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Ravi Gahlot 🇮🇳

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| Indian | Social | Political | Equality | Appreciate Your Life 🤝 Life is Very Beautiful 😍 Don't Permotional DM ✍️

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दलित दूल्हे की सुरक्षा में 200 पुलिसकर्मियों को गांव में तैनात किया गया हैं , ना तो इस गांव में मुग़ल हैं , ना पाकिस्तानी और ना ही चीनी ना तो बांग्लादेशी , इस गांव में रहने वाले सभी लोग HINDU होने का दावा करते हैं , लेकिन बात घोड़ी पर चढ़ने की आती है तब HINDU EKTA फुस हो जाती है , AJMER के लवेड़ा गांव में अगड़ी जाति के लोगों ने धमकी दी कि दलित दूल्हा घोड़ी नही चढ़ना चाहिए , परिवार ने पुलिस में शिकायत की और सुरक्षा की मांग की , HINDU जाति के नाम पर दूसरे HINDU पर हमला ना करे , इसलिए भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर बारात को सुरक्षित निकाला गया , कौन है वो लोग जो बोलते है देश में जातिवाद नही है जातिवाद एक बीमारी है जो कभी खत्म ही नहीं होगी। अभी भी लोगों को लगता है कि दलितों का आरक्षण नहीं मिलना चाहिए ? जब तक जातिवाद है तब तक आरक्षण रहना चाहिए।।

दलित दूल्हे की सुरक्षा में 200 पुलिसकर्मियों को गांव में तैनात किया गया हैं , ना तो इस गांव में मुग़ल हैं , ना पाकिस्तानी और ना ही चीनी ना तो बांग्लादेशी , इस गांव में रहने वाले सभी लोग HINDU होने का दावा करते हैं , लेकिन बात घोड़ी पर चढ़ने की आती है तब HINDU EKTA फुस हो जाती है , AJMER के लवेड़ा गांव में अगड़ी जाति के लोगों ने धमकी दी कि दलित दूल्हा घोड़ी नही चढ़ना चाहिए , परिवार ने पुलिस में शिकायत की और सुरक्षा की मांग की , HINDU जाति के नाम पर दूसरे HINDU पर हमला ना करे , इसलिए भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर बारात को सुरक्षित निकाला गया , कौन है वो लोग जो बोलते है देश में जातिवाद नही है जातिवाद एक बीमारी है जो कभी खत्म ही नहीं होगी। अभी भी लोगों को लगता है कि दलितों का आरक्षण नहीं मिलना चाहिए ? जब तक जातिवाद है तब तक आरक्षण रहना चाहिए।।

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लाल गमछा माथे पर लपेटे दो व्यक्ति ऑर्केस्ट्रा में नाचने वाली मजबूर महिला की आबरू के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं , महिला के स्तन , पेट , गाल , गर्दन और शरीर के अंग को दोनों विकृत मानसिकता आदमी नोंच रहे हैं। ऑर्केस्ट्रा में को खुशी से नही नाचता , हंसते मुस्कुराते चेहरे के पीछे बेबसी का दर्द होता है , ,ऑर्केस्ट्रा में महिलाएं मजबूरी में नाचती हैं।

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लाल गमछा माथे पर लपेटे दो व्यक्ति ऑर्केस्ट्रा में नाचने वाली मजबूर महिला की आबरू के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं , महिला के स्तन , पेट , गाल , गर्दन और शरीर के अंग को दोनों विकृत मानसिकता आदमी नोंच रहे हैं। ऑर्केस्ट्रा में को खुशी से नही नाचता , हंसते मुस्कुराते चेहरे के पीछे बेबसी का दर्द होता है , ,ऑर्केस्ट्रा में महिलाएं मजबूरी में नाचती हैं।

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"ढोंगी महामंडलेश्वर" बोल रही है लालू के बारे में नहीं जानती थी, मुझे पता नहीं था लालू यादव कौन है..."-👇 लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति के एक प्रमुख नेता हैं, जो सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए जाने जाते हैं। वे बिहार के मुख्यमंत्री (1990-1997) और भारत के रेल मंत्री (2004-2009) रह चुके हैं। उनके समाज सुधार के प्रयासों .... सामाजिक न्याय और पिछड़ों का उत्थान उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को मजबूत समर्थन दिया, जिससे ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को आरक्षण मिला। बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति को स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। दलितों और पिछड़ों को राजनीतिक मंच देना बिहार में यादव, कुर्मी, दलित और अन्य पिछड़े वर्गों को सत्ता में भागीदारी दिलाने में अग्रणी रहे। उन्होंने "पिछड़ों का नेता" बनकर गरीब और ग्रामीण जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई। सामंती व्यवस्था का विरोध उन्होंने बिहार में जातिवादी और सामंती व्यवस्था को चुनौती दी, जिससे वंचित वर्गों को सशक्त होने का अवसर मिला। गरीबों और भूमिहीन किसानों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। शिक्षा और रोजगार में सुधार उनके शासनकाल में गरीब छात्रों के लिए योजनाएं लागू की गईं, जिनसे शिक्षा का स्तर बढ़ा। उन्होंने रेलवे में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए और रेलवे को मुनाफे में लाने का दावा किया। सांप्रदायिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्ष राजनीति लालू यादव ने सांप्रदायिक ताकतों का खुलकर विरोध किया। 1990 में अयोध्या में रथयात्रा के दौरान उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी को बिहार में गिरफ्तार कर सांप्रदायिक तनाव को रोकने का प्रयास किया। लालू यादव की राजनीति को कुछ लोग "मंडल बनाम कमंडल" की राजनीति मानते हैं, जहां उन्होंने पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश की। हालांकि, उनके शासनकाल में "जंगलराज" और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे, लेकिन सामाजिक सुधारों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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