
𝐏ʀᴀsᴏᴏɴ
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सुनिए, किन हालातों में दुनियाँ की चौथी सबसे बड़ी इकनॉमिक पॉवर के छात्र राजधानी में रहकर पढाई करते हैं।
𝐏ʀᴀsᴏᴏɴ183,219 просмотров • 1 месяц назад

Ye sunanda sharma ka consert dekhne k liye kitne paise lgte hai?
𝐏ʀᴀsᴏᴏɴ342,489 просмотров • 3 месяцев назад

सोशल मीडिया पर वायरल होने और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ अब इतनी तेज़ हो गई है कि कई बार कम उम्र के बच्चे भी बिना इसके दूरगामी प्रभाव समझे खुद को इंटरनेट पर पूरी तरह प्रदर्शित करने लगते हैं। जिस उम्र में पढ़ाई, खेलकूद, व्यक्तित्व विकास और जीवन के मूल्यों को समझने की जरूरत होती है, उस उम्र में लाइक्स, व्यूज़ और वायरल होने का दबाव बच्चों को गलत दिशा में ले जा सकता है। मेरा सरकार और अभिभावकों से निवेदन है कि बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन कम उम्र में डिजिटल दुनिया के जोखिमों से बचाना भी उतना ही जरूरी है। लोकप्रियता की दौड़ में कहीं बचपन ही न खो जाए।
𝐏ʀᴀsᴏᴏɴ292,083 просмотров • 4 месяцев назад

सोचिए, कुछ साल पहले तक अगर किसी मॉल, होटल या कपड़ों की दुकान के ट्रायल रूम में छिपा हुआ कैमरा मिलने की खबर आ जाती थी, तो पूरा देश गुस्से से भर उठता था। लोग इसे निजता पर हमला और बेहद शर्मनाक हरकत मानते थे। लेकिन आज सोशल मीडिया की अंधी दौड़ ने हालात कुछ ऐसे कर दिए हैं कि जिन चीज़ों को कभी लोग छिपकर रिकॉर्ड करते थे, उन्हें कुछ लोग खुद ही कैमरे के सामने रिकॉर्ड करके दुनिया के सामने परोस रहे हैं। कुछ लाइक्स, व्यूज़ और थोड़ी-सी वायरलिटी के लिए लोग अपनी निजता, गरिमा और भविष्य तक को दांव पर लगाने लगे हैं।
𝐏ʀᴀsᴏᴏɴ217,964 просмотров • 4 месяцев назад

कभी-कभी सोशल मीडिया देखकर चिंता होती है कि आखिर हम अपने बच्चों को किस दिशा में ले जा रहे हैं। जिस बच्ची की उम्र अभी मुश्किल से 15–16 साल होगी, उसे भी वायरल होने, फॉलोअर्स बढ़ाने और लोगों का ध्यान खींचने की ऐसी बेचैनी दिखाई देती है कि लगता है जैसे बचपन कहीं पीछे छूटता जा रहा है। लाइक्स और व्यूज़ की इस दौड़ ने बच्चों को समय से पहले ही एक ऐसी दुनिया में धकेल दिया है, जिसकी गंभीरता और परिणामों को समझना उनके लिए आसान नहीं है। मेरा सरकार, सोशल मीडिया कंपनियों और अभिभावकों से निवेदन है कि कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त और प्रभावी नियम बनाए जाएँ। हर चीज़ को कंटेंट बना देने की यह प्रवृत्ति आने वाली पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है। बच्चों को वायरल नहीं, काबिल बनने की ज़रूरत है। फॉलोअर्स नहीं, संस्कार और शिक्षा उनकी सबसे बड़ी पूंजी होनी चाहिए।
𝐏ʀᴀsᴏᴏɴ133,917 просмотров • 4 месяцев назад

हमें यह समझना चाहिए कि हम किन लोगों को अपना आदर्श बना रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि हम उन लोगों की आदतें और जीवनशैली अपना रहे हैं, जिन्होंने स्वयं अपने जीवन में गलत रास्ता चुना, अपने परिवार और अपनों का सम्मान नहीं किया। किसी भी व्यक्ति का अनुसरण करने से पहले उसके चरित्र, आचरण और मूल्यों को परखना आवश्यक है, क्योंकि अंततः हमारी आदतें ही हमारे व्यक्तित्व और भविष्य का निर्माण करती हैं।
𝐏ʀᴀsᴏᴏɴ32,935 просмотров • 3 месяцев назад
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