rituraj singh's banner
rituraj singh's profile picture

rituraj singh

@riturajsingh11 • 2,109 subscribers

सांप पालता था दातों समेत..और दिल के आंगन बबुल खिलाता था...कोई शिव का भक्त रहा होगा,, जहरीला वक्त रहा होगा.......raj

Videos

📺We spent 45 minutes browsing ♀️Netflix ♂️ trying to find a movie we both liked,,only to have sex that lasted shorter than the 'Skip Intro' button....... 💦
1:27

Sensitive content

This media may contain sensitive content.

♨️लोग..औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं,,रूह भी होती है उस में..ये कहाँ सोचते हैं...रूह क्या होती है..इस से उन्हें मतलब हीं नहीं,,वो तो बस तन के तक़ाज़ों का कहा मानते हैं... ...रूह मर जाती है तो जिस्म है चलती हुई लाश,,इस हक़ीक़त को समझते हैं..न पहचानते हैं... ...कितनी सदियों से ये वहशत का चलन जारी है,, कितनी सदियों से है क़ाएम..ये गुनाहों का रिवाज... मैं न ज़िंदा हूँ..कि मरने का सहारा ढूँडूँ,, और न मुर्दा हूँ कि..जीने के ग़मों से छूटूँ... कौन बतलाएगा मुझ को किसे जा कर पूछूँ,, ज़िंदगी क़हर के साँचों में ढलेगी कब तक... कब तलक आँख न खोलेगा ज़माने का ज़मीर,, ज़ुल्म और जब्र की ये रीत चलेगी कब तक.......
1:35

Sensitive content

This media may contain sensitive content.

riturajsingh11's profile picture

♨️लोग..औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं,,रूह भी होती है उस में..ये कहाँ सोचते हैं...रूह क्या होती है..इस से उन्हें मतलब हीं नहीं,,वो तो बस तन के तक़ाज़ों का कहा मानते हैं... ...रूह मर जाती है तो जिस्म है चलती हुई लाश,,इस हक़ीक़त को समझते हैं..न पहचानते हैं... ...कितनी सदियों से ये वहशत का चलन जारी है,, कितनी सदियों से है क़ाएम..ये गुनाहों का रिवाज... मैं न ज़िंदा हूँ..कि मरने का सहारा ढूँडूँ,, और न मुर्दा हूँ कि..जीने के ग़मों से छूटूँ... कौन बतलाएगा मुझ को किसे जा कर पूछूँ,, ज़िंदगी क़हर के साँचों में ढलेगी कब तक... कब तलक आँख न खोलेगा ज़माने का ज़मीर,, ज़ुल्म और जब्र की ये रीत चलेगी कब तक.......

rituraj singh

85,881 просмотров • 14 дней назад

Больше нет контента для загрузки