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मुज़फ्फरनगर में एक मुस्लिम फूड ब्लॉगर को सिर्फ इसलिए जेल भेज दिया गया क्योंकि उसके नॉनवेज फूड रिव्यू वीडियो में शिव चौक की प्रतिमा और तिरंगा कुछ सेकंड के लिए दिखाई दे गए। अनस अहमद नाम के इस ब्लॉगर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया, जबकि वीडियो में न तो किसी धर्म के खिलाफ टिप्पणी थी और न ही कोई भड़काऊ बात। विवाद बढ़ने के बाद अनस ने माफी भी मांगी और कहा कि उसका किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। बावजूद इसके पुलिस ने BNS की धारा 170 के तहत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या भीड़ के दबाव में बिना किसी स्पष्ट अपराध के किसी को जेल भेज देना ही नया कानून बन गया है?

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सूरत के नासिर नगर में सैकड़ों मुस्लिम परिवारों के घरों पर हुई रहस्यमयी तोड़फोड़ ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी पुलिस बल और मशीनों की मौजूदगी में 100 से अधिक घरों को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन अब नगर निगम, पुलिस और जनप्रतिनिधि सभी इस कार्रवाई से पल्ला झाड़ रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के उन्हें बेघर कर दिया गया। इस बीच आरोप लग रहे हैं कि निजी निर्माण परियोजना को रास्ता देने के लिए यह कार्रवाई की गई। मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन भीषण गर्मी में बेघर हुए परिवार अब भी न्याय और जवाबदेही का इंतजार कर रहे हैं।

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32,464 просмотров • 1 месяц назад

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बरेली से 7 मुसलमान मर्दों को अचानक सादे कपड़ों में उठाया गया न कोई वॉरंट, न FIR, न गिरफ़्तारी मेमो। परिवारवालों को हफ़्तों तक नहीं पता चला कि उनके लोग कहाँ हैं। बाद में पता चला कि पुलिस की SOG ने उन्हें हिरासत में लिया है और इल्ज़ाम लगाया धर्मांतरण रैकेट का। परिजनों का कहना है कि हिरासत में उन्हें पीटा गया, बिजली के झटके दिए गए और खाली काग़ज़ों पर जबरन दस्तख़त करवाए गए। एक बीवी बताती है कि उसके शौहर ने अदालत में ज़ख़्म दिखाने चाहे, लेकिन पुलिस ने वहीं से घसीटकर ले लिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर सख़्त रुख़ अपनाया है। अदालत ने कहा अगर ये इल्ज़ाम सही हैं, तो ये संविधान के आर्टिकल 21 यानी जीवन और व्यक्तिगत आज़ादी के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट ने ADG, IG और SSP बरेली को 8 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया है। #Bareilly #AllahabadHighCourt #ConversionCase #ObserverPost

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CJP के प्रदर्शन के दौरान पहुंचे एक हिंदुत्व संगठन से जुड़े कुछ युवकों ने प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप लगाए और बिना कोई सबूत पेश किए उमर खालिद तथा अन्य लोगों का नाम लेते हुए विवादित दावे किए। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं और आयोजकों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं। जब आरोपों के आधार के बारे में पूछा गया, तो वे कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सके। इस दौरान Observer Post की पत्रकार पाटेश्वरी सिंह ने उनसे विस्तार से बातचीत की और उनके आरोपों पर सवाल किए। बातचीत में युवकों ने कई दावे किए, लेकिन उनके समर्थन में कोई स्पष्ट साक्ष्य पेश नहीं किया। उल्लेखनीय है कि यह प्रदर्शन मुख्य रूप से शिक्षा और सामाजिक मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया था।

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26,222 просмотров • 1 месяц назад