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Nadeem Shaikh

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|| Peace 🍁|| Politics || Ex Muslim || Ex Waqf Board Officer ||

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ढाई किलो का होने दो या कितना भी मोटा होने दो तुझे फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्यो तजुर्बा जो है।

ढाई किलो का होने दो या कितना भी मोटा होने दो तुझे फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्यो तजुर्बा जो है।

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ये सूअर अब ट्रेनों मे भी गंदगी करने घुस गया😡

ये सूअर अब ट्रेनों मे भी गंदगी करने घुस गया😡

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या अल्लाह, ये तोतली कब सुधरेगी 🥹 वैसे बास्केट काफ़ी बड़ा था।

या अल्लाह, ये तोतली कब सुधरेगी 🥹 वैसे बास्केट काफ़ी बड़ा था।

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मदरसे मे एक दुधारू बकरी आयी है।🤲🤲

मदरसे मे एक दुधारू बकरी आयी है।🤲🤲

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अल्लाह कसम नहीं मजा आये आपको तो X छोड़ दूंगा पूरा वीडियो देखो 😅

अल्लाह कसम नहीं मजा आये आपको तो X छोड़ दूंगा पूरा वीडियो देखो 😅

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यह वाली बकरी कहा मिलेगी पाई जान ?

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यह वाली बकरी कहा मिलेगी पाई जान ?

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ये कह रहा है, "खा, आलू चाट, खा"

ये कह रहा है, "खा, आलू चाट, खा"

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माशाअल्लाह सुभानल्लाह🤲🤲

माशाअल्लाह सुभानल्लाह🤲🤲

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कौन कहता है की दीन मे खावातीनो को आज़ादी नहीं है।
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इजराइल ने आज के हमले में ईरान की एक परमाणु स्थल को मिसाइलों के घातक हमलों में पिघला दिया है। मिसाइलें इतनी घातक थीं कि 2 किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाली हर धातु की वस्तु प्लाज्मा की तरह गैस बनकर उड़ गई और धरातल की मिट्टी पकी हुई ईटों की तरह पत्थर बन गई। संभवतः कई दशकों से इतना घातक हमला किसी ने नहीं किया होगा कि 2Km के क्षेत्र का सब कुछ गैस बनकर उड़ जाए। भारत के लिए तब और ज्यादा अच्छा होगा जब सारे मुस्लिम देश इसराइल के विरुद्ध युद्ध में भाग लें। अरब के देश यदि इजरायल के विरुद्ध युद्ध में भाग लेते हैं तो उसे ईरान से लेकर सीरिया और सीरिया से लेकर सऊदी अरब, यमन तक सब कुछ जल उठेगा, सारे तेल भंडार, तेल के कुएं और बुर्ज खलीफा मिसाइल का शिकार बनेंगे और यह पूरा इस्लामिक वर्ड 200 साल पीछे चला जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि हम फिर पाकिस्तान बांग्लादेश का समाधान भी कर सकते हैं और भारत में घर वापसी का व्यापक सरकारी प्रोग्राम भी चलाया जा सकता है। अर्थात हजार साल के आक्रांताओं के आक्रमणों के कारण कन्वर्ट हुए लोगों को घर वापस लाया जा सकता है और उस स्थिति में भारत का विरोध करने की सामर्थ्य किसी में नहीं होगी। लेकिन यदि युद्ध ईरान और इसराइल तक ही सीमित रहता है तो बर्बाद ईरान, कमजोर ईरान भारत के हित में है जब तक ईरान कमजोर रहेगा उसे मुस्लिम ब्रदरहुड की याद कम आएगी और हम ईरान का प्रयोग पाकिस्तान के विरुद्ध, तुर्की के विरुद्ध और मिडिल ईस्ट की राजनीति को कंट्रोल करने में भी कर सकते हैं, चाबहार पोर्ट का पूर्ण उपयोग हम कर पाएंगे। हम अपने अधिक से अधिक हित साध सकते हैं। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जितना खतरा भारत को पाकिस्तान के परमाणु बमों से होगा उतना ही खतरा ईरान के परमाणु बमों से भारत को सदैव रहेगा। सीधी सी बात यह है कि ईरान के परमाणु बम का खतरा केवल इसराइल को नहीं है बल्कि ईरान के परमाणु बमों का खतरा भारत को भी है। यह बहुत गंभीर और तथ्यात्मक बात है। भारत पाकिस्तान के युद्ध में सारे मुस्लिम देशों को अपना मुस्लिम ब्रदरहुड याद आ जाता है। मलेशिया, तुर्की, बांग्लादेश, मालदीप, यमन, कुवैत जैसे देश पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध युद्ध में तत्काल मदद भेजते हैं। इस बात की कोई गारंटी नहीं दे सकता की ईरान के हथियार भारत के लिए खतरा नहीं बनेंगे। मेरी दृष्टि में सशक्त और मजबूत पाकिस्तान जितना बड़ा खतरा भारत के लिए है, भविष्य में उतना ही बड़ा खतरा हमें ईरान से भी होगा। ईरान से भारत के वर्तमान व्यापार संबंध केवल तब तक हैं जब तक कि ईरान कमजोर है और वो इसराइल और अमेरिका से युद्ध में घिरा हुआ है। यदि आज ईरान, इसराइल और अमेरिका से युद्ध में ना घिरा होता तो भारत भी ईरान के लिए पाकिस्तान की तरह ही शत्रु होता। ईरानी जनता भी इसमें ख़ुशी हो रही है सुनो
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इजराइल ने आज के हमले में ईरान की एक परमाणु स्थल को मिसाइलों के घातक हमलों में पिघला दिया है। मिसाइलें इतनी घातक थीं कि 2 किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाली हर धातु की वस्तु प्लाज्मा की तरह गैस बनकर उड़ गई और धरातल की मिट्टी पकी हुई ईटों की तरह पत्थर बन गई। संभवतः कई दशकों से इतना घातक हमला किसी ने नहीं किया होगा कि 2Km के क्षेत्र का सब कुछ गैस बनकर उड़ जाए। भारत के लिए तब और ज्यादा अच्छा होगा जब सारे मुस्लिम देश इसराइल के विरुद्ध युद्ध में भाग लें। अरब के देश यदि इजरायल के विरुद्ध युद्ध में भाग लेते हैं तो उसे ईरान से लेकर सीरिया और सीरिया से लेकर सऊदी अरब, यमन तक सब कुछ जल उठेगा, सारे तेल भंडार, तेल के कुएं और बुर्ज खलीफा मिसाइल का शिकार बनेंगे और यह पूरा इस्लामिक वर्ड 200 साल पीछे चला जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि हम फिर पाकिस्तान बांग्लादेश का समाधान भी कर सकते हैं और भारत में घर वापसी का व्यापक सरकारी प्रोग्राम भी चलाया जा सकता है। अर्थात हजार साल के आक्रांताओं के आक्रमणों के कारण कन्वर्ट हुए लोगों को घर वापस लाया जा सकता है और उस स्थिति में भारत का विरोध करने की सामर्थ्य किसी में नहीं होगी। लेकिन यदि युद्ध ईरान और इसराइल तक ही सीमित रहता है तो बर्बाद ईरान, कमजोर ईरान भारत के हित में है जब तक ईरान कमजोर रहेगा उसे मुस्लिम ब्रदरहुड की याद कम आएगी और हम ईरान का प्रयोग पाकिस्तान के विरुद्ध, तुर्की के विरुद्ध और मिडिल ईस्ट की राजनीति को कंट्रोल करने में भी कर सकते हैं, चाबहार पोर्ट का पूर्ण उपयोग हम कर पाएंगे। हम अपने अधिक से अधिक हित साध सकते हैं। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जितना खतरा भारत को पाकिस्तान के परमाणु बमों से होगा उतना ही खतरा ईरान के परमाणु बमों से भारत को सदैव रहेगा। सीधी सी बात यह है कि ईरान के परमाणु बम का खतरा केवल इसराइल को नहीं है बल्कि ईरान के परमाणु बमों का खतरा भारत को भी है। यह बहुत गंभीर और तथ्यात्मक बात है। भारत पाकिस्तान के युद्ध में सारे मुस्लिम देशों को अपना मुस्लिम ब्रदरहुड याद आ जाता है। मलेशिया, तुर्की, बांग्लादेश, मालदीप, यमन, कुवैत जैसे देश पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध युद्ध में तत्काल मदद भेजते हैं। इस बात की कोई गारंटी नहीं दे सकता की ईरान के हथियार भारत के लिए खतरा नहीं बनेंगे। मेरी दृष्टि में सशक्त और मजबूत पाकिस्तान जितना बड़ा खतरा भारत के लिए है, भविष्य में उतना ही बड़ा खतरा हमें ईरान से भी होगा। ईरान से भारत के वर्तमान व्यापार संबंध केवल तब तक हैं जब तक कि ईरान कमजोर है और वो इसराइल और अमेरिका से युद्ध में घिरा हुआ है। यदि आज ईरान, इसराइल और अमेरिका से युद्ध में ना घिरा होता तो भारत भी ईरान के लिए पाकिस्तान की तरह ही शत्रु होता। ईरानी जनता भी इसमें ख़ुशी हो रही है सुनो

Nadeem Shaikh

90,383 просмотров • 1 год назад