
Rajat Mourya 🇮🇳
@Therajatmourya • 7,511 subscribers
Author of "The Gold Standards of Ambedkarism" | Passionate about heritage, history & politics | Building an inclusive, equitable society.
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Mamidwar title is used by SC, OBC and Unreserved category (so-called meritorious), not by tribal. According to girl herself she belong to padmshali which came under OBC maratha community in Maharashtra. But according to this advocate, that girl belongs to ST. 👏👏👏 First, your Ritualist philosophy of Varna and caste in Hindu Vedic religion killed our people, and when we counter, we become hate-mongers. Till we accept atrocities we are “good”; when we agitate, we are hate-mongers. I am writing again: Hindus carry hate for SCs and Buddhists. Your religion is nothing but the filth of ingrained inequality and caste hierarchy. It is the Constitution which stands between you and us otherwise your people would have carried out genocide against us just like the Nazis did with Jews in Germany, and as members of your community have done in multiple states. Go and file a case against me; it will be very helpful for me to show the world how much hate your religion and your religious scriptures carry for SCs and Buddhists, from Ramayana to Mahabharata to Puranas and even in contemporary times how you treat these communities.
Rajat Mourya 🇮🇳129,057 views • 7 months ago

बाबा साहेब होते तो बहुत दुखी होते। जिनके लिए वो लड़े, वो अधिकांश लोग कायर निकले। जिस जाति का विरोध संत रैदास से लेकर बाबा साहेब तक ने किया, आज उसी समाज के लोग ब्राह्मणवाद के आंगन में घुटनों के बल बैठे हैं और जाति की मटकी गले में लटकाए घूम रहे हैं। बेहद शर्मनाक है।
Rajat Mourya 🇮🇳58,428 views • 1 year ago
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Buddhist women, monks & elders were brutally beaten in Mahabodhi Mahavihara. Shiv puja was done in front of Buddha’s statue on Buddha Purnima. Where is justice? 📢 To Buddhist nations & Ambedkarite leaders: Speak up before it’s too late. #SaveBuddhaLand #HinduTerror
Rajat Mourya 🇮🇳48,410 views • 1 year ago

मैं Adv. Anil Mishra को खुली बहस के लिए आमंत्रित करता हूँ। अगर वे इस आमंत्रण को स्वीकार नहीं करते, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनका उद्देश्य देशहित नहीं, बल्कि देशविरोधी ताकतों के साथ मिलकर दंगा भड़काना है। उनका न तो Sir B. N. Rau से कोई वास्तविक संबंध है, न ही उनके सम्मान की चिंता। अनिल जी का मकसद सिर्फ दो समुदायों के बीच नफरत फैलाना और टकराव पैदा करना है।
Rajat Mourya 🇮🇳33,101 views • 9 months ago

गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ तब 8 राजाओं ने उनकी अस्थि अवशेष को अपने राज्यों के लिए मांगा और उन पर स्तूपों का निर्माण कराया। ये तीन जोकर बैठे हैं, चाहे तो एक खुली बहस कर लें और साबित करें कि बुद्ध के समय जातियाँ या वर्ण थे। अगर इन्होंने ज़रा भी पढ़ाई की है, तो यही साबित कर दें कि उनके समय संस्कृत भाषा और वेद थे। बाबा साहेब ने कभी नहीं कहा कि उन्होंने नवयान यानी नियो बुद्धिज़्म शुरू किया है। एक पत्रकार ने उनसे कहा कि क्या ये कहा जा सकता है कि आपका मार्ग नियो बुद्धिज़्म का है? तब बाबा साहेब ने कहा, हाँ, कहा जा सकता है। ये प्रोपेगेंडा इन तीन नालायकों के सजातीय लोगों ने शुरू किया। इन दो कौड़ी के नालायकों को ये भी नहीं पता कि बुद्धिज़्म के अष्टांगिक मार्ग की 8 शिक्षाएँ बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञाओं का हिस्सा हैं। एक अनपढ़ गँवार आदमी इन दो टके के दलालों से ज्यादा आईक्यू रखता होगा। दलाई लामा पूरे दुनिया के बुद्धिज़्म की एक शाखा लामा बुद्धिज़्म के परमुख व्यक्ति को कहा जाता है, जो तिब्बत में शुरू हुआ 6-7 सदी के आसपास। तिब्बत में तुम्हारे जातिवादी और वर्णवादी धर्म की तरह समाज को नहीं बाँटा जाता था। अरे नालायक, जब तिब्बत में शूद्र होते ही नहीं हैं तो वहाँ कोई शूद्र दलाई लामा कैसे बनेगा? तथागत ने यह कहीं नहीं कहा कि वो नया धर्म चला रहे हैं, उन्होंने पुराने धम्म को ही गतिमान किया, इसलिए उसे धम्म चक्क पवत्तन कहा गया। गँवार, बाबा साहेब को बुद्ध नहीं, बोधिसत्व माना गया, और भारत के लोगों ने उन्हें बोधिसत्व नहीं कहा। श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल आदि देशों के बौद्ध भिक्षुओं ने बाबा साहेब को बोधिसत्व की उपाधि दी थी। तथागत ने कब ऐसा कहा कि मेरी मूर्तियाँ नहीं बनाना या बनाना? कौनसे पिटक में यह बात आती है? तुम्हारे धर्म में कब से मूर्ति पूजा होने लगी? 8वीं सदी से पहले की एक भी मूर्ति दिखा दो अपने धर्म की। उल्टा तुम्हारी मनुस्मृति में मूर्ति बनाने वालों का विरोध किया गया है, कारीगरों का विरोध किया गया है, शर्म करो। पूरी दुनिया में बुद्ध की मूर्तियाँ बनीं, क्योंकि पूरी दुनिया ने बुद्ध को स्वीकार किया। तुम्हारी तरह बैठकर मज़ाक थोड़ी बनाया। तुम्हारे पुरखों की तरह उनकी मूर्तियाँ तोड़ी नहीं दुनिया वालों ने।
Rajat Mourya 🇮🇳53,110 views • 1 year ago

📢 प्रोपेगेंडा का अब पर्दाफाश! कांग्रेस, सपा और लिबरल बुद्धिजीवियों के फैलाए भ्रम अब टूट रहे हैं! बहन जी ने अपनी रैली में केवल सपा और कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भाजपा पर भी किए तीखे वार... Mayawati बहन जी ने कहा: "जबकि इससे पहले केंद्र की रही भाजपा सरकार ने सत्ता का दुरुपयोग करके मेरे ऊपर, व मेरे माता-पिता, भाई-बहन, अन्य रिश्ते-नातेदारों आदि के ऊपर भी अनेकों गलत एवं फर्जी केस दर्ज कराके, हम सभी को जबरदस्ती इंकम टैक्स व सीबीआई आदि के जंजाल में फंसाकर, हमारी छवि को धूमिल करने का हर संभव पूरा-पूरा प्रयास किया।" Akash Anand Vishwanath Pal
Rajat Mourya 🇮🇳17,966 views • 9 months ago

ये कुछ वीडियो है जो BSP के लिए बनाये थे, पूरे भारत में शायद एक ही content creator हूँ जो BSP के लिए वीडियो बनता या लिखता हूँ। पर बसपा के नालायक समर्थक हमेसा गली गलौच करते है। इनके जैसे लोगों की वजह से BSP से ना कोई जुड़ना चाहता है ना उसके लिए काम करना चाहता है। Akash Anand
Rajat Mourya 🇮🇳23,054 views • 1 year ago

देखिए, ऐसे फैलाया जाता है बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बारे में झूठा प्रचार — शब्दों को तोड़-मरोड़ कर, संदर्भ काटकर, और सच्चाई को दबाकर। और जब हम सच बताते हैं, तो यही लोग पूछते हैं — “तुम्हें ब्राह्मणों से नफ़रत क्यों है?” हम किसी से नफ़रत नहीं करते, लेकिन बताइए — हम ब्राह्मणवाद के खिलाफ क्यों न हों? वो व्यवस्था जिसने सदियों तक इंसान को इंसान नहीं माना। 📚 सच पढ़िए, 💙 सोचिए, ✊ और फिर बोलिए जय भीम। #JaiBhim #Ambedkarite #Brahmanwad #ExposeTheLies #DrAmbedkar #BahujanVoice #VasantMoon #ArunShourie #AmbedkarTruth #EducateOrganizeAgitate #जयभीम ANUPAM MISHRA शर्म आनी चाहिए तुम्हें! खुद को पत्रकार कहते हो — लेकिन असल में तुम जातिवादी गुंडों से ज़्यादा कुछ नहीं हो।
Rajat Mourya 🇮🇳12,819 views • 9 months ago

भारत जिस दशहरा को राम द्वारा रावण वध की जीत मानता है (अश्विन दशमी), रामायण के हिसाब से वह घटना फाल्गुन/चैत्र (मार्च-अप्रैल) में हुई थी। यह साफ़ तौर पर एक ऐतिहासिक धोखा है! असली इतिहास क्या है? यह दिन सम्राट अशोक द्वारा कलिंग युद्ध के बाद शुरू की गई अशोका विजयदशमी है—युद्ध की नहीं, धम्म द्वारा विजय (Dhamma Vijaya) की जीत। मेगस्थनीज और फ़ाह्यान के लेखों में इस बौद्ध पर्व का प्रमाण है। यही वो ऐतिहासिक अश्विन दशमी है, जिस दिन बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने 1956 में लाखों लोगों के साथ धम्म में घरवापसी की थी। हमारे गौरवशाली इतिहास को कहानियों के नीचे दबा दिया गया। इतिहास याद रखें। अशोका विजयदशमी की मंगलकामनाएं! #AshokaVijayadashami #DhammaDeekshaDivas #DussehraDebunked #BabasahebAmbedkar #EmperorAshoka #DhammaVijaya #IndianHistory #RajatMourya
Rajat Mourya 🇮🇳12,647 views • 9 months ago