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देश सर्वोपरि- जय भीम - जय समाज - जय हिन्द -
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मैं गंगा नदी को माँ नहीं मानती ।हम दलित कभी अपवित्र माने जाते थे? हाँ, लेकिन गंगा जल ने हमें शुद्ध नहीं किया! बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमें अधिकार दिए, सम्मान दिया और इंसान बनाया! गंगा का पानी? बस पानी है! गंगा सिर्फ़ एक नदी है, देवी नहीं! हम दलित तभी सच्चे शुद्ध होंगे, जब हर दलित संविधान पढ़ेगा, भीम राव अंबेडकर के रास्ते पर चलेगा न कि गंगा में डुबकी लगाएगा! जो लोग आज भी गंगा-पूजा के नाम पर दलितों को अपमानित करते हैं, उनका समय खत्म हो चुका है! आंबेडकर की विचारधारा और शिक्षा ही हमारी गंगा है! संविधान की किताब ही हमारी धार्मिक किताब हैं! जय भीम! जय संविधान! दलित एकता ज़िंदाबाद!
Neha Bharti omg267,712 просмотров • 2 месяцев назад

अभी कुछ ब्राह्मण और मनुवादी मानसिकता वाले लोग बोलेंगे ये भीमटी दलित चमार इतना अच्छा कपड़ा कैसे पहन सकती है ॥ तुम हिंदू धर्म के लिए शिक्षा छोड़ के 500 की दिहाड़ी पे सरकार की चाटुकारिता करते रहो हम पढ़ लिख के बाबा भीम राव के मार्ग पर चल कर आसमान छुएँगे ॥ जय भीम जय संविधान जय हिन्द ॥
Neha Bharti omg117,708 просмотров • 1 месяц назад

आज जो दलितों के साथ हो रहा है, वही सच्चाई है जो हम बार-बार कह रहे हैं।जाति भेदभाव अभी भी इस देश में नासूर की तरह पनप रहा है। संविधान समानता का वादा करता है, लेकिन समाज में आज भी छुआछूत, अपमान, हमले और अन्याय की घटनाएँ थम नहीं रही हैं। बारात पर हमला, पानी पीने पर मारपीट, मंदिर में प्रवेश से मनाही, अंतरजातीय रिश्ते पर हिंसा — ये सब सिर्फ खबरें नहीं, हमारी सामूहिक असफलता हैं। जब तक हम जाति के नाम पर इंसानियत को तौला जाएगा, तब तक यह घाव भरने वाला नहीं है। समय आ गया है कि हम सिर्फ बात न करें, बल्कि इस नासूर को जड़ से मिटाने के लिए खड़े हों।और इसके लिए सविधान की किताब को सीने से लगाकर अपने अंदर ज्वाला जलानी होगी ॥ जय हिंद जय भीम जय संविधान ।
Neha Bharti omg29,075 просмотров • 7 дней назад

मनुस्मृति में शूद्रों के लिए लिखा गया: जीभ काटो, मुंह में गर्म कील ठोंको, कान में उबलता तेल डालो। इसी किताब को धर्मग्रंथ मानकर सदियों तक शूद्रों दलितों को जानवर से भी बदतर रखा गया। इसीलिए 25 दिसंबर 1927 को बाबा साहेब अंबेडकर ने महाड़ में मनुस्मृति जलाई। जो आज भी इस ग्रंथ को न्याय की किताब बताता है, वह समानता का दुश्मन है। जय भीम। जय संविधान जय हिन्द
Neha Bharti omg40,105 просмотров • 18 дней назад

मैं अगर मुस्लिम होती अब तक जेल में पड़ी होती।मेरी आवाज़ को दबाने के लिए मुझे पाकिस्तानी घोषित कर दिया जाता ॥
Neha Bharti omg103,573 просмотров • 2 месяцев назад

Mr. Modi ने जिस तरह दिल्ली पुलिस की फौज खड़ी कर दी है ॥ और पुलिस जिस अंदाज़ में एक्शन मोड में है… लगता है ॥ अब इन CJP के समर्थक बच्चों का “जलीय वाला व्यवहार” होने ही वाला है। सोचिए ज़रा। एक मन्त्री के लिए नरेन्द्र मोदी इन बच्चों की कुर्बानी चाहिए ॥
Neha Bharti omg48,107 просмотров • 1 месяц назад

जब तुम गर्व से बोलते हो — “मैं हिंदू हूँ” जय श्री राम तो पूरा समाज ताली बजाता है। मैं जब गर्व से बोलती हूँ ॥“मैं हिंदू नहीं, दलित हूँ” जय भीम जय संविधान तो तुम्हारी भावनाएँ तुरंत आहत हो जाती हैं? अब बताओ, क्या गर्व सिर्फ तुम्हारा अधिकार है ॥ दलित जाति वालो का नहीं ? मैं एक बार फिर से बोलती हूँ ॥ मैं हिंदू नहीं मुझे दलित होने पे गर्व है ॥
Neha Bharti omg39,199 просмотров • 2 месяцев назад

कुछ लोग धमकी दे रहे है की में दलितों को भड़का रही हूँ ॥ तुमने हमेशा दलितों का शोषण किया है उनको अपमानित किया है उनका हक़ मारा है। दलितों को मंदिरों में प्रवेश नहीं करने दिया है । आज दलित जाग रहा है ॥ तो तुम्हें डर लग रहा है । हिंदू जागे या ना जागे लेकिन दलित जाग चुका है ।अब दलित बीजेपी को वोट कभी नहीं देगा ॥
Neha Bharti omg41,483 просмотров • 2 месяцев назад

भगवा झंडा उठाकर निकलने वाले सिर्फ ‘भगवा धारी गुंडे ’ कहलाते हैं। नीला झंडा लेकर निकलने वाले अंबेडकरवादी और संविधान के रक्षक कहलाते हैं। भगवा रंग किसी एक समुदाय का प्रतीक बन चुका है, नीला रंग बाबा साहेब अंबेडकर का रंग है – समानता, न्याय और संविधान का रंग। जो संविधान की रक्षा करना चाहते हैं, वे भगवा नहीं, नीला झंडा उठाएँ। जो जाति-पाति तोड़ना चाहते हैं, वे भगवा नहीं, अंबेडकर का नीला रंग अपनाएँ। जय भीम। संविधान जिंदाबाद।
Neha Bharti omg30,282 просмотров • 1 месяц назад

हम भटके हुए नहीं, जागरूक और ज़िम्मेदार युवा हैं। हम देश के प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री और गृह मंत्री अमित शाह से ज़्यादा पढ़े-लिखे हैं।यकीन न हो तो पीएम की डिग्री और हमारी डिग्री मिलाकर देख लो। हिम्मत है मोदी भक्तों में? नरेंद्र मोदी जी की डिग्री दिखा दो! बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने फरमाया था ॥ “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पीएगा वो दहाड़ेगा!” हमने वो दूध पिया है, इसलिए हम सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। अब जवाब दो! या इस्तीफ़ा?
Neha Bharti omg29,374 просмотров • 2 месяцев назад

SSP अविनाश पांडेय कायर है! मैंने खुद देखा — गुस्से में दलित भाइयों को किस तरह थप्पड़ बरसा रहा था, पुलिस वैन के अंदर घुसकर पीट रहा था। ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय मांग रहे दलितों पर ये मर्दानगी दिखा रहा है? अविनाश पांडेय, जवाब दो — अगर ये दलित नहीं, कोई ब्राह्मण या ठाकुर होता तो क्या इसी तरह वर्दी का घमंड दिखाते? क्या तब भी थप्पड़ बरसाते? या फिर सिर झुकाकर बात करते? मेरठ की ये घटना साफ दिखाती है कि कुछ पुलिस वाले अभी भी जाति के चश्मे से देखते हैं। दलितों पर दमन आसान लगता है, लेकिन सवर्णों के सामने कमर झुक जाती है। दलित समाज जाग चुका है! अब चुप नहीं रहेंगे। जय भीम जय संविधान ॥
Neha Bharti omg21,529 просмотров • 2 месяцев назад

एक हिंदू भाई ने कलमा पढ़ लिया तो एक BJP को सपोर्ट करने वाली एक लड़की ने तुरंत उसे “पाकिस्तानी” घोषित कर दिया! पास खड़े सभी मुस्लिम भाई एक साथ उसके सपोर्ट में उतर आए।कोई झगड़ा नहीं, कोई नफरत नहीं… सिर्फ मोहब्बत। ये है असली हिंदुस्तान। जहाँ हिंदू-मुस्लिम एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं, एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं। बाटने की कोशिश सिर्फ वो लोग करते हैं जिन्हें नफरत से वोट चाहिए। बीजेपी और आरएसएस वाले यही खेल खेलते हैं। हमारे बीच प्यार है, सद्भाव है। और ये प्यार कोई नहीं तोड़ सकता।
Neha Bharti omg16,464 просмотров • 1 месяц назад

जब में दलितों की हक की बात करती हूँ ।अनपढ़ दलित ही मुझे गाली दे रहे हैं वह क्या बात है ।लेकिन मैं उनको बोलना चाहती हूँ । जो दलित आज सबसे बड़े हिंदू बने बैठे है । जाओ तुम मंदिरों में जाओ॥ तुम पीटो गे तभी तुम को समझ में आयेगा की बीजेपी के राज्य में दलितों पे अत्याचार हो रहा है ॥ में फिर कह रही हूँ जो दलित बाबा साहेब से मोहब्बत करता वो दलित कभी भी दलित विरोधी पार्टी बीजेपी को वोट नहीं देगा ॥
Neha Bharti omg17,645 просмотров • 2 месяцев назад

20 जुलाई को सबको धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए सड़को पे उतरना होगा / ये लड़ाई सिर्फ अब इन बच्चों की नहीं पूरे देश के बच्चों की है । आज शिक्षा व्यवस्थाओं में सुधार होगा तभी कल हमारे बच्चे मेहनत से पढ़ सकेंगे बच्चे मौत को नहीं चुनेगे ॥ सरदार जी एक पत्रकार है इनके हाथ नहीं लेकिन इनकी रीड की हड्डी सीधी है ॥ सरदार जी को सलाम है उनके ज़ज़्बे को जो आज दलाली मीडिया के दौर में बच्चों के किए। न्यूज़ कवर कर रहे है जंतर मंतर पर ॥ आज की मीडिया हाथ होने के वावज़ूद अपाहिज है । बच्चो के लिए सरकार के ख़िलाफ़ लिख नहीं सकती ॥ Dharmendra Pradhan Must Resign!
Neha Bharti omg13,114 просмотров • 2 месяцев назад

मैं फिर से कहती हूँ – मैं खुद को हिंदू नहीं मानती, मैं दलित हूँ! जो दलित भाई-बहन आज भी खुद को हिंदू कहते घूम रहे हैं, वो एक बार आँखें खोलकर देख लें। उनमें मुसलमानों से इतनी नफरत नहीं है, जितनी नफरत दलितों से और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर से है! क्यों? क्योंकि भारत का संविधान एक “नीच जाति” वाले ने लिखा है – बाबा साहेब ने! ये सवर्ण मानसिकता कभी नहीं बदलती। मुसलमान तो दूर की बात, अपने ही दलित भाई को देखकर इनके मन में आग लग जाती है। बाबा साहेब ने जो संविधान दिया, उसी से इनकी मनुवादी ताकत छिन गई, इसलिए ये दलित और आंबेडकर के नाम से इतना घृणा करते हैं। दलित एकता ज़िंदाबाद! मनुवाद मुर्दाबाद! जय भीम! जय संविधान!
Neha Bharti omg12,885 просмотров • 2 месяцев назад

ये भाजपा वाले उन्हीं लोगों को सम्मानित करते हैं जो महात्मा गांधी को गाली देते हैं। ये बीजेपी वाले उन लोगो को माला पहनाकर स्वागत करते हैं जो दलितों को गाली देते हैं, बाबासाहेब अंबेडकर जी की प्रतिमाएं तोड़ते हैं अंबेडकर विरोधियों को वोट देना बंद करो! आपका वोट आपका हक है,इसे अपमानित करने वालों को मत दो। दलितों का सम्मान, अंबेडकर का सपना — इन्हें बचाना है तो सोच समझकर वोट दो।
Neha Bharti omg12,486 просмотров • 2 месяцев назад

मुझे लगता है कि सोनम वांगचुक जी को अब अपना अनशन तोड़ देना चाहिए। सोनम वांगचुक जी, अगर आपको कुछ हो गया तो उन मासूम बच्चों के लिए कौन आगे आएगा? भाजपा के लिए किसी के प्राणों का कोई मोल नहीं है। उनके लिए सिर्फ़ धन ही प्रधान है। भ्रष्टाचार से कमाए काले धन के घमंड में चूर ये लोग विकास के नाम पर सत्ता के लालच में इतने अंधे हो चुके हैं कि सत्याग्रह का मूल्य ही नहीं समझते। जिनमें अहंकार भरा हो, उनमें परिष्कार की गुंजाइश कहाँ? जो ‘सत्ताग्रह’ के चक्कर में मंदिर तक लूटने से बाज नहीं आते, वो ‘सत्याग्रह’ की कीमत क्या जानें?
Neha Bharti omg10,744 просмотров • 2 месяцев назад

यूथ अकेले नहीं… उनके माँ-बाप, परिवार वाले भी 20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर उतर आए! हमने सिर्फ आपके बच्चों का भविष्य बचाने के लिए सरकार से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा है। ये कोई राजनीतिक प्रोटेस्ट नहीं है… ये हमारे बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष है! जिन माँ-बाप ने अपने बच्चे खो दिए, उनसे पूछिए… जिन बच्चों ने रात-रात भर पढ़ाई की, सपने देखे, और जिनकी मेहनत की कमाई को इस सिस्टम ने नीलाम कर दिया… उनसे पूछिए! देश की शिक्षा व्यवस्था चरमरा चुकी है। पेपर लीक, घोटाले, बेईमानी… अब बस बहुत हुआ! सुधार होगा… चाहे जितनी कीमत चुकानी पड़े!
Neha Bharti omg10,281 просмотров • 2 месяцев назад