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हिसुआ में शांति मार्च, लोगों से सौहार्द बनाए रखने की अपील नवादा, बिहार: हिसुआ में भूमिहार और चंद्रवंशी समाज के बीच हालिया विवाद के बाद रणवीर सेना से जुड़े मोनू सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने हिसुआ बाजार से शांति मार्च निकाला और लोगों से शांति व भाईचारा बनाए रखने की अपील की। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले हुए विवाद में गोलीबारी से भूमिहार समाज के दो और चंद्रवंशी समाज के एक युवक को गोली लगी थी, जिनमें चंद्रवंशी युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। भूमिहार समाज के लोगों ने जाति पूछकर मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

हिसुआ में शांति मार्च, लोगों से सौहार्द बनाए रखने की अपील नवादा, बिहार: हिसुआ में भूमिहार और चंद्रवंशी समाज के बीच हालिया विवाद के बाद रणवीर सेना से जुड़े मोनू सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने हिसुआ बाजार से शांति मार्च निकाला और लोगों से शांति व भाईचारा बनाए रखने की अपील की। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले हुए विवाद में गोलीबारी से भूमिहार समाज के दो और चंद्रवंशी समाज के एक युवक को गोली लगी थी, जिनमें चंद्रवंशी युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। भूमिहार समाज के लोगों ने जाति पूछकर मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

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ये दीदी बारहवीं कक्षा की छात्रा है, NEET और CBSE के फुल फॉर्म तक बता नहीं सकी। इनका सत्य इतना क्रांतिकारी है कि ज़िंदा इंसान की ही तेरहवीं करवा दी, समोसा खिला कर! ऊपर यमराज भी अपनी एक्सेल शीट चेक कर रहे होंगे। पता नहीं ये लोग अंबेडकर की कौन सी किताब फॉलो कर रहे हैं, जिसमें ये सब लिखा है।

ये दीदी बारहवीं कक्षा की छात्रा है, NEET और CBSE के फुल फॉर्म तक बता नहीं सकी। इनका सत्य इतना क्रांतिकारी है कि ज़िंदा इंसान की ही तेरहवीं करवा दी, समोसा खिला कर! ऊपर यमराज भी अपनी एक्सेल शीट चेक कर रहे होंगे। पता नहीं ये लोग अंबेडकर की कौन सी किताब फॉलो कर रहे हैं, जिसमें ये सब लिखा है।

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क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इतनी कठोर पुलिस कार्रवाई उचित है?

क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इतनी कठोर पुलिस कार्रवाई उचित है?

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जब CJP के प्रदर्शनकारी सेना और पुलिस को गालियाँ दे रहे थे, तब ये मूकदर्शक बने खड़े थे। तब इन्हें सब ठीक लग रहा था। आज देखिए, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है।

जब CJP के प्रदर्शनकारी सेना और पुलिस को गालियाँ दे रहे थे, तब ये मूकदर्शक बने खड़े थे। तब इन्हें सब ठीक लग रहा था। आज देखिए, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है।

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At Jantar Mantar!

At Jantar Mantar!

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ब्राह्मण की बेटियाँ क्यों चाहिए?

ब्राह्मण की बेटियाँ क्यों चाहिए?

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जंतर-मंतर वाला “भाईचारा” अब रांची पहुंच चुका है! पिछले महीने जंतर-मंतर के प्रदर्शन में कुछ लोग बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी और दूसरे ऐतिहासिक राजनीतिक प्रतीकों के रूप में तैयार होकर नजर आए थे। अब वैसा ही दृश्य रांची में भी दिखाई दिया है। कुछ खास लोगों ने छात्र प्रदर्शन जैसे गंभीर मुद्दे को भी मज़ाक बनाकर रख दिया है।

जंतर-मंतर वाला “भाईचारा” अब रांची पहुंच चुका है! पिछले महीने जंतर-मंतर के प्रदर्शन में कुछ लोग बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी और दूसरे ऐतिहासिक राजनीतिक प्रतीकों के रूप में तैयार होकर नजर आए थे। अब वैसा ही दृश्य रांची में भी दिखाई दिया है। कुछ खास लोगों ने छात्र प्रदर्शन जैसे गंभीर मुद्दे को भी मज़ाक बनाकर रख दिया है।

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खेरागढ़ में सवर्ण समाज का प्रदर्शन, आर्थिक आरक्षण और UGC बिल में संशोधन की मांग आगरा के खेरागढ़ कस्बे में सवर्ण समाज ने आर्थिक आरक्षण और UGC बिल में संशोधन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन डाक बंगला से शुरू होकर एसडीएम कार्यालय पर समाप्त हुआ। इस दौरान सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने एसडीएम खेरागढ़ नरेंद्र गंगवार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आर्थिक आरक्षण व्यवस्था और UGC बिल में संशोधन की मांग उठाई गई। प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के प्रबुद्धजन और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

खेरागढ़ में सवर्ण समाज का प्रदर्शन, आर्थिक आरक्षण और UGC बिल में संशोधन की मांग आगरा के खेरागढ़ कस्बे में सवर्ण समाज ने आर्थिक आरक्षण और UGC बिल में संशोधन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन डाक बंगला से शुरू होकर एसडीएम कार्यालय पर समाप्त हुआ। इस दौरान सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने एसडीएम खेरागढ़ नरेंद्र गंगवार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आर्थिक आरक्षण व्यवस्था और UGC बिल में संशोधन की मांग उठाई गई। प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में सवर्ण समाज के प्रबुद्धजन और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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जंतर-मंतर पर लोगों को Entry

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देर रात, दिल्ली पुलिस द्वारा महिलाओं को भी detain किया गया!

देर रात, दिल्ली पुलिस द्वारा महिलाओं को भी detain किया गया!

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क्या केजरीवाल पेपर लीक कराने ही गया था? पंजाब में 19 जुलाई 2026 को हुई फार्मा अधिकारी परीक्षा का पेपर लीक हो गया। बना लो अब पंजाब का शिक्षा मंत्री सोनम वांगचुक को!

क्या केजरीवाल पेपर लीक कराने ही गया था? पंजाब में 19 जुलाई 2026 को हुई फार्मा अधिकारी परीक्षा का पेपर लीक हो गया। बना लो अब पंजाब का शिक्षा मंत्री सोनम वांगचुक को!

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21 छात्रों की मौत के बाद Resignation Party इसे जश्न कहें या संवेदनहीनता का सार्वजनिक प्रदर्शन? और पार्टी भी ऐसी कि जुनैद को बुलाया तक नहीं, रो रहा है बेचारा!

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21 छात्रों की मौत के बाद Resignation Party इसे जश्न कहें या संवेदनहीनता का सार्वजनिक प्रदर्शन? और पार्टी भी ऐसी कि जुनैद को बुलाया तक नहीं, रो रहा है बेचारा!

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सामाजिक समरसता की मिसाल: वाल्मीकि समाज की बेटी की बारात को हवेली पर रोककर कराया स्वागत एक गांव में सामाजिक समरसता की अनोखी तस्वीर देखने को मिली। वाल्मीकि समाज की एक बेटी की बारात जब ठाकुर नारायण सिंह की हवेली के सामने से गुजरी, तो उन्होंने आगे बढ़कर दूल्हे और बारातियों का स्वागत किया। बताया जा रहा है कि ठाकुर नारायण सिंह ने पूरी बारात को अपनी हवेली पर रोककर चाय-नाश्ता कराया और दूल्हे का सम्मान किया। इसके बाद उन्होंने दूल्हे को अपनी घोड़ी पर बैठाकर सम्मानपूर्वक आगे विदा किया। (वीडियो पिछले वर्ष का है, लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में इसे देखना और समझना बेहद प्रासंगिक है।)

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129,193 görüntüleme • 1 gün önce

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धर्म और विवाह को लेकर सवाल, ब्राह्मण समाज को टारगेट कर टिप्पणी करने पर Rapido राइडर को युवती ने लगाई फटकार एक वायरल वीडियो में Rapido राइडर कथित तौर पर एक युवती से उसका धर्म पूछता है। हिंदू बताए जाने पर वह दूसरी जाति और दूसरे धर्म में विवाह करने की सलाह देने लगता है तथा ब्राह्मण समाज को लेकर भी टिप्पणी करता है। इस पर युवती नाराज होकर उसे फटकार लगाती है और कहती है कि गलत एक व्यक्ति करता है, पूरी जाति नहीं करती! वीडियो 3 महीने पुरानी हैं। Rapido ने घटना को गंभीर बताते हुए संबंधित कैप्टन के व्यवहार को अस्वीकार्य कहा। कंपनी ने बताया कि कैप्टन को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है और ग्राहक सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है।

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22,636 görüntüleme • 8 saat önce

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जम्मू कश्मीर के पूर्व DGP शेष पाल वैध जी ने कहा, "सरकार ने सीजेपी के सामने सुप्रीम कोर्ट में लिखकर दे दिया कि उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने भी दूसरे राज्यों में दर्ज ऐसे मामलों को वापस लेने की बात कही। तो सवाल है कि आगे से कोई अराजकता फैलाए, पुलिसवालों को घायल करे, पब्लिक प्रॉपर्टी और गाड़ियाँ तोड़े, तो क्या पुलिस को कार्रवाई करने से पहले पूछना चाहिए कि FIR करनी है या नहीं? दिल्ली पुलिस ने जिन लोगों को आइडेंटिफाई किया, उनमें कथित तौर पर कई लोगों का क्रिमिनल रिकॉर्ड था। अगर पहले की FIR ठीक थी तो नई FIR क्यों? मुझे लगता है, यह बहुत खतरनाक ट्रेंड है। झारखंड में जेनुइन बच्चे अपने हक के लिए लड़ रहे थे, उन पर लाठीचार्ज हुआ, लेकिन उनके केस वापस लेने की कोई बात नहीं हुई। यहाँ मापदंड अलग क्यों है? भारत सरकार ने जिस तरह सीजेपी के सामने सरेंडर किया, उससे गलत संदेश जाएगा कि कोई भी पुलिस के सिर फोड़ दे, पब्लिक प्रॉपर्टी तोड़ दे और पुलिस कार्रवाई भी न करे। मेरी अपील भारत सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से है कि इस चीज से बचना चाहिए।"

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44,078 görüntüleme • 1 gün önce

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आरजेडी प्रवक्ता प्रिया राज यादव अक्सर आरक्षण और SC-ST एक्ट के समर्थन में मुखर होकर बोलती रही हैं। इनकी जुबान पर "मनुवाद से आजादी, ब्राह्मणवाद से आजादी" के नारे हमेशा ही रहते हैं। अब खुद के ऊपर SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज होने का दावा सामने आया है। 3 महीने पहले का पूरा मामला ये था कि एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। उसे दरभंगा रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद प्रिया ने अस्पताल संचालक के खिलाफ आवाज उठाते हुए प्रदर्शन किया। बाद में अस्पताल संचालक, जो अनुसूचित जाति से हैं, ने संबंधित प्रिया के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया। जिस SC-ST एक्ट के समर्थन में वे अक्सर आवाज़ उठाती रही हैं, आज उसी एक्ट के इस्तेमाल पर वे सवाल उठा रही हैं।

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164,160 görüntüleme • 5 gün önce

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डॉ. अंबेडकर जी को शिक्षा में सबसे अधिक सहयोग किसने दिया? एक ब्राह्मण ने और एक राजपूत ने। सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय बड़ौदा (वर्तमान वडोदरा, गुजरात) रियासत के महाराजा थे और 1875 से 1939 तक शासक रहे। उन्होंने अम्बेडकर की उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग दिया था। * उन्होंने अंबेडकर को छात्रवृत्ति दी। * इसी छात्रवृत्ति के सहारे अंबेडकर 1913 में Columbia University, अमेरिका उच्च शिक्षा के लिए गए। * बड़ौदा राज्य की छात्रवृत्ति तीन वर्षों के लिए थी। उसी तरह उनका दूसरा विवाह भी एक ब्राह्मण महिला से हुआ। तो भाई, ब्राह्मण महिला से विवाह भी हो गया। उस समय आरक्षण भी नहीं था, फिर वे आपके समाज के सबसे अच्छे पढ़े-लिखे व्यक्ति बने। किस कारण से बने? दिमाग के कारण। भगवान ने या बुद्धिजीवियों ने उनको इतनी बुद्धि दी, जितनी हमको-आपको दी। उसी दिमाग से उन्होंने इतनी डिग्रियाँ हासिल कीं। यह हीनता का भाव है कि आरक्षण के कारण इन्हें जातियों में डाल दिया गया और एक साइकोलॉजी डाल दी गई कि तुम बैकवर्ड ही हो!

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509,874 görüntüleme • 14 gün önce

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माँ के निधन के बाद पैतृक गाँव लौटा बेटा, अब जान बचाने की गुहार, SC-ST Act की धमकियों से हालात ऐसे कि कह रहा है: “या तो गाँव छोड़ना पड़ेगा, या मेरी जान चली जाएगी!” "मैं राजपूत ठाकुर जाति से संबंध रखता हूँ और मेरा जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश है। दरअसल, मैं काफी लंबे समय से दिल्ली में रह रहा था। अभी दो महीने पहले मेरी माता का निधन हुआ, तो मुझे अपने पैतृक गाँव में आकर रहना पड़ा। तो यहाँ की स्थिति ये है कि मेरे पड़ोसी जो भीम आर्मी संगठन से जुड़े हुए हैं। उन लोगों ने मुझे इतना बुरी तरह से प्रताड़ित कर रखा है कि वे मेरे घर में जबरदस्ती घुसने का प्रयास करते हैं, मुझे हमेशा गालियाँ देते हैं, धमकियाँ देते हैं और आते-जाते हुए रास्ते में मुझे परेशान करते हैं। मेरे पास वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिसमें मुझसे ये तक कहा गया है कि, तू हमारी तरफ देखता क्यों है? तू हमारी तरफ देखेगा नहीं और तू जमीन कि तरफ नीचे नज़र करके चलेगा, हमारे सामने। मैंने पुलिस को भी इस संबंध में कई बार शिकायत दी है। एक महीने से मैं कई बार पुलिस को शिकायत दे चुका हूँ। पुलिस का हमेशा आश्वासन रहता है कि कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में आज सुबह मेरे साथ इन लोगों ने मारपीट की है, गाली-गलौज की है और मुझे धमकी दी है कि हम तुम्हें फर्जी एससी-एसटी एक्ट और महिला उत्पीड़न के केस में किसी न किसी तरह फँसाकर जेल भेजवा देंगे। तुम्हें आज के आज यहाँ से जाना पड़ेगा, या तो तुम यहाँ से कहीं बाहर चले जाओ, नहीं तो हम तुम्हें जेल भेज देंगे। मेरे घर में बहुत सारे लोग नहीं हैं। दरअसल, मैं अकेला हूँ और मेरे वृद्ध पिता हैं। मेरा बहुत बुरी तरह से शोषण और उत्पीड़न किया जा रहा है। तो मेरा सभी संगठनों से, जो भी सवर्ण संगठन हैं या जो भी इस तरह के कुकृत्यों के संबंध में हम जैसे लोगों की रक्षा करते हैं या सुरक्षा करते हैं, उनसे निवेदन है कि मेरी सुरक्षा की जाए। आज जिस तरह से मेरे साथ मारपीट की गई है, मुझे अपनी हत्या तक किए जाने का डर है। अगर मुझे कुछ होता है तो यही लोग, जिनके खिलाफ मैंने शिकायत और प्रार्थना पत्र में नाम दिया है, वही लोग उसके जिम्मेदार होंगे। इन लोगों के द्वारा गलियों में तलवारें लहराई जाती हैं, गली में नीला गमछा डालकर और तरह-तरह से मुझे उत्पीड़ित किया जाता है। तो मेरा यही निवेदन है कि सभी लोग मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करें, क्योंकि मैं पुलिस में भी कई बार कंप्लेंट दे चुका हूँ। आज पुलिस के द्वारा मुझे आश्वासन दिया गया है कि जो संबंधित लोग मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं, उनके खिलाफ आज मुकदमा दर्ज किया जाएगा। परंतु मेरा कहना ये है कि अगर मुझे इसी तरह प्रताड़ित किया गया और मेरे बचाव में कोई संस्था या कोई लोग नहीं आते हैं, या मेरे ऊपर किसी तरह का फर्जी मुकदमा दर्ज होता है, तो मेरे पास दो रास्ते होंगे। एक रास्ता होगा कि मैं अपने प्राणों की आहुति दे दूँ या अपनी जीवन समाप्त कर लूँ, क्योंकि मैं एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति हूँ और मुझे इस तरह प्रताड़ित करके या जेल भेजने का अगर काम किया जाएगा, तो मैं अपने प्राण देने के लिए मजबूर रहूँगा और मेरे पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं होगा। इसके अलावा, मुझे पलायन करना पड़ेगा। मुझे समझ में नहीं आता कि मेरे कई पीढ़ियों से मेरे पूर्वज यहाँ पर रहे हैं, तो अचानक ऐसा क्या हुआ है कि मुझे यहाँ से भगाया जा रहा है। चूँकि मेरा घर इस गाँव में अंतिम पंक्ति में है, ठाकुरों के गाँव में जो घर होते हैं, उसकी अंतिम पंक्ति में मेरा घर है। इन लोगों की कम्युनिटी ने चारों तरफ घर बनाकर हमें चारों तरफ से घेर रखा है। तो अब इन लोगों का ये है कि इन्होंने मुझे वल्नरेबल समझ लिया है कि मैं इनके लिए बहुत ईज़ी टारगेट हूँ। तो अगर मेरी किसी तरह हत्या हो जाती है या मुझे किसी केस में फँसाया जाता है, तो उसके लिए वही लोग जिम्मेदार होंगे। मेरे पास दूसरा रास्ता ये भी है, जो मेरे दिमाग में आ रहा है, कि मुझे धर्म परिवर्तन कर लेना चाहिए, ताकि मेरे ऊपर से ये ठाकुर वाला दाग हट जाए। इसको मैं दाग कहूँगा। एक्चुअली, मैं इस पर पहले गर्व महसूस करता था। गर्व इसलिए महसूस करता था कि हमारे पूर्वजों ने काफी वीरताएँ दिखाई हैं, युद्ध लड़े हैं और कई युद्ध जीते हैं। उन्होंने देश को आगे बढ़ाने में प्रयास किया है। लेकिन अभी मुझे इस बात का भय है कि जिस जाति से मैं बिलॉन्ग करता हूँ, वही जाति मेरे प्राणों के लिए काफी कष्टकर साबित हो रही है।"

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82,806 görüntüleme • 5 gün önce