
Thakur Saurabh Singh
@Saurabh737475 • 3,739 subscribers
Freelance Journalist l Social media Influencer l Yogi supporter।Hindu Rights Activist l Political Analyst l Rt's not Indorsement...
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नाथ संप्रदाय में ‘आदेश’ का मतलब और महत्व: नाथ योगी एक-दूसरे से मिलते वक्त ‘नमस्ते’ या ‘राम-राम’ नहीं, बल्कि *“आदेश”* बोलते हैं। इसका अर्थ है: आ = आत्मा, दे = देव/परमात्मा, श = शरीर यानी: _“आत्मा, देव और शरीर एक हैं”_ या _“मैं तुम्हारे भीतर स्थित शिव को प्रणाम करता हूं।” गोरखनाथ जी ने कहा है: “आदेश आदेशे सब कोई, आदेश कहे सो योगी होई।” मतलब जो ‘आदेश’ का मर्म समझ ले, वही सच्चा योगी है! अभिवादन नहीं, उद्घोष है: ये साधारण हैलो-हाय नहीं। ये गुरु-परंपरा को नमन है। आदिनाथ शिव, मत्स्येंद्रनाथ और गोरखनाथ को याद करना है। जब नाथ योगी ‘आदेश’ बोलता है तो वो सामने वाले के अहंकार को नहीं, उसके भीतर के शिव-तत्व को प्रणाम करता है। ‘आदेश’ सुनते ही पता चल जाता है कि सामने वाला नाथ पंथी है। ये उनकी पहचान है। योगी आदित्यनाथ जी को ‘आदेश’ करते कई बार देखा गया है! योगी आदित्यनाथ जी सिर्फ UP के CM नहीं हैं। वो गोरखनाथ मठ के महंत और 'नाथ संप्रदाय के सबसे बड़े "पीठाधीश्वर" हैं। गोरक्षपीठ की परंपरा:गोरखनाथ मंदिर में सुबह गोरक्षनाथ जी की आरती के बाद, या किसी भी नाथ योगी से मिलते वक्त वो हाथ जोड़कर “आदेश” बोलते हैं। ये 1000 साल पुरानी परंपरा है। जब भी कोई नाथ योगी, नागा साधु या संत उनसे मिलने आता है, तो योगी जी पहले ‘आदेश’ करते हैं। कई बार रैली में संत समाज के सामने वो मंच से ‘आदेश’ का उद्घोष करते हैं। ये जनता को बताता है कि उनकी जड़ें कहां हैं। इसीलिए जब योगी जी ‘आदेश’ करते हैं तो वो CM की कुर्सी नहीं, गोरक्षपीठ की गद्दी का धर्म निभा रहे होते हैं। आदेश...🙏🔥
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