
Sahil Razvi
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यह वीडियो सोशल मीडिया वायरल हो रही है। पुलिस का व्यवहार देखिए एक बार।
Sahil Razvi1,110,144 просмотров • 1 год назад

ATS द्वारा गिरफ्तार किए गए समीर खान के पिता को भी सुनना चाहिए। जिस तरह से दूसरे आरोपी तुषार चौहान के मां बाप के इंटरव्यू आ रहे हैं, उस हिसाब से समीर खान के माता पिता के इंटरव्यू नहीं आ रहे हैं। तुषार के माता पिता उसे ज़हनी बीमार बताकर उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
Sahil Razvi56,323 просмотров • 1 месяц назад

वर्षा गायकवाड़, जो कि महाराष्ट्र की एक लोकसभा सीट से कांग्रेस की सांसद हैं, का कहना है कि 19 साल बाद रिहा हुए बेगुनाह मुस्लिमों की दोबारा जांच होनी चाहिए और उन्हें फिर से जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ फडणवीस सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। ध्यान देने की बात है कि इन नेताओं को संसद तक पहुँचाने में मुस्लिम समुदाय ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
Sahil Razvi119,423 просмотров • 10 месяцев назад

ये बुर्के को लेकर कैसा ऑब्सेसन है?अपनी माँ-बहनों को बुर्का पहनाकर उनके साथ नाचने जैसी हरकतें की जा रही हैं। Amroha Police, UP POLICE कृपया इस मामले का संज्ञान लें और संबंधित कॉलेज प्रशासन के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई करें। यह पहली बार नहीं है। ऐसी गतिविधियों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की गंभीर आशंका है।
Sahil Razvi52,623 просмотров • 5 месяцев назад

इन जनाब को सुनिए, ये साहब जमीअत उलेमा हिंद के अध्यक्ष हैं। ये कह रहे हैं, की मैं मुस्लिम लीडरशिप का बहुत बड़ा विरोधी हूँ। असदुद्दीन ओवैसी को केवल आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना तक ही सीमित रहना चाहिए। उन्हें और कहीं चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। ख़ुद भाई साहब सेक्युलर पार्टियों के कन्धों पर रहते राज्यसभा जाएंगे, लेकिन मुस्लिम लीडरशिप को आगे बढ़ने नहीं देंगे। इन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में तो ओवैसी साहब को ज़रा भी घुसने नहीं देंगे, कहीं ऐसा तो नहीं कि सेक्युलर दलों से बंद कमरे में कोई डील हो गयी हो, जिसके सबब इम्तियाज़ जलील साहब को हरवाया गया?
Sahil Razvi173,794 просмотров • 2 лет назад

फाइनली! देर से ही सही, पर मौलाना तौक़ीर रज़ा साहब ने आज एकदम दूध का दूध पानी का पानी कर दिया। लिहाज़ा शाहबुद्दीन रज़वी बरेलवी को शाहबुद्दीन रज़वी बहराइची कहा जाए, उसका न तो मरकज़ से कोई ताअल्लुक़ है और न ही बरेली शरीफ से। उसने बरेलवी जमाअत को जितना बदनाम किया है, उससे कहीं ज़्यादा मीडिया वालों ने बदनाम किया है। लिहाज़ा, वह व्यक्ति सरकार का दलाल है। सरकार का पिट्ठू है। उसका दरगाह बरेली शरीफ से कोई दूर-दूर तक नाता नहीं है। -Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi सुन लीजिएगा, और अपने नाम के आगे से बरेलवी टाइटल हटा दीजिए अगर थोड़ी ग़ैरत बाक़ी हो तो।
Sahil Razvi108,409 просмотров • 1 год назад

यह वीडियो उत्तराखंड के नैनीताल के गौजानी की है। देखिए किस तरह हिंदूवादी अपनी नीचता पर उतर आए हैं। यह नीचता का सबसे निचला पायदान होता है। भाजपा नेता मदन जोशी कुछ लोगों के साथ एक मुस्लिम व्यक्ति के शव को दफनाने से रोकने पहुंचे। मुस्लिम समुदाय का कहना था कि यह ज़मीन उनकी कब्रिस्तान की है, लेकिन जोशी ने दावा किया कि यह ज़मीन कब्रिस्तान की नहीं है और पास में हिंदू परिवार रहते हैं, इसलिए दफनाने का विरोध किया। बाद में धामी प्रशासन ने आदेश दिया कि शव को किसी और जगह दफनाया जाए।
Sahil Razvi91,297 просмотров • 1 год назад

"डरा हुआ भारतीय हिंदू", इनका कहना है कि इनके घर की जिम्मेदारी कोई ले तो ये मुल्लों (मुसलमानों) का कत्ले आम करेंगे।
Sahil Razvi28,747 просмотров • 3 месяцев назад

“मैं सौ बार मर चुका हूँ, और अगर मौत दरवाज़ा खटखटाएगी, तो मैं उसकी आँखों में आँखें डालकर देखूँगा।” ये शब्द थे शहीद वकील शाहिद आज़मी के, जिनकी आज से 16 साल पहले इसी दिन मुंबई के कुर्ला टैक्सीमैन कॉलोनी स्थित उनके चैंबर में गोली मारकर शहीद कर दिया गया था। शाहिद आज़मी को सलाम।
Sahil Razvi23,578 просмотров • 3 месяцев назад

आला हज़रत दरगाह से प्रेस कॉन्फ्रेंस। मौलाना तौक़ीर रज़ा साहब के भाई तौसीफ रज़ा खान ने कहा कि पुलिस झूठे आरोप लगाकर नौजवानों को जेल में डाल रही है। पुलिस मस्जिद के इमामों, मुअज्ज़िनों को परेशान कर रही है। बेकसूर मुसलमानों के घरों के सामन बुलडोजर लेकर खड़ी है। अगर जल्दी ही ये सब नहीं रोका गया, तो बड़ा फैसला लिया जाएगा।
Sahil Razvi23,476 просмотров • 8 месяцев назад

ये बिहार के मोहम्मद ग़ुलाम जिलानी हैं। वे आंखों से देख नहीं सकते। अल्लाह ने उन्हें आंखों की रोशनी नहीं दी। लेकिन उन्हें बेपनाह हुनर से नवाज़ा है। वे कई तरह की आवाज़ें निकालने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। इसके साथ ही, उनके दिल में इश्क़-ए-मुहम्मद की जो आग है, वैसा सच्चा इश्क़ हर किसी के नसीब में नहीं होता। सुनिए ज़रा।
Sahil Razvi13,722 просмотров • 4 месяцев назад

अब तो इन ‘देशभक्त आतंकियों’ की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि अब ये महिलाओं के हिजाब तक खींचने लगे हैं! लगता है अब 'जय श्री राम' का नारा लगवाने के लिए महिला सम्मान को भी कुर्बान करना ज़रूरी समझ लिया गया है। वाकई, ये लोग अब मॉरल पुलिसिंग से सीधे मॉब टेररिज्म पर आ चुके हैं। गृहमंत्री कार्यालय, HMO India NCW क्या अब भी आंखें बंद रखेंगे या इन 'संस्कारी दरिंदों' के लिए कोई इलाज मुकर्रर करेंगे? अब वक्त आ गया है कि इन पर भी वही सख्ती दिखाई जाए, जो अक्सर ‘दूसरों’ के लिए आरक्षित रहती है। कहीं ऐसा न हो कि कल को ये संविधान को भी जबरन 'जय श्री राम' बुलवाने पर आमादा हो जाएं! -Wasim Akram Tyagi भाई
Sahil Razvi10,326 просмотров • 1 год назад
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