
Sanjay Nirupam
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अपने पैतृक गांव बहुआरा में आज एक कलश यात्रा में शामिल हुआ। कड़ाके की धूप।हज़ारों महिलायें।पूरा गांव रस्ते पर उतर आया था। चार-चार साल की बच्चियाँ भी छोटे-छोटे कलश उठाकर चलती रहीं । हर हर महादेव और एक ही नाम, जय श्रीराम का नारा पूरे गाव में घंटों तक गूँजता रहा। यकीन मानिए, हिदुत्व की जड़ें बहुत अंदर तक जम गईं हैं। SIR और EVM बहुत पीछे छूट गए हैं। विपक्ष उन जडों को उखाड़ते-उखाड़ते खुद उखड़ जाएगा। #Bihar
Sanjay Nirupam25,073 次观看 • 2 个月前

भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन को एक सफलतम कार्यकाल के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ। कांग्रेस ने जातिगत समीकरण को साधकर अपना अध्यक्ष चुना जबकि बीजेपी ने एक नौजवान और ऊर्जावान कार्यकर्ता प्राथमिकता दी। खुद तय करिए,जातिवादी कौन है। Nitin Nabin BJP Shivsena - शिवसेना
Sanjay Nirupam26,930 次观看 • 7 个月前

कल दिंडोशी में पहले शिवशाही के मुस्लिम गुंडों ने हिन्दू युवकों पर हमला किया, फिर पुलिसवालों ने। जिस पुलिसकर्मी ने हिंदू युवकों पर लाठीचार्ज किया, उसे तत्काल सस्पेंड करो, वरना एक-दो दिन में पुलिस स्टेशन का घेराव करेंगे। शिवशाहीवालों को बाद में देखेंगे। आज मैं नागपुर में हूँ। #Dindoshi
Sanjay Nirupam13,265 次观看 • 5 个月前

यह वीडियो नवी मुंबई का है। कल का है। एक महीने पहले एक मज़दूर रोटी की तलाश में यहाँ आया। एक रेस्टोरेंट में उसे वेटर की नौकरी मिल गई। मनसेवाले कह रहे हैं कि तुम मराठी बोलो। इतना फ़ास्ट लर्नर होता तो रोज़गार के लिए दर-दर भटकता ? महाराष्ट्र में मराठी भाषा सबको बोलनी चाहिए। इस भाषा के सम्मान के प्रति हम सब वचनबद्ध हैं। लेकिन इसके लिए क़ानून हाथ में लेना,गुंडागर्दी करना और किसी गरीब को पीटना यह सब महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति को कलंकित करता है। निवेदन है कि राज्य के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री Devendra Fadnavis पूरे मामले का संज्ञान लें और कार्रवाई करें। किसी ने मोदी जी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने के लिए बिना शर्त समर्थन दिया इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे गरीब मज़दूरों को सरेआम पीटने का लाइसेंस मिल गया है। तातड़ी ने कार्रवाई झाली पाहिजे। #NaviMumbai
Sanjay Nirupam28,861 次观看 • 2 年前

जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी धार्मिक कम,राजनीतिक ज़्यादा है। उबाठा के प्रमुख से मिलना उनका व्यक्तिगत फ़ैसला हो सकता है। इस पर कोई एतराज नहीं है। पर शिवसेना के अंदरूनी विवाद पर राजनीतिक भाष्य करने से उन्हें बचना चाहिए था। यह उन्हें शोभा नहीं देता। कौन मुख्यमंत्री बनेगा,कौन नहीं, यह जनता तय करेगी,शंकराचार्य नहीं। बोलते-बोलते वे यह भी बोल गए कि जो विश्वासघात करते हैं, वे हिंदू नहीं हो सकते। यह बड़ा अजीबोग़रीब तर्क है। पहले तो यह तय होना है कि विश्वासघात किसने किया ? और यह शंकराचार्य नहीं तय कर सकते। दूसरा, हिंदू पौराणिक कथाओं और इतिहास में विश्वासघात के तमाम प्रकरण उपलब्ध हैं। क्या वे हिंदू नहीं थे ? विश्वासघात एक मानवीय अवगुण है। इसका किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। हाँ,इस अवगुण की वजह से कोई अच्छा या बुरा हिंदू हो सकता है। मगर वह हिंदू हो ही नहीं सकता, यह कुतर्क है। #Avimukteshwaranandji
Sanjay Nirupam16,568 次观看 • 2 年前
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