
Nitish Kumar Yadav
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Soldier of Tejashwi Yadav || If anything I said ever hurt you, please consider me your younger brother and let me know — I truly want to improve
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जनप्रतिनिधि होना सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि समाज के सामने एक आदर्श स्थापित करने की जिम्मेदारी है।" बुलंदशहर के शमशान घाट में बीजेपी नेता राहुल वाल्मीकि का कथित आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा जाना न सिर्फ नैतिक पतन को दर्शाता है, बल्कि यह जनता के विश्वास के साथ भी धोखा है। जिस स्थान को अंतिम संस्कार और शांति का प्रतीक माना जाता है, वहां इस तरह की हरकतें निंदनीय हैं। यह सिर्फ अश्लीलता नहीं, सार्वजनिक मर्यादा का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में केवल माफी मांगना काफी नहीं होता, राजनीतिक और कानूनी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आश्चर्य की बात है कि नेता हो या आम आदमी, जब शारीरिक इच्छाएं विवेक पर हावी हो जाएं, तो स्थान और स्थिति का कोई मतलब नहीं रह जाता। प्रश्न यही है — क्या राजनीति अब चरित्र से ज़्यादा सुविधा का खेल बन चुकी है? आप जैसे नेता समाज का मार्गदर्शन करें या समाज को शर्मसार करें — फैसला जनता को करना है। नेताजी, शमशान में संस्कार होते हैं, संस्कारों का नहीं।
Nitish Kumar Yadav122,388 просмотров • 1 год назад

Kranti Kumar युवाओं ने पंजाब बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अनोखा और सकारात्मक तरीका अपनाया। संगीत के जरिए भावनाओं को जोड़कर दान की प्रेरणा दी। इस पहल से लोगों में संवेदनशीलता और सहयोग की भावना बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर भी यह प्रयास प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
Nitish Kumar Yadav98,226 просмотров • 11 месяцев назад

महिला की बहादुरी काबिल-ए-तारीफ है — जिस तरह से इस बेटी ने सरेआम अपने सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी, वह उन सभी लड़कियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अक्सर ऐसे मौकों पर चुप रह जाती हैं। समाज की उदासीनता शर्मनाक है — वहाँ मौजूद लोगों ने मदद करने की बजाय वीडियो बनाना ज़्यादा जरूरी समझा, जो समाज में संवेदनहीनता की स्थिति को दर्शाता है। पुलिस का त्वरित एक्शन सही दिशा में कदम है — आरोपी को लॉकअप में डालना जरूरी था ताकि ऐसा व्यवहार दोबारा न हो और एक कड़ा संदेश जाए। जरूरत है सामूहिक जागरूकता की — सिर्फ पुलिस या पीड़िता की जिम्मेदारी नहीं है कि ऐसे लोगों को सबक सिखाएं, समाज को भी मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
Nitish Kumar Yadav105,635 просмотров • 1 год назад

यह घटना न केवल एक जनप्रतिनिधि की अमानवीयता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे सत्ता में बैठे लोग आम जनता की समस्याओं को उपहास और अपमान से जवाब देते हैं। एक गर्भवती महिला जो सिर्फ अपने गांव के लिए सड़क की मांग कर रही थी, उसे "एक हफ्ता पहले उठवा लेने" जैसी अशोभनीय और धमकी भरी भाषा में जवाब दिया गया — यह लोकतंत्र के मूल्यों और महिला सम्मान दोनों का खुला अपमान है। जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है जनता की बात सुनना, न कि उन्हें डराना या नीचा दिखाना। इस मामले में भाजपा सांसद की टिप्पणी न सिर्फ अशालीन है, बल्कि महिला विरोधी मानसिकता को भी उजागर करती है। सरकार और पार्टी को ऐसे बयानों की सार्वजनिक निंदा करनी चाहिए और पीड़ित महिला से माफ़ी माँगनी चाहिए।
Nitish Kumar Yadav96,223 просмотров • 1 год назад

यह घटना बताती है कि रिश्तों की सतही चमक के पीछे गहरे और गंभीर मतभेद या योजनाएं छिपी हो सकती हैं। विवाह जैसे पवित्र संबंध में विश्वासघात का यह उदाहरण न केवल चौंकाने वाला है बल्कि यह भी दर्शाता है कि भावनात्मक या निजी कारणों से कोई व्यक्ति किस हद तक जा सकता है। ऐसे मामलों में सतर्कता, पारिवारिक संवाद और समय रहते व्यवहार की समझ जरूरी है ताकि गंभीर अपराधों को रोका जा सके।
Nitish Kumar Yadav75,676 просмотров • 1 год назад

एक लोकतांत्रिक देश में जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य होता है कि वे जनता की समस्याओं को समझें और संवेदनशीलता के साथ समाधान करें। लीला साहू जैसी गर्भवती महिला जब बुनियादी सुविधा — सड़क — की मांग करती हैं, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए, न कि असंवेदनशील और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना चाहिए। सांसद राजेश मिश्रा का "उठवा लेने" जैसा बयान न केवल स्त्री सम्मान के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और मर्यादाओं की भी अवहेलना है। एक जनप्रतिनिधि से ऐसी भाषा की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अगर वे सड़क नहीं बनवा सकते, तो कम से कम शब्दों से ज़ख्म न दें।
Nitish Kumar Yadav31,967 просмотров • 1 год назад

बिंदु की यह यात्रा हमारे समाज के लिए कई संदेश देती है। पहला – लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। दूसरा – जो मेहनत करता है, उसे सम्मान मिलना ही चाहिए, चाहे वह किसी भी पेशे से जुड़ा हो। तीसरा – समाज को अपनी सोच को बदलने की जरूरत है, खासकर उन पारंपरिक रूढ़ियों को जो यह तय करती हैं कि कौन सा काम ‘लड़कों’ का है और कौन सा ‘लड़कियों’ का। आज बिंदु एक मिसाल हैं। उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार को सहारा दिया, बल्कि तमाम युवा लड़कियों को यह हिम्मत भी दी है कि अगर मन में दृढ़ निश्चय हो, तो किसी भी पेशे को अपनाया जा सकता है, चाहे दुनिया कुछ भी कहे। ऐसे उदाहरण समाज में बदलाव की नींव बनते हैं। हम सभी की तरफ से बिंदु प्रिया को दिल से धन्यवाद और सलाम। उन्होंने दिखा दिया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ते खुद बन जाते हैं। उनका साहस, समर्पण और संघर्ष निश्चित ही नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा।
Nitish Kumar Yadav27,295 просмотров • 1 год назад

Kranti Kumar अमृता फडणवीस के कपड़ों पर ट्रोल करना गलत है। कपड़े पहनने की स्वतंत्रता व्यक्तिगत होती है। उन्होंने सामाजिक कार्य में भाग लेकर सकारात्मक संदेश दिया। समाज को उनके प्रयासों की सराहना करनी चाहिए, न कि पहनावे पर टिप्पणी करनी चाहिए। मानसिकता बदलना जरूरी है।
Nitish Kumar Yadav18,079 просмотров • 11 месяцев назад
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