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Vinesh Phogat

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प्रिय मतदाताओं, 5 अक्टूबर को बैलेट नंबर 4 पर 'हाथ के पंजे' का बटन दबाएं और कांग्रेस की विजयी सरकार बनाने में अपना योगदान दें। मैं आपकी बहन, बेटी और आपकी आवाज़ बनकर आपके हक़ के लिए संघर्ष करूंगी। आइए, मिलकर हरियाणा की तस्वीर बदलें और एक मजबूत भविष्य की नींव रखें। विनेश फोगाट - प्रत्याशी, जुलाना विधानसभा हाथ के पंजे के साथ, हरियाणा के बेहतर कल के लिए।✋

प्रिय मतदाताओं, 5 अक्टूबर को बैलेट नंबर 4 पर 'हाथ के पंजे' का बटन दबाएं और कांग्रेस की विजयी सरकार बनाने में अपना योगदान दें। मैं आपकी बहन, बेटी और आपकी आवाज़ बनकर आपके हक़ के लिए संघर्ष करूंगी। आइए, मिलकर हरियाणा की तस्वीर बदलें और एक मजबूत भविष्य की नींव रखें। विनेश फोगाट - प्रत्याशी, जुलाना विधानसभा हाथ के पंजे के साथ, हरियाणा के बेहतर कल के लिए।✋

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आज सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल जी के आमरण अनशन का 24वां दिन है। उनका यह संघर्ष किसानों के हक और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी कानून की मांग के लिए है। यह मांग सिर्फ एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों की है, जिनका जीवन और रोज़गार सीधे इस मुद्दे से जुड़ा है। संसद की खेती-बाड़ी स्थायी समिति ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि MSP गारंटी कानून जरूरी है। यह साफ करता है कि यह मुद्दा केवल किसानों तक सीमित नहीं, बल्कि संसद की भी भावना है। जब संसद की स्थायी समिति जैसी जिम्मेदार इकाई इसे सही ठहरा रही है, तो केंद्र सरकार को इसे लागू करने में देरी क्यों? 24 दिनों से एक किसान नेता अनशन पर बैठे हैं, यह सिर्फ उनके शरीर की परीक्षा नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। क्या सरकार संसद की भावना का सम्मान करेगी और किसानों की इस जायज़ मांग को पूरा करेगी? देश के अन्नदाता के प्रति यह उदासीनता न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि पूरे किसान वर्ग की उम्मीदों को भी चोट पहुंचा रही है। अब वक्त आ गया है कि सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाए और MSP गारंटी कानून बनाकर अपने वादों को निभाए। किसानों की मांगें न केवल जायज़ हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। सरदार डल्लेवाल जी जैसे नेता का संघर्ष इस बात का प्रतीक है कि किसान अपने अधिकारों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। अब केंद्र सरकार को भी यह दिखाना होगा कि वह अपने अन्नदाताओं के साथ खड़ी है।

आज सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल जी के आमरण अनशन का 24वां दिन है। उनका यह संघर्ष किसानों के हक और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी कानून की मांग के लिए है। यह मांग सिर्फ एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों की है, जिनका जीवन और रोज़गार सीधे इस मुद्दे से जुड़ा है। संसद की खेती-बाड़ी स्थायी समिति ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि MSP गारंटी कानून जरूरी है। यह साफ करता है कि यह मुद्दा केवल किसानों तक सीमित नहीं, बल्कि संसद की भी भावना है। जब संसद की स्थायी समिति जैसी जिम्मेदार इकाई इसे सही ठहरा रही है, तो केंद्र सरकार को इसे लागू करने में देरी क्यों? 24 दिनों से एक किसान नेता अनशन पर बैठे हैं, यह सिर्फ उनके शरीर की परीक्षा नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। क्या सरकार संसद की भावना का सम्मान करेगी और किसानों की इस जायज़ मांग को पूरा करेगी? देश के अन्नदाता के प्रति यह उदासीनता न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि पूरे किसान वर्ग की उम्मीदों को भी चोट पहुंचा रही है। अब वक्त आ गया है कि सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाए और MSP गारंटी कानून बनाकर अपने वादों को निभाए। किसानों की मांगें न केवल जायज़ हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। सरदार डल्लेवाल जी जैसे नेता का संघर्ष इस बात का प्रतीक है कि किसान अपने अधिकारों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। अब केंद्र सरकार को भी यह दिखाना होगा कि वह अपने अन्नदाताओं के साथ खड़ी है।

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जनता से किए 7 मजबूत वादे। अब बदलाव की बारी आपकी! 5 अक्टूबर को बैलेट नंबर 4 दबाएं और हाथ के पंजे को विजयी बनाएं।✋

जनता से किए 7 मजबूत वादे। अब बदलाव की बारी आपकी! 5 अक्टूबर को बैलेट नंबर 4 दबाएं और हाथ के पंजे को विजयी बनाएं।✋

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Phogat_Vinesh's profile picture

यह सच में दुखद है कि किसान आज अपने ही देश में संघर्ष कर रहे हैं। एक ओर, उनकी मेहनत से उगाई गई फसल की पराली का धुआं दिल्ली तक पहुंचता है, जिसे सरकार और मीडिया बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। मगर मंडियों में अनाज के साथ धूल फांकते किसान, उनकी बर्बादी, उनका दर्द और उनकी मेहनत का हक न तो सेटेलाइट से दिखता है और न ही मीडिया में प्रमुखता पाता है। क्यों हमारे देश का अन्नदाता हर कदम पर उपेक्षित महसूस करता है? यह विडंबना है कि एक तरफ़ 'MSP जारी थी , जारी है और जारी रहेगी प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री दर्जनों बार ये दावे कर चुके हैं, वहीं दूसरी ओर मंडियों की हालत और किसानों की आवाज़ को अनदेखा किया जा रहा है। क्यों किसानों के उत्पाद पर MSP दिलाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही? किसान केवल हमारी कृषि व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि देश की रीढ़ हैं। उन्हें वो सम्मान और समर्थन मिलना चाहिए, जिसके वो हकदार हैं। #MSP #Paddy #FarmersProtest Congress Rahul Gandhi Priyanka Gandhi Vadra Bajrang Punia 🇮🇳 Hindustan Times The Hindu The Indian Express Dainik Bhaskar BBC News Hindi

Vinesh Phogat

240,850 views • 1 year ago

Phogat_Vinesh's profile picture

निर्मला बूरा हरियाणा की एक अत्यंत सम्मानित और उपलब्धि-सम्पन्न खिलाड़ी हैं। वे भीम अवार्डी, कॉमनवेल्थ गेम्स सिल्वर मैडलिस्ट, एशियन चैम्पियनशिप सिल्वर मैडलिस्ट, तथा 20 बार सीनियर नेशनल मैडलिस्ट रही हैं, जिनमें से 14–15 गोल्ड मेडल सिर्फ सीनियर नेशनल स्तर पर हैं। वर्तमान में वे हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर सेवा दे रही हैं। कुश्ती में आज के समय में वे सबसे सीनियर सक्रिय खिलाड़ी हैं, और इस उम्र में भी उनका निरंतर खेलना हम सभी के लिए एक प्रेरणा है। लेकिन हाल ही में हरियाणा में नेशनल के लिए हुए ट्रायल में उनके साथ अत्यंत अनुचित व्यवहार किया गया… निर्मला बूरा की ट्रायल तक नहीं ली गई, न कोई कारण बताया गया और न कोई आधिकारिक सूचना दी गई। फेडरेशन में गुंडे-बदमाशों को बैठा दिया जो मनमर्जी से, बिना किसी पारदर्शिता के, खिलाड़ियों को शामिल या बाहर करने का निर्णय ले रहे हैं। दुर्भाग्य यह है कि हरियाणा और केंद्र का खेल मंत्रालय इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि खिलाड़ी पूरे वर्ष कड़ी मेहनत करते हैं और उचित अवसर की उम्मीद में रहते हैं। यदि निर्मला बूरा जैसी अनुभवी और देश के लिए अनगिनत पदक जीतने वाली खिलाड़ी की सुनवाई नहीं हो रही, तो आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा? यह स्थिति केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय खेल तंत्र पर एक प्रश्न है और अब इसमें सुधार अनिवार्य हो चुका है। खेलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता बहाल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि हर खिलाड़ी को उसकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर पहचान मिल सके। मैं, निर्मला दीदी के सम्मान और हर खिलाड़ी के अधिकार के लिए खड़ी हूँ। मैं सरकार, खेल मंत्रालय और सभी जिम्मेदार अधिकारियों से आग्रह करती हूँ कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए और उनको न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।

Vinesh Phogat

23,906 views • 6 months ago

Phogat_Vinesh's profile picture

आज की इस विडियों में आप देख सकते है कि जींद के एकलव्य स्टेडियम की वास्तविक स्थिति क्या है? जब विधानसभा में रामराय गांव में स्विमिंग पूल की मांग उठाई गई, तो सरकार की ओर से कहा गया कि हमने ओलंपिक स्तर का स्टेडियम बना दिया है। लेकिन आप खुद देख सकते हैं कि ज़मीनी हकीकत क्या है। माननीय खेल मंत्री जी कहते हैं कि सरकार की योजना के अनुसार हर 10 किलोमीटर पर स्टेडियम उपलब्ध है। लेकिन सच्चाई यह है कि रामराय गांव से जींद का एकलव्य स्टेडियम लगभग 14 किलोमीटर दूर है। जिस स्टेडियम को ओलंपिक स्तर का बताया जा रहा है, उसकी वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, वहाँ न तो पानी की सही व्यवस्था है और न ही बाथरूम जैसी मूलभूत सुविधाएँ। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी दूर लड़कियाँ रोज़ प्रैक्टिस के लिए कैसे जाएँगी? इसके अलावा एक लाइन में प्रैक्टिस करने के लिए 25,000 से 30,000 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। सवाल ये है कि एक ही लाइन में 200–250 बच्चे कैसे प्रैक्टिस कर सकते हैं?, तो यह व्यवस्था किस तरह खिलाड़ियों के हित में है? गांव के बच्चों के लिए आना-जाना और स्टेडियम की फीस दोनों वहन करना बेहद मुश्किल है। दुर्भाग्य की बात यह है कि सरकार और उसके मंत्री खेलों के प्रति अपनी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नही है, लेकिन जब हमारे खिलाड़ी देश के लिए पदक जीतकर आते हैं, तो श्रेय लेने के लिए सबसे आगे खड़े हो जाते हैं। खिलाड़ियों को सुविधाएँ देना सरकार की जिम्मेदारी है, सिर्फ दावे करने से खेल और खिलाड़ी मजबूत नहीं बनते। Nayab Saini Gaurav Gautam

Vinesh Phogat

16,072 views • 3 months ago

Phogat_Vinesh's profile picture

मुझे यह अत्यंत दुःख और चिंता के साथ ज्ञात हुआ है कि हरियाणा के कई युवाओं को धोखे से रूस की सेना में भर्ती कर लिया गया और उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेजा गया है। इसी दौरान गांव मदनहेड़ी के युवक सोनू श्योराण ने इस युद्ध में अपनी जान गंवा दी है, जबकि अमन पूनिया नामक युवक ने अपनी जान बचाने की गुहार लगाई है। अमन पूनिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें उसने स्पष्ट बताया है कि भारतीय युवाओं को सिक्योरिटी जॉब का झांसा देकर रूस की सेना में भर्ती कर युद्ध क्षेत्र में भेजा जा रहा है। यह स्थिति बेहद गंभीर और मानवीय दृष्टि से चिंताजनक है। मैं एक लोक प्रतिनिधि और भारतीय नागरिक के नाते भारत सरकार, विशेष रूप से विदेश मंत्रालय से विनम्र अनुरोध करती हूँ कि इस पूरे प्रकरण का तत्काल संज्ञान लिया जाए। • रूस सरकार से तुरंत संपर्क स्थापित किया जाए • अमन पूनिया सहित सभी भारतीय युवाओं को सुरक्षित भारत वापस लाया जाए • और ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह केवल हरियाणा या किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि भारत के सम्मान और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न है। PMO India गृहमंत्री कार्यालय, HMO India Dr. S. Jaishankar

Vinesh Phogat

25,159 views • 7 months ago