
The MuskX
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Hello friends, When we came out for a walk, it started raining and we got completely drenched. Our clothes got completely wet... ❤️❤️😊
The MuskX1,093,580 просмотров • 11 месяцев назад

मनमोहन सिंह, भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण चेहरा, भारत के 13वें प्रधानमंत्री थे। उनका कार्यकाल 2004 से 2014 तक था। उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधारक के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने 1991 में आर्थिक उदारीकरण के महत्वपूर्ण निर्णयों का नेतृत्व किया। वह एक शांत और संयमित व्यक्तित्व के मालिक थे, जिनकी नीतियाँ बुनियादी सुधारों की दिशा में कारगर साबित हुईं। सिंह जी के समय में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूती दी, लेकिन उनकी सरकार को कई राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उनका योगदान भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में सदैव याद रखा जाएगा। सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर एक तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। सोनिया गांधी ने अपने निर्णय से इस आलोचना को दरकिनार करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित किया। डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान न केवल आर्थिक सुधारों को गति दी, बल्कि अपने संयमित नेतृत्व से देश को नई दिशा दी। 10 वर्षों तक उनके शासन ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखा। उनके निधन की खबर भारतीय राजनीति में एक युग के अंत का प्रतीक है। उनकी सादगी और निस्वार्थ सेवा को हमेशा याद किया जाएगा।
The MuskX205,104 просмотров • 1 год назад

यह घटना न केवल अज्ञानता का प्रदर्शन करती है, बल्कि मानवता और सहानुभूति की कमी को भी उजागर करती है। किसी भी व्यक्ति को उसके पहनावे या स्थिति के आधार पर गलत समझना और उसके साथ दुर्व्यवहार करना अन्याय है। ठंड के कारण यदि कोई गरीब बूढ़ा आदमी भगवा वस्त्र के नीचे गर्म कपड़े पहनता है, तो यह उसकी मजबूरी है, न कि पाखंड। राख की भस्म का वैज्ञानिक कारण चाहे जो भी हो, इसका यह मतलब नहीं कि इसे दूसरों पर थोपने का अधिकार किसी को मिल जाता है। किसी साधु का उद्देश्य मानव सेवा और सहनशीलता का संदेश देना होता है, न कि हिंसा और दुराचार का। पुलिस को इस मामले में निष्पक्ष जांच करके दोषी व्यक्ति पर कार्यवाही करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके और मेलों की पवित्रता बनी रहे।
The MuskX52,118 просмотров • 1 год назад

इस पूरे संवाद में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि यह सत्ता और अधिकार की लड़ाई है। छात्रों का उद्देश्य अपने अधिकारों और न्याय की मांग करना है, जबकि सत्ता पक्ष धमकी और भय दिखाकर उन्हें दबाने की कोशिश कर रहा है। प्रशांत किशोर पांडे द्वारा कंबल का जिक्र और "नेता बनोगे तुम" जैसी बातें, उनकी असंवेदनशीलता और जनता की मूलभूत समस्याओं को न समझने की प्रवृत्ति को उजागर करती हैं। छात्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें कंबल या अन्य कोई कृपा नहीं चाहिए, बल्कि उनका हक चाहिए। यह उनकी जागरूकता और आत्मसम्मान को दिखाता है। गुंडों द्वारा दी गई गालियाँ और हिंसात्मक भाषा सत्ता के उस पक्ष को उजागर करती है, जो आलोचना और सवाल उठाने वालों को दबाने के लिए बल का उपयोग करता है। छात्रों की ओर से "हम फ्लावर नहीं, फायर हैं" कहना उनकी दृढ़ता और आत्मबल को दिखाता है। यह संवाद सत्ता और युवाओं के बीच की खाई को भी उजागर करता है। सत्ता पक्ष को समझना चाहिए कि छात्र देश का भविष्य हैं, और उन्हें धमकाने या डराने के बजाय उनके साथ संवाद और समस्या समाधान की कोशिश करनी चाहिए। छात्रों का साहस और विवेक यह दर्शाता है कि न्याय के लिए खड़े होने वाले कभी झुकते नहीं।
The MuskX36,567 просмотров • 1 год назад
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