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Priyanka Kushwaha

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प्रिया मौर्य के साथ हुई खागा की घटना में आरएसएस . विश्व हिंदू परिषद .बजरंग दल जैसे हिन्दू संगठन के लोग एक हिंदू धर्म की बेटी को न्याय दिलाने के लिए आगे नही आ रहे । क्या मौर्य हिंदू नही हैं??

प्रिया मौर्य के साथ हुई खागा की घटना में आरएसएस . विश्व हिंदू परिषद .बजरंग दल जैसे हिन्दू संगठन के लोग एक हिंदू धर्म की बेटी को न्याय दिलाने के लिए आगे नही आ रहे । क्या मौर्य हिंदू नही हैं??

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रोशन यादव जी गवाह और सबूत के आधार पर FIR होता है आपके पास दोनों नहीं है फर्जी केस और आपका इमोशनल कार्ड नहीं चलेगा बिहार की जनता आपकी सच्चाई और आपके भाई की सच्चाई पूरी तरह जानता है आपके भाई पांच दोस्तों के साथ नेपाल क्या करने गया था आपका भाई दारू का सेवन करता है आपके भाई को पहले से बीमारी था जिसका दवाई चल रहा था उसको मिर्गी भी आता था वह भी किसी से छुपा हुआ नहीं है नेपाल पुलिस का पोस्टमार्टम रिपोर्ट सब कुछ बता देगा इसलिए इमोशनल कार्ड खेलकर लोगों को गुमराह करना बंद कीजिए खान सर को दफनाने के लिए जिस गड्ढे को आप खोद रहे हो उस गड्ढे में आप गिरोगे प्रिंस यादव के दोस्त गिरेगा विपिन यादव गिरेगा आपका रिश्तेदार गिरेगा अपनी नाकामी और बदनामी को छुपाने के लिए फर्जी FIR आवेदन लेकर थाना का चक्कर काट रहे हो समर्थकों के साथ धरना दे रहे हो कुछ नहीं मिलने वाला है दुनिया सब जानती है आप कौन सा खेल खेल रहे हो कुछ मुट्ठी भर समर्थकों के साथ आप इमोशनल कार्ड खेल रहे हो तो यह आपकी भूल है अभी भी खान के पास समर्थकों का हुजुम और जनसैलाब है पर खान सर आपके तरफ बेवकूफ नहीं है रोशन आनंद जी अपने गलती को सुधारीए और अपने कामों में लग जाएं यही आपके स्वास्थ्य और सेहत के लिए बेहतर होगा। ईश्वर पर विश्वास रखिए जो जैसा करेगा वैसा ही पाएगा हम सब तो मात्र खिलौना है परिवर्तन ही संसार का नियम है इसका पालन कीजिए #KhanSir

Priyanka Kushwaha

69,002 views • 1 month ago

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प्रशांत किशोर की मां कायस्थ जाति से हैं और पिता ब्राह्मण जाति से,, यानी जातिगत रूप से वह एक हाइब्रिड है। ऐसे में जब वह सामाजिक न्याय या वंचित वर्ग की बात करता है, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक नौटंकी लगती है। प्रशांत किशोर न तो किसी संघर्षशील पृष्ठभूमि से आता है, न ही उसका जमीनी राजनीति से कोई परंपरागत संबंध रहा है। सत्ता के गलियारों में घुसने के लिए उसने रणनीति और सौदेबाज़ी को हथियार बनाया। आज वही पीके बार-बार सामाजिक न्याय, बदलाव और जन सुराज जैसे भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल करता है लेकिन सच्चाई यह है कि उसके अंदर न तो सामाजिक संघर्ष का कोई अनुभव है, न ही कोई वैचारिक प्रतिबद्धता। जो व्यक्ति कल तक मोदी का प्रचारक था, वही कुछ समय बाद नीतीश कुमार का सलाहकार बन जाता है। फिर वही व्यक्ति कांग्रेस, ममता बनर्जी और जगन मोहन रेड्डी के लिए काम करने लगता है। यानी जहां पैसा मिला, वहां मुंह मारा,, बस यही उसकी असली पहचान है। बिहार के युवाओं को भ्रमित करने के लिए उसने ‘जन सुराज यात्रा’ की एक स्क्रिप्टेड नौटंकी शुरू की। गांव-गांव घूमना, कैमरे लगाना, तैयार सवाल-जवाब करना और नैतिकता के नाम पर भाषण झाड़ना,, ये सब सिर्फ एक सोची-समझी मार्केटिंग थी ताकि किसी विपक्षी पार्टी से मोटी रकम का सौदा किया जा सके। प्रशांत किशोर का हर कदम निजी लाभ और सत्ता की भूख से प्रेरित होता है। उसे न विचारधारा की परवाह है, न समाज सुधार की। और ऐसे व्यक्ति को जन आंदोलनकारी या समाज का मसीहा कहना देश की राजनीति के साथ धोखा है। अब सोचिए... जो कल तक सत्ता के दलालों का एजेंट था, क्या आज उसके दिखावे और बड़े-बड़े भाषणों पर भरोसा किया जाना चाहिए?

Priyanka Kushwaha

38,822 views • 1 year ago

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