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देश सर्वोपरि- जय भीम - जय समाज - जय हिन्द -

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भारत हिंदू राष्ट्र कभी नहीं बनेगा! ये देश महात्मा गांधी, भगत सिंह, अशफाकुल्ला खान, जवाहरलाल नेहरू, चंद्रशेखर आज़ाद और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के खून और संविधान से बना है। ये देश किसी एक धर्म का नहीं, सबका है — हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन… हर किसी का। जो लोग इसे हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वो न सिर्फ संविधान के खिलाफ जा रहे हैं, बल्कि उन शहीदों के सपनों को भी कुचल रहे हैं जिन्होंने धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक भारत के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। हम कभी नहीं होने देंगे! भारत रहेगा सेकुलर। भारत रहेगा सबका।

भारत हिंदू राष्ट्र कभी नहीं बनेगा! ये देश महात्मा गांधी, भगत सिंह, अशफाकुल्ला खान, जवाहरलाल नेहरू, चंद्रशेखर आज़ाद और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के खून और संविधान से बना है। ये देश किसी एक धर्म का नहीं, सबका है — हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन… हर किसी का। जो लोग इसे हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वो न सिर्फ संविधान के खिलाफ जा रहे हैं, बल्कि उन शहीदों के सपनों को भी कुचल रहे हैं जिन्होंने धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक भारत के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। हम कभी नहीं होने देंगे! भारत रहेगा सेकुलर। भारत रहेगा सबका।

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देश में मुसलमान हैं, इसलिए दलित आज भी जिंदा है॥अगर ये मुसलमान न होते तो आज दलितों की हालत क्या होती? ब्राह्मणों और राजपूतों की बगिया में कुत्ते-बिल्ली की तरह बंधे जानवर बनकर पड़े होते! दलितों की बेटियाँ, बहनें और माताएँ ब्राह्मणों-राजपूतों की गुलामी करती, रात-दिन उनकी हवस की भूख मिटाती! मुसलमानों ने तुम्हारी मनुवादी गुलामी की चक्की को रोका, नहीं तो आज दलित सिर्फ़ मुर्दा नाम होता, हकीकत में तो तुम्हारे जूतों का चमड़ा चाटता! मुसलमान न होते तो आज भी तुम दलित को “अछूत” कहकर मारते, उनकी औरतों को उठा ले जाते और “धर्म की रक्षा” का नाम देकर बलात्कार करते! ये हकीकत है सवर्णों! अब भी वही मनुवाद सर उठा रहा है। जागो दलित-मुस्लिम भाइयों! एकजुट हो जाओ, वरना फिर वही पुराना जुल्म लौट आएगा! जय भीम! जय मुस्लिम! सवर्णवाद मुर्दाबाद! मनुवाद का अंत करो! जय भीम! जय मुस्लिम एकता!

देश में मुसलमान हैं, इसलिए दलित आज भी जिंदा है॥अगर ये मुसलमान न होते तो आज दलितों की हालत क्या होती? ब्राह्मणों और राजपूतों की बगिया में कुत्ते-बिल्ली की तरह बंधे जानवर बनकर पड़े होते! दलितों की बेटियाँ, बहनें और माताएँ ब्राह्मणों-राजपूतों की गुलामी करती, रात-दिन उनकी हवस की भूख मिटाती! मुसलमानों ने तुम्हारी मनुवादी गुलामी की चक्की को रोका, नहीं तो आज दलित सिर्फ़ मुर्दा नाम होता, हकीकत में तो तुम्हारे जूतों का चमड़ा चाटता! मुसलमान न होते तो आज भी तुम दलित को “अछूत” कहकर मारते, उनकी औरतों को उठा ले जाते और “धर्म की रक्षा” का नाम देकर बलात्कार करते! ये हकीकत है सवर्णों! अब भी वही मनुवाद सर उठा रहा है। जागो दलित-मुस्लिम भाइयों! एकजुट हो जाओ, वरना फिर वही पुराना जुल्म लौट आएगा! जय भीम! जय मुस्लिम! सवर्णवाद मुर्दाबाद! मनुवाद का अंत करो! जय भीम! जय मुस्लिम एकता!

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कुछ लोग बाबा भीम राव अंबेडकर जी की तुलना बँटवारे की राजनीति करने वाले दंगे करने के दाग लगे नेता नरेंद्र मोदी से कर रहे हैं । उनसे कहना चाहती हूँ ॥एकता की मिसाल है : बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर॥ बाबासाहेब को किसी से तुलना करनी हो तो उन महारथियों से करो जिन्होंने देश को जोड़ने का काम किया, न कि बांटने का। जिन्होंने कभी बंटवारे की राजनीति नहीं की, बल्कि हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सबको एक सूत्र में पिरोने की कोशिश की। तुलना करनी हो तो करो : • मौलाना अबुल कलाम आजाद से — जो हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बने, विभाजन के खिलाफ डटे रहे। • एपीजे अब्दुल कलाम से — मिसाइल मैन, राष्ट्रपति, विज्ञान और शिक्षा के प्रचारक। • चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह से — जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ये वो धुरंधर हैं जिनकी विरासत एक भारत, श्रेष्ठ भारत की नींव रखती है। देश को जोड़ने वाले नेताओं की तुलना उनसे करो जिन्होंने सच्ची देशभक्ति, बलिदान और समावेशी सोच दिखाई। बाबासाहेब संविधान के निर्माता हैं। उनका नाम किसी भी व्यक्तिगत राजनीति या विभाजनकारी दंगावादी नेता कैसे नरेंद्र मोदी एजेंडे से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनकी याद हमें याद दिलाती है — जाति, धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्र सेवा ही सच्ची राजनीति है। जय भीम। जय हिंद। 🇮🇳

कुछ लोग बाबा भीम राव अंबेडकर जी की तुलना बँटवारे की राजनीति करने वाले दंगे करने के दाग लगे नेता नरेंद्र मोदी से कर रहे हैं । उनसे कहना चाहती हूँ ॥एकता की मिसाल है : बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर॥ बाबासाहेब को किसी से तुलना करनी हो तो उन महारथियों से करो जिन्होंने देश को जोड़ने का काम किया, न कि बांटने का। जिन्होंने कभी बंटवारे की राजनीति नहीं की, बल्कि हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सबको एक सूत्र में पिरोने की कोशिश की। तुलना करनी हो तो करो : • मौलाना अबुल कलाम आजाद से — जो हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बने, विभाजन के खिलाफ डटे रहे। • एपीजे अब्दुल कलाम से — मिसाइल मैन, राष्ट्रपति, विज्ञान और शिक्षा के प्रचारक। • चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह से — जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ये वो धुरंधर हैं जिनकी विरासत एक भारत, श्रेष्ठ भारत की नींव रखती है। देश को जोड़ने वाले नेताओं की तुलना उनसे करो जिन्होंने सच्ची देशभक्ति, बलिदान और समावेशी सोच दिखाई। बाबासाहेब संविधान के निर्माता हैं। उनका नाम किसी भी व्यक्तिगत राजनीति या विभाजनकारी दंगावादी नेता कैसे नरेंद्र मोदी एजेंडे से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनकी याद हमें याद दिलाती है — जाति, धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्र सेवा ही सच्ची राजनीति है। जय भीम। जय हिंद। 🇮🇳

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ब्राह्मणों की मानसिकता आज भी गंदी और ओछी है! दलित लड़की अच्छे कपड़े पहन ले तो कमेंट आता है — “ये दलित है, चमार है, अच्छा कैसे खाती है? अच्छा कैसे पहनती है?” अरे ओ ब्राह्मणवादी मानसिकता! हम भी इंसान हैं! हम भी अच्छी शिक्षा ले सकते हैं, अच्छा खा सकते हैं, अच्छा पहन सकते हैं! बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने हमें सर उठाकर जीने का अधिकार दिया है! तुम्हारी गंदी नजरें अब काम नहीं आएंगी। जितना जलोगे, उतना हम आगे बढ़ेंगे! अब बस बहुत हुआ! दलित-बहुजन अब झुकेगा नहीं, सर ऊँचा करके चलेगा! जय भीम जय संविधान दलित-बहुजन एकता ज़िंदाबाद!

ब्राह्मणों की मानसिकता आज भी गंदी और ओछी है! दलित लड़की अच्छे कपड़े पहन ले तो कमेंट आता है — “ये दलित है, चमार है, अच्छा कैसे खाती है? अच्छा कैसे पहनती है?” अरे ओ ब्राह्मणवादी मानसिकता! हम भी इंसान हैं! हम भी अच्छी शिक्षा ले सकते हैं, अच्छा खा सकते हैं, अच्छा पहन सकते हैं! बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने हमें सर उठाकर जीने का अधिकार दिया है! तुम्हारी गंदी नजरें अब काम नहीं आएंगी। जितना जलोगे, उतना हम आगे बढ़ेंगे! अब बस बहुत हुआ! दलित-बहुजन अब झुकेगा नहीं, सर ऊँचा करके चलेगा! जय भीम जय संविधान दलित-बहुजन एकता ज़िंदाबाद!

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ब्राह्मण समाज में मुझे “नीली कबूतरी छोटी जाति” कहकर अपमानित करते हो? अरे ओह भगवान के ठेकेदारों! जात-पात की ये गंदी मानसिकता अभी भी पाल रहे हो? किताबें पढ़कर भी मन अछूत और छोटी जाति के चक्कर में फंसा है? नीली कबूतरी नहीं, अंबेडकरवादी हूँ मैं! हम सच्चे दलित-अंबेडकरवादी अब तुम्हारी सड़ी हुई ब्राह्मणवादी सोच को चुनौती देंगे! जय भीम! जय संविधान! जातिवाद मुर्दाबाद! ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद!

ब्राह्मण समाज में मुझे “नीली कबूतरी छोटी जाति” कहकर अपमानित करते हो? अरे ओह भगवान के ठेकेदारों! जात-पात की ये गंदी मानसिकता अभी भी पाल रहे हो? किताबें पढ़कर भी मन अछूत और छोटी जाति के चक्कर में फंसा है? नीली कबूतरी नहीं, अंबेडकरवादी हूँ मैं! हम सच्चे दलित-अंबेडकरवादी अब तुम्हारी सड़ी हुई ब्राह्मणवादी सोच को चुनौती देंगे! जय भीम! जय संविधान! जातिवाद मुर्दाबाद! ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद!

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मैं गंगा नदी को माँ नहीं मानती ।हम दलित कभी अपवित्र माने जाते थे? हाँ, लेकिन गंगा जल ने हमें शुद्ध नहीं किया! बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमें अधिकार दिए, सम्मान दिया और इंसान बनाया! गंगा का पानी? बस पानी है! गंगा सिर्फ़ एक नदी है, देवी नहीं! हम दलित तभी सच्चे शुद्ध होंगे, जब हर दलित संविधान पढ़ेगा, भीम राव अंबेडकर के रास्ते पर चलेगा न कि गंगा में डुबकी लगाएगा! जो लोग आज भी गंगा-पूजा के नाम पर दलितों को अपमानित करते हैं, उनका समय खत्म हो चुका है! आंबेडकर की विचारधारा और शिक्षा ही हमारी गंगा है! संविधान की किताब ही हमारी धार्मिक किताब हैं! जय भीम! जय संविधान! दलित एकता ज़िंदाबाद!

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SSP अविनाश पांडेय कायर है! मैंने खुद देखा — गुस्से में दलित भाइयों को किस तरह थप्पड़ बरसा रहा था, पुलिस वैन के अंदर घुसकर पीट रहा था। ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय मांग रहे दलितों पर ये मर्दानगी दिखा रहा है? अविनाश पांडेय, जवाब दो — अगर ये दलित नहीं, कोई ब्राह्मण या ठाकुर होता तो क्या इसी तरह वर्दी का घमंड दिखाते? क्या तब भी थप्पड़ बरसाते? या फिर सिर झुकाकर बात करते? मेरठ की ये घटना साफ दिखाती है कि कुछ पुलिस वाले अभी भी जाति के चश्मे से देखते हैं। दलितों पर दमन आसान लगता है, लेकिन सवर्णों के सामने कमर झुक जाती है। दलित समाज जाग चुका है! अब चुप नहीं रहेंगे। जय भीम जय संविधान ॥

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मैं फिर से कहती हूँ – मैं खुद को हिंदू नहीं मानती, मैं दलित हूँ! जो दलित भाई-बहन आज भी खुद को हिंदू कहते घूम रहे हैं, वो एक बार आँखें खोलकर देख लें। उनमें मुसलमानों से इतनी नफरत नहीं है, जितनी नफरत दलितों से और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर से है! क्यों? क्योंकि भारत का संविधान एक “नीच जाति” वाले ने लिखा है – बाबा साहेब ने! ये सवर्ण मानसिकता कभी नहीं बदलती। मुसलमान तो दूर की बात, अपने ही दलित भाई को देखकर इनके मन में आग लग जाती है। बाबा साहेब ने जो संविधान दिया, उसी से इनकी मनुवादी ताकत छिन गई, इसलिए ये दलित और आंबेडकर के नाम से इतना घृणा करते हैं। दलित एकता ज़िंदाबाद! मनुवाद मुर्दाबाद! जय भीम! जय संविधान!

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