
सूर्य प्रकाश मिश्र
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🚩 भूखे को भोजन, प्रकृति को जीवन, और समाज को संस्कार — यही हमारा संकल्प। 🚩
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आपकी बस 4:30 मिनट ही चाहिए मौलाना कलीम सिद्दीकी द्वारा पांच निकाह, तीन हलाला और धर्म परिवर्तन: इंदौर की इस भयावह घटना को पढ़ें 2012 में, एक ब्राह्मण महिला सोशल मीडिया पर नवीन राणा नाम के एक व्यक्ति से मिलीं। 2013 में, उसने उन्हें इंदौर से दिल्ली बुलाया। वहां से उन्हें फलात स्थित एक मदरसे में ले जाया गया, जहां उन्हें पता चला कि नवीन का असली नाम नावेद है। उन्हें मदरसे में बंधक बनाकर रखा गया, जहां उन्हें जबरन इस्लामी शिक्षाएं दी गईं। उन्हें कलमा पढ़ने और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया गया। वहां से उन्हें छह महीने के लिए मेरठ के एक मदरसे में भेज दिया गया और फिर मुजफ्फरनगर स्थित उसी मदरसे में स्थानांतरित कर दिया गया। फलात मदरसे में मौलाना अब्दुर रहमान ने उनके साथ बलात्कार किया। जब उन्होंने विरोध किया, तो वह उनके कपड़े उतारकर उन्हें पीटता था। फिर उसने उन्हें तीन तलाक देकर छोड़ दिया। इसके बाद उन्हें खालत मदरसे में ले जाया गया, जहां उन्हें तीन महीने की इद्दत की अवधि बितानी पड़ी। फिर जयपुर के एक मदरसे में पांच दिनों तक उनका हलाला संपन्न हुआ। 2015 में उन्हें उत्तर प्रदेश के शामली ले जाया गया, जहां उनका दूसरा निकाह मुदसिर नाम के एक व्यक्ति से हुआ। निकाह के बाद उन्हें गुजरात ले जाया गया, लेकिन मुदसिर की 2019 में मृत्यु हो गई। फिर मौलाना कारी आसमान नाम के एक मौलवी ने उन्हें फंसा लिया और दिल्ली के शाहीन बाग स्थित एक मदरसे में ले गए। वहां उनका हलाला संपन्न हुआ और उसके बाद उनकी शादी खालिद हुसैन से करा दी गई। लेकिन खालिद का परिवार उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं था क्योंकि वह पहले से ही विवाहित था। 2022 में उसने उन्हें तीन तलाक दे दिया और खालिद के दोबारा शादी करने की इच्छा के चलते उन्हें बागपत में एक और हलाला संपन्न कराना पड़ा। बाद में, खालिद के भाई साकिब ने महिला का बलात्कार किया। तब खालिद के बहनोई फखरुद्दीन ने हलाला संपन्न कराया और कहा, "अब तुम खालिद से दोबारा शादी कर सकती हो क्योंकि अब तुम पाक हो गई हो।" फिर अंततः उसकी शादी खालिद से दोबारा हो गई। आखिरकार, वह उनके चंगुल से निकल गई और उसने 2 मई को गाजियाबाद के अंकुर विहार पुलिस स्टेशन में 16 आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
सूर्य प्रकाश मिश्र24,886 次观看 • 19 天前

“ग्राम Pidariya के विनायक प्रसाद त्रिपाठी का परिवार — जब 25 साल की उम्र में पति चला जाए और बुढ़ापे में एक लोटा पानी देने वाला भी कोई न बचे…” आज जनगणना के दौरान ग्राम पंचायत Pidariya में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने अंदर तक झकझोर दिया। मेरी विद्यालय की दक्षिण दिशा में बसे इस परिवार की पीड़ा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। विनायक प्रसाद त्रिपाठी जी का परिवार आज गहरे दर्द और संघर्ष में जीवन जी रहा है। बहू के पति की मौत मात्र 25 वर्ष की उम्र में हो गई। घर का जवान सहारा छिन गया। समय बीतता गया, बेटियों की शादी हो चुकी है और वे अपने-अपने घरों में हैं। बुढ़ापे का सहारा बनने की उम्मीद में उन्होंने अपने नाती को अपने साथ रखा, उसे पाल-पोस कर बड़ा किया, लेकिन किस्मत का दर्द यहीं नहीं रुका… वह नाती भी अब इस दुनिया में नहीं रहा। आज इस घर में सिर्फ दो बूढ़े लोग अकेले जिंदगी काट रहे हैं। हालत इतनी दर्दनाक है कि उन्हें एक लोटा पानी देने वाला भी कोई नहीं बचा। जीवन के इस अंतिम पड़ा। क्या BJP Amit Shah Narendra Modi Supreme Court of India ब्राह्मण गरीब नहीं होता? अगर ब्राह्मण गरीब है तो उसके लिए आपके द्वारा कौन सी योजना चल रही हैं?? #सनातन_ब्राह्मण_चौपाल #Brahmin_Identity_Protection_Act की मांग करता हैं।
सूर्य प्रकाश मिश्र22,593 次观看 • 1 个月前
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