
Sheeetalpsingh
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जाति/वर्ण आधारित श्रेष्ठता की अनुराग ठाकुर द्वारा बघारी गई इस शेख़ी की बीजेपी को बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी। राहुल गांधी के लिए यह अपमानजनक slur वरदान साबित होगा। संलग्न वीडियो देश की बहुसंख्यक आबादी में राहुल गांधी को ऐसी स्वीकृति दिलवायेगा जो कल्पनातीत है। उन सब जाति के लोगों में जिन्हें हजारों साल से ऊंच-नीच का अपमान मिला है/मिलता है यह slur राहुल गांधी के लिए अपनापन पैदा करेगा।
Sheeetalpsingh230,025 görüntüleme • 2 yıl önce

नया पाडकास्ट ले आए हैं । Utube पर @Round.Table.Sudio ने जारी किया है
Sheeetalpsingh84,142 görüntüleme • 8 ay önce

हरदोई के एक स्कूल से वीडियो आया है—बच्चों की थाली में दोपहर के भोजन के नाम पर सूखे चावल। दुनिया स्कूल मील को charity नहीं, nation-building investment मानती है। WFP के अनुसार स्कूल भोजन पर लगाया $1 कई गुना आर्थिक-सामाजिक लाभ दे सकता है। 2020-24 के बीच दुनिया में school feeding पर खर्च बढ़कर करीब $84 अरब हो गया। फिनलैंड, स्वीडन, जापान, कोरिया पौष्टिक स्कूल लंच देते हैं; ब्राज़ील स्थानीय किसानों से कम-से-कम 30% खरीद की व्यवस्था करता है। और उत्तर प्रदेश? PM-POSHAN की cooking/material cost में राज्य का हिस्सा करीब ₹2.71 प्रति बच्चा प्रतिदिन और केंद्र का करीब ₹4.07 है। यानी ₹6.78 में दाल-सब्जी, तेल-मसाला और ईंधन तक! दूसरे राज्य अतिरिक्त पैसा लगाते हैं। तेलंगाना ने अपनी तरफ से लागत बढ़ाई; पश्चिम बंगाल ने अतिरिक्त राशि देकर अंडा/मछली/चिकन जैसे प्रोटीन जोड़ने की कोशिश की। दक्षिण और पूर्वोत्तर में अंडा-मांस की खपत भी UP से कहीं अधिक है। बच्चों को प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और micronutrients चाहिए—संस्कृति के नाम पर पोषण विज्ञान नहीं बदलता। अब प्राथमिकता देखिए। UP सरकार निराश्रित गोवंश के रखरखाव के लिए गौशालाओं को ₹50 प्रति पशु प्रतिदिन देती है—इसे ₹30 से बढ़ाकर ₹50 किया गया। लेकिन अपने हिस्से से स्कूली बच्चे के भोजन पर करीब ₹2.71। सवाल बहुत बड़ा है: अगर पशु के लिए ₹50 जुट सकते हैं, तो बच्चे के पौष्टिक भोजन के लिए राज्य अपना योगदान कई गुना क्यों नहीं बढ़ा सकता? कुपोषण सिर्फ भूख नहीं है। शुरुआती वर्षों में खराब पोषण बच्चे की शारीरिक वृद्धि, सीखने की क्षमता और भविष्य की उत्पादकता पर लंबे समय का असर डाल सकता है। गाय पर खर्च maintenance है; बच्चे के पोषण पर खर्च nation-building investment। इसलिए सवाल गाय बनाम बच्चा नहीं है। सवाल सरकार की budgetary priority का है: बच्चे के लिए ₹2.71, गोवंश के लिए ₹50—क्या उत्तर प्रदेश अपने भविष्य पर पर्याप्त खर्च कर रहा है? राजनीति में गाय पवित्र हो सकती है, लेकिन शासन में बच्चे का भविष्य सबसे पवित्र प्राथमिकता होना चाहिए।
Sheeetalpsingh17,946 görüntüleme • 1 ay önce

दूरदर्शन, देश के नागरिकों से उगाहे गये टैक्स से चलता है किसी दल, विचारधारा या अन्य स्त्रोत से नहीं। इसमें इतने सुयोग्य संघी एंकरों को सजाया गया है कि रेडियो रवांडा भी शर्म से डूब मरा है। जब कोई अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी इस प्रहसन को आंक देगी तो देसी सियारों का झुंड अरण्यरोदन करने लगेगा कि सोरोस के प्रभाव से उनके पृष्ठभाग पर पैबंद लगाया गया है!
Sheeetalpsingh36,922 görüntüleme • 5 ay önce

दुनियां के 177 देशों की लिस्ट में प्रदूषण के मामले में भारत सबसे निचली पायदान से ठीक एक पायदान ऊपर क्यों है? क्या दुनियां का हर अध्ययन भारत के खिलाफ षडयंत्र कर रहा है? या हम अपनी बरबादी क़बूल करने को किसी सूरत में तैयार नहीं हैं क्योंकि हम स्वयंभू विश्वगुरू हैं! (वीडियो लिंक कमेंट्स में है)
Sheeetalpsingh18,490 görüntüleme • 2 ay önce
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