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संजीव बालियान कांस्टीट्यूशन क्लब नहीं, दरअसल 'कंस्टीट्यूशनल कंट्रोल' जीतना चाहते हैं। अमित शाह गुट की यही परंपरा रही है, चुनाव हो या संस्था, कब्ज़ा ज़रूरी है! राजीव प्रताप रूड़ी भले ही अकेले हों, कम से कम रिमोट से नहीं चल रहे।

संजीव बालियान कांस्टीट्यूशन क्लब नहीं, दरअसल 'कंस्टीट्यूशनल कंट्रोल' जीतना चाहते हैं। अमित शाह गुट की यही परंपरा रही है, चुनाव हो या संस्था, कब्ज़ा ज़रूरी है! राजीव प्रताप रूड़ी भले ही अकेले हों, कम से कम रिमोट से नहीं चल रहे।

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न सत्ता,न कोई पद,सिर्फ पूर्व सांसद-और पकड़ ऐसी जैसी सरकार की हो! जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रभुनाथ सिंह की जिनके छोटे भाई दीनानाथ सिंह का श्राद्ध संस्कार था। जिसमें आम से लेकर खास तक और बिहार से लेकर यूपी-झारखंड तक लोग इस कदर उमड़े कि हजारों वर्गफ़ीट में फैला पंडाल छोटा पड़ गया।

न सत्ता,न कोई पद,सिर्फ पूर्व सांसद-और पकड़ ऐसी जैसी सरकार की हो! जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रभुनाथ सिंह की जिनके छोटे भाई दीनानाथ सिंह का श्राद्ध संस्कार था। जिसमें आम से लेकर खास तक और बिहार से लेकर यूपी-झारखंड तक लोग इस कदर उमड़े कि हजारों वर्गफ़ीट में फैला पंडाल छोटा पड़ गया।

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यूनानियों, शकों, कुषाणों, हूणों, अरबों, तुर्को और मुगलों को धूल चटाने वाली ये कॉम है!! #रक्तस्वाभिमानरैली #Agra

यूनानियों, शकों, कुषाणों, हूणों, अरबों, तुर्को और मुगलों को धूल चटाने वाली ये कॉम है!! #रक्तस्वाभिमानरैली #Agra

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आजादी के बाद क्षत्रिय समाज भले ही अपनी-अपनी क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित रहा हो, लेकिन अब समय बदल रहा है। सोशल मीडिया और बढ़ती जागरूकता ने विभिन्न प्रांतों के राजपूतों को जोड़कर एक नई ऊर्जा और सामूहिक शक्ति दी है। चाहे बृजभूषण सिंह का मामला हो, आनंद मोहन जी की रिहाई का प्रश्न हो, या फिर रुपाला का बयान—हर प्रसंग पर राजपूत समाज ने सीमाओं से ऊपर उठकर अपनी एकजुटता और ताकत का परिचय दिया है। यह प्रवाह बताता है कि जब-जब क्षत्रिय समाज एक मंच पर खड़ा हुआ है, तब-तब उसका असर पूरे देश में गूंजा है। अब समय है कि यह एकजुटता केवल आंदोलन या विरोध तक न सीमित रहकर एक दीर्घकालिक रणनीति बने। राजपूत समाज यदि अपनी इस नई ऊर्जा को संगठित रूप से दिशा देता है, तो न केवल अपनी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा कर सकेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरवपूर्ण और निर्णायक भूमिका भी सुनिश्चित करेगा। राजपूतों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है, और यही शक्ति भविष्य में उनकी सबसे बड़ी पहचान बनेगी। क्षत्रियो एकता की गूँज सुनाओ, क्षेत्रवाद को दूर भगाओ! Team- The Thakur Force

आजादी के बाद क्षत्रिय समाज भले ही अपनी-अपनी क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित रहा हो, लेकिन अब समय बदल रहा है। सोशल मीडिया और बढ़ती जागरूकता ने विभिन्न प्रांतों के राजपूतों को जोड़कर एक नई ऊर्जा और सामूहिक शक्ति दी है। चाहे बृजभूषण सिंह का मामला हो, आनंद मोहन जी की रिहाई का प्रश्न हो, या फिर रुपाला का बयान—हर प्रसंग पर राजपूत समाज ने सीमाओं से ऊपर उठकर अपनी एकजुटता और ताकत का परिचय दिया है। यह प्रवाह बताता है कि जब-जब क्षत्रिय समाज एक मंच पर खड़ा हुआ है, तब-तब उसका असर पूरे देश में गूंजा है। अब समय है कि यह एकजुटता केवल आंदोलन या विरोध तक न सीमित रहकर एक दीर्घकालिक रणनीति बने। राजपूत समाज यदि अपनी इस नई ऊर्जा को संगठित रूप से दिशा देता है, तो न केवल अपनी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा कर सकेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरवपूर्ण और निर्णायक भूमिका भी सुनिश्चित करेगा। राजपूतों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है, और यही शक्ति भविष्य में उनकी सबसे बड़ी पहचान बनेगी। क्षत्रियो एकता की गूँज सुनाओ, क्षेत्रवाद को दूर भगाओ! Team- The Thakur Force

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पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता व नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की 6 मई 2026 को मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में राज सिंह का नाम भी जोड़ा जा रहा है, जबकि घटना के समय वह अपने घर पर था और उसके पहले-बाद में भी बलिया/लखनऊ में मौजूद दिख रहा है। बताया जा रहा है कि उसने सिर्फ परिचितों के कहने पर लखनऊ से टोल प्लाज़ा के QR पर पैसे भेजे थे, उसी आधार पर उसे आरोपी बनाया जा रहा है। बिना ठोस सबूत के मीडिया राज सिंह को सबसे बड़ा अपराधी दिखाने में लगी है। यह पहली बार नहीं है जब क्षत्रिय समाज के लोगों को बदनाम करने की कोशिश हुई हो, वीरेंद्र तोमर का मामला भी लोगों को याद है, जहां अदालत ने उन्हें बेकसूर मानकर बरी कर दिया था।

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33,141 просмотров • 2 месяцев назад

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रघुनाथपुर विधानसभा से भारी मतों से विजयी होने पर शहाबुद्दीन जी के सुपुत्र ओसामा जी को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं अनंत बधाई। 'आप की अदालत' कार्यक्रम में रजत शर्मा जी द्वारा लिए गए शहाबुद्दीन जी के उस ऐतिहासिक साक्षात्कार का छोटा-सा वीडियो आज भी व्यापक रूप से प्रसारित होता है, जिसमें उन्होंने कहा था “बेसिकली मेरा गांव ठाकुरों का गांव है, ठाकुर by birth डरते नहीं किसी से।” यह वाक्य मात्र एक बयान नहीं था, बल्कि सिवान की जमीनी राजनीतिक वास्तविकता का सटीक चित्रण था। सिवान सदैव एक क्षत्रिय–बहुल और बाहुबली परंपरा वाला जिला रहा है, जहाँ रघुनाथपुर विधानसभा पड़ती है। विशेष बात यह है कि क्षत्रिय और मुस्लिम समाज ने यहाँ हमेशा भाईचारे, परस्पर सम्मान और राजनीतिक सहयोग की अनोखी मिसाल कायम की है। दोनों समुदायों के बीच संबंध मजबूती और विश्वास पर आधारित रहे हैं। आज भले ही शहाबुद्दीन जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके सुपुत्र ओसामा जी की ऐतिहासिक जीत देखकर यह महसूस होता है कि भाईचारा, सम्मान और राजनीतिक साझेदारी की वह विरासत आज भी उतनी ही सशक्त है। यह जीत न केवल राजनीतिक सफलता है, बल्कि मुस्लिम–क्षत्रिय सद्भाव की शानदार मिसाल भी है।

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79,313 просмотров • 8 месяцев назад

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छपरा रेप कांड में जब एक गरीब राजपूत परिवार अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है, तब राजपूत समाज के बड़े-बड़े नपुंसक नेता जो अपने समाज कि बेटी के लिए आवाज तक नहीं उठा पा रहे है पता नहीं कहाँ चूड़ियाँ पहनकर किस बिल मै छिपे है जैसे उन्हें इस बेटी के दर्द से कोई मतलब ही नहीं। लेकिन ऐसे समय में सांसद पप्पू यादव पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, उनका दर्द सुना और न्याय की लड़ाई में साथ खड़े होने का भरोसा दिया। यह कदम बताता है कि असली नेतृत्व वही है जो मुश्किल समय में पीड़ित के साथ खड़ा हो, न कि सिर्फ मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करे। आज सच यही है कि जिस समाज के नेता को आवाज उठानी चाहिए थी, वे खामोश हैं… और एक बाहरी आदमी आकर इंसानियत निभा रहा है। यह उन तथाकथित नेताओं के लिए आईना है।

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42,178 просмотров • 4 месяцев назад

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"मेरा नाम ठाकुर मनीष कुमार जादौन है। मैं उमरा करा का निवासी हूं, थाना शिकोहाबाद, जनपद फ़िरोज़ाबाद का रहने वाला हूं। मामला यह है, आज से 4 साल पहले राजीव कुमार उर्फ बाले यादव, जो पहले सपा का नेता था, आज वो भाजपा सरकार में अपना पद प्रत्याशी है। उसने मेरी माँ को 4 साल से अगवा कर, 35 बीघा जमीन बिकवाने के बाद में पैसा हड़पने के बाद, मौत कर दी। उन्हें कहाँ रखा मुझे आज दिन तक पता नहीं चला। इसके साथ-साथ पुलिस प्रशासन पूरा मिला हुआ है। आज तक मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई है कहीं पर भी। और उसके बाद में 17 बीघा खेत का भूपेंद्र यादव के साथ मिलकर के मेरी अगवा किया गया। मेरे पास सारे सबूत हैं। अगवा करने के बाद में, मेरा 17 बीघा मारपीट करके गौरव वर्मा रजिस्ट्रार, जो कि मैनपुरी में जेल में बंद है, वहीं जाकर के मेरे से रजिस्ट्री कराई गई है। और आज 11/04/2026 को एक बिट्टू नामक व्यक्ति, विपिन कुमार उर्फ बिट्टू यादव, जो बाले यादव के साथ का व्यक्ति है, उसपे भी कई दर्जनों मुकदमे हैं बाले यादव पर भी और बिट्टू यादव भी पुलिस मुठभेड़ और उसमें है। उसपे भी दर्जनों मुकदमे हैं। उसने मेरी पत्नी को इतना टॉर्चर किया, ब्लैकमेल किया कि आज मेरी पत्नी ने आत्महत्या कर ली, या उसने खुद मारा, मुझे ये मालूम नहीं पड़ा।" (रिपोर्टर: कोई कार्रवाई नहीं हुई? "नहीं, अभी तक थाना में वो मुकदमा दर्ज हो गया, अभी तक कोई अपराधी नहीं पकड़े गए हैं।" (रिपोर्टर: क्या चाहते हैं?) "मैं ये चाहता हूं कि श्रीमान जी से, योगी जी तक मेरी ये न्याय पहुंचे कि मुझे न्याय दिलाया जाए, नहीं तो मेरी इच्छानुसार मेरी मौत की इच्छा कर दी जाए। और नहीं तो मैं अबकी बार जाऊंगा योगी जी के पास दरबार में, मैं वहां 5 लीटर पेट्रोल डाल के अपनी और अपने बच्चे की आत्महत्या कर लूंगा। मेरे पास अब कुछ नहीं बचा है जिससे कि मैं अपना कुछ जीवन बिता सकूं, अपने बच्चे का जीवन काट सकूँ। इन लोगों दरिंदों ने मेरे साथ मिलकर ऐसा कर दिया है कि आज मुझे दर-दर की भीख मांगनी पड़ रही है। और यहां पर जबकि मैं कहीं सो भी नहीं पाता हूं अपने घर पर। कहीं अपने बच्चे को लेकर किसी घर पर सो रहा हूं, कहीं सो रहा हूं। आज मेरी कोई मदद भी करे कोई आदमी, तो इन दरिंदों की वजह से मेरी मदद नहीं हो पा रही है।" (रिपोर्टर: क्यों? मतलब क्यों? ऐसा क्यों है? प्रभावशाली हैं ये लोग?) "ये बहुत बलशाली व्यक्ति हैं। इन पर राजनीतिक शास्त्र भी है और पुलिस प्रशासन भी इनके साथ में है पूरा।" (रिपोर्टर: तो यहां आज किससे मिलने आए हैं आप?) "मैं एसएसपी साहब से मिलने आया था।"

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22,521 просмотров • 2 месяцев назад

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वीरेंद्र सिंह तोमर की पत्नी सड़क पर खड़ी चीख-चीख कर कह रही हैं "मेरे पति निर्दोष हैं, उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं है। वे सिर्फ़ अपना फाइनेंस का व्यवसाय कानूनी तरीके से, पूरी पारदर्शिता के साथ, अकाउंट के माध्यम से चलाते हैं।" आज देश भर में सरकार से मान्यता प्राप्त हजारों फाइनेंस कंपनियाँ हर शहर में कानूनी तौर पर व्यवसाय कर रही हैं। लेकिन क्या कभी किसी फाइनेंस कंपनी के व्यवसायी का इस तरह सार्वजनिक जुलूस निकाला गया है? स्पष्ट है कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जिसका पर्दाफाश अब धीरे-धीरे हो रहा है। राजनीति के इस घिनौने खेल में कुछ मीडिया संस्थान भी शामिल हैं। मीडिया के माध्यम से ऐसी खबरें प्लांट की गईं जिनसे वीरेंद्र सिंह तोमर की छवि एक सम्मानित व्यवसायी से घटाकर ‘गुंडे’ के रूप में दिखा दी गई।

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50,227 просмотров • 8 месяцев назад