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एक कारसेवक की बात सुनो; राम मंदिर के नाम पर क्या क्या हो रहा है; सब पता चल जाएगा!
Tribhuvan_Official52,021 views • 9 days ago

पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में पुष्पेश पंत के साथ हुआ यह प्रश्नोत्तर अत्यंत रोचक है। यह केवल नेहरू की उपलब्धियों का गुणगान नहीं करता, उनके व्यक्तित्व, विचार और राजनीतिक प्राथमिकताओं के कई ऐसे पक्ष खोलता है, जिन पर सामान्यतः चर्चा नहीं होती। यह भी नहीं है कि पुष्पेश पंत नेहरू के समर्थक होने के कारण महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, सरदार पटेल या दूसरे नेताओं को खारिज कर रहे हैं। उनके पास इतिहास को देखने की अपनी स्वतंत्र दृष्टि है, जिससे आप सहमत भी हो सकते हैं और असहमत भी। लेकिन उनकी बातों को सुनना इसलिए जरूरी है, क्योंकि वे हमारी बनी-बनाई धारणाओं को थोड़ा विचलित करती हैं और इतिहास को किसी एक नायक या एक विचारधारा की कैद से बाहर देखने के लिए प्रेरित करती हैं। यह बहुत छोटी-सी क्लिप है, लेकिन इसे ध्यान से सुनिए। संभव है कि इसके बाद आपके भीतर कुछ नई जिज्ञासाएँ जन्म लें, कुछ पुराने विश्वास प्रश्नों के घेरे में आएँ और नेहरू के साथ-साथ गांधी, बोस तथा पटेल को देखने के लिए भी एक नया वैचारिक द्वार खुले। अच्छी बातचीत वही होती है जो अंतिम उत्तर नहीं देती, हमारे भीतर बेहतर प्रश्न पैदा करती है और बेहतर प्रश्न ही अंततः बेहतर समझ तथा अधिक परिपक्व सोच को जन्म देते हैं।
Tribhuvan_Official19,796 views • 7 days ago

ये लड़का जिसका नाम विनोद है, विनोद जाखड़। ये जेन ज़ी है। ये भला आदमी रात होने तक तो सीकर में नीट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहा था और सुबह चार बजे तक झुंझुनूं के गांवों में था। नीट मामले में पीड़ित परिवार के सदस्यों की बात नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से करवा रहा था। पीड़ित परिवार को शुक्रवार की रात को पचास हजार रुपए भेंट करके आया। शनिवार को इसने एलान किया कि उनका संगठन 11 लाख रुपए का पूरा करजा उस पीड़ित परिवार का उतारेगा। शनिवार शाम को वह हैदराबाद में प्रदर्शन कर रहा था। इस ट्वीट के साथ प्रदर्शन के वीडियो हैं। विनोद अनुसूचित जाति के एक मजदूर का बेटा है, छात्र संघ के चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जीतकर राजस्थान विश्वविद्यालय का अध्यक्ष बना था। किसी तरह वह एनएसयूआई का अध्यक्ष बना और मौक़ा मिला ने उसने एनएसयूआई के ही कुछ दिल्ली वाले नेताओं की भारी परेशानी झेली और उसे अपमानित किया गया; जो कि पदों पर बनावटी तौर बैठ जाने वाले लोग करते हैं। लेकिन उसने पूरे हौसले से काम किया। मुझे याद है, मैं तो उसे जानता ही नहीं था। मेरा परिचय विनोद से तब हुआ जब वह राजस्थान की ख़तरनाक़ लू में राजस्थान के जिलों का दौरा करने निकल रहा था। वह अवाक् कर देने वाला हौसला था। उसने वह सब किया। मुझे नहीं याद पड़ता कि किसी काँग्रेसी युवा या बुज़ुर्ग ने कभी कोई इस तरह का काम किया हो। तथ्यों के अनुसार दुरुस्त करने का अधिकार तो आपका है ही। अब NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना तो इस किरदार में इस तरह उतर गया कि उसकी सक्रियता काँग्रेस में विभिन्न पदों पर वर्षों से बैठे लोगों को नींद में भी शर्मसार तो ज़रूर करती होगी कि काम कैसे किया जाता है। बहुत से पदाधिकारी जातियों और क्षेत्रीयता के दायरे से ही बाहर नहीं आ पाते और जाने क्या बनने के ख़्वाब देखने लगते हैं। कुछ पूरा समय गाय वाले भैंस के नीचे और भैंस वालों को गाय के नीचे करने से ही फुरसत नहीं। मुझे लगता है, सही राजनीति इसी तरह की जाती है, जो रास्ता विनोद ने अपनाया है। राजनीति का एक ही माध्यम है और वह है आंदोलन। आंदोलन वह तेज वेग जलधारा होती है, उसमें कचरा बह जाता है और सिर्फ़ टिकी रहने वाली चीज़ें ही टिकती हैं। आंदोलन नहीं होते तो असली चीज़ें ढक जाती हैं और कचरा उसके ऊपर तैरने लगता है। यह कोई कांग्रेस की कहानी नहीं है। यह जनता के मूल दु:ख-दर्द से विमुख आंदोलनविहीन और यथास्थतिवादी हर संगठन के साथ है। आप सोचिए, अगर किसानों, युवाओं, संस्कृति कर्मियों, बुजुर्गों, प्यास से तड़पते इलाकों, सुदूर यात्री सुविधाओं से वंचित लोगों,एमएसपी की झूठी कहानियों, जल और उर्वरकों के संकट में सूखती फसलों, बदहाल मंडियों, बढ़ते अपराधों, बहुत ख़तरनाक़ तरीके से सुदृढ़ होती घूसखोरी, आए दिन सड़कों पर मारे जाते लोगों, साइबर ठगियों के बेइंतहा अपराधों, लुटते बुजुर्गों, बैंकिंग सिस्टम की बेलगाम लूट आदि मामलों में कितना कुछ किया जा सकता है। छात्रों और नीट के मोर्चे पर अपने किरदार को जीकर विनोद ने यही दिखाया है। यह एक छोटी घटना है, लेकिन इसके भीतर का विस्तार बहुत है। विनोद एक उम्मीद का नाम है; जो काँग्रेस जैसी आंदोलनविमुख ज़मीन पर पैदा हुई है। मैं जानता हूँ, मेरा यह ट्वीट इस तरह लिखे जाने से इसे कोई भी कॉंग्रेसी रिपोस्ट तो क्या; लाइक भी नहीं कर सकता। हाँ; बच्चे गाली वाले प्रियजन तो वे आमंत्रित हैं! VINOD JAKHAR Rahul Gandhi Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ Sukhjinder Singh Randhawa Jitendra Singh Alwar Sachin Pilot NSUI
Tribhuvan_Official60,006 views • 28 days ago

बड़े भाई ने अपनी कमाई से पढ़ाया, अपने सपनों से बड़ा सपना दिया — देश की सेवा का। और छोटे भाई संतोष वर्मा ने वह सपना पूरा भी किया, पर केवल चार महीने में ही मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। आज बड़े भाई की आँखों में जो नमी थी। वह केवल शोक नहीं था, वह उस प्रेम का भार था, जो शब्दों में कभी समाता नहीं। एक भाई ने रास्ता दिखाया, दूसरे ने उस रास्ते पर अपना सब कुछ अर्पित कर दिया। यही है वह रिश्ता जो खून से नहीं, त्याग से बनता है। हमारे आम लोग देश को अपने बेटों के खून से सींचते हैं और राजनेता अपने बेटों को या तो राजनीति में भेजते हैं या क्रिकेट में या फिर किसी बड़े कारोबार में। 🙏अमर रहें वीर संतोष वर्मा #sikar #बलिदान Praveen Bishnoi
Tribhuvan_Official11,230 views • 13 days ago

गाँव वालो, मरना कैंसल! कुछ यादें कैसे जीवंत हो उठती हैं!!!
Tribhuvan_Official69,563 views • 7 months ago

मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ भाई सौरभ द्विवेदी का, जिन्होंने मेरी कविता “अरावली के आख़िरी दिन” अपने अंदाज़ में पढ़ी है और इसे आज के अरावली के दर्द से जोड़ दिया है। यह कविता दरअसल अरावली का शोकगीत नहीं, हमारे समय के मिथक का पोस्टमार्टम है। हम “विकास” को प्राकृतिक मान लेते हैं, प्रकृति को लॉन में बदल देते हैं और जीवों को शब्दकोश में क़ैद कर देते हैं। और फिर आईफ़ोन के नोटिफिकेशन के बीच एक पहाड़ के मरने की ख़बर को भी स्क्रोल कर देते हैं। Saurabh Dwivedi
Tribhuvan_Official17,265 views • 6 months ago

पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के भाषणों में ऐसी नफासत और पकड़ होती है, जो श्रोताओं को न केवल आकृष्ट करती है, बल्कि उन्हें गहराई से सोचने के लिए भी प्रेरित करती है। वक्तृत्व-कला में दक्ष पायलट ने अपने भाषण में संविधान की गिरती हालत को अत्यंत संतुलित और प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया — किस प्रकार संवैधानिक मूल्यों को खोखला किया जा रहा है, यह भी बताया। पायलट ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की खुले दिल से प्रशंसा की, यह रेखांकित करते हुए कि संगठन को सशक्त बनाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। आज का उनका भाषण काफ़ी शार्प था। Sachin Pilot
Tribhuvan_Official15,657 views • 1 year ago

दिव्या मदेरणा आजकल काफी प्रखरता से बोल रही हैं। ऐसा लगता है कि गांधी-नेहरू परिवार को घेरने की सरकार की रणनीति बहुत उलटी जा रही है और उसने काँग्रेस के नेताओं के बॉडी लैँग्वेज ही नहीं बदली, बल्कि उनके तेवर भी तीखे और पैने कर दिए हैं। मदेरणा ने आह्वान किया है कि जो लोग इस समय चुपचाप बैठे हैं और इस संघर्ष में भागीदार नहीं बन रहे, वे अपराधी हैं। मदेरणा की धारदार स्पीच आने वाले दिनों के लिए इस बात की आहट है कि काँग्रेस में नया नेतृत्व अच्छे से उभार पर है। पहले जब भाजपा सत्ता में नहीं थी तो उसके नेताओं के भाषण काफी पैने होते थे, लेकिन आजकल वहाँ से अभी ऐसे भाषण सुनाई नहीं दे रहे। इससे साफ है कि प्रतिरोध की आवाज़ में ही दमखम रहता है। Divvya Mahepal Madernna
Tribhuvan_Official14,394 views • 1 year ago
2:12
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