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Pankaj Sharma पंकज शर्मा

@Pankaj___Sharma22,180 subscribers

Independent Journalist | Print and Broadcast| Editor-News Views India and GII | Special Correspondent-Navbharat Times (1980-2006) | Member-CBFC (2010-2015)

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मेरे सब से बड़े ताऊ जी ज्योतिष के अच्छे ज्ञाता थे और आसपास के इलाके में उन के कुंडली फलादेश को लोग बेहद सटीक माना करते थे। बचपन में गर्मियों की छुट्टियों में मुझे गांव भेज दिया जाता था, सो, तभी से ज्योतिष विज्ञान मुझे आकर्षित करने लगा था। अर्थपूर्ण क़िताबें पढ़ने की आदत शुरू से है और इसी के चलते तक़रीबन चार दशक से मुझे ज्योतिष शास्त्र के अलग-अलग पहलुओं का स्वांतःसुखाय स्वाधाय करने का मौक़ा भी मिलता रहा है। किसी पत्रकार को ज्योतिष के गणनालोक की सैर करनी चाहिए या नहीं, मुझे नहीं मालूम, मगर मैं कर रहा हूं और इस का अपना अलग आनंद है। दो दिन पहले, शुक्रवार, 19 जून को राहुल गांधी का जन्म दिन था तो मैं ने उन के अगले बरस की कुंडली पर निग़ाह डाली। जो लगा, उस पर एक ट्वीट कर दिया। पिछले बारह साल से Rahul Gandhi की मीडिया के एक ख़ास हिस्से को कितनी फ़िक्र है, यह इस से समझिए कि मेरे इस आकलन तक पर रजत शर्मा Rajat Sharma के इंडिया टीवी India TV पर सौरव शर्मा Saurav Sharmma ने अपने शो में विस्तृत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता Alok Mehta और प्रदीप सिंह Pradeep Singh ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। चुनावों में मतदाताओं के रुझान का विश्लेषण करने वाले मनोज कुमार सिंह Manoj Kumar Singh ने भी राहुल और कांग्रेस Congress के राजनीतिक भविष्य पर अपना आकलन बताया। सभी ने मेरा नाम नहीं ले कर मुझे कृतार्थ किया। मगर मैं ने तो खुलेआम लिखित ट्वीट किया था, इसलिए अगर नाम ले भी लेते तो मैं कौन-सा बुरा मान जाता? एक अनुरोध है, अगले साल 19 जून को सौरव जी अपने शो में यह बताएं कि मेरा ट्वीट कितने प्रतिशत सही-ग़लत रहा। उस दिन आलोक जी, प्रदीप जी और मनोज जी को भी ज़रूर आमंत्रित करें।

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39,523 görüntüleme • 24 gün önce

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जब देवीलाल ने दिया चंद्रशेखर को धोखा ... साढ़े छत्तीस साल पहले, 1 दिसंबर 1989 को, अरुण नेहरू के जालबट्टे में फंस कर चैधरी देवीलाल ने संसद के केंद्रीय कक्ष में चंद्रशेखर को ऐसा धोखा दिया कि पूरा देश सन्न रह गया। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने देवीलाल को जनता दल की संसदीय पार्टी का नेता चुनने का प्रस्ताव पेश किया। चंद्रशेखर ने प्रस्ताव का समर्थन किया। सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हो गया। यानी देवीलाल प्रधानमंत्री बन गए। मगर देवीलाल खड़े हुए, सब को धन्यवाद दिया और ऐलान कर दिया कि मैं प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहता और विश्वनाथ प्रताप सिंह को अपनी तरफ़ से इस पद के लिए नामजद करता हूं। चंद्रशेखर समेत ज़्यादातर लोग अवाक् रह गए। बाद में चंद्रशेखर ने खुल कर अपने गुस्से का इज़हार किया।

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16,426 görüntüleme • 22 gün önce

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