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Abhishek Kumar Kushwaha

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National Secretary And Spokesperson of Adiguru Shankaracharya Gurukul, Social Activist, Political Commentator, (Grandson of Freedom Fighter) Son of Farmer🌾

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जटायु का झुंड पहुंचा अयोध्या विलुप्त गिद्ध अचानक कहां से आ गए अयोध्या। कोई चमत्कार अथवा प्रभु दर्शन के लिए ?? जय श्री राम..🙏🚩

जटायु का झुंड पहुंचा अयोध्या विलुप्त गिद्ध अचानक कहां से आ गए अयोध्या। कोई चमत्कार अथवा प्रभु दर्शन के लिए ?? जय श्री राम..🙏🚩

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छात्र आंदोलन के नाम पर जमाते इस्लामी द्वारा बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार, हिन्दू महिलाओं का जघन्य बलात्कार किया जा रहा है पूरे बांग्लादेश में जिहादी हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन “छात्र विरोध” के रूप में शुरू हुआ और अब हिंदू नरसंहार में बदल गया है। #SaveHindusinBangladesh #AllEyesOnBangladeshiHindus

छात्र आंदोलन के नाम पर जमाते इस्लामी द्वारा बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार, हिन्दू महिलाओं का जघन्य बलात्कार किया जा रहा है पूरे बांग्लादेश में जिहादी हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन “छात्र विरोध” के रूप में शुरू हुआ और अब हिंदू नरसंहार में बदल गया है। #SaveHindusinBangladesh #AllEyesOnBangladeshiHindus

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NSA अजीत डोभाल सच जानते थे... उन्होंने तब तक इंतज़ार किया, जब तक भारत के पक्ष में एक सरकार सत्ता में नहीं आ गई 🔥 > पाकिस्तान करोड़ों रुपये का नकली इंडियन करेंसी रैकेट चला रहा था। > बेसमेंट में नहीं छपी... बल्कि असली इंडियन करेंसी प्लेट्स का इस्तेमाल कर रही थी। > और सबसे बड़ा झटका? > वे प्लेट्स भारत के अंदर से बेची जा रही थीं... सत्ता में बैठे एक सीनियर मंत्री द्वारा। > जब अजीत डोभाल को इसका पता चला, तो उन्होंने कहा: “कभी कोई सरकार आएगी जिसको देश की चिंता होगी… तब कुछ करेंगे।” > क्योंकि उस राज में, काम करने का मतलब पॉलिटिकल सुसाइड था। > इसलिए उन्होंने इंतज़ार किया... साल बीत गए। > नेटवर्क भारत में नकली नोट भेजता रहा। > टेरर फंडिंग फली-फूली... ब्लैक मनी बढ़ी। > और पाकिस्तान हंसा। 📌 फिर 2014 आया। > एक राष्ट्रवादी सरकार सत्ता में आई। > और 2016 में, एक फैसले ने पूरे इकोसिस्टम को तोड़ दिया। > नोटबंदी का टारगेट सिर्फ़ ब्लैक मनी नहीं था। > इसने रातों-रात पाकिस्तान के नकली करेंसी नेटवर्क पर रोक लगा दी। > बेकार नोटों के गोदाम... टेरर फंडिंग खत्म हो गई। > हवाला चेन खत्म हो गईं। > पाकिस्तान की अंडरग्राउंड इकॉनमी को सीधा झटका लगा। यह कोई अचानक लिया गया इकॉनमिक कदम नहीं था... यह नेशनल सिक्योरिटी पर हमला था... बिना गोली चलाए। जो लोग चिल्लाते हैं “असुविधा का क्या?”, वे कभी नहीं पूछते: 👉 दशकों तक इस रैकेट को किसने बचाया? 👉 प्लेटें किसने बेचीं? 👉 चुप्पी से किसे फ़ायदा हुआ? उन लोगों को कभी मत भूलना, जिन्होंने इस फ़ैसले का विरोध किया..✋

Abhishek Kumar Kushwaha

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