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जब गोलियों की आवाज़ से पहलगाम थर्रा उठा, तब एक कश्मीरी युवक ने घायल की मदद कर दिखाया कि मानवता ज़िंदा है। #Pahalgam #kashmirattack

जब गोलियों की आवाज़ से पहलगाम थर्रा उठा, तब एक कश्मीरी युवक ने घायल की मदद कर दिखाया कि मानवता ज़िंदा है। #Pahalgam #kashmirattack

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यूपी: संभल के बहजोई में प्रशासन द्वारा सैकड़ों परिवारों को अचानक उनके घरों से बेघर किया जा रहा है। सरकार और प्रशासन द्वारा पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से रह रहे इन सैकड़ों परिवारों को बिना किसी पूर्व चेतावनी के बेघर किया जा रहा है। लोगों का सामान जबरन घरों से बाहर फेंक दिया गया है। लोगों का सवाल है कि यदि यह इलाका अवैध था, तो नगर पालिका द्वारा यहां पर सड़कों, नालियों और विद्युतीकरण जैसे विकास कार्य क्यों कराए गए? यदि यह सब अवैध था, तो सरकार ने इतने वर्षों में इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया और इतना सरकारी पैसा क्यों खर्च किया? 50 वर्षों तक प्रशासन और सरकार ने इस मुद्दे पर मौन क्यों साधा?

यूपी: संभल के बहजोई में प्रशासन द्वारा सैकड़ों परिवारों को अचानक उनके घरों से बेघर किया जा रहा है। सरकार और प्रशासन द्वारा पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से रह रहे इन सैकड़ों परिवारों को बिना किसी पूर्व चेतावनी के बेघर किया जा रहा है। लोगों का सामान जबरन घरों से बाहर फेंक दिया गया है। लोगों का सवाल है कि यदि यह इलाका अवैध था, तो नगर पालिका द्वारा यहां पर सड़कों, नालियों और विद्युतीकरण जैसे विकास कार्य क्यों कराए गए? यदि यह सब अवैध था, तो सरकार ने इतने वर्षों में इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया और इतना सरकारी पैसा क्यों खर्च किया? 50 वर्षों तक प्रशासन और सरकार ने इस मुद्दे पर मौन क्यों साधा?

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तलवारों की चमक के आगे कानून की आंखें क्यों मुँद गईं? उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में करणी सेना की रैली में खुलेआम लहराई गईं तलवारें। न पुलिस दिखी, न कोई डर! क्या अब रैलियों में शक्ति प्रदर्शन के नाम पर हथियार लहराना नया ट्रेंड है? कहाँ है वो प्रशासन जो सोशल मीडिया पर पोस्ट तक पर केस दर्ज कर देता है? या फिर तलवारों के आगे कानून की धार ही कुंद हो गई? #UttarPradesh

तलवारों की चमक के आगे कानून की आंखें क्यों मुँद गईं? उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में करणी सेना की रैली में खुलेआम लहराई गईं तलवारें। न पुलिस दिखी, न कोई डर! क्या अब रैलियों में शक्ति प्रदर्शन के नाम पर हथियार लहराना नया ट्रेंड है? कहाँ है वो प्रशासन जो सोशल मीडिया पर पोस्ट तक पर केस दर्ज कर देता है? या फिर तलवारों के आगे कानून की धार ही कुंद हो गई? #UttarPradesh

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लिबिया के अमीर अल महदी मंसूर अल गद्दाफी हज यात्रा पर जाने के लिए अपने ग्रुप के साथ एयरपोर्ट पहुंचे थे, लेकिन वहां उनके नाम को लेकर अप्रत्याशित अड़चन आ गई। सुरक्षा अधिकारियों ने उनके नाम के साथ जुड़े 'गद्दाफी' उपनाम को देखते हुए उन्हें चेक-इन काउंटर पर रोक लिया और लंबी पूछताछ शुरू कर दी। इस दौरान उनका हज जत्था प्लेन में सवार होकर रवाना हो गया। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान को तकनीकी खराबी के चलते वापस त्रिपोली एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। हालांकि, जब अमीर गद्दाफी दोबारा विमान में चढ़ने पहुंचे, तो पायलट ने तकनीकी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए विमान का दरवाज़ा खोलने से इनकार कर दिया, और एक बार फिर वे यात्रा से वंचित रह गए। मगर इस कहानी में ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं हुआ। कुछ समय बाद विमान ने फिर से उड़ान भरी, लेकिन इस बार भी उसमें तकनीकी गड़बड़ी आ गई और उसे तीसरी बार त्रिपोली एयरपोर्ट पर लैंड कराना पड़ा। यात्रियों और चालक दल के अनुसार, लैंडिंग के बाद विमान के कैप्टन ने ऐलान किया: "मैं कसम खाता हूं, जब तक आमिर गद्दाफी इस विमान में सवार नहीं होंगे, हम उड़ान नहीं भरेंगे।" इसके बाद अधिकारियों ने सुरक्षा जांच पूरी कर अमीर गद्दाफी को यात्रा की इजाज़त दे दी। तीसरी कोशिश में आखिरकार वे विमान में सवार हो गए और हज यात्रा पर रवाना हो पाए। अमीर गद्दाफी ने इस पूरे घटनाक्रम को अल्लाह की मर्ज़ी और करिश्मा बताया। उन्होंने कहा, "जिसे अल्लाह बुलाता है, उसके लिए सारी रुकावटें हट जाती हैं।" #Haj2025 #Libya

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28,530 views • 1 year ago