
Manish Shrivastava
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Artha funds Dharma. Dharma fuels Bhakti. Bhakti builds the Mandir. The Mandir belongs to Him. And the Karma belongs to Me.
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हमारा अस्सी वाला दशक सही था। डाक्टर बन जाओ या इंजीनियर! बहुत बढ़िया गणित हैं तो PO या CA ( जिसके बारे में यह कह कर डराया जाता था कि IAS तो बन सकते हो CA नहीं) उन दिनों कुछ एक बच्चे NDA या CDS में चले जाते थे। याद नहीं पड़ता कि कभी किसी से सुना हो कि IAS की तैयारी कर रहा है। राव का नाम नब्बे में सुना था जब मेरे दोस्त ने दिल्ली जाकर तैयारी की थी। नब्बे में MBA और MCA भी आ गया था और फिर शुरू हुई MBA और MCA की दुकानें! जब थोक के भाव से ग्रेजुएट निकल रहे हो और फुटकर के हिसाब से नौकरियां तो बस भगवान ही मालिक हैं। वो बात अलग है कि हम ने ना MBA किया और न MCA! हम ना बने डाक्टर और ना बने इंजीनियर! हमने ना कोशिश की IAS की और न PO और CA की! हमने चुनी थी वो नौकरी जो शराबियों और जुआरियों की नौकरी मानी जाती थी।
Manish Shrivastava14,099 次观看 • 6 个月前
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