. अमेज़न लिंक की क्लोनिंग कर फर्जी साइट बनाई गई। 2. डायरेक्ट बिक्री शुरू की तो बैंक अकाउंट्स में ट्रांजैक्शन की दिक्कत हो गई। 3. डाकखाने से किताब भेजने लगे तो पोस्टमास्टर ने कहा राहुल गांधी पर किताब लिखने की क्या ज़रूरत!!!! इस किताब के लिए Dayashankar Mishra जी को नौकरी छोड़नी पड़ी क्योंकि संस्थान को पसंद नहीं आया। ये है हमारे देश का माहौल। जहां मीडिया में शीर्ष स्तर का एक व्यक्ति किताब लिखता है तो पहले वो मीडिया के लिए अछूत हो जाता है और फिर उसको परेशान करने की कवायद शुरू हो जाती है। ये है सबसे मज़बूत सरकार वाले दौर में एक लेखक की स्थिति। पूरी बातचीत Molitics के यूट्यूब पर। लिंक कमेंट बॉक्स में।

Neeraj Jha

135,701 просмотров • 11 месяцев назад