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ravish kumar

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किताब: इश्क में शहर होना, Free Voice, बोलना ही है । https://t.co/8OYAHh77Cp सब्सक्राइब करें ।

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ज्ञानेश कुमार को लगा था कि SIR के नाम पर करोड़ों लोगों के वोट काट देंगे। जो कहानी सुनाएँगे, जनता सुनकर सो जाएगी? पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए समय नहीं था मगर SIR करना ही था। प्रक्रियाओं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में वोट छीनने के अपराध से बच नहीं सकते। शर्म आनी चाहिए कि उनके इस्तीफ़े, SIR रद्द करने की माँग को लेकर जनता सड़क पर है। पिछले साल राहुल गांधी ने शालीन शब्दों में महादेवपुरा और अलंद में वोट चोरी का उदाहरण दिया था तब ज्ञानेश कूमार प्रेस कांफ्रेंस करने आए और राहुल गांधी से हलफनामा और माफीनामा मांगने लगे थे। इस बार राहुल गांधी ज्ञानेश कुमार को चोर बोल रहे हैं, ज्ञानेश कुमार चुप हैं। क्योंकि जनता को चोरी की यह कहानी समझ आ गई है। यह दिन भी देखना था। चुनाव आयुक्त इस देश के हीरो हुआ करते थे, आज उन्हें चोर कहा जा रहा है।

ज्ञानेश कुमार को लगा था कि SIR के नाम पर करोड़ों लोगों के वोट काट देंगे। जो कहानी सुनाएँगे, जनता सुनकर सो जाएगी? पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए समय नहीं था मगर SIR करना ही था। प्रक्रियाओं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में वोट छीनने के अपराध से बच नहीं सकते। शर्म आनी चाहिए कि उनके इस्तीफ़े, SIR रद्द करने की माँग को लेकर जनता सड़क पर है। पिछले साल राहुल गांधी ने शालीन शब्दों में महादेवपुरा और अलंद में वोट चोरी का उदाहरण दिया था तब ज्ञानेश कूमार प्रेस कांफ्रेंस करने आए और राहुल गांधी से हलफनामा और माफीनामा मांगने लगे थे। इस बार राहुल गांधी ज्ञानेश कुमार को चोर बोल रहे हैं, ज्ञानेश कुमार चुप हैं। क्योंकि जनता को चोरी की यह कहानी समझ आ गई है। यह दिन भी देखना था। चुनाव आयुक्त इस देश के हीरो हुआ करते थे, आज उन्हें चोर कहा जा रहा है।

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एक प्रदर्शन बिहार से बिहार के लाखों BSSC अभ्यर्थियों की ओर से आपसे एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान देने का आग्रह है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) द्वारा द्वितीय इंटर-स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (विज्ञापन 02/23) का विज्ञापन वर्ष 2023 में जारी किया गया था। इतने लंबे समय के बाद भी अभ्यर्थी परीक्षा की स्पष्ट तिथि का इंतजार कर रहे हैं। इस भर्ती में आवेदन प्रक्रिया में कई बार बदलाव/विस्तार हुआ, लेकिन अभ्यर्थियों को अभी तक ऐसी स्पष्ट समय-सारणी नहीं मिली है जिससे उन्हें यह पता चल सके कि परीक्षा आखिर कब होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस भर्ती में लगभग 26 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे और बाद में रिक्तियों की संख्या बढ़ाकर लगभग 24,492 की गई। यह केवल इंटर लेवल तक सीमित समस्या नहीं है। BSSC 4th Graduate Level (CGL-4), 10वीं स्तर तथा BSO जैसी भर्तियों को लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा की तारीख और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अभ्यर्थियों के पास कोई स्पष्ट और बाध्यकारी परीक्षा कैलेंडर नहीं है। लाखों युवा वर्षों से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह निश्चित रूप से पता नहीं होता कि परीक्षा कब होगी। इससे उनकी पढ़ाई, उम्र सीमा, आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर सीधा असर पड़ता है। हमारी कुछ प्रमुख मांगें हैं— 1. BSSC का स्पष्ट एवं बाध्यकारी परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए। हर भर्ती की संभावित परीक्षा, परिणाम और आगे की प्रक्रिया की समय-सीमा सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों को बार-बार अनिश्चितता में न रहना पड़े। 2. 25% संविदा वेटेज की व्यवस्था समाप्त की जाए। सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं समानता सुनिश्चित हो। 3. परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। परीक्षा के आयोजन से लेकर प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका/OMR, उत्तर-कुंजी, आपत्ति और परिणाम तक प्रत्येक चरण में स्पष्ट व्यवस्था हो। 4. परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से कराने पर विचार किया जाए। अभ्यर्थियों की एक बड़ी मांग है कि बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेन-पेपर एवं OMR आधारित परीक्षा कराई जाए। हमारा उद्देश्य किसी माध्यम के खिलाफ होना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग करना है जिसमें अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रक्रिया पर अधिक भरोसा हो और प्रश्नपत्र एवं OMR की उपलब्धता के माध्यम से रिकॉर्ड भी स्पष्ट रहे। 5. परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र और OMR/उत्तर-पत्र की पारदर्शी व्यवस्था दी जाए। इससे अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन को समझ सकेंगे और किसी भी आपत्ति की स्थिति में प्रक्रिया अधिक पारदर्शी रहेगी। 6. वर्षों से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की समस्या पर सार्वजनिक चर्चा हो। बिहार के युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ आवेदन की तारीख नहीं, बल्कि परीक्षा और पूरी भर्ती प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा चाहिए। रविश कुमार जी, आपसे विनम्र आग्रह है कि BSSC की लंबित भर्तियों और परीक्षा कैलेंडर के मुद्दे को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से उठाएं। लाखों अभ्यर्थियों की आवाज को उचित मंच मिले और संबंधित आयोग/सरकार से यह पूछा जाए कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद परीक्षा और पूरी चयन प्रक्रिया को निश्चित समय में पूरा करने की व्यवस्था क्यों नहीं है। हम किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं। हमारी मांग केवल इतनी है कि भर्ती समय पर हो, परीक्षा पारदर्शी हो, सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले और परीक्षा कैलेंडर स्पष्ट रूप से जारी किया जाए। धन्यवाद।

एक प्रदर्शन बिहार से बिहार के लाखों BSSC अभ्यर्थियों की ओर से आपसे एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान देने का आग्रह है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) द्वारा द्वितीय इंटर-स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (विज्ञापन 02/23) का विज्ञापन वर्ष 2023 में जारी किया गया था। इतने लंबे समय के बाद भी अभ्यर्थी परीक्षा की स्पष्ट तिथि का इंतजार कर रहे हैं। इस भर्ती में आवेदन प्रक्रिया में कई बार बदलाव/विस्तार हुआ, लेकिन अभ्यर्थियों को अभी तक ऐसी स्पष्ट समय-सारणी नहीं मिली है जिससे उन्हें यह पता चल सके कि परीक्षा आखिर कब होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस भर्ती में लगभग 26 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे और बाद में रिक्तियों की संख्या बढ़ाकर लगभग 24,492 की गई। यह केवल इंटर लेवल तक सीमित समस्या नहीं है। BSSC 4th Graduate Level (CGL-4), 10वीं स्तर तथा BSO जैसी भर्तियों को लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा की तारीख और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अभ्यर्थियों के पास कोई स्पष्ट और बाध्यकारी परीक्षा कैलेंडर नहीं है। लाखों युवा वर्षों से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह निश्चित रूप से पता नहीं होता कि परीक्षा कब होगी। इससे उनकी पढ़ाई, उम्र सीमा, आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर सीधा असर पड़ता है। हमारी कुछ प्रमुख मांगें हैं— 1. BSSC का स्पष्ट एवं बाध्यकारी परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए। हर भर्ती की संभावित परीक्षा, परिणाम और आगे की प्रक्रिया की समय-सीमा सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों को बार-बार अनिश्चितता में न रहना पड़े। 2. 25% संविदा वेटेज की व्यवस्था समाप्त की जाए। सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं समानता सुनिश्चित हो। 3. परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। परीक्षा के आयोजन से लेकर प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका/OMR, उत्तर-कुंजी, आपत्ति और परिणाम तक प्रत्येक चरण में स्पष्ट व्यवस्था हो। 4. परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से कराने पर विचार किया जाए। अभ्यर्थियों की एक बड़ी मांग है कि बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेन-पेपर एवं OMR आधारित परीक्षा कराई जाए। हमारा उद्देश्य किसी माध्यम के खिलाफ होना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की मांग करना है जिसमें अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रक्रिया पर अधिक भरोसा हो और प्रश्नपत्र एवं OMR की उपलब्धता के माध्यम से रिकॉर्ड भी स्पष्ट रहे। 5. परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र और OMR/उत्तर-पत्र की पारदर्शी व्यवस्था दी जाए। इससे अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन को समझ सकेंगे और किसी भी आपत्ति की स्थिति में प्रक्रिया अधिक पारदर्शी रहेगी। 6. वर्षों से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की समस्या पर सार्वजनिक चर्चा हो। बिहार के युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ आवेदन की तारीख नहीं, बल्कि परीक्षा और पूरी भर्ती प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा चाहिए। रविश कुमार जी, आपसे विनम्र आग्रह है कि BSSC की लंबित भर्तियों और परीक्षा कैलेंडर के मुद्दे को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से उठाएं। लाखों अभ्यर्थियों की आवाज को उचित मंच मिले और संबंधित आयोग/सरकार से यह पूछा जाए कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद परीक्षा और पूरी चयन प्रक्रिया को निश्चित समय में पूरा करने की व्यवस्था क्यों नहीं है। हम किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं। हमारी मांग केवल इतनी है कि भर्ती समय पर हो, परीक्षा पारदर्शी हो, सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले और परीक्षा कैलेंडर स्पष्ट रूप से जारी किया जाए। धन्यवाद।

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एक राहगीर ने यह वीडियो दिया है। हॉट सिटी ग़ाज़ियाबाद की सोसायटी का है।

एक राहगीर ने यह वीडियो दिया है। हॉट सिटी ग़ाज़ियाबाद की सोसायटी का है।

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सूरत रेलवे स्टेशन। वंदे भारत के अलावा भी रेल यात्रियों के अपने सपने हैं।

सूरत रेलवे स्टेशन। वंदे भारत के अलावा भी रेल यात्रियों के अपने सपने हैं।

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नारायण मूर्ति कहते हैं कि युवाओं को सप्ताह में सत्तर घंटे काम करना चाहिए।भारत में एक काम कई घंटे लाइन में लगना भी है। यह वीडियो 1 नवबंर का है। मुंबई में रिज़र्व बैंक के बाहर कई लोग बहुत ख़ुशी से क़तार में लगे हैं। दो हज़ार का नोट बदलवाने। 2016 की नोटबंदी आज भी जारी है। बस सच्चाई मीडिया से दूर है और जनता बोलना भूल गई है।

नारायण मूर्ति कहते हैं कि युवाओं को सप्ताह में सत्तर घंटे काम करना चाहिए।भारत में एक काम कई घंटे लाइन में लगना भी है। यह वीडियो 1 नवबंर का है। मुंबई में रिज़र्व बैंक के बाहर कई लोग बहुत ख़ुशी से क़तार में लगे हैं। दो हज़ार का नोट बदलवाने। 2016 की नोटबंदी आज भी जारी है। बस सच्चाई मीडिया से दूर है और जनता बोलना भूल गई है।

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24 जून 2024, धर्मेंद्र प्रधान जब लोकसभा में शपथ लेने आए तब नारा लगा था, नीट, नीट, शेम, शेम...अगर धर्मेंद्र प्रधान में तब भी जज़्बा होता तो पेपर लीक को जड़ से ख़त्म कर देते। दो साल बाद आज 24 जुलाई 2026 है। यह वीडियो इसलिए देखिए ताकि उन लोगों को आप जवाब दे सकें जो कह रहे हैं कि प्रधान के इस्तीफे से क्या होगा। क्योंकि प्रधान फेल रहे हैं। नीट की चोरी को लेकर विपक्ष ने ठीक एक साल एक महीना पहले याद दिला दिया था। कम से कम इन दो सालों में वे नहीं कर पाए। यह तो साबित होता है। कई दिन हो गए, कोई विपक्षी दल नहीं तोड़ा गया है ताकि देश में दहशत पसर जाए कि अब क्या होगा, कोई बचेगा या नहीं। सरकार अगर युवाओं से संवाद करना चाहती है तो राघव चड्ढा को उनके बीच भेज दे, वे जेन ज़ी स्कूल ऑफ नायकत्व के प्रोडक्ट हैं। उन्हें मालूम होगा या उन 20 सांसदों की परेड करा दे जो जनता की नब्ज़ को सुपर फास्ट गति से समझते हुए तृणमूल छोड़ कर NCPI में शामिल हो गए। जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बनाया न अटल बिहारी वाजपेयी न संघ ने सुरेंद्र नाथ बनर्जी, मुलायम सिंह यादव या नीतीश कुमार ने। NCPI के संस्थापक का कम से कम एक इंटरव्यू तो छपना ही चाहिए कि अगर विपक्ष ने ज़ुबान बंद नहीं की तो 24 घंटे के भीतर राहुल गांधी और अखिलेश यादव को छोड़ कर उनसे सारे सांसद NCPI में होंगे। यह मान लीजिए कि इस देश में दो चार कालेज यूनिवर्सिटी को छोड़ कर सब के सब इस तरह काम कर रहे हैं जैसे युवाओं को किसी लायक नहीं बनने देना है। किसी लायक बन जाएंगे तो वे धर्म की राजनीति को ठीक से समझ जाएंगे। विपक्ष से भी सवाल करने लग जाएंगे।

ravish kumar

770,245 次观看 • 3 个月前

ravish_journo's profile picture

यह जंतर-मंतर का वीडियो है। आज दिल्ली की उमस भरी गर्मी जान ले रही है। उस हाल में वहाँ लोग ठसा-ठस भरे हैं। हाथ का पंखा लेकर नौजवान एक दूसरे को हवा का मरहम लगा रहे हैं। घर में पंखे के नीचे राहत नहीं है, वहाँ तो क्या ही हालत होगी। इस गर्मी में वहां मौजूद लोगों की हालत भी ख़राब हो रही होगी। सोनम वांगचुक को जबरन हटाने के बाद भी धरना कमज़ोर नही हुआ है। लोगों ने आगे आकर इस धरने को थाम लिया है। कौन नेता है, कैसा नेता है, यह सब सवाल पीछे चला गया है। आज पूरे दिन जंतर-मंतर पर भारी भीड़ रही। धरना स्थल तक जाने के लिए लोग कतार में बिना शिकायत खड़े हैं। वहाँ से लौटने वाले लोगों की लाइन राजीव चौक मेट्रो में भी बढ़ती जा रही है। सोमवार को सरकार का इम्तहान है। कल वह मार्च में बाधा डालेगी या मार्च होने देगी। आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग़ाज़ियाबाद इन महानगरों, महाज़िलों में रहने वाले जेन ज़ी, जेन बी जेन एक्स, जेन जो भी, किसी से पूछ लीजिए। क्या यहाँ एक भी सरकारी शैक्षणिक संस्थान है, जिसकी दुनिया छोड़िए, भारत में पहचान हो। जिसकी गुणवत्ता की तारीफ होती हो। जिसमें पढ़ने का सपना देखा जाता हो। एक भी नहीं है। सोचिए लाखों करोड़ों की आबादी के बीच एक ढंग का कॉलेज नहीं है। जहाँ भारत का एस्पिरेशनल क्लास रहता है। वह 12 साल से व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में डूबा रह गया। बच्चों के लिए अमेरिका का वीज़ा बनवाता रहा लेकिन मुड़ कर नहीं देखा कि उसके शहर में एक भी कॉलेज काम का क्यों नहीं है। इसके कारण मिडिल क्लास के साथ साथ नियो मिडिल क्लास के बच्चे भी घिस रहे हैं, पिस रहे हैं, मिट रहे हैं। जो मेहनत मज़दूरी करने वाला तबका है, जिसे लग रहा है कि पढ़ाई से उसके परिवार का भविष्य बदल सकता है, वह कड़ी मेहनत कर अपने बच्चों को किसी तरह स्कूल और कालेज भेज रहा है। उसे पता ही नहीं है कि वह अपने बच्चों को जिन सपनों के लिए तैयार कर रहा है, वह कब का रौंदा जा चुका है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग़ाज़ियाबाद और गुरुग्राम के घरों में काम करने वाली महिलाओं से पूछ लीजिए। हाड़ तोड़ मेहनत कर रही हैं और अपने बेटी की पढ़ाई के लिए फीस भर रही हैं। उनके बच्चे भी ख़ूब मेहनत करते हैं लेकिन सामाजिक पूंजी नहीं होने के कारण उन्हें गाइड नहीं मिल पाता। हर दिन लाखों सपनों की हत्या हो रही है। समाज के इस तबके को अभी शिक्षा से जुड़े मुद्दे की समझ नहीं है, कभी तो उन्हें भी पता चलेगा कि सारा सिस्टम इसी तरह डिज़ाइन किया गया है कि उनके बाद उनकी बेटियाँ भी घरों में काम करती रहेंगी । शिक्षा को बर्बाद किया गया ताकि लाखों लोगों का भविष्य बर्बाद हो सके और वे कम से कम पैसे में काम करने के लिए हमेशा मजबूर रहें। भारत के भविष्य के साथ लंबे समय तक यह धोखा हुआ है। हो सकता है भारत का युवा धर्म की राजनीति में फिर से सनक जाएगा, वह गौरव और पहचान राजनीति में धर्म से पाने लगेगा, यह सब हो सकता है, हो ही रहा है, लेकिन अगले तीस साल में भी वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए बड़े स्तर के शैक्षणिक संस्थानों को नहीं पा सकता है। यह लड़ाई आज की नहीं है, अगले पचास साल की है।

ravish kumar

526,031 次观看 • 3 个月前

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It’s Bisan from Gaza, I am still alive इसकी घोषणा होते ही दिल धड़क गया और आँखें छलक गईं। ग़ज़ा की इस साहसी पत्रकार को देखकर भारत की हत्यारी मीडिया को शर्म आनी चाहिए। भारत के पत्रकार और उनके चैनलों के मालिक अर्जित लोकतंत्र की हत्या करने में लगे हैं, बिसान अपनी जान पर खेल कर हिंसा का क्रूर चेहरा उजागर कर रही है। बिसान का वीडियो संदेश सुनकर ही झुरझुरी हो गई। Peabody में ग़ज़ा से लेकर अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की नीतियों के ख़िलाफ़ बनी डॉक्यूमेंट्री थीं जिन्हें सम्मानित किया गया। बिसान को उनकी पत्रकारिता के लिए पुरस्कृत किया गया। कमाल की शाम थी। बिसान के लिए ताली बजाते वक्त लगा कि जीवन सार्थक हुआ। आप भी बिसान के लिए दुआएँ कीजिये और ताली बजाइये। ग़ज़ा के लिए बोलिए।

ravish kumar

1,177,810 次观看 • 2 年前

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AQI की हालत भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव जैसी हो गई है।युद्ध की विभीषिका को लेकर चेतावनी दी जाती है, निंदा होती है मगर बम बरसते रहते हैं। वैसे ही आप लाख फेफड़ों का बुरा हाल बताएँगे, लोग पटाखे फोड़ेंगे ही। सुप्रीम कोर्ट को अब अपना नाम बदल कर ‘टिप्पणी कोर्ट’ रख लेना चाहिए और पटाखे फोड़ने की पूरी छूट दे देनी चाहिए। वक्त की मांग है कि पटाखे छोड़ने के बाद की हवा को ‘पवित्र पवन’ घोषित किया जाए। हर नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह खुले मैदान में जाकर इस ‘पवित्र पवन’ का सेवन करे। भविष्यवाणी- दिल्ली के अगले चुनाव में एयर प्युरिफ़ायर बाँटने की होड़ शुरू हो सकती है या इस पर सब्सिडी दी जा सकती है। नेता हर मोहल्ले में टावर लगाने का वादा कर सकते हैं जिस पर चढ़ कर जनता पटाखे भी फोड़ सकती है। हम विश्व गुरू हैं। इसे कम से कम सौ बार दोहराएँ। बाक़ी सब ठीक हो जाएगा।

ravish kumar

1,338,386 次观看 • 2 年前

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रेलवे की हक़ीक़त अब टीवी पर नहीं आती। दस साल में त्योहारों के समय की भीड़ में कोई सुधार नहीं हुआ। दस साल पहले कम से कम इन बातों को कवर किया जाता था, अब इन्हें ग़ायब कर दिया जाता है। सूरत की यह तस्वीर देख कर याद कुछ नहीं आया क्योंकि भूला ही नहीं था। जो भूल चुके हैं वो याद कर सकते हैं। क्या रेल मंत्री इस तरह से बोगी में घुस कर दिखा सकते हैं? यह किसी को न दिखे इसीलिए वंदे भारत दनादन लाँच की जा रही है ताकि ग़रीब और आम लोग भी पास से गुज़रती वंदे भारत को देख कर चकित हो जाएँ। वो तकलीफ़ भूल कर सपना देखने लग जाएँ। मगर राजधानी से लेकर वंदे भारत तक इन लोगों के लिए कुछ नहीं बदला है।

ravish kumar

1,122,521 次观看 • 3 年前

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मतदान के दिन सपा उम्मीदवार लालजी वर्मा के घर पुलिस छापा मार रही है। यूपी के जानकार कहते हैं कि लालजी वर्मा जी बड़े नेता हैं। अपनी बिरादरी के ही नहीं यूपी के भी। उनके घर छापा पड़ा है। इससे बेहतर होता कि विपक्ष के सभी उम्मीदवारों को जेल में डाल देते। उनके वोटर को भी जेल में डाल देते फिर बीजेपी को चुनाव जीतने से कौन रोक लेता।हर दिन लोकतंत्र की दीवार की खुरचन उतर रही है। लालजी वर्मा जी का बयान देख रहा था। कितने शांत और शालीन तरीक़े से बयान दे रहे थे। आज के दिन छापा मारने के बाद भी उनका संयम देखने लायक़ है। दूसरी तरफ़ आज प्रधानमंत्री का इंटरव्यू चल रहा है। चौथी बार मेगा एक्सक्लूसिव! चौथी बार? वो भी एक्सक्लूसिव? उसी चैनल को? टेम्पो वाले को? पीएम को अब एक चैनल खोल लेना चाहिए। रिकार्डिंग का सामान तो है ही। शीशे के सामने बैठकर घंटों बात करनी चाहिए और उसका सीधा प्रसारण करना चाहिए। क़ानून बने कि जब पीएम का प्रसारण होगा तब सबको देखना होगा। चुनाव आयुक्त से लेकर गन्ना आयुक्त को भी देखना होगा। इससे होगा यह कि इंटरव्यू के नीचे पाँच हज़ार पचास हज़ार व्यूज़ लिखा नहीं आएगा। हर इंटरव्यू का व्यूज़ वन बिलियन जाएगा।

ravish kumar

605,415 次观看 • 2 年前