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घायल कर दे छोरा तू, तेरी अदा निराली है, तेरी एक मुस्कान में जैसे दुनिया सारी है। नज़रें तेरी जब उठती हैं, दिल की धड़कन बढ़ जाती है, तेरी बातों की मिठास से हर शाम संवर जाती है। चेहरे पर तेरे चाँद सा नूर, बातों में जादू बसा है, तुझे देखकर लगता है जैसे कोई सपना सजा है। तेरे होने से रंगीन लगती हर राह और हर मंज़र, दिल कहता है बस देखता रहूँ तुझको पल-पल, हर पल। तू सामने आ जाए तो शब्द कहीं खो जाते हैं, तेरी सादगी के चर्चे दिल में घर कर जाते हैं। ❤️✨ “घायल कर दे छोरा तू, तेरे अंदाज़ बड़े कमाल, एक झलक जो मिल जाए तेरी, बन जाए दिन खुशहाल।” ✨❤️

घायल कर दे छोरा तू, तेरी अदा निराली है, तेरी एक मुस्कान में जैसे दुनिया सारी है। नज़रें तेरी जब उठती हैं, दिल की धड़कन बढ़ जाती है, तेरी बातों की मिठास से हर शाम संवर जाती है। चेहरे पर तेरे चाँद सा नूर, बातों में जादू बसा है, तुझे देखकर लगता है जैसे कोई सपना सजा है। तेरे होने से रंगीन लगती हर राह और हर मंज़र, दिल कहता है बस देखता रहूँ तुझको पल-पल, हर पल। तू सामने आ जाए तो शब्द कहीं खो जाते हैं, तेरी सादगी के चर्चे दिल में घर कर जाते हैं। ❤️✨ “घायल कर दे छोरा तू, तेरे अंदाज़ बड़े कमाल, एक झलक जो मिल जाए तेरी, बन जाए दिन खुशहाल।” ✨❤️

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“ये चीज़ तो हर लड़की के पास होती है जनाब, बस आपको ही उसे उलझाने का शौक़ है बेहिसाब। वरना सीधी-सादी बात को भी इस कदर घुमा देते हो, कि लोग सोचते रह जाएँ और आप मुस्कुरा देते हो। 😄”

“ये चीज़ तो हर लड़की के पास होती है जनाब, बस आपको ही उसे उलझाने का शौक़ है बेहिसाब। वरना सीधी-सादी बात को भी इस कदर घुमा देते हो, कि लोग सोचते रह जाएँ और आप मुस्कुरा देते हो। 😄”

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बहुत भाग्यशाली माँ हो आप, जो आपको श्रवण जैसा बेटा मिला है। कलयुग में जहाँ रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है, वहाँ आपका बेटा सेवा, संस्कार और सम्मान की मिसाल बना है। माँ की दुआओं का असर ही है कि ऐसा बेटा मिला, जो हर सुख-दुख में आपका सहारा बना। भगवान उसके जीवन में खुशियों की वर्षा करें, और माँ-बेटे का यह अटूट प्रेम सदा बना रहे। 🙏❤️🌹

बहुत भाग्यशाली माँ हो आप, जो आपको श्रवण जैसा बेटा मिला है। कलयुग में जहाँ रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है, वहाँ आपका बेटा सेवा, संस्कार और सम्मान की मिसाल बना है। माँ की दुआओं का असर ही है कि ऐसा बेटा मिला, जो हर सुख-दुख में आपका सहारा बना। भगवान उसके जीवन में खुशियों की वर्षा करें, और माँ-बेटे का यह अटूट प्रेम सदा बना रहे। 🙏❤️🌹

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वीडियो वायरल के चक्कर में लड़के पता नहीं ऐसे वीडियो क्यों बनाते है समाज को और देश को बदनाम नहीं करना चाहिए

वीडियो वायरल के चक्कर में लड़के पता नहीं ऐसे वीडियो क्यों बनाते है समाज को और देश को बदनाम नहीं करना चाहिए

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ये कहानी सचमुच की चेतावनी जैसी है। इसका सार यही है कि किसी की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ करना, किसी का भरोसा तोड़ना या किसी के जज़्बातों से खेलना बहुत भारी पड़ सकता है। अक्सर ऐसी घटनाएँ बदनामी, अफ़सोस और कभी-कभी अपराध की ओर भी ले जाती हैं। एक छोटा सा उदाहरण—मान लो किसी ने अपने प्यार या दोस्ती के भरोसे का फायदा उठाया, झूठ बोला, या धोखा दिया। शुरू में मज़ा या फायदा लग सकता है, लेकिन आख़िर में वही व्यक्ति सामाजिक, मानसिक और कभी-कभी कानूनी परेशानी में पड़ जाता है।

ये कहानी सचमुच की चेतावनी जैसी है। इसका सार यही है कि किसी की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ करना, किसी का भरोसा तोड़ना या किसी के जज़्बातों से खेलना बहुत भारी पड़ सकता है। अक्सर ऐसी घटनाएँ बदनामी, अफ़सोस और कभी-कभी अपराध की ओर भी ले जाती हैं। एक छोटा सा उदाहरण—मान लो किसी ने अपने प्यार या दोस्ती के भरोसे का फायदा उठाया, झूठ बोला, या धोखा दिया। शुरू में मज़ा या फायदा लग सकता है, लेकिन आख़िर में वही व्यक्ति सामाजिक, मानसिक और कभी-कभी कानूनी परेशानी में पड़ जाता है।

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सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में होली मना रहे थे। वे बिना किसी मर्यादा का ध्यान दिए, दूसरों को परेशान कर रहे थे, सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील वीडियो बना रहे थे और शोर-शराबा कर रहे थे। एक जगह तो एक परिवार परेशान होकर बाहर आया। बुजुर्ग ने कहा, “हमारे घर में संस्कार और सम्मान की परंपरा है। आप अपने मनोरंजन के लिए किसी और की शांति क्यों छीन रहे हो?” उस दिन रमेश और सीमा ने अपनी बेटी को यह सिखाया कि त्योहार का असली मजा केवल रंगों में नहीं, बल्कि मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी में है। वे सोशल मीडिया पर वायरल होने के लालच में अपने संस्कार न भूलें। रंगों की मस्ती तो जरूरी है, लेकिन दूसरों का सम्मान और परिवार की परंपराएं और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में होली मना रहे थे। वे बिना किसी मर्यादा का ध्यान दिए, दूसरों को परेशान कर रहे थे, सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील वीडियो बना रहे थे और शोर-शराबा कर रहे थे। एक जगह तो एक परिवार परेशान होकर बाहर आया। बुजुर्ग ने कहा, “हमारे घर में संस्कार और सम्मान की परंपरा है। आप अपने मनोरंजन के लिए किसी और की शांति क्यों छीन रहे हो?” उस दिन रमेश और सीमा ने अपनी बेटी को यह सिखाया कि त्योहार का असली मजा केवल रंगों में नहीं, बल्कि मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी में है। वे सोशल मीडिया पर वायरल होने के लालच में अपने संस्कार न भूलें। रंगों की मस्ती तो जरूरी है, लेकिन दूसरों का सम्मान और परिवार की परंपराएं और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं।

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लड़कियों का डांस: आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और कला की पहचान डांस केवल एक शौक या मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे खूबसूरत माध्यम है। खासकर लड़कियों के लिए डांस आत्मविश्वास, आज़ादी और आत्म-अभिव्यक्ति का प्रतीक बन चुका है। आज के दौर में लड़कियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और डांस की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। भारत में भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी और कुचिपुड़ी जैसे शास्त्रीय नृत्य हों या फिर हिप-हॉप, कंटेम्पररी और फ्री-स्टाइल जैसे आधुनिक डांस फॉर्म — लड़कियाँ हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उनके हर स्टेप में मेहनत, लगन और जुनून साफ दिखाई देता है। डांस से न केवल शरीर फिट रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है और मंच पर खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना सिखाता है। कई लड़कियाँ डांस को करियर के रूप में चुन रही हैं और कोरियोग्राफर, डांस टीचर या परफॉर्मर बनकर सफलता हासिल कर रही हैं।

लड़कियों का डांस: आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और कला की पहचान डांस केवल एक शौक या मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे खूबसूरत माध्यम है। खासकर लड़कियों के लिए डांस आत्मविश्वास, आज़ादी और आत्म-अभिव्यक्ति का प्रतीक बन चुका है। आज के दौर में लड़कियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और डांस की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। भारत में भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी और कुचिपुड़ी जैसे शास्त्रीय नृत्य हों या फिर हिप-हॉप, कंटेम्पररी और फ्री-स्टाइल जैसे आधुनिक डांस फॉर्म — लड़कियाँ हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उनके हर स्टेप में मेहनत, लगन और जुनून साफ दिखाई देता है। डांस से न केवल शरीर फिट रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है और मंच पर खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना सिखाता है। कई लड़कियाँ डांस को करियर के रूप में चुन रही हैं और कोरियोग्राफर, डांस टीचर या परफॉर्मर बनकर सफलता हासिल कर रही हैं।

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आपकी बात से साफ है कि यह स्थिति आपको मानसिक रूप से भारी लग रही है। 40 की उम्र के आसपास शादी न हो पाना कई बार सिर्फ “घरवालों की वजह से” नहीं होता, बल्कि इसके पीछे अलग-अलग कारण मिलकर काम करते हैं—परिवार की सोच, जिम्मेदारियाँ, रिश्ते न आना, या फिर आपकी अपनी प्राथमिकताएँ और परिस्थितियाँ भी। सबसे पहले एक बात ज़रूरी है: शादी का फैसला अंततः आपका भी होता है, सिर्फ घरवालों का नहीं। अगर आपको सच में शादी करनी है, तो अब आपको “इंतज़ार” से आगे बढ़कर कुछ ठोस कदम सोचने होंगे। आप कुछ व्यावहारिक रास्ते देख सकती हैं: आप घरवालों से सीधी और शांत बातचीत करें—यह पूछें कि असली रुकावट क्या है: रिश्ता नहीं मिल रहा, या वे टाल रहे हैं, या उनकी कोई चिंता है। जब कारण साफ होगा तभी समाधान निकलेगा। अगर रिश्ते नहीं आ रहे, तो आप खुद भी पहल कर सकती हैं—रिश्ते देखने वाले प्लेटफॉर्म, परिचितों का नेटवर्क, या भरोसेमंद मैट्रिमोनियल सेवाएँ। अगर घरवाले भावनात्मक या सामाजिक कारणों से रोक रहे हैं, तो धीरे-धीरे अपनी financial और personal independence बढ़ाना जरूरी हो जाता है, ताकि फैसले आपके हाथ में भी हों। और एक अहम बात—अगर उम्र को लेकर समाज क्या सोचेगा यह दबाव है, तो उसे बहुत ज्यादा वजन देना जरूरी नहीं है। सही जीवनसाथी उम्र से ज्यादा समझ, सम्मान और compatibility पर मिलता है।

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38,918 просмотров • 12 дней назад

लड़की के साथ हो रही बर्बरता… और खामोश जिम्मेदार लोग! आजकल सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो/घटना सामने आई है जिसे देखकर दिल दहल जाता है। एक लड़की के साथ जिस तरह की बर्बरता की जा रही है, वह सिर्फ इंसानियत पर नहीं बल्कि पूरे समाज पर सवाल खड़ा करती है। सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या वहां कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं था? क्या कोई सिक्योरिटी नहीं थी जो यह सब रोक सके? किसी भी सार्वजनिक जगह पर अगर ऐसी घटना होती है, तो वहां मौजूद लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। सिर्फ तमाशा देखना या वीडियो बनाना समस्या का समाधान नहीं है। चुप रहना भी कहीं न कहीं गलत को बढ़ावा देना है। सिक्योरिटी व्यवस्था का मकसद ही यही होता है कि किसी के साथ अन्याय न हो। अगर वहां सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और फिर भी यह सब हुआ, तो यह उनकी लापरवाही है। और अगर सिक्योरिटी ही नहीं थी, तो यह प्रशासन की गंभीर चूक है। सबसे दुखद बात यह है कि अक्सर पीड़ित लड़की ही सवालों के घेरे में आ जाती है — उसके कपड़ों पर, उसके व्यवहार पर, उसके वहां मौजूद होने पर। जबकि असली सवाल उन लोगों से होना चाहिए जो अत्याचार करते हैं और उन लोगों से भी जो इसे रोक सकते थे लेकिन चुप रहे। समाज को यह समझना होगा कि किसी भी लड़की की सुरक्षा सिर्फ उसके परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। हमें ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी होगी, प्रशासन से जवाब मांगना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी बर्बरता दोबारा न हो। इंसानियत तभी जिंदा रहेगी जब हम गलत के खिलाफ खड़े होंगे — चाहे वह किसी के साथ भी हो।
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लड़की के साथ हो रही बर्बरता… और खामोश जिम्मेदार लोग! आजकल सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो/घटना सामने आई है जिसे देखकर दिल दहल जाता है। एक लड़की के साथ जिस तरह की बर्बरता की जा रही है, वह सिर्फ इंसानियत पर नहीं बल्कि पूरे समाज पर सवाल खड़ा करती है। सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या वहां कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं था? क्या कोई सिक्योरिटी नहीं थी जो यह सब रोक सके? किसी भी सार्वजनिक जगह पर अगर ऐसी घटना होती है, तो वहां मौजूद लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। सिर्फ तमाशा देखना या वीडियो बनाना समस्या का समाधान नहीं है। चुप रहना भी कहीं न कहीं गलत को बढ़ावा देना है। सिक्योरिटी व्यवस्था का मकसद ही यही होता है कि किसी के साथ अन्याय न हो। अगर वहां सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और फिर भी यह सब हुआ, तो यह उनकी लापरवाही है। और अगर सिक्योरिटी ही नहीं थी, तो यह प्रशासन की गंभीर चूक है। सबसे दुखद बात यह है कि अक्सर पीड़ित लड़की ही सवालों के घेरे में आ जाती है — उसके कपड़ों पर, उसके व्यवहार पर, उसके वहां मौजूद होने पर। जबकि असली सवाल उन लोगों से होना चाहिए जो अत्याचार करते हैं और उन लोगों से भी जो इसे रोक सकते थे लेकिन चुप रहे। समाज को यह समझना होगा कि किसी भी लड़की की सुरक्षा सिर्फ उसके परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। हमें ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी होगी, प्रशासन से जवाब मांगना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी बर्बरता दोबारा न हो। इंसानियत तभी जिंदा रहेगी जब हम गलत के खिलाफ खड़े होंगे — चाहे वह किसी के साथ भी हो।

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56,339 просмотров • 3 месяцев назад

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