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📍𝐉𝐎𝐃𝐇𝐏𝐔𝐑 || • 𝐒𝐎𝐂𝐈𝐎-𝐏𝐎𝐋𝐈𝐓𝐈𝐂𝐀𝐋 𝐀𝐂𝐓𝐈𝐕𝐈𝐒𝐓 •राजस्थान कला & संस्कृति •बिश्नोईज्म • वन्य जीव एवं पर्यावरण संरक्षण •अधिवक्ता 🎓

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टीना डाबी..!! बाड़मेर से टोंक जाने के लिए राजी नहीं थी..😏 वो बड़ा जिला लेने की फिराक में थी जिसमें जयपुर और उदयपुर उनकी पहली और दूसरी पसंद थे। इसके अलावा रिफाइनरी वाले बालोतरा में भी जाने के लिए राजनीतिक हलकों में अपनी इच्छा जाहिर की थी..✅🤌 खैर..!!

टीना डाबी..!! बाड़मेर से टोंक जाने के लिए राजी नहीं थी..😏 वो बड़ा जिला लेने की फिराक में थी जिसमें जयपुर और उदयपुर उनकी पहली और दूसरी पसंद थे। इसके अलावा रिफाइनरी वाले बालोतरा में भी जाने के लिए राजनीतिक हलकों में अपनी इच्छा जाहिर की थी..✅🤌 खैर..!!

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जिनके दादा,परदादा समाज में पंच हो उनके पोते कभी कुंवारे नहीं रहते...😀✅ नतीजा आपके सामने है..⬇️👇

जिनके दादा,परदादा समाज में पंच हो उनके पोते कभी कुंवारे नहीं रहते...😀✅ नतीजा आपके सामने है..⬇️👇

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आजकल अफीम में तरह-तरह के केमिकल मिक्स होने लगे हैं,जो व्यक्ति की मानसिक शक्ति को क्षीण कर देते हैं। आदमी झूठ बोलने का आदी हो जाता हैं वो पूरी तरह से डाफ़ाचूक हो जाता हैं। उसे किसी तरह की सुध नहीं रहती हैं वो क्या बोल रहा हैं, क्या नहीं..?? दरअसल ये सिर्फ एक नशा नहीं बल्कि एक खामोश ज़हर है जो इंसान के जिस्म ही नहीं उसकी अक़्ल, शऊर और शख्सियत को भी अंदर ही अंदर तबाह कर देता है। अफीम की लत इंसान को हक़ीक़त से दूर ले जाकर एक ऐसी दुनिया में धकेल देती है जहाँ ना सोच बचती है, ना समझ, ना ही कोई ज़िम्मेदारी का एहसास। हनुमान बेनीवाल भी अफीम की बुरी लत से नशेड़ी बन कर गुज़र रहे हैं.. तेजाजी महाराज उनकी सुध लें 🙏 HANUMAN BENIWAL

आजकल अफीम में तरह-तरह के केमिकल मिक्स होने लगे हैं,जो व्यक्ति की मानसिक शक्ति को क्षीण कर देते हैं। आदमी झूठ बोलने का आदी हो जाता हैं वो पूरी तरह से डाफ़ाचूक हो जाता हैं। उसे किसी तरह की सुध नहीं रहती हैं वो क्या बोल रहा हैं, क्या नहीं..?? दरअसल ये सिर्फ एक नशा नहीं बल्कि एक खामोश ज़हर है जो इंसान के जिस्म ही नहीं उसकी अक़्ल, शऊर और शख्सियत को भी अंदर ही अंदर तबाह कर देता है। अफीम की लत इंसान को हक़ीक़त से दूर ले जाकर एक ऐसी दुनिया में धकेल देती है जहाँ ना सोच बचती है, ना समझ, ना ही कोई ज़िम्मेदारी का एहसास। हनुमान बेनीवाल भी अफीम की बुरी लत से नशेड़ी बन कर गुज़र रहे हैं.. तेजाजी महाराज उनकी सुध लें 🙏 HANUMAN BENIWAL

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#घुंघट पर ज्ञान देने वाले लिब्रांडुओं को यह वीडियो जरूर देखना चाहिए..👇 अपने परंपरागत पोशाक में घुंघट लिए खड़ी यह बाईसा आज गुजरात में सिविल कोर्ट में जज नियुक्त हुई है..✅ अगर घुंघट सच में पिछड़ेपन का प्रतीक होता तो यह बहन आज न्याय की कुर्सी तक नहीं पहुँचती..🔕 Arvind Chotia

#घुंघट पर ज्ञान देने वाले लिब्रांडुओं को यह वीडियो जरूर देखना चाहिए..👇 अपने परंपरागत पोशाक में घुंघट लिए खड़ी यह बाईसा आज गुजरात में सिविल कोर्ट में जज नियुक्त हुई है..✅ अगर घुंघट सच में पिछड़ेपन का प्रतीक होता तो यह बहन आज न्याय की कुर्सी तक नहीं पहुँचती..🔕 Arvind Chotia

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राजेंद्र राठौर V/S रविंद्र सिंह भाटी 🆕 एक तरफ अनुभव की दुकान तो दूसरी तरफ जोशीला अंदाज़ और युवा दिलों की धड़कन...🔥✊ दोनों ही वकील और दोनों की ही पॉलिटिकल जर्नी की शुरुआत स्टूडेंट पॉलिटिक्स से हुई...✅ राजेंद्र राठौर साहब ABVP के टिकट से राजस्थान यूनिवर्सिटी से अध्यक्ष बने वहीं रविंद्र सिंह भाटी ने JNVU के तमाम मिथकों को तोड़ते हुए ABVP से बागी होकर इतिहास रचते हुवे जेएनवीयू के पहले निर्दलीय छात्रसंघ अध्यक्ष बने... राठौर साहब चूरू और तारानगर से BJP के 7 बार विधायक रहे ग्रामीण विकास और चिकित्सा मंत्री के रूप में अलग-अलग मंत्रालय भी संभाले सदन में लीडर ऑफ अपोजिशन के रूप में उनकी बेबाकी ने कई बार अशोक गहलोत की सरकार कांग्रेस को बैकफुट पर धकेला उनका एक्सपेरिएंस और पार्लियामेंट्री कमांड आज भी मिसाल माना जाता है वहीं भाटी ने सरहद की शिव विधानसभा से अमीन खान जैसे हबीड़ नेता को हराकर निर्दलीय जीत दर्ज की.. यह जीत सिर्फ चुनावी नहीं बल्कि एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट थी 📝 फिर लोकसभा में इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर लगभग 6 लाख वोट हासिल किए जो किसी युवा नेता के लिए विरला जनसमर्थन माना जाता है.. अब चर्चा क्यों..??🤔 हाल ही में एक पॉडकास्ट में राठौर साहब ने भाटी को एक्सिडेंटल विधायक कहा.. यह बयान राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर गया गौरतलब है कि राठौर साहब स्वयं अधिवक्ता रहे हैं और भाटी को BJP में join कराने का श्रेय भी कभी उन्हें ही दिया जाता रहा हैं ऐसे में यह प्रतिक्रिया सिर्फ एक टिप्पणी नहीं बल्कि सियासी उठापटक का इशारा लगती है इधर वसुंधरा राजे और राठौर साहब के बीच तल्ख़ियाँ किसी से छिपी नहीं हैं हाल ही में राजे ने विधानसभा भवन के बाहर भाटी की तारीफ़ की एक अच्छी मुलाक़ात हुई और राजे बार-बार भाटी की घड़ी देखती नज़र आईं⌚⌛ भाटी की राजे से बढ़ती नजदीकियां उनके राजनीतिक करियर को विराट बना सकती हैं सियासत में सिंबॉलिज्म भी बहुत कुछ कह जाता है शायद यही वजह है कि राठौर की नज़र में भाटी कुछ ज़्यादा ही चढ़ गए लेकिन सच यह भी है कि एक्सिडेंटल शब्द कभी-कभी कहने वाले को ज़्यादा चुभता है क्योंकि भाटी का क्रेज next level पर है और 36 कौम का प्यार किसी एक्सीडेंट से नहीं मिलता उसके पीछे ज़मीन, जुनून और जनता का भरोसा होता है ✔️ खैर दोनों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं..!!💐 Rajendra Rathore Ravindra Singh Bhati Lokendra Singh Kilanaut Bhupendra Singh Rathore Vikram Sajiyali 🇮🇳

राजेंद्र राठौर V/S रविंद्र सिंह भाटी 🆕 एक तरफ अनुभव की दुकान तो दूसरी तरफ जोशीला अंदाज़ और युवा दिलों की धड़कन...🔥✊ दोनों ही वकील और दोनों की ही पॉलिटिकल जर्नी की शुरुआत स्टूडेंट पॉलिटिक्स से हुई...✅ राजेंद्र राठौर साहब ABVP के टिकट से राजस्थान यूनिवर्सिटी से अध्यक्ष बने वहीं रविंद्र सिंह भाटी ने JNVU के तमाम मिथकों को तोड़ते हुए ABVP से बागी होकर इतिहास रचते हुवे जेएनवीयू के पहले निर्दलीय छात्रसंघ अध्यक्ष बने... राठौर साहब चूरू और तारानगर से BJP के 7 बार विधायक रहे ग्रामीण विकास और चिकित्सा मंत्री के रूप में अलग-अलग मंत्रालय भी संभाले सदन में लीडर ऑफ अपोजिशन के रूप में उनकी बेबाकी ने कई बार अशोक गहलोत की सरकार कांग्रेस को बैकफुट पर धकेला उनका एक्सपेरिएंस और पार्लियामेंट्री कमांड आज भी मिसाल माना जाता है वहीं भाटी ने सरहद की शिव विधानसभा से अमीन खान जैसे हबीड़ नेता को हराकर निर्दलीय जीत दर्ज की.. यह जीत सिर्फ चुनावी नहीं बल्कि एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट थी 📝 फिर लोकसभा में इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर लगभग 6 लाख वोट हासिल किए जो किसी युवा नेता के लिए विरला जनसमर्थन माना जाता है.. अब चर्चा क्यों..??🤔 हाल ही में एक पॉडकास्ट में राठौर साहब ने भाटी को एक्सिडेंटल विधायक कहा.. यह बयान राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर गया गौरतलब है कि राठौर साहब स्वयं अधिवक्ता रहे हैं और भाटी को BJP में join कराने का श्रेय भी कभी उन्हें ही दिया जाता रहा हैं ऐसे में यह प्रतिक्रिया सिर्फ एक टिप्पणी नहीं बल्कि सियासी उठापटक का इशारा लगती है इधर वसुंधरा राजे और राठौर साहब के बीच तल्ख़ियाँ किसी से छिपी नहीं हैं हाल ही में राजे ने विधानसभा भवन के बाहर भाटी की तारीफ़ की एक अच्छी मुलाक़ात हुई और राजे बार-बार भाटी की घड़ी देखती नज़र आईं⌚⌛ भाटी की राजे से बढ़ती नजदीकियां उनके राजनीतिक करियर को विराट बना सकती हैं सियासत में सिंबॉलिज्म भी बहुत कुछ कह जाता है शायद यही वजह है कि राठौर की नज़र में भाटी कुछ ज़्यादा ही चढ़ गए लेकिन सच यह भी है कि एक्सिडेंटल शब्द कभी-कभी कहने वाले को ज़्यादा चुभता है क्योंकि भाटी का क्रेज next level पर है और 36 कौम का प्यार किसी एक्सीडेंट से नहीं मिलता उसके पीछे ज़मीन, जुनून और जनता का भरोसा होता है ✔️ खैर दोनों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं..!!💐 Rajendra Rathore Ravindra Singh Bhati Lokendra Singh Kilanaut Bhupendra Singh Rathore Vikram Sajiyali 🇮🇳

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नाम.. इज़्ज़त..शोहरत 👑 रुतबा..पद..प्रतिष्ठा..रूप..दौलत..वैभव.. ताक़त..सत्ता..!! क्या कुछ नहीं था रूपाली चाकणकर के पास..!!✅✊ मगर जनाब वक्त भी बड़ी दिलचस्प चीज़ है..!! जब पलटता है ना तो तख़्त भी हिल जाते हैं और ताज भी गिर जाते हैं..!! और फिर जैसे ही भोंदू बाबा अशोक खैरात की चर्चित “एप्सटिन फाइल्स” वायरल हुई तो कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि शोहरत का सितारा भी धुंधला पड़ने लगा..!! कल तक जो नाम था आज वही सवाल है..?? कल तक जो ताक़त थी आज वही इल्ज़ाम है। साहब..!! ज़िन्दगी का सबसे कड़वा सच यही है ऊँचाइयाँ हमेशा स्थायी नहीं होतीं। और जब गिरावट आती है ना तो शोर नहीं करती…बस खामोशी से सब कुछ छीन लेती है… 💔

𝐒𝐀𝐓𝐈𝐒𝐇_𝐒𝐈𝐇𝐀𝐀𝐆_

46,875 görüntüleme • 3 ay önce

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55 ₹ का टोल नहीं दे सकते ये #बोतलिए और 60₹ का ढोला मारु पी जाते हैं..!! टॉल गेट का डंडा तोड़ कर खुद को हीरो समझ रहे है। इन्हीं हरकतों के कारण तुम जीरो पर हो और आने वाले समय में माइनस में चले जाओगे। मैं पुलिस प्रशासन(Rajasthan Police) से निवेदन करता हूं कि ऐसे टट्टपूंजीये छपरियों को पकड़ कर पिछवाड़े में यही टोल गेट का डंडा डाल के पेट्रोल छिड़क के आग लगा देनी चाहिए...🙏 और सुनो मिस्टरHANUMAN BENIWAL ऐसे छपरियों को अपना अनुयायी मत समझो जातिवाद से ऊपर उठकर, नशे पते से ऊपर उठकर ढंग की राजनीति करो। बाकी गालियाँ बकने से, आरोप लगाने से, झूठ बोलने से, गाड़ियों की फाटकों पर लटकने से, नशा करने से तुम्हारी सरकार नहीं बनने वाली.... ✅👍 थोड़ी सकारात्मकता लाओ 🤌🙏 हम भी सर्वोच्च समर्पण से कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े मिलेंगे 🙏 #जय_जांभोजी_की #जय_वीर_तेजाजी #जय_खेमा_बाबा

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10,454 görüntüleme • 1 ay önce

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सरिता विश्नोई का बड़ा बयान..!! #केके_विश्नोई और बिहारी विश्नोई के लिए पूरा समाज सदैव आभारी रहेगा। आप दोनों ने हमारी आवाज़ को सिर्फ सुना ही नहीं बल्कि हाथों-हाथ दोनों मांगें मानकर लिखित में स्वीकृति भी दिलाई। केके विश्नोई साहब..!! आपकी ताकत और संकल्प को मानना पड़ेगा। आपने यह सिद्ध कर दिया कि आप सच में विश्नोई समाज के बेटे हैं जो समाज के सम्मान और प्रकृति की रक्षा के लिए हर मंच पर डटकर खड़े रहते हैं। आज तक कई धरनों की बातें हुईं मगर पहली बार हमारी मांगों को लेकर स्वयं मुख्यमंत्री ने विधानसभा में शब्द दिए। यह सिर्फ एक जीत नहीं, यह संघर्ष, विश्वास और सत्य की जीत है। #खेजड़ी_बचाओ जय खेजड़ी। जय विश्नोई समाज। K.K.Vishnoi Biharilal Bishnoi

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12,387 görüntüleme • 5 ay önce

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क्या कभी किसी ने कल्पना भी की होगी कि रविन्द्र सिंह राणावत की दाहिनी ओर गंभीर, स्थिर, धीर दृष्टि में गैंगस्टर-सा लुक लिए गौरे चेहरे वाला वह युवक एक दिन आवाम के दिलों में घर नहीं स्थाई आवास बनाएगा..?? जिसे लोग एक तस्वीर का साया समझ बैठे थे वही साया एक दिन युवा दिलों की धड़कन बन जाएगा। जो राजनीतिक गलियारों ने बड़े-बड़े दलों की नींद उड़ाने का सबब बन जाएगा। न कोई पार्टी-सिंबल न कोई विरासत की बैसाखी सिर्फ़ अपना वजूद अपनी ज़मीन और अपने लोगों का भरोसा। निर्दलीय विधायक बनकर सिर्फ़ शिव नहीं सिर्फ़ राजस्थान नहीं बल्कि पूरे भारत में एक नई पहचान गढ़ देगा। यह बात कौन जानता था जिसके नाम से मरुधरा की हवाएँ एक पल को ठहर जाएँ धरा और गगन जिसे अदब से सलामी दें और सूरज भी जिसकी दिशा देखकर उदय करना चाहे। यह कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं था यह कोई अचानक हुआ चमत्कार नहीं था क्योंकि क़ुदरत कभी जल्दबाज़ी नहीं करती। वह वक़्त लेती है लोगों को परखती है किरदार को आग में तपाती है और फिर तारीख़ के पन्नों पर एक नाम स्याही से नहीं संघर्ष से लिखा जाता हैं। जो भी होता है वक़्त की किताब में बेवजह नहीं लिखा जाता। क़लम क़ुदरत की होती है और हर हरफ़ मुक़द्दर से निकलता है। मगर प्रकृति सब कुछ पहले से तय करके रखती है। कौन भीड़ में खोएगा और कौन भीड़ को दिशा देगा..?? #रविन्द्र_सिंह_भाटी सिर्फ़ एक नाम नहीं वह उस यक़ीन का नाम है। जो आम आदमी के दिल से उठकर सत्ता के शिखर तक पहुँचता है। Ravindra Singh Bhati Bheru singh Bhati chaba

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11,443 görüntüleme • 6 ay önce

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