
Praveen Kumar IPS
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Indian Police Service (2001 Batch) | UP Cadre | ADG Zone Lucknow | Views are strictly personal.
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मेरे प्रभु की एक छवि में सब कुछ समाविष्ट ये नहीं तो फिर जीवन में होगा क्या अभीष्ट...
Praveen Kumar IPS22,051 views • 3 months ago

प्रचंड चंड वेग से, एक में अनेक से। लक्ष्मण संजीवन को, बढ़े उद्रेक से।। संत वृंत हनुमंत, हरि अरिहंत से। सुमेरु संजीवनि संग, रुद्र अभिषेक से।। प्रचंड चंड वेग से... राम जी का नाम है, राम जी का काम है। हर पल अविचल, जय सियाराम है।। काल ग्रस्त कालनेमि, बजरंगी टेक से। प्रचंड चंड वेग से... बूटी बूटी दिखात, बीते न कहीं रात। उखाड़ के पहाड़ को, धर लिया एक हाथ। राम के प्रताप से, चले अतिरेक से। प्रचंड चंड वेग से... सत्य का संग्राम है, तो युद्ध निष्काम है। राम काजु किए बिन, कहाँ विश्राम है। पहुंचे हनुमान जी, अतुलित संवेग से। प्रचंड चंड वेग से... #हनुमान_जन्मोत्सव_की_अनंत_शुभकामनाएं
Praveen Kumar IPS20,686 views • 3 months ago

ज़िंदगी की ज़मी में किसी कमी की नमी में इक दूब उगती है इक ऊब मिटती है नंगे पांव में ओस ताज़गी भरती है पीड़ा परिष्कार को यूँ ही छलकती है... दिया जलाते हम जिस सर-ज़मीं में रहते हैं कांटे भी उस शुभ शमी में यक़ीन उबरने का मौजूद हर ज़मी में मत बिखरना तुम किसी भी कमी में! -प्रवीण
Praveen Kumar IPS77,365 views • 3 years ago

व्यष्टि और समष्टि के मध्य संवाद की चेष्टा में 'वह एक और मन' की कुछ पंक्तियाँ.....
Praveen Kumar IPS10,883 views • 2 months ago

_संबंधों की ज्यामिति का एक भाव चित्र_... जो तुम सोचो वो मैं सोचूं तब खुद से कोई राय करूं। शायद यही मुनासिब ढंग है। इस से निज अभिप्राय करूं! मुश्किल सा ही हो जाता है एक धरातल पे होना। चाहूं बहुत उसी तल होना पर खुद को असहाय करूं! अपने अपने विन्यासों में सबकी अपनी आश निराशा किस अनुकृति की प्रत्याशा में जीवन को कृशकाय करूं! प्रिय से ये चाहत होती है इक जैसी अनुभूति पाएं। कैसे इस अनुक्रम में खुद को उसका ही पर्याय करूं! दो रंगों के मिल जाने से नए रंग में प्राण भरूं, अपनी जड़ को छोड़ के फिर से नए तने की राह तकूं! यही प्रकति है, यही नियम है, क्यों न इसका ध्यान धरूं। कुछ निज छोड़ूं, कुछ पर जोड़ूँ... सर्वनिष्ठ संदाय करूं! ChatGPT के नजरिए से..... What you think, I think the same Then I form my own domain Perhaps this is the right way, To find my own perspective each day. It's hard to be on the same page, I yearn to be, but feel helpless in this cage. In our own designs, we all have hopes and despairs, In anticipation of what replica, life becomes frail and rare. What my dear feel, I wish to feel the same way, How do I become a reflection of him each day? When two colors blend, a new hue comes alive, Leaving my roots, I await a new stem to thrive. This is nature, this is the rule, Why not focus on this, let go of my own cool? I'll let go of few mine, add some from others... Make a universal balance, harmonize with each other's borders.....
Praveen Kumar IPS27,166 views • 10 months ago

Presenting audio version of my book' Deh mann madhyam tumhare yog ka'.......
Praveen Kumar IPS31,037 views • 1 year ago

जय नारी शक्ति, जय मिशन शक्ति, दुष्टों के दमन को तीक्ष्ण दृष्टि। बाहर-भीतर की हिंसा को, कर शमित,मार्ग करती प्रशस्ति। जय नारी शक्ति, जय मिशन शक्ति, दुष्टों के दमन को तीक्ष्ण दृष्टि.. सारे विभाग दिन रात जाग, संकल्प बद्ध, कर्तव्य-राग। उन्नयन मार्ग ,जागे सुभाग, सातत्य समाहित सर्वनिष्ठ। जय नारी शक्ति, जय मिशन शक्ति, दुष्टों के दमन को तीक्ष्ण दृष्टि.. प्रतिपल प्रविष्टि, सुखमय समष्टि, विकसित भारत पाए विशिष्टि। अपराधमुक्त, सहकार सृष्टि, विधि का शासन नित समादिष्ट। जय नारी शक्ति, जय मिशन शक्ति, दुष्टों के दमन को तीक्ष्ण दृष्टि.. जय मातृ शक्ति, जय मिशन शक्ति, जय मिशन शक्ति, जय मिशन शक्ति। #MissionShaktiUPP
Praveen Kumar IPS18,607 views • 9 months ago

मस्तक, हृदय, कान का, यदि चाहो कल्याण डीजे से तौबा करो, ये है ज़हर समान। स्नायु तंत्र अनमोल है, कर लो कुछ संज्ञान ध्वनि प्रदूषण त्याग दो, संवर जाएगी जान। आप सभी से अपील है कि डीजे के अभिशाप से बचें और इस संबंध में अयोध्या के ख्यातिलब्ध नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव के संदेश को सुनें...
Praveen Kumar IPS13,185 views • 10 months ago

"ध्यायतो विषयान्पुंस: सङ्गस्तेषूपजायते | सङ्गात्सञ्जायते काम: कामात्क्रोधोऽभिजायते || क्रोधाद्भवति सम्मोह: सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम: | स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति || Translation: As a man contemplates sense-objects, attachment for them arises, from attachment, desire for them will be born, from desire arises anger, from anger comes delusion, from delusion, comes loss of memory, from loss of memory, comes destruction of discrimination, and from destruction of discrimination he perishes" गीता के उपरोक्त श्लोक को पढ़ कर उपजी काव्य अनुभूति एक संक्षिप्त नज़्म के रूप में प्रस्तुत है.....
Praveen Kumar IPS10,774 views • 10 months ago